दुनिया के 18 खतरनाक खेल duniya ke sabse khatarnak khel

दुनिया के सबसे खतरनाक खेल duniya ke sabse khatarnak khel खेलों के बारे मे तो आप अच्छी तरह से जानते ही हैं। और खेल हमारे लिए कई तरह से फायदा भी करते हैं। लेकिन आपको बतादें कि दुनिया के अंदर कई तरह के खेल होते हैं जोकि हमारे लिए मनोरंजन का काम भी करते हैं। क्रिकेट और कबडडी व फुटबाल जैसे खेल बहुत ही कॉमन होते हैं जिनको हर कोई आसानी से खेल सकता है।

‌‌‌और क्रिकेट के बारे मे तो आप आसानी से जानते ही हैं। आजकल इसका लाइव तो टीवी पर आता है। पर यह सब खेल मनोरंजन के लिए खेले जाते हैं। और इनके अंदर जोखिम किसी भी तरह का नहीं होता है। इस वजह से इनको आमजन काफी आसानी से खेल लेते हैं। लेकिन इनके अलावा भी कुछ ऐसे खेल होते हैं जोकि काफी जोखिम से भरे ‌‌‌होते हैं। हालांकि इन खेल के अंदर मनोरंजन तो भरपूर होता है लेकिन जोखिम इतना अधिक होता है कि पूछो मत दोस्तों यह सभी खेल काफी भयंकर होते हैं। इनके अंदर मौत का खतरा होता है। इस वजह से यह सारे खेल वे ही लोग अधिक खेलना पसंद करते हैं जिनको मौत से कोई भी डर नहीं होता है।

‌‌‌असल मे इन खेल को देखने वाले लोगों के भी दिल धम जाते हैं क्योंकि इन खेल के अंदर जरा सभी भी चुक मौत के घाट उतार सकती है। इस वजह से वैसे भी लोग इन खेल के अंदर उतरना कम ही पसंद करते हैं। लेकिन कुछ साहसी लोग ऐसे होते हैं जोकि इन खेलों को खास तौर पर खेलना पसंद करते हैं।

‌‌‌हालांकि इन खेलों को खेलने वाले बहुत सारे खिलाड़ी कई बार मौत के मुंह के अंदर चले जाते हैं और कुछ लक्की खिलाड़ी ऐसे होते हैं जोकि मौत के मुहं के अंदर जाकर काफी आसानी से बच भी जाते हैं।

‌‌‌और रही बात इन डेंजर खेलों को देखने की तो इन खेलों को देखने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होती है। यह काफी रोमांचक से भरपूर होते हैं। हालांकि भारत के अंदर इस तरह के खेल नहीं खेले जाते हैं पर विदेशों मे यह काफी खेलते हुए देखे जा सकते हैं। इनका विडियो तो आपने जरूर ही देखा होगा । तो आइए जानते हैं ‌‌‌दुनिया के सबसे खतरनाक खेल के बारे मे जिनके बारे मे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे ।

duniya ke sabse khatarnak khel bullfighting

दुनिया के सबसे खतरनाक खेल

Bullfighting एक काफी डेंजर खेल है और इसका विडियो आपने देखा ही होगा । इसके अंदर एक बैल होता है। जिस को खास तौर पर Bullfighting के लिए ही पाला जाता है। और उस बेल को एक खास तरह से बनाए गए मैदान के अंदर रखा  जाता है। और उसके बाद एक व्यक्ति उस बैल के सामने आता है और उस बैल को भड़काने की कोशिश करता ‌‌‌है। इसके लिए वह बैल को लाल कपड़े की मदद से डरा भी सकता है लेकिन असल मे यह डरने वाला बैल नहीं होता है और कपड़े को देखकर काफी भड़क जाता है और व्यक्ति को ही मारने लग जाता है। यह अपने सींग के अंदर व्यक्ति को घाल कर फेंक सकता है। इस खेल के अंदर कई बार व्यक्कि्त की मौत तक हो जाती है।

‌‌‌हालांकि इस खेल मे सभी व्यक्तियों की मौत नहीं होती है। लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिनको मौत का सामना करना पड़ता है। हालांकि भारत के अंदर इस प्रकार का खेल नहीं खेला जाता है। लेकिन कई जगह ऐसी हैं जहां पर यह खेल खेला जाता है जैसे कि स्पेन , पुर्तगाल , दक्षिणी फ्रांस , मैक्सिको , कोलंबिया , इक्वाडोर , वेनेजुएला और पेरू ‌‌‌ जैसी कुछ ऐसी जगह हैं जहां पर इस खेल को खासतौर पर खेला जाता है। हालांकि इस खेल को एक विवादास्पद खेल के तौर पर देखा जाता है। लेकिन कई देशों के अंदर इस तरह का खेल खेलना कानूनी मान्यता के अंदर आता है। इस वजह से दर्शक भी खेल के अंदर काफी मजा लुटते हैं।

बुलफाइटिंग की जड़ें मेसोपोटामिया और भूमध्य क्षेत्र में प्रागैतिहासिक बैल पूजा और बलिदान से जुड़ी हैं। पहला रिकॉर्ड किया गया बुलफाइट एपिक ऑफ गिलगमेश हो सकता है

जिसमें गिलगमेश और एनकीडु ने बुल ऑफ हेवन से लड़ाई की और उसे मार डाला।मध्ययुगीन स्पेन में बुलफाइटिंग को एक महान खेल माना जाता था और अमीरों के लिए आरक्षित था, जो अपने जानवरों की आपूर्ति और प्रशिक्षण का खर्च उठा सकते थे। बैल को एक बंद अखाड़े में छोड़ दिया गया, जहां घोड़े पर सवार एक भी योद्धा लांस से लैस था।सम्राट चार्ल्स वी के समय में , पेड्रो पोंस डी लियोन स्पेन में सबसे प्रसिद्ध बुलफाइटर थे। और यह आंखों पर पट्टी को बांधकर बुल से फाइट करते थे ।

रोंडा , स्पेन के फ्रांसिस्को रोमेरो को आम तौर पर 1726 के आसपास पैदल बैलों से लड़ने की प्रथा शुरू करने वाले पहले व्यक्ति के रूप में माना जाता है और इस लड़ाई के अंदर व्यक्ति एक मखौटा पहनता है और उसके बाद बुल जब उस पर अटैक करता है तो हाथ मे लिए हथियार से खुद को बचाने का काम भी करता है।

बुलफाइटिंग कई तरीकों से की जाती है। जैसे कि सबसे पहले एक बैल को रिंग के अंदर छोड़ दिया जाता है और उसके बाद जिस व्यक्ति को बैल से लड़ना होता है वह एक घोड़े पर सवार होकर आता है और हाथ के अंदर हथियार लेकर भी आता है।

‌‌‌हालांकि बैल के सींगों से घोड़े को बचाने के लिए उसको एक सुरक्षात्मक परत पहनाई जाती है। यह प्रयोग 1930  के बाद किया गया था। इससे पहले बैल घोड़ें को आसानी से अपने सींग की मदद से घायल कर देता था। और इस प्रक्रिया मे मरने वाले घोड़ों की संख्या काफी अधिक होती थी। ‌‌‌लेकिन घोड़े के द्धारा जैकेट पहने जाने के बाद घोड़ों के मरने की संख्या कम हो गई । इसके अंदर सवार बैल को घायल करता है और उसके बाद धीरे धीरे बैल के अंदर खून की कमी हो जाती है और वह लैट जाता है। इस तरह से यह खेल चलता है।

Bullfighting के बारे मे हमने जाना आइए अब Bullfighting के उन चीजों के बारे मे हम जानकारी हाशिल कर लेते हैं जोकि आपको अलग किस्म की लग सकती हैं तो आइए जानते हैं इनके बारे मे ।

  • बोलीविया में न तो बैलों को मारा जाता है और न ही किसी लाठी से घायल किया जाता है। बोलिवियन टोरेरोस का लक्ष्य खुद को नुकसान पहुंचाए बिना ताने से सांड को भड़काना है
  • डोमिनिकन गणराज्य के एल सेइबो प्रांत में बुलफाइट जानवर को किसी भी तरह से इस खेल मे नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है। बस उसे थकाने का काम किया ‌‌‌ जाता है। जब वह थक जाता है तो उसे छोड़ दिया जाता है।
  • कनाडा में , पुर्तगाली शैली की बुल फाइटिंग 1989 में दक्षिणी ओंटारियो के लिस्टोवेल शहर में पुर्तगाली प्रवासियों द्वारा शुरू की गई थी और आज भी यह परम्परा मौजूद है। इसके अंदर ना तो बैलों को मारा ही जाता है और ना ही उनको घायल किया जाता है।
  • सेंट्रल वैली , कैलिफ़ोर्निया, यूएस में ऐतिहासिक रूप से पुर्तगाली समुदाय ने बुलफाइट का एक रूप विकसित किया है और इस प्रथा को यहां पर सन 1957 ई के अंदर गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था लेकिन आज भी इस   प्रथा को काफी मान्यता दी जाती रही है।
  • जल्लीकट्टू, एक प्रकार का बुल-टमिंग या बुल-राइडिंग इवेंट, भारतीय राज्य तमिलनाडु में प्रचलित है। और इसके अंदर होता यह है कि लोगों की भीड़ के बीच एक बैल को छोड़ दिया जाता है।और उसके बाद लोग उस बैल को भड़काने का प्रयास करते हैं। हालांकि सुप्रिम कोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सन 2014 मे एक ‌‌‌ आदेश पारित किया था।पशु कल्याण जांच से पता चला है कि कुछ सांडों को लाठी और कैंची से पीटा जाता है, कुछ की पूंछ मुड़ी हुई होती है, कुछ को उन्हें विचलित करने के लिए जबरन शराब पिलाई जाती है। और जानवरों को भड़काने के लिए उनके उपर मिर्च भी डाली जाती है।  तमिल नाडू के अंदर इस खेल पर कई बार ‌‌‌ प्रतिबंध लग चुका है। लेकिन लोग इसके खिलाफ विरोध पदर्शन करते हैं जिसकी वजह से इस प्रतिबंध को फिर से हटा दिया जाता है। और आज भी इस खेल की भारत के अंदर अनुमति बनी हुई है।

Bullfighting के विडियो यदि आप देखना चाहते हैं तो इंटरनेट पर कई तरह के विडियो मौजूद हैं जिनको आप देख सकते हैं। और इससे आपको यह अंदाजा हो जाएगा कि यह खेल किस तरह से खेला जाता है।

दुनिया के खतरनाक खेल base jumping

By Xof711 – Own work, CC BY-SA 3.0,wiki

BASE jumping बहुत ही डेंजर खेल होता है। जिसके अंदर एक व्यक्ति पैरासूट की मदद से किसी उंची चोटी से कूदने का प्रयास करता है।और यह काफी डेंजर खेल होने की वजह से कई देशों ने इसके उपर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन उसके बाद भी चोरी छुपे इस खेल को खेला जाता है। इसमे थोड़ी सी भी चूक इंसान की जान लेने के ‌‌‌ लिए काफी होती है। और यह डेंजर खेल खेलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।

फॉस्टो वेरांजियो को व्यापक रूप से माना जाता है कि वह 1617 में वेनिस में सेंट मार्क कैम्पैनाइल से पैंसठ वर्ष से अधिक उम्र में कूदकर पैराशूट बनाने और परीक्षण करने वाले पहले व्यक्ति थे ।

1978 में, उन्होंने पहली बेस जंपिंग की छलांग लगाई गई थी। हालांकि आपको बतादें कि इसके बाद कार्ल बोएनिश ने 1984 में ट्रोल वॉल से BASE कूदने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

  • ऊंचे पहाड़ों से कूदते समय, BASE जंपर्स अक्सर हवा में नियंत्रण और उड़ान विशेषताओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष कपड़ों का उपयोग करते हैं। हाल के वर्षों में विंगसूट उड़ान बेस जंपिंग का एक लोकप्रिय रूप बन गया है, जो कूदने वालों को लंबी क्षैतिज दूरी पर सरकने की अनुमति देता है।
  • ‌‌‌बेस जंप को मोटे तौर पर लो जंप और हाई जंप के अंदर बांटा गया है।
  • लो बेस जंप वे हैं जहां जम्पर टर्मिनल वेग तक नहीं पहुंचता है। कभी-कभी “स्लाइडर डाउन” जंप के रूप में संदर्भित किया जाता है क्योंकि वे आमतौर पर पैराशूट पर स्लाइडर रीफिंग डिवाइस के बिना किए जाते हैं। स्लाइडर की कमी से पैराशूट अधिक तेज़ी से खुल सकता है।
  • कई BASE जम्पर्स मुक्त रूप से गिरने वाली ऊंची वस्तुओं से कूदने के लिए प्रेरित होते हैं । हाई बेस जंप वे होते हैं जो जम्पर के टर्मिनल वेग तक पहुंचने के लिए पर्याप्त होते हैं। लेकिन यह उस चट्टान से दूर आसानी से हो जाते हैं जिससे यह कूदे थे और उसके बाद अपने पैरा सूट का उपयोग करते हैं।
  • ‌‌‌वैसे आपको बतादें कि बेस जंप काफी खतरनाक होता है। और यह कम उंचाई से किया जाता है।पैराशूट को 2,000 फीट (610 मीटर) की ऊंचाई से ऊपर तैनात करने की आवश्यकता होती है।कई बेस जंप, विशेष रूप से यूके में इस ऊंचाई पर कम चट्टानों की संख्या के कारण लगभग 150 फीट से बनाए जाते हैं। ‌‌‌वैसे आपको बतादें कि बेस जंपिंग काफी खतरनाक होती है। क्योंकि इसके अंदर दूरी बहुत ही सीमित होती है। और जरा सी गलती भी जान ले सकती है। ‌‌‌बेस जंपिंग की तुलना मे प्लेन से कुदना काफी आसान कार्य होता है।
  • ‌‌‌वैसे आपको बतादें कि बेस जंपिंग ज्यादातर जगहों पर वैध नहीं है।हालांकि कुछ ऐसी जगह होती हैं जिनके उपर बेस जंपिंग तो की जाती है।लेकिन वहां पर बेस जंपिंग की अनुमति नहीं है। हालांकि कुछ ऐसी जगह भी होती हैं जहां पर बेस जंपिंग की असानी से अनुमति मिल जाती है। इडाहो के ट्विन फॉल्स में पेरिन ब्रिज , संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मानव निर्मित संरचना का एक उदाहरण है, जहां बिना परमिट के BASE जंपिंग की अनुमति साल भर दी जाती है।
  • 2002 मे फेटलिटीज के एक अध्ययन मे इस बात को सामने लाया गया कि बेस जंप करने वाले 60 लोगों मे से एक को काफी घातक चोटों का सामना करना पड़ा था।
  • नॉर्वे में केजेराग मासिफ से 20,850 BASE जंप के एक अध्ययन ने 11 साल की अवधि में 1995 से 2005 तक नौ घातक घटनाओं की सूचना दी।
  • बेस जंपिंग दुनिया की सबसे खतरनाक मनोरंजक गतिविधियों में से एक है, जिसमें विमान से पैराशूटिंग की तुलना में मृत्यु और चोट की दर 43 गुना अधिक है।और सन 1981 से लेकर 1921 तक इस खेल के अंदर 412 लोगों की मौत हो चुकी है।

Calcio Fiorentino

Calcio Fiorentino

Calcio Fiorentino एक बहुत ही डेंजर खेल होता है। और यह एक फुटबाल की तरह ही होता है। लेकिन फुटबाल के अंदर गेंद को छीनने के लिए किसी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं होती है। और मारपीट भी नहीं होती है। लेकिन इस खेल के अंदर गेंद को छीनने के लिए काफी जोरजबरदस्ती होती है और कई बार तो खिलाड़ी किसी दूसरे ‌‌‌खिलाड़ी को ही पीट पीट कर मार डालते हैं।इस तरह से यह खेल काफी डेंजर खेल बन जाता है।

कैल्सियो अमीर अभिजात वर्ग के लिए आरक्षित था जो हर रात एपिफेनी और लेंट के बीच खेलते थे । यहां तक कि क्लेमेंट VII , लियो इलेवन और अर्बन VIII जैसे पोप भी वेटिकन सिटी में खेल खेलते थे ।

  • फ़्लोरेंस शहर ने 17 फरवरी, 1530 को चार्ल्स पंचम द्वारा भेजे गए शाही सैनिकों की अवज्ञा में एक मैच आयोजित किया ।
  • 1574 में फ्रांस के हेनरी तृतीय ने भी इस खेल के अंदर भाग लिया था।
  • 17 वीं शताब्दी के आते आते इस खेल के अंदर लोगों की रूचि कम हो गई थी। और आज यह खेल उतना अधिक नहीं खेला जाता है। यह काफी कम ही लोग खेलते हैं। और वे भी खास कर वे लोग खेलते हैं जोकि इस तरह के खेल को खेलने के लिए काफी शौकिन होते हैं।

Calcio Fiorentino के नियम की हम बात करें तो यह खेलने मे एक तरह से फुटबाल की तरह ही लगता है। मैच 50 मिनट तक चलते हैं और रेत से ढके मैदान पर खेले जाते हैं, जब तक कि यह चौड़ा हो (लगभग 100 मीटर × 50 मीटर या 109 गुणा 55 गज)। एक सफेद रेखा मैदान को दो समान वर्गों में विभाजित करती है। और दो टीम होती हैं

‌‌‌हर टीम के अंदर 27 खिलाड़ी होते हैं। जो खिलाड़ी घायल हो जाते हैं उनको प्रतिस्थापन की अनुमति नहीं होती है।टीम डटोरी इंडिएट्रो (गोलकीपर), तीन डटोरी इन्नान्ज़ी (फुलबैक), पांच स्कोनसिएटोरी (हाफबैक), 15 इन्नैन्ज़ी या कॉरिडोरी (फॉरवर्ड) से बनी हैं।

रेफरी और छह लाइनमैन जज कमिश्नर के सहयोग से मैच का संचालन करते हैं, जो मैदान से बाहर रहता है। रेफरी, हर किसी से ऊपर, क्षेत्र का मास्टर है, और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि खेल सुचारू रूप से चलता है, केवल अनुशासन बनाए रखने और झगड़े होने पर आदेश को फिर से स्थापित करने के लिए मैदान में कदम रखता है।।

‌‌‌यदि हम इस खेल के सबसे बड़े नुकसान की बात करें तो इसके अंदर घायल खिलाड़ी को किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाता है। बस जीतने वाली टीम को ही ईनाम दिया जाता है। इस तरह का खेल काफी भयंकर होता है। खेलने वाले खिलाड़ी भी पहलवान के जैसे होते हैं जोकि कभी भी हिंसक हो सकते हैं।

‌‌‌वैसे तो कप्तान वैगरह झगड़े को रोकने का प्रयास करते हैं लेकिन कई बार क्या होता है कि झगड़ा काफी हिंसक हो जाता है जिसकी वजह से किसी खिलाड़ी को काफी चोंटों का सामना करना पड़ता है। इसमे मार मार कर भी फुटबाल को छीना जा सकता है। क्योंकि इसके अंदर मारना जायज होता है।

‌‌‌हालांकि मारने के लिए खिलाड़ी किसी दूसरी चीजों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे बस अपने हाथ पैरों का ही इस्तेमाल करते हैं। यही उनके लिए सही होता है।

पर्वतारोहण

पर्वतारोहण

पर्वतारोहण हो सकता है कि आपको आसान लगे लेकिन यह कोई आसान काम नहीं है। पर्वतारोहण को कई लोग काफी पसंद करते हैं। और पर्वतारोहण करने का काम करते हैं। इसके अंदर बड़े बड़े लंबे पहाड़ों पर चढ़ना होता है। और इसके अंदर जोखिम भी किसी से कम नहीं होता है।पर्वतारोहण लोग कई उदेश्यों के लिए करते हैं कुछ ‌‌‌लोगों का पहाड़ों पर चढ़ना शौक होता है तो कुछ नाम के लिए भी पहाड़ों पर चढ़ते हैं। मतलब वे नाम कमाने के लिए इसके अलावा पैशा भी इसके अंदर होता है। चट्टानों पर चढ़ने की कला, बर्फ से ढके पर्वतों पर चढ़ने की कला और स्कीइंग की कला इन सबके लिए तकनीकी ज्ञान और कौशल की जरूरत होती है।

  • पर्वतारोही ठोस बर्फ पर बहुत ही आसानी से चल पाते हैं। हालांकि इसके लिए विशेष प्रकार के हिम जूतों का प्रयोग किया जाता है। इन जूतों की मदद से वे बर्फ पर बहुत ही आसानी से चल पाते हैं। आपको इसके बारे मे पता होना चाहिए । ‌‌‌इन जूते के नीचे दांते होते हैं जोकि बर्फ पर चलने के लिए विशेष तौर पर बनाये जाते हैं। और हल्के एल्युमिनियम की मदद से बने होते हैं जोकि काफी उपयोगी होते हैं। सीधी बर्फ की चढ़ाई पर चढ़ने और उतरने के लिए काफी काम आते हैं। ‌‌‌इसके अलावा बर्फ पर यदि आप साधारण जूतों से चलने का प्रयास करेंगे तो आप फिसल सकते हैं। इसके लिए हिम जूतों का प्रयोग किया जा सकता है जोकि आपको फिसलने से बचाने का काम करते हैं।
  • ‌‌‌इसके अलावा आपने बर्फ की कुल्हाड़ी के बारे मे तो सुना ही होगा । बर्फ की कुल्हाड़ी की मदद से भी बर्फ के पाहड़ पर चढ़ने का काम किया जाता है। वैसे भी कुल्हाड़ी पर्वतरोही को काफी सुरक्षा प्रदान करने का काम करती है। आपको इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए ।
  • ‌‌‌इसके अलावा पहाड़ों पर बर्फ की खाइयां होती हैं। और इनके उपर बर्फ की एक पतली परत जम जाती है। यदि इनके बारे मे ठीक से ध्यान नहीं दिया जाता है तो पैर रखने पर इसके अंदर इंसान जा सकता है। यह काफी डेंजर होती हैं।और दरार के अंदर यदि कोई पर्वतरोही गिर भी जाता है तो दूसरे पर्वतरोही उसकी आसानी से मदद कर ‌‌‌ देते हैं। दोस्तों बर्फ की दरार से बचने के लिए रस्सी का प्रयोग किया जाता है। रस्सी ही है जोकि पर्वतरोही को गिरने से बचाने का काम करती है।
  • ‌‌‌जमी हुई बर्फ की यात्रा के लिए पर्वतरोही कई सारी विधियों का प्रयोग करता है। किसी पर्वतरोही के लिए कौनसी विधि अच्छी रहेगी यह तो उस पर्वतरोही को गाइड करने वाले बताने का काम करते हैं।
  • आधार शिविर आमतौर पर उन पहाड़ों के लिए बनाये जाते हैं जिनके उपर एक दिन मे नहीं पहुंचा जा सकता है। आमतौर पर आधार शिविर जो होते हैं वे सुरक्षित स्थानों पर बनाये जाते हैं।
  • पर्वतीय झोपडि़याँ भी होती हैं। दोस्तों यदि आपने पर्वतीय झोपड़ी का नाम नहीं सुना है तो हम आपको इसके बारे मे बताने वाले हैं। पर्वतीय झोपडि़याँ आमतौर पर पहाड़ों पर बनी होती हैं और इन पहाड़ों पर यह इंसानों के द्धारा बनाई जाती हैं इंसान भी इनको चला सकते हैं। वैसे यह पहाड़ों पर चढ़ने वालों के लिए किसी ‌‌‌वरदान से कम नहीं होती है। कारण यह है कि इनके अंदर रजाई तकिया और कंबल व भोजन की सुविधाएं मौजूद होती हैं। इन झोपड़ी के अंदर पर्वतरोही आसानी से आराम कर सकते हैं। ‌‌‌आपको बतादें कि यूरोप के अंदर इस तरह की झोंपडियां पहाड़ों पर बनी होती हैं। इसके अलावा यह आमतौर पर मानव रहित भी हो सकती है। लेकिन गर्मी के मौसम के अंदर यह कर्मचारी इनको चलाते हैं और सर्दी के मौसम के अंदर कर्मचारी कम ही उपस्थित रहते हैं। इसके अलावा यहां पर कर्मचारी खाने पीने के सामान को भी बेचने ‌‌‌ का काम करते हैं। हालांकि सामान को पहुंचाने के लिए एक हैल्किाप्टर की मदद ली जाती है। और उसकी मदद से ही सामान को झोंपडियों के पास पहुंचाया जाता है। लेकिन एक पर्वतरोही के लिए झोपड़ी काफी अच्छी चीज होती है। और वह आसानी से अपने भारी वजन को यहां पर रख सकता है। और फिर कुछ समय आराम कर सकता है। केक तथा पेस्ट्री, बीयर और शराब सहित गर्म और ठंडे पेय और रात्रि भोज के लिए उच्च कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार यहां पर आसानी से मिल जाता है। यदि आप अधिक पैसा देने के लिए तैयार हैं तो आपको यहां पर पका हुआ भोजन भी मिल जाता है। और क्रेडिट कार्ड की मदद से आप यहां पर पेमेंट कर सकते हैं। कुल मिलाकर झोपडी ‌‌‌के अंदर रहना पर्वतरोही के लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है।
  • ‌‌‌पड़ाव का नाम तो आपने सुना ही होगा । पड़ाव का मतलब होता है किसी एक स्थान पर रूकना । दोस्तों जो पर्वतरोही होते हैं जब वे काफी थक जाते हैं या फिर रात के मौसम के अंदर जब चलना कठिन हो जाता है तो उनको पड़ाव डालने की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति के अंदर वह यहां पर भोजन करते हैं और बर्फ की खाइयों ‌‌‌के अंदर आराम करने का प्रयास करते हैं ताकि ठंडी हवाओं का सामना नहीं करना पड़े । इसके अलावा भी यह पड़ाव एक पर्वतरोही की थकान को मिटाने का काम भी करते हैं।
  • तम्बू का नाम तो आपने सुना ही होगा ।तंबू आमतौर पर एक विशेष प्रकार के तिरपाल से बने होते हैं।आमतौर पर एक तंबू को किसी चट्टान और बर्फ के पीछे लगाया जा सकता है ताकि तेज हवाओं से बचा जा सके ।इसके अलावा तंबू की सुरक्षा के लिए खूंटों को बर्फ के अंदर दबाया जाता है ताकि यह तेज हवा के अंदर उड़ ना जाए ।
  • बर्फ की गुफा को भी पहाड़ों पर बनाया जा सकता है। आमतौर पर पहाड़ों पर बर्फ की गुफा को बनाना काफी आसान काम होता है और यह तंबू की तुलना मे काफी सुरक्षित तरीका होता है। यदि बर्फ की गुफा बनाना संभव हो तो पर्वतरोही एक बर्फ की गुफा को बनाता है और उसके अंदर विश्राम कर सकता है। ‌‌‌वैसे भी बर्फ की गुफा के अंदर तापमान शुन्य के करीब रहता है और यह तंबु की तरह नींद के अंदर खलल भी पैदा नहीं करती है। हालांकि इसको बनाने मे थोड़ा समय जरूर ही लग सकता है।
  • ‌‌‌दोस्तों यदि हम पर्वतरोहण के खतरे की बात करें तो यह कई तरह से हो सकता है जैसे कि  एक खतरा तो मानव निर्मित होता है। इसका मतलब यह है कि असावधानी से या फिर उपकरण के खराब होने की वजह से भी पर्वतरोही की जान जा सकती है। इसके अलावा कुछ खतरे नैचुरल होते हैं। जैसे कि चट्टान का गिरना ,गिरती बर्फ, हिमस्खलन, पर्वतारोही का गिरना, बर्फीली ढलानों से गिरना, बर्फीली ढलानों का गिरना, बर्फीली दरारों में गिरना ‌‌‌ इन सब खतरों को कम करने के लिए एक पर्वतरोही को अनुभवी होना जरूरी होता है। इसलिए आपने भी देखा होगा कि एक टीम के अंदर कप्तान होता है जोकि यह गाइड करता है कि किस तरह से पर्वत के उपर चढ़ाई करनी है और क्या समस्या आने पर क्या करना होगा ?
  • ‌‌‌हालांकि उंचे पर्वतों पर चढ़ने से पहले काफी अभियास किया जाता है। एक पर्वतरोही जोकि उंचे पर्वतों पर चढ़ता है वह पहले कम उंचाई के पर्वतों पर चढ़ने का अभियास करता है। यदि वह कम उंचाई और कम जोखिम वाले पर्वतों के उपर चढ़ने मे कामयाब हो जाता है तो उसके बाद अधिक उंचाई और अधिक जोखिम वाले ‌‌‌पर्वतों को चुनने का काम करता है।
  • हिमस्खलन वैसे देखा जाए तो एक पर्वतरोही के लिए बहुत बड़ा खतरा होता है। और आमतौर पर इसको कम आंका जाता है लेकिन यह काफी डेंजर होता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हर साल120 से 150 लोग केवल आल्प्स में ही छोटे हिम्स्खालनों में मारे जाते हैं। इनमें अधिकतर 20 से 35 की आयु वर्ग के अनुभवी पुरुष स्कीयर्स होते हैं। हिमस्खलन का नाम तो आपने सुना ही होगा । जिसके अंदर कि एक बड़ी चट्टान आपकी तरफ आ सकती है। और यह भी हो सकता है कि एक पर्वत रोही उसके अंदर फंस जाए । एक बार यदि उसके अंदर कोई फंस जाता है तो उसके बाद उसके बचने के चांस आधे हो जाते हैं। हिमस्खलन के बारे मे काफी प्रशीक्षण दिया जाना जरूरी होता है ताकि इनसे काफी आसानी से बचा जा सके ।
  • जमी बर्फ क़ी ढलानें पर यात्रा करते समय भी पर्वतरोहियो को काफी सावधानी बरतनी होती है। आमतौर पर यहां पर बर्फीली ढलानों पर कई बार स्टेप-कटिंग का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि यह अधिक सुरक्षा प्रदान नहीं करती है। इसके अलावा बर्फ की कुल्हाड़ी का भी प्रयोग किया जा सकता है जोकि ना केवल सुरक्षा ‌‌‌प्रदान करता है। वरन पर्वतरोही को गिरने मे काफी मदद करने का काम करता है।
  • ऊंचाई में सौर विकिरण काफी बढ़ जाता है क्योंकि ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडल पतला होता जाता है। और इसकी वजह से अंधेपन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

‌‌‌इस तरह से दोस्तों पर्वतरोही काम भी किसी डेंजर खेल की तरह होता है। हालांकि अधिकतर लोग इसको बस अपने शौक के लिए पूरा करते हैं। लेकिन इसके अंदर काफी अधिक जोखिम होता है। और हर साल पर्वतरोही के अंदर 1.6 percent लोग मारे जाते हैं। हालांकि इस काम के अंदर अब अधिक सुविधाएं आने की वजह से डेथ रेट ‌‌‌ काफी कम हो चुकी है। आपको इसके बारे मे अच्छी तरह से समझना जरूरी है। खैर प्राचीन काल के अंदर इतनी सारी सुविधाएं नहीं होने की वजह से एक पर्वतरोही की मौत अधिक होती थी। आज प्रशीक्षण भी काफी बढ़िया तरीके से दिया जाता है।

‌‌‌दुनिया के खतरनाक खेल Hurling

‌‌‌दुनिया के खतरनाक खेल Hurling

Hurling नामक खेल की शूरूआत आयरलैंड के अंदर हुई थी। और देखने मे यह होकी से मिलता जुलता खेल है।इस खेल के अंदर खिलाड़ी किसी भी तरह के हेल्मिेंट आदि का प्रयोग नहीं करते हैं। जिसकी वजह से वे हमेशा खतरों के अंदर रहते हैं। हर्लिंग का पहला लिखित संदर्भ 1272 ईसा पूर्व का है।और इसके अंदर जो खिलाड़ी होते हैं वह घास के उपर खेल को खेलते हैं।इस खेल के अंदर एक छड़ी ली जाती है जिसकी मदद से गेंद को इधर उधर ले जाने का प्रयास किया जाता है। इस खेल के अंदर हर खिलाड़ी का उदेश्य होता है कि वह गेंद को नेट के पार कर दे। ऐसा करने ‌‌‌से उसको तीन अंक मिलते हैं।और इस लेख के अंदर जिस टीम का स्कोर उच्च होता है वह जीत जाती है। कहा जाता है कि यह खेल 3000 साल से भी अधिक पुराना खेल है।इस खेल के अंदर एक खिलाड़ी 180 किलोमीटर प्रतीघंटा से भी अधिक यात्रा कर सकता है। इसकी वजह से यह दुनिया के सबसे तेज खेलों के अंदर एक माना जाता है।

  • ‌‌‌इस खेल के अंदर एक टीम के पास 15 खिलाड़ी होते हैं
  • उछाल 15 से 36 इंच का हो सकता है।
  • एक गेंद का स में 69 और 72 मिमी (2.7 और 2.8 इंच) के बीच है, और इसका वजन 110 और 120 ग्राम (3.9 और 4.2 औंस) के बीच है।
  • हर्ल के साथ एक अच्छी स्ट्राइक गेंद को 150 किमी/घंटा (93 मील प्रति घंटे) की गति होती है।

एक उछाल वाली पिच कुछ मामलों में रग्बी पिच के समान होती है लेकिन बड़ी होती है। घास की पिच आयताकार होती है, जो 130-145 मीटर (140-160 गज) लंबी और 80-90 मीटर (90-100 yd) चौड़ी होती है। प्रत्येक छोर पर एच -आकार के गोलपोस्ट होते हैं, जो दो पदों से बने होते हैं, जो आमतौर पर 6-7 मीटर (20-23 फीट) ऊंचे होते हैं, 6.5 मीटर (21 फीट) अलग होते है।

एक गोलकीपर, तीन फुल बैक, तीन हाफ बैक, दो मिडफील्डर, तीन हाफ फॉरवर्ड और तीन फुल फॉरवर्ड जैसे कुल 30 खिलाड़ी हो सकते हैं और इनके अंदर दोनों ही टीमों के खिलाड़ी होते हैं। इसके अलावा खेल के अंदर यदि कोई खिलाड़ी घायल हो जाता है तो उसके स्थान पर दूसरे किसी खिलाड़ी को बदला जा सकता है।

  • गेंद को सीधे जमीन से उठाना
  • गेंद फेंकना
  • गेंद को हाथ में लेकर चार से अधिक कदम चलना
  • जमीन को छुए बिना गेंद को लगातार तीन बार पकड़ना
  • गेंद को एक हाथ से दूसरे हाथ में डालना
  • एक गोल हाथ से गुजरना
  • “चॉपिंग” दूसरे खिलाड़ी के हर्ल पर नीचे की ओर खिसकना
  • जानबूझकर हर्ले को गिराना या फेंक देना।
  • एक ‘स्क्वायर बॉल’, गेंद में प्रवेश करने से पहले प्रतिद्वंद्वी के छोटे आयत में प्रवेश करती है
  • गेंद पर लेटकर उसे ढकना या ढालना।
  • गेंद को जानबूझकर ऊपर फेंकना और उसे फिर से पकड़ना
  • गेंद को प्रतिद्वंद्वी की गोल लाइन के ऊपर ले जाना

‌‌‌इस तरह से दोस्तों देखा जाए तो यह उतना अधिक खतरनाक खेल नहीं है। बाकि इसके अंदर चोट लगने के चांस भी उतने नहीं होते हैं। लेकिन आमतौर पर जब पहले सन 2010 से पहले खिलाड़ी हेलिमेंट नहीं पहनते थे तो काफी समस्या होती थी और यह काफी डेंजर खेल हो जाता था लेकिन अब यदि कोई खिलाड़ी हेलिमेंट नहीं पहनता ‌‌‌ है तो उसको इस खेल से बाहर कर दिया जाता है क्योंकि अब हेलिमेंट पहनना जरूरी हो गया है।

Surfing

Surfing

Surfing एक डेंजर खेल होता है इसका मतलब होता है सवारी करना । इसके अंदर एक खिलाड़ी किसी लहर की सवारी करता है। और इसके लिए वह एक बोर्ड का इस्तेमाल करता है। अक्सर आपने कई विडियों के अंदर कुछ लोगों को खड़ी लहर की सवारी करते हुए देखा होगा यह Surfing ही होती है। सर्फिंग के लिए उपयुक्त लहरें मुख्य रूप से समुद्र के तटों पर पाई जाती हैं, लेकिन खुले समुद्र में, झीलों में, नदियों में ज्वारीय बोर के रूप में , या लहर पूल में खड़ी लहरों में भी पाई जा सकती हैं ।सर्फिंग भी कई तरीके से की जाती थी। यदि हम आधुनिक तरीके की बात करें तो अब लोग खड़े होकर सर्फिंग करते हैं

‌‌‌लेकिन जो प्राचीन संस्कृति थी वहां पर सर्फिंग करने के लिए पेट के बल पर लैटा जाता था। बॉडी बोर्डिंग भी सर्फिंग का एक रूप ही होता है । इसका मतलब यह होता है कि सवार अपनी बॉडी का उपयोग करके लहर को पकड़ने का काम करता है। इसी तरीके से स्टैंड-अप सर्फिंग के भीतर तीन प्रमुख उप-विभाग हैं स्टैंड-अप पैडलिंग , लंबी बोर्डिंग और शॉर्ट बोर्डिंग ।

टो-इन सर्फिंग में  एक मोटर चालित सिस्टम होता है जोकि सर्फिंग करने वाले को एक बड़ी लहर की गति से मेल खाने मे काफी मदद करने का काम करता है।2013 तक, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने गैरेट मैकनामारा द्वारा नाज़ारे , पुर्तगाल में 23.8 मीटर (78 फीट) की लहर की सवारी को अब तक की सबसे बड़ी लहर के रूप में मान्यता दी।

तेहुपोओ ; मावेरिक्स , कैलिफ़ोर्निया , संयुक्त राज्य अमेरिका; क्लाउडब्रेक, तवरुआ द्वीप, फिजी ; सुपरबैंक, गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया आदि कुछ ऐसी जगह हैं जहां पर सर्फिंग की जा सकती है।इसके अलावा भी दुनियां के अंदर और भी कई सर्फिंग करने के लिए काफी लोकप्रिय स्थान होते हैं।

  • पेरू के अंदर आज से 4 से 5 हजार साल पहले लोग मछली पकड़ने के लिए लहरों की सवारी करते थे ।सर्फिंग का एक प्रारंभिक विवरण जेसुइट मिशनरी जोस डी एकोस्टा ने अपने 1590 के प्रकाशन हिस्टोरिया नेचुरल वाई मोरल डे लास इंडियास में लिखा था ।
  • पोलिनेशिया की संस्कृति के अंदर भी हवाई द्धिवपों के लिए अपना रस्ता बनाना शूरू कर दिया था और इन्हीं लोगों ने खड़े होकर सर्फिंग करने का आविष्कार किया था।लेफ्टिनेंट जेम्स किंग हवाई पर सर्फिंग की कला के बारे में लिखने वाले पहले व्यक्ति थे। और कई यूरोपियन लोगों ने भी सर्फिंग को देखना शूरू कर ‌‌‌ दिया था।
  • ‌‌‌सर्फ पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक कृत्रिम चट्टान का निर्माण भी कर सकते हैं।कृत्रिम सर्फिंग रीफ को टिकाऊ सैंडबैग या कंक्रीट के साथ बनाया जा सकता है, और एक जलमग्न ब्रेकवाटर जैसा दिखता है। इस तरह के जो चट्टान होते हैं वो ना केवल उर्जा तरंगों को नष्ट करते हैं वरन सर्फिंग भी प्रदान करने ‌‌‌का काम करते हैं।
  • ‌‌‌दोस्तों आपको बतादें कि सर्फिंग करने से पहले उसको सीखा जाना जरूरी होता है। और इसके लिए विदेशों के अंदर कई तरह के स्कूल को संचालित किया जाता है। और इसके अलावा कई कैंप भी होते हैं। जोकि नए सर्फ की भर्ति को लेने का काम करते हैं। और यहां पर लगभग सभी तरह की सुविधाएं मौजूद होती हैं जैसे कि ‌‌‌रहना भोजन करना और पीना सोना । ‌‌‌यहां पर सर्फ को सीखने वाले बहुत सारे लोग होते हैं और उनको समुद्र के अंदर सर्फ को सिखाया जाता है। इनके पास गई गाइड हो सकते हैं जोकि यह सब सीखाने का काम करते हैं। कुल मिलाकर इन सब चीजों के अंदर काफी एंज्योय किया जा सकता है।
  • सर्फ़बोर्ड , लॉन्गबोर्ड , स्टैंड अप पैडल बोर्ड (एसयूपी) , बॉडीबोर्ड , वेव स्की , स्किमबोर्ड , नाइबोर्ड , सर्फ मैट और मैका ट्रे सहित विभिन्न उपकरणों पर सर्फिंग की जा सकती है ।और जो सर्फ बोर्ड होते हैं वे लकड़ी के बने होते हैं और उनके वजन की यदि हम बात करें तो यह 70 किलो तक जा सकता है। हालांकि अधिकांश आधुनिक सर्फ़बोर्ड फाइबरग्लास फोम (पीयू) से बने होते हैं। और यह बोर्ड काफी हल्के होने की वजह से इनको पानी के अंदर यूज करना काफी आसान काम होता है।इससे उन्हें पैडल मारना और पानी में तेजी से चलना आसान हो जाता है। सर्फ़बोर्ड के आकार अलग अलग हो सकते हैं। कुछ सर्फ बोर्ड काफी छोटे होते हैं तो कुछ सर्फ बोर्ड काफी बड़े भी होते हैं।
  • ‌‌‌सर्फिंग के अंदर जो सबसे बड़ा खतरा होता है ना वह डूबने का होता है। और सर्फ कई वजह से डूब सकता है। और कई लोगों के साथ डूबने की घटना हो चुकी हैं। इसलिए सावधानी से सर्फिंग करना बेहद ही जरूरी हो जाता है।सर्फर से सर्फिंग बोर्ड अलग हो सकता  है और उसके बाद सर्फर डूब सकता है। इसके अलावा एक गिरे हुए सवार का बोर्ड बड़ी लहरों में फंस सकता है, और अगर सवार को पट्टा से जोड़ा जाता है, तो उसे पानी के भीतर लंबी दूरी तक खींचा जा सकता है।और सर्फर को पूरी तरह से सावधान रहना चाहिए । आपको बतादें कि इस खेल के अंदर ‌‌‌कई फेमस सर्फर भी पानी के अंदर डूब गए हैं।
  • परिस्थितियों के गलत सेट के तहत, सर्फर के शरीर के संपर्क में आने वाली कोई भी चीज एक संभावित खतरा है, जिसमें रेत की छड़ें , चट्टानें, छोटी बर्फ, चट्टानें, सर्फ़बोर्ड और अन्य सर्फर । इनसब की वजह से चोट लग सकती है और दुर्लभ मामलों के अंदर मौत भी हो सकती है।इसके अलावा यदि त्वचा के अंदर कट वैगरह लग जाती ‌‌‌तो इसकी वजह से त्वचा के अंदर संक्रमण फैल सकता है और खुले घाव के अंदर बैक्टिरिया आसानी से हमला कर देते हैं। इसलिए सर्फिंग करने के लिए हमेशा साफ पानी को ही चुना जाता है।
  • शार्क ,  स्टिंगरे , वीवर फिश , सील और जेलिफ़िश आदि कुछ ऐसे समुद्री जानवर होते हैं जोकि एक सर्फिंग करने वाले इंसान के लिए खतरें का कारण बन सकते हैं। और यहां तक की कई बार मौत के कारण भी यह जानवर बन सकते हैं।
  • चीर धाराएं जल चैनल हैं जो किनारे से दूर बहती हैं और इस तरह की धाराएं किसी भी अनुभवी सर्फर को भी खतरे के अंदर डालने के लिए काफी होती हैं।और एक चीरधारा का प्रवाह काफी मजबूत होने की वजह से यह सर्फर को किनारे से दूर ले जा सकती हैं। हालांकि पैडलिंग करके सर्फर आसानी से इन चीर धाराओं से दूर जा सकता है।‌‌‌लेकिन इन सबके अंदर काफी अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है।
  • सीबेड सर्फर्स के लिए खतरा पैदा कर सकता है। यदि कोई सर्फर लहर की सवारी करते हुए गिर जाता है तो वह काफी गम्भीर रूप से घायल हो सकता है क्योंकि लहर उसे पानी के अंदर खींच कर ले जाती हैं। और इस दौरान उसका शरीर किसी चट्टान से भी टकरा सकता है जिसकी वजह से उसकी मौत तक हो सकती है।
  • ‌‌‌एक सर्फर के कान की क्षति होना या कान मे सूजन की समस्या होना आम बात होती है। सर्फर को इन सब से बचने के लिए ईयर प्लग का प्रयोग करना चाहिए ।यह समस्या इसकी वजह से होती है क्योंकि कान की हड्डी  बार बार ठंडे पानी के संपर्क मे आती है।और इसकी वजह से कान की नली संकरी हो जाती है। उसके बाद कान के ‌‌‌अंदर से पानी को निकालना काफी कठिन हो जाता है।जिसके परिणाम स्वरूप कान बज सकता है और कान के अंदर संक्रमण हो सकता है व कान की क्षति हो सकती है।केवल एक बार सर्फ करने के बाद कान की सूजन जैसी क्षति हो सकती है।
  • सर्फर की मायलोपैथी एक दुर्लभ रीढ़ की हड्डी की चोट है । और इसकी वजह से पक्षघात हो सकता है। हालांकि यह सभी सर्फर के अंदर नहीं होती है। यह पक्षघात कुछ मामलों मे स्थाई भी हो सकता है।

‌‌‌इस तरह से दोस्तों सर्फिंग एक बहुत ही डेंजर खेल होता है। और यदि इसके अंदर किसी भी तरह की चूक हो जाती है तो उसके बाद जान जाने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। खैर कई सर्फिंग करने वाले लोगों की जान चली जाती है।‌‌‌लेकिन लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। और आज भी विदेशों के अंदर लोग सबसे अधिक सर्फिंग करते हैं और इसका प्रयास करते हैं। क्योंकि उन सबको इन चीजों के अंदर काफी आनन्द मिलता है।

शार्कों के बीच सर्फिंग करना बहुत ही डेंजर काम होता है। ओस्ट्रेलिया के अंदर कई ऐसे लोग हैं जोकि सर्फिंग करने के दौरान शार्क के हमले के शिकार हो गए । और शर्क ने उनको पकड़ कर पानी के अंदर खींच लिया । इस तरह से दोस्तों सर्फिंग एक डेंजर खेल होता है जिसके अंदर यह पता ही नहीं चल पाता है कि आप कब ‌‌‌मौत के मुंह के अंदर समा सकते हैं।

‌‌‌दुनिया के सबसे खतरनाक खेल Boxing

Boxing

Boxingको हम जितना आसान समझते हैं यह उतनी आसान नहीं है। कारण यह है कि इसके अंदर बॉक्सर कई बार काफी हिंसक हो जाते हैं जिसकी वजह से वे अपने सामने वाले को बुरी तरह से घायल कर सकते हैं या फिर उसकी हडियां भी तोड़ सकते हैं। यदि आपने कभी बॉक्सिंग देखी होगी तो आपको इसके बारे मे पता ही होगा ।

बॉक्सिंग करने के लिए सुरक्षात्मक दस्ताने और हेल्मिेंट पहना जाता है। लेकिन कई बार आप बॉक्सर को बिना हेल्मिेंट की भी देखते हैं। ऐसी स्थिति के अंदर बॉक्सिंग काफी डेंजर हो जाती है। क्योंकि यदि बिना हेल्मिेंट के चोट लगने का खतरा बहुत अधिक होता है।

पश्चिमी मुक्केबाजी, फ्रेंच मुक्केबाजी , चाइनीज बॉक्सिंग , थाई बॉक्सिंग , किकबॉक्सिंग और द प्राचीन पिग्माचिया ।आदि कई तरह की बॉक्सिंग होती है। वैसे आपको बतादें कि इसके अंदर एक रिंग होती है और इस रिंग को विशेष प्रकार से बनाया जाता है। और इसमे दोनों बॉक्सर एक साथ लड़ते हैं। कई बार पूरे ग्रुप को ‌‌‌भी इसके अंदर शामिल किया जाता है। मुक्केबाजी के एक रूप का सबसे पहला सबूत सुमेरियन नक्काशी में तीसरी और दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में देखा जा सकता है।और यदि हम बॉक्सिंग के नियम पहला उल्लेख की बात करें तो यह ग्रीस के अंदर 688 ई पूर्व मिलता है।

  • मुक्केबाजी के किसी भी रूप का सबसे पहला ज्ञात चित्रण इराक में तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व से सुमेरियन राहत से आता है।
  • मिस्र के अंदर 1350 ई के अंदर एक मूर्तिकला के अंदर बॉक्सि के पहलवानों को दिखाया गया है।
  • प्राचीन भारत में विभिन्न प्रकार की मुक्केबाजी मौजूद थी । मुस्टी-युद्ध का सबसे पहला संदर्भ शास्त्रीय वैदिक महाकाव्यों जैसे रामायण और ऋग्वेद से मिलता है ।
  • इसके अलावा महाभारत के अंदर भी मुक्केबाजी का वर्णन आता है जिसके अंदर दो पहलवान मूठी को बंद करके लड़ते हैं।
  • प्राचीन ग्रीस में मुक्केबाजी एक अच्छी तरह से विकसित खेल था जिसे पिग्माचिया कहा जाता था। और यह लोग अपने हाथ मे चमड़ें के दस्ताने पहनकर लड़ते थे । और इसके अंदर कोई भी राउंड नहीं होता था। बस दोनों पहलवान तब तक लड़ते थे जब तक कि दोनों मे से कोई एक हार नहीं जाता था।
  • ‌‌‌वैसे आपको पता ही होगा कि बॉक्सिंग काफी डेंजर होती है। और इसके अंदर किसी भी खिलाड़ी को चोट लग सकती है। क्योंकि एक बॉक्सर का मुख्य उदेश्य ही यही होता है कि वह दूसरे बॉक्सर को चोट पहुंचाए । और इसके लिए वह काफी प्रयास भी करता है। 1980 से 2007 तक, 200 से अधिक शौकिया मुक्केबाजों, पेशेवर मुक्केबाजों और टफमैन सेनानियों की रिंग या प्रशिक्षण चोटों के कारण मृत्यु हो गई। ‌‌‌इन सब कारणों के चलते मुक्केबाजी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।पेशेवर मुक्केबाजी आइसलैंड,  ईरान और उत्तर कोरिया में प्रतिबंधित है।
  • मांसपेशियों की टोन में वृद्धि, मजबूत हड्डियों और स्नायुबंधन, हृदय की फिटनेस, मांसपेशियों की सहनशक्ति, बेहतर कोर स्थिरता आदि बॉक्सि के कुछ फायदे भी होते हैं। लेकिन यदि किसी बॉक्सर को चोट लग जाए और कई बार दूसरे बॉक्सर हिंसक हो सकते हैं जोकि पहले बॉक्सर की जान भी ले सकते हैं।
  • रिंग कॉर्नर एक ऐसी जगह होती है जहां पर बॉक्सर खड़े होते हैं। बॉक्सर को रिंग के अंदर एक कोना दिया जाता है जहां पर वे कुछ समय के लिए आराम कर सकते हैं।बॉक्सर के अलावा कोने में तीन पुरुष खड़े होते हैं; ये हैं ट्रेनर, असिस्टेंट ट्रेनर और कटमैन। कटमैन आमतौर पर एक चिकित्सक होता है जोकि बॉक्सर को ‌‌‌ आंखों के आस पास चोट को बचाने का काम भी करता है।इसके अलावा, कोने लड़ाई को रोकने के लिए जिम्मेदार है अगर उन्हें लगता है कि उनके लड़ाकू को स्थायी चोट का गंभीर खतरा है। हालांकि कई बार बॉक्सर जब गुस्से के अंदर होते हैं तो कोच को ही मारने मे कोई एतराज नहीं करते हैं।
  • ‌‌‌1857 ई के अंदर मुक्केबाजी के संदर्भ मे कुछ नियम बनाए गए थे । इन नियमों के आधार पर मुक्केबाजी को नियंत्रित किया जाता है। यदि हम मुक्केबाजी के समय की बात करें तो इसके अंदर बस तीन मिनट का एक राउंड होता है। लड़ाई को एक रेफरी द्वारा नियंत्रित किया जाता है जो रिंग के भीतर काम करता है। ‌‌‌इसके अलावा रिंग के बाहर तीन जज भी मौजूद होते हैं जोकि लड़ाई और रक्षा आदि कई चीजों के आधार पर मुक्केबाज को स्कोर देने का काम भी करते हैं।लड़ाई के अंत में उच्च स्कोर वाले लड़ाकू को विजेता माना जाता है। तीन न्यायाधीशों के साथ, सर्वसम्मत और विभाजित निर्णय संभव हैं। ‌‌‌यदि कोई बॉक्सर नीचे गिर जाता है और उसके बाद लड़ नहीं पता है। या वह अपनी चोटों की वजह से लड़ने मे असमर्थ हो जाता है तो उसके बाद एक से लेकर 10 तक गिना जाता है और यदि वह नहीं उठ पाता है तो दूसरे को विजेता घोषित कर दिया जाता है। सामान्य तौर पर, मुक्केबाजों को बेल्ट के नीचे मारने, पकड़ने, ट्रिपिंग करने, धक्का देने, काटने या थूकने से मना किया जाता है । और यदि कोई मुक्केबाज नियमों का उल्ल्घंन करता है तो उसके लिए चेतावनी जारी की जाती है और उसका अंक कट सकता है या फिर उसको अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।
  • शौकिया मुक्केबाजी को कॉलेजिएट स्तर पर, ओलंपिक खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों , एशियाई खेलों आदि में पाया जा सकता है। यह आमतौर पर 3 मिनट के राउंड होते हैं।इसके अंदर खेलों को काफी आराम से खेला जाता है। जिसकी वजह से चोट लगने की संभावना अधिक नहीं होती है। खेल के अंदर हेल्मिेंट वैगरह आदि सभी चीजों का ‌‌‌ उपयोग किया जाता है।और आपको बतादें कि प्रत्येक राउंड के बीच एक मिनट का अंतराल होता है।सफेद छोर न्यायाधीशों के लिए क्लीन हिट स्कोर करना आसान बनाने का एक तरीका है। प्रत्येक प्रतियोगी को अपने हाथों पर अतिरिक्त सुरक्षा के लिए और दस्ताने के नीचे अतिरिक्त कुशन के लिए अपने हाथों को ठीक से लपेटा हुआ होना चाहिए। ‌‌‌यदि कोई मुक्केबाज नियमों का उल्लघंन करता है तो उसके बाद उसे रेफरी के द्धारा अलग कर दिया जाता है और यदि कोई बार बार ऐसा करता है तो उसे दंडित किया जा सकता है और अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।
  • पेशेवर मुक्केबाजी काफी डेंजर होती है। और इसके अंदर जो मुक्केबाज होता है वह किसी भी तरह का हेल्मिेंट भी नहीं पहनता है। और इसको देखना काफी अधिक लोग पसंद करते हैं। आमतौर पर दस से बारह राउंड तक यह हो सकते हैं। और रिंग के अंदर कई बार कोई पहलवान काफी उत्तेजित हो जाता है जिसके बाद वह दूसरे को जान से भी मार सकता है। और कई बार तो इनका बचाव करने वाले भी बूरी तरह से डर जाते हैं। इसके अंदर किसी बॉक्सर की मौत भी हो सकती है। यदि कोई मुक्केबाज़ लड़ना छोड़ देता है, या उसके कोने से लड़ाई रुक जाती है, तो विजेता मुक्केबाज़ को तकनीकी नॉकआउट जीत से भी सम्मानित किया जाता है। शौकिया मुक्केबाजी के विपरीत, पेशेवर पुरुष मुक्केबाजों को नंगे-छाती होना पड़ता है।

Heliskiing

Heliskiing

Heliskiing भी एक काफी डेंजर खेल होता है। और इस खेल के अंदर जो खिलाड़ी होता है वह हैल्किाप्टर से निश्चित दूरी पर रहता है और इसकी हवा की वजह से स्कीइंग  करता है। हालांकि यह खेल काफी डेंजर है क्योंकि यदि इसमे जरा सी चूक हो जाती है तो इंसान मौत के मुंह मे जा सकता है। अचानक मौसम बदलना, हिमस्खलन आदि की वजह से खिलाड़ी की मौत हो सकती है।और खिलाड़ी हैल्किाप्टर की चपेट मे आ सकता है।

हेली-स्कीइंग ऑफ-ट्रेल, डाउनहिल स्कीइंग या स्नोबोर्डिंग है जो स्की लिफ्ट के बजाय हेलीकॉप्टर द्वारा पहुंचा जाता है । 1950 के दशक के अंत में, अलास्का और यूरोप में दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया था।

स्विटज़रलैंड में 42 लैंडिंग साइटों के लिए हर साल अनुमानित 15,000 हेलिस्कीइंग उड़ानें होती हैं।जर्मनी में हेलिस्कीइंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और 1985 में फ्रांस में प्रतिबंधित कर दिया गया था।

आइस हॉकी

आइस हॉकी

आइस हॉकी या बर्फ हॉकी एक प्रकार का काफी डेंजर खेल होता है। हालांकि यह आम हॉकी की तरह ही होता है लेकिन इसको बर्फ पर खेला जाता है। और इस बर्फ पर फिसल जाना और चोट लग जाने का डर हमेशा बना रहता है। इसके अलावा खिलाड़ी आपस मे लड़ते हैं जिसकी वजह से काफी डेंजर समस्याएं हो सकती है। आइस हॉकी कनाडा, मध्य और पूर्वी यूरोप, नॉर्डिक देशों, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे लोकप्रिय है अंतर्राष्ट्रीय आइस हॉकी महासंघ बर्फ हॉकी से सम्बंधित कार्यक्रमों की देखरेख एवं आयोजन करता है। आइस हॉकी कनाडा का आधिकारिक राष्ट्रीय शीतकालीन खेल भी है। तो दोस्तों आइए हॉकि भी काफी डेंजर खेल होता है।

‌‌‌दोस्तों आपको बतादें कि ऑइस हॉकी किसी पहाड़ पर या बर्फ के जगहों पर नहीं खेली जाती है। यह विशेषतौर पर इसके लिए मैदान बनाये जाते हैं जिनके अंदर बर्फ जमी होती है। और उन मैदान के चारों ओर दशर्कों के बैठने की अनुमति भी होती है। ‌‌‌इसके अलावा आपको बतादें कि आइस हॉकि के अंदर स्पेसल प्रकार के जुते का प्रयोग किया जाता है जिनक ी मदद से आसानी से बर्फ पर चला जा सकता है।

Mixed martial arts

Mixed martial arts

‌‌‌इस खेल को पिंजरे की लड़ाई के नाम से जाना जाता है।दुनिया भर के विभिन्न लड़ाकू खेलों की तकनीकों को शामिल करना।  मिश्रित मार्शल आर्ट शब्द का पहला प्रलेखित प्रयोग 1993 में टेलीविजन समीक्षक हॉवर्ड रोसेनबर्ग द्वारा किया गया था।

‌‌‌इसके अंदर दो बॉक्सर होते हैं जोकि पिंजरे के अंदर लड़ाई करते हैं। और मिश्रित मार्शल आर्ट अनिवार्य रूप से एक ऐसा खेल है जिसमें मुक्केबाजी, कराटे, जिउ जित्सु, कुश्ती और जूडो जैसे किसी भी मार्शल अनुशासन के लड़ाके उन नियमों के तहत प्रतिस्पर्धा करते हैं।

वयस्क प्रतियोगिता में, निम्नलिखित भार वर्ग लागू होते हैं:

  • 265 पाउंड से अधिक का सुपर हैवीवेट
  • 205 से 265 पाउंड से अधिक का हैवीवेट
  • 185 से 205 पाउंड से अधिक का हल्का हैवीवेट
  • मिडिलवेट 170 से 185 पाउंड से अधिक
  • 155 से 170 पाउंड से अधिक का वेल्टरवेट
  • 145 से 155 पाउंड से अधिक का हल्का
  • फेदरवेट 135 से 145 पाउंड से अधिक
  • महिलाओं का बैंटमवेट 125 से 135 पाउंड से अधिक
  • बैंटमवेट 125 से 135 पाउंड से अधिक
  • 115 पाउंड से 125 . तक फ्लाईवेट
  • 115 पाउंड तक स्ट्रॉवेट

‌‌‌दोस्तों इस खेल के अंदर भी जज होते हैं जोकि रिंग के चारो ओर बैठते हैं और लडाकू को स्कोर देते हैं। इसमे जितने वाले बॉक्सर का स्कोर 10 होता है और हारने वाले का 9 होता है।

  • ‌‌‌इसके अदर मैच मे 3 राउंड होते हैं। हर राउंड 5 मिनट से अधिक नहीं हो सकता है।
  • लड़ाई एक अंगूठी या पिंजरे में होगी जिसका माप 20 वर्ग फुट और 32 वर्ग फुट के बीच होगा।
  • एक निष्पक्ष लड़ाई सुनिश्चित करने के लिए, प्रतियोगी केवल उन्हीं सेनानियों से लड़ सकते हैं जो समान भार वर्ग में हैं।
  • कमर पर वार
  • आँख मूँदना
  • काटना
  • बाल पकड़ना ।
  • उंगलियों में हेरफेर
  • सिरपर मारना आदि की अनुमति नहीं है।
  • प्राचीन चीन में , लड़ाकू खेल लीताई के रूप में दिखाई दिया , जो बिना किसी रोक-टोक के मिश्रित युद्ध खेल है जिसमें चीनी मार्शल आर्ट , मुक्केबाजी और कुश्ती शामिल है
  • प्राचीन ग्रीस में , पंक्रेशन नामक एक खेल था । जोकि इस मार्शल आर्ट से मिलता जुलता ही खेल हुआ करता था।
  • 1993 में पहली अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप के बाद से मिश्रित मार्शल आर्ट प्रतियोगिताओं में नाटकीय रूप से बदलाव आया है। और सन 2014 के बाद एमएम मे चोट लगने की दर को कम होते हुए देखा गया है।
  • एमएमए में उपलब्ध चोट डेटा के 2014 के मेटा-विश्लेषण में, चोट की घटनाओं की दर प्रति 1000 एथलीट-एक्सपोज़र में 228.7 चोटों का अनुमान लगाया गया था।वैसे आपको बतादें कि यह खेल काफी डेंजर होता है और मरने की घटनाएं सबसे आम होती हैं। ‌‌‌कारण यह है कि इसके अंदर यह पता नहीं चल पाता है कि कब कौनसा खिलाड़ी हिंसक हो जाए । और हिंसक होने की दशा मे वह दूसरे खिलाड़ी को काफी भयंकर चोट दे सकता है। ‌‌‌यदि आप इस तरह के मार्शल आर्ट को देखते हैं तो आपको पता चलेगा कि यह चीन के अंदर सबसे अधिक खेला जाता था। और चीन के अंदर ही इसका बेहतरीन तरीके से विकास हुआ था। दोस्तों मार्शल आर्ट ‌‌‌खेल को खेलने के लिए काफी अनुभव होना जरूरी होता है कारण यह है कि इसके लिए आपको पहले ही तैयार करना होता है। यदि आपको इसके बारे मे कुछ भी पता नहीं होता है तो आप इसको खेल नहीं सकते हैं। ‌‌‌इस तरह से दोस्तों मार्शल आर्ट के अंदर खिलाड़ी के घायल होने के चांस बहुत ही अधिक बढ़ जाते हैं क्योंकि यहां पर काफी मुक्केबाजी की जाती है। और कई बार खिलाड़ी की हडियां ही तोड़ दी जाती हैं।

Bungy Jumping

Bungy Jumping

                                 Bungee jumping एक बहुत ही डेंजर खेल होता है। जिसके अंदर करना यह होता है कि एक व्यक्ति किसी उंची ईमारत या फिर किसी उंची चट्टान या फिर किसी हेल्किॉटर की मदद से नीचे कूदता है और उसके पैरों के अंदर और उसके शरीर पर एक रस्सी बांधी जाती है। यह सब भारत के अंदर भी होता है। वैसे देखा जाए तो यह एक ‌‌‌ बहुत ही डेंजर खेल होता है। यदि इसके अंदर कुछ भी हादसा हो सकता है। लेकिन इस तरह का खेल खेलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। कूदने के लिए आपके पास जिगरा होना जरूरी होता है।

पहला आधुनिक बंजी जंप 1 अप्रैल 1979 को इंग्लैंड के ब्रिस्टल में 250 फुट (76 मीटर) क्लिफ्टन सस्पेंशन ब्रिज से डेविड किर्के और साइमन कीलिंग,  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी डेंजरस स्पोर्ट्स क्लब के सदस्य और ज्योफ टैबिन द्वारा किया गया था।

ब्लोक्रांस रिवर ब्रिज अफ्रीका में बंजी जंप लॉन्च स्पॉट के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला पहला पुल था, जब फेस एड्रेनालिन ने 1990 में अफ्रीकी महाद्वीप में बंजी जंपिंग की शुरुआत की थी। ब्लोक्रांस ब्रिज बंगी को 1997 से फेस एड्रेनालिन द्वारा व्यावसायिक रूप से संचालित किया गया है,

अप्रैल 2008 में, एक 37 वर्षीय डरबन व्यक्ति, कार्ल मोस्का डायोनिसियो ने बंजी जंपिंग का इतिहास रच दिया, जब वह बंजी कॉर्ड से जुड़े 30 मीटर (100 फीट) टॉवर से कूद गया

Bungee jumping के अंदर सन 1920 के बाद कई मिलियन सफल छलांके लग चुकी हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि कुछ लोगों को चोटें नहीं आई हो कुछ लोगों को काफी चोंटें आई और कुछ की मौत तक हो गई थी । लेकिन यदि नियंत्रित करने वाले सही तरीके से चीजों को नियंत्रित करते हैं तो आसानी से सब कुछ ठीक किया जा सकता है।

  • अगस्त 2005 में, एजे हैकेट ने मकाऊ टॉवर में एक स्काईजंप जोड़ा , जिससे यह 233 मीटर (764 फीट) पर दुनिया की सबसे ऊंची छलांग बन गई।
  • 17 दिसंबर 2006 को, मकाऊ टॉवर ने एक उचित बंजी जंप का संचालन शुरू किया, जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार “दुनिया में सबसे ऊंचा वाणिज्यिक बंजी जंप बन चुका है।
  • कुश्मा बंजी जंप 228 मीटर की ऊंचाई के साथ दूसरी सबसे ऊंची बंजी जंप है।
  • Bungee jumping  काफी डेंजर होता है। यदि इसके अंदर थोड़ी भी चीजें इधर उधर हुई तो फिर चोट लगना और मौत होना तय होता है। इसके अंदर गम्भीर चोटें भी आ सकती हैं। आपको इस बात को समझना होगा ।सुरक्षा हार्नेस विफल होने पर चोट लग सकती है। ‌‌‌और यदि गलत रस्सी की लंबाई का अनुमान लगा लेता है तो उसकी वजह से भी चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है।इसके अंदर आमतौर पर आंखों की रोशनी की क्षति सबसे अधिक होती है। और आंखों से दिखना बंद हो सकता है। और इसके ठीक होने में आमतौर पर एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है और कई व्यक्तियों ने इस बात ‌‌‌ को रिपोर्ट किया है कि काफी दिन बाद भी उनकी आंखों की रोशनी वापस नहीं आई है। जम्पर की गर्दन या शरीर नाल में फंस जाने पर बहुत गंभीर चोट भी लग सकती है।

स्कूबा डाइविंग

स्कूबा डाइविंग

स्कूबा डाइविंग को एक तरह से हम खेल भी कह सकते हैं और यह मुख्य रूप से शोध के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अंदर व्यक्ति पानी के अंदर प्रवेश करता है और उसके बाद वहां पर अपना आवश्यक कार्य करता है। पानी मे सांस लेने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करता है। आपने देखा होगा ‌‌‌ कई विडियों के अंदर लोग पानी के नीचे तैर रहे होते हैं। जिनको आमतौर पर गोताखोर के नाम से जाना जाता है। और कई फिल्मों के अंदर भी इनके बारे मे दिखाया जाता है।

स्कूबा डाइविंग के कारणों की यदि हम बात करें तो यह कई उदेश्यों के लिए किया जाता है खास तौर पर यह आनन्द के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा यह पेशेवर भी होता है जो पानी के नीचे किसी खास प्रकार की खोज करने के लिए होता है।

  • ‌‌‌यदि हम इसके अंदर पानी की गहराई की बात करें तो यह कई चीजों पर निर्भर करता है। लेकिन असल मे पानी मे मनोरंजन के लिए उतरना 30 मीटर तक होती है।
  • मनरंजन के लिए किये जाने वाले गोताखोरी में गोताखोर आधी मुह के मास्क का इस्तेमाल करते है जो उनके नाक और मुह को ढकता हैं। पेशेवर स्कूबा गोताखोरों पूरे चेहरे वाले मास्क का उपयोग करते है।
  • गोताखोर पानी के अंदर हेल्मिेंट और मास्क का प्रयोग करते हैं जोकि उनको पानी के अंदर सुरक्षा प्रदान करते हैं।
  • वेट सूट एक परिधान है जो आमतौरझाग बनाये हुए निओप्रीन से बना होता हैं एवं थर्मल इन्सुलेशन, घर्षण प्रतिरोध और उछाल प्रदान करता है।
  • और पानी के भीतर का जो वातावरण होता है वह काफी डेंजर होता है। इस वजह से गोताखोर को आवश्यक सुरक्षा का इंतजाम करना जरूरी होता है।
  • स्कूबा डाइविंग के अंदर भी कई सारे जोखिम होते हैं। और इनकी वजह से गम्भीर चोट लग सकती है। गोताखोर बनने से पहले इसका पूरी सही तरीके से प्रशीक्षण लेना जरूरी होता है। पानी के दबाव मे बदलाव होने पर गम्भीर चोटें लग सकती हैं।
  • जब शरीर में ऑक्सीजन एक सुरक्षित आंशिक दबाव (PPO2) से अधिक हो जाता हैं तब ऑक्सीजन विषाक्तता होती है और इसकी वजह से बोहोशी हो सकती है।
  • डाइविंग उपकरणों की यदि किसी वजह से विफलता हो जाती है तो इससे जान का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
  • ‌‌‌इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा जो होता है वह समुद्री जीवों को होता है। समुद्री जीवों की ताकत पानी के अंदर बहुत अधिक बढ़ जाती है। पानी के अंदर हम आसानी से किसी भी समुद्री जीव का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। ‌‌‌समुद्री शार्क सबसे अधिक डेंजर होती है जोकि किसी भी गोताखोर के लिए काफी घातक साबित हो सकती है। सो समुद्री गोताखोरों के लिए समद्री जीव भी बहुत बड़े खतरें पैदा कर सकते हैं।
  • ‌‌‌यह काफी डेंजर होती है। और यदि कोई सही तरीके से नहीं तैरता है तो उसको कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं । जैसे कि यदि कोई गोताखोर तेजी से उपर आता है तो इसकी वजह से एक भयंकर बीमारी हो सकती हैं जिसको डीकम्प्रेशन सिकनेस नाम से जाना जाता है जिससे कि सोचने समझने की क्षमता नष्ट हो जाती है।

duniya ke sabse khatarnak khel  Cave diving

duniya ke sabse khatarnak khel  Cave diving

Cave diving भी गोताखोर की तरह ही होता है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह काफी डेंजर होती है। और इसके अंदर जान के नुकसान होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।केव डाइविंग पानी से भरी गुफाओं में अंडरवाटर डाइविंग है । यह एक चरम खेल के रूप में किया जा सकता है, वैज्ञानिक जांच के लिए बाढ़ की गुफाओं की खोज करने का एक तरीका है,

Cave diving  और स्क्युबा डाइविंग दोनों वैसे अलग अलग होती हैं। Cave diving  को काफी कम लोग करना पसंद करते हैं क्योंकि इसके अंदर काफी अधिक जोखिम होता है।इन जोखिमों के बावजूद, पानी से भरी गुफाएं स्कूबा गोताखोरों, गुफाओं और स्पेलोलॉजिस्टों को आकर्षित करती हैं, क्योंकि उनकी अक्सर बेरोज़गार प्रकृति होती है, और गोताखोरों को एक तकनीकी डाइविंग चुनौती के साथ पेश किया जाता है

Cave diving  के अंदर गोताखोर को सांस लेने के लिए मुक्त हवा नहीं मिल पाती है।और सांस को छोड़ने के लिए उस हवा का बाहर निकलना भी काफी जरूरी होता है।यह गोताखोर टीम और गुफा के बाढ़ वाले हिस्से के बाहर एक बिंदु के बीच निरंतर दिशानिर्देश के उपयोग और गैस आपूर्ति की मेहनती योजना और निगरानी के द्वारा सुनिश्चित किया जाता है।

  • Cave diving  आमतौर पर काफी डेंजर होते हैं। और इनको पूरी सावधानी से पूर्ण किया जाना जरूरी होता है। यदि इनको पूरी सावधानी से पूर्ण नहीं किया जाता है तो यह काफी डेंजर हो सकता है।जब एक गोताखोर गुफा से पास होता है तो ‌‌‌उसे काफी लंबी दूरी तक तैरना होता है और गुफा के दोनों मार्ग काफी दूरी पर होते हैं। और उन तक पहुंचने के लिए उनको अधिक सांस की आवश्यकता होती है। जोकि जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है।
  • 30 मीटर (100 फीट) से अधिक गहराई के अंदर एक गोताखोर नहीं देख सकता है और यहां पर सूरज का प्रकाश भी नहीं पहुंच पाता है। और अधिक गहराई के अंदर देखने के लिए आमतौर पर कृत्रिम प्रकाश का प्रयोग किया जाता है। और पानी के नीचे जमी मिट्टी और तलछट भी द्रश्यता को कम करने का काम करती है।
  • ‌‌‌इसके अलावा एक गुफा के अंदर पानी का बहाव बहुत ही तेज होता है। जिसका मतलब यह है कि एक गोताखोर को काफी तेजी से सब कुछ करना होता है वरना काफी गम्भीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • केव डाइविंग दुनिया के सबसे घातक खेलों मे से एक माना जाता है। और इस खेल के अंदर कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। लेकिन कितने लोगों ने इसके अंदर अपनी जान गवाई इसके बारे मे कोई जानकारी नहीं है। लेकिन यदि सही तरीके से टीम के निर्देशों का पालन करते हुए केव डाइविंग की जाती है तो जोखिम को कम किया जा ‌‌‌ सकता है। गुफा में गोता लगाने के शुरुआती चरणों में विश्लेषण से पता चलता है कि 90% दुर्घटनाएँ प्रशिक्षित गुफा गोताखोर नहीं थे।
  • प्रशिक्षण एक सुरक्षित गुफा गोताखोर जानबूझकर अपने प्रशिक्षण के दायरे से अधिक नहीं होता है।  गुफा में गोता लगाना आम तौर पर चरणों में पढ़ाया जाता है, प्रत्येक क्रमिक चरण गुफा में गोताखोरी के अधिक जटिल पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करता है। एक सुमद्री गोतोखोर को अनुभव प्राप्त करना होता है उसके बाद वह आसानी से ‌‌‌सभी तरह की समस्याओं से बचने मे सक्षम होता है।
  • ‌‌‌एक गोताखोर के पास प्रकाश के कम कम तीन स्त्रोत होना जरूरी होते हैं। यदि प्रकाश का कोई स्त्रोत खराब हो जाता है तो उस गोताखोर को वहां से तुरंत ही बाहर निकलना शूरू कर देना चाहिए ।वरना जोखिम और अधिक बढ़ सकता है।
  • श्वास गैस की आपूर्ति गोताखोर को ऊपरी वातावरण से बाहर होने तक चलती रहनी चाहिए। गैस प्रबंधन के लिए कई रणनीतियाँ हैं। सबसे आम प्रोटोकॉल ‘ तिहाई का नियम ‘ है, जिसमें प्रारंभिक गैस आपूर्ति का एक तिहाई प्रवेश के लिए, एक तिहाई निकास के लिए, और एक तिहाई आपात स्थिति के मामले में टीम के किसी अन्य सदस्य का समर्थन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • Cave diving  के अंदर आजकल विशेष प्रकार के कैमरे का उपयोग भी किया जाने लगा है ताकि कैमरे की मदद से पानी के द्रश्य को आसानी से लोगों को दिखाया जा सके । और आप जो विडियो को देखते हैं वह पानी के अंदर का द्रश्य होता है। खैर केव डाइविंग काफी डेंजर होती है। ‌‌‌और यदि इसके अंदर जरा सी असावधानी हुई तो नुकसान हो सकता है। इसलिए जैसा जैसा निर्देष दिया जाता है वैसे वैसे पालन करना होता है।

duniya ke sabse khatarnak khel  Bull riding

Bull riding

Bull riding को सांड की सवारी के नाम से जाना जाता है। आपको पता ही होगा कि सांड कितना डेंजर होता है। और यदि हम उसके उपर चढ़ जाएं तो फिर हमारा क्या हाल हो सकता है सोच कर ही काफी परेशानी हो रही है। यह एक तरह से देखा जाए तो काफी भयंकर खेल होता है। और दुनिया का सबसे खतरनाक खेल के अंदर ‌‌‌ आता है।इस खेल मे खिलाड़ी एक सांड पर चढ़ता है और उसकी सवारी करने की कोशिश करता है। लेकिन सांड को यह कहां पसंद आने वाला होता है तो सांड उसको दूर भगाने की कोशिश करता है। एक तरह से देखा जाए तो यह काफी डेंजर होता है। इसकी वजह से यह बस एक रिंग के अंदर ही किया जाता है।

बुल राइडिंग संगठन और प्रतियोगिता के आधार पर, अधिकतम चार जज सवार को जज कर सकते हैं और चार जज बैल को उनके प्रदर्शन के आधार पर जज कर सकते हैं। अधिकांश संगठनों के लिए, एक पूर्ण स्कोर 100 अंक है। और आपको बतादें कि दुनिया के कई देशों के अंदर बुल राइडिंग का खेल खेला जाता है।

संयुक्त राज्य के बाहर, कनाडा, मैक्सिको, बेलीज, ग्वाटेमाला, अल सल्वाडोर, होंडुरास, निकारागुआ, कोस्टा रिका, पनामा, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य, कोलंबिया, वेनेजुएला, गुयाना, इक्वाडोर में अलग-अलग नियमों और इतिहास के साथ बैल की सवारी परंपराएं मौजूद हैं। , पेरू, बोलीविया, ब्राजील, पराग्वे, चिली, अर्जेंटीना, उरुग्वे, फिलीपींस, जापान, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ‌‌‌आदि देशों के अंदर ‌‌‌बुल की सवारी की जाती है।

बुल राइडिंग की जड़ें मैक्सिकन प्रतियोगिताओं में सीधे तौर पर घुड़सवारी और पशुपालन कौशल से जुड़ी हैं।16वीं शताब्दी के दौरान, जारिपो नामक एक हाईसेंडा प्रतियोगिता विकसित हुई। मूल रूप से बुल फाइटिंग का एक प्रकार माना जाता ।इसके अंदर बैल का सचमुच मौत के घाट उतार दिया जाता था।स्कॉटिश रईस फ्रांसेस एर्स्किन इंगलिस, काल्डेरोन डे ला बार्का के प्रथम मार्क्वेज़ ने 1840 में मेक्सिको में रहते हुए बुल राइडिंग देखी, और इसके बारे में अपनी पुस्तक “लाइफ इन मैक्सिको” (1843) में लिखा ‌‌‌ है।

‌‌‌बुल राइडिंग के अंदर बहुत सारे बैल होते हैं और इसके अंदर हर बैल का एक नाम भी होता है। बैल का चुनाव कई चीजों के आधार पर किया जाता है। प्रदर्शन के लिए पर्याप्त संख्या में सांडों का चयन किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक को अच्छी ताकत, स्वास्थ्य, चपलता और उम्र का माना जाता है। और अब तो बुल पर सवार ‌‌‌ होने वाला खुद के लिए बैल को चुनता है। उसके सामने बहुत सारे बैल को रखा जाता है वह अपनी पसंद के अनुसार बैल को चुनने का काम करता है।

इस प्रतियोगिता के अंदर सबसे पहले सांड एक घोल घेरे के अंदर होता है और जब राइडर उस सांड के उपर सवार हो जाता है तो उसके बाद वह उसकी रस्सी को पकड़ता है फिर सांड को ‌‌‌ बाहर मैदान के अंदर छोड़ दिया जाता है।

 बस उसके बाद क्या है ? सांड उस सवार को गिरने के लिए काफी तेजी से उछल कूद करने का प्रयास करता है। और इस दौरान सवार सांड के उपर कम से कम 8 सेकिंड तक अपनी पकड़ बनाए रखना जरूरी होता है।और अधिक समय तक सांड की सवारी करना काफी कठिन होता है तो सांड उसके बाद ‌‌‌सवार को उपर फेंक देता है। बुलफाइटर्स सवार को नुकसान से बचाने के लिए बैल को विचलित करते हैं।इसके अलावा कई जो प्रतियोगिताएं होती हैं उनके अंदर होता यह है कि सांड को कई सवारों के द्धारा सवारी की जाती है इसका मतलब यह है कि हर रात अलग सवार सांड की सवारी करता है। और उनके अंकों के आधार पर एक विजेता ‌‌‌ को चुन लिया जाता है।

एक रोडियो संगठन के भीतर लगातार स्कोरिंग की जाती है। दो सबसे बड़े मंजूरी देने वाले निकाय पीआरसीए और पीबीआर हैं। वे बैल की सवारी करने के तरीके में थोड़ा भिन्न होते हैं। और इसके अंदर 0 से 100 अंक होते हैं। एक राइडर बैल की सवारी करता है तो उसे 0 से 100 अंक दिये जाते हैं। इस खेल के अंदर बैल को भी अंक ‌‌‌ दिया जाता है कि बैल को किस तरह से राइडर उगसा पाता है। और इसमे चार जज होते हैं। आमतौर पर एक राइडर को अंक तभी मिलता है जब वह सफलता पूर्वक बैल की सवारी करता है। और कम से कम उसे 8 मिनट तक बैल की सवारी करना जरूरी होता है। यदि वह 8 मिनट तक ऐसा नहीं करता है तो फिर उसे कोई अंक नहीं दिया जाता है।

कई अनुभवी पेशेवर 75 या अधिक के स्कोर अर्जित करने में सक्षम हैं। 80 से ऊपर के स्कोर को उत्कृष्ट माना जाता है, और 90 के दशक में एक स्कोर असाधारण माना जाता है।और इस खेल के अंदर जो जज होते हैं वे पूर्व बुल राइडर ही होते हैं। क्योंकि उनको ही इन सब चीजों की ठीक ठीक जानकारी हो सकती है। इस तरह से दोस्तों ‌‌‌ बुलराइडिंग काफी डेंजर खेल होता है जोकि कभी भी हो सकता है। एक तरह से देखा जाए तो बुल राइडिंग काफी कठिन भी होता है। आमतौर पर इसके अंदर यदि सवारी के दौरान कोई बैल बहुत अधिक उग्र हो जाता है तो उस बैल को अलग से अंक दिये जाते हैं। इसका मकसद होता है कि इस तरह के बेल को राइडिंग मे लाना जोकि ‌‌‌ काफी डेंजर होते हैं।

‌‌‌यदि हम बुल राइडिंग के अंदर खतरे की बात करें तो यह काफी डेंजर खेल होता है और बैल आमतौर पर सवारी होने के बाद काफी तेजी से उछलता है और सवार को भी नीचे गिरा देता है। और यह भी हो सकता है कि गुस्से के अंदर बैल सवार को ही मारना शूरू कर सकता है। इस तरह से देखा जाए तो यह काफी डेंजर हो सकता है।

‌‌‌और बुल जो होता है उसके सींग भी काफी डेंजर होते हैं यदि किसी के पेट के अंदर उसे सींग लग जाएं तो उसकी मौत होना तय होता है। इसके अलावा बुल यदि किसी सवार के उपर पैर रखता है तो उसको भयंकर इंजरी का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया के खतरनाक खेल स्ट्रीट ल्युज

स्ट्रीट ल्युज एक बहुत ही डेंजर खेल होता है। इसके अंदर जो सवार होता है वह एक पहिया लगे बोर्ड पर लेटी हुई अवस्था के अंदर होता है। और इसमे बोर्ड की जो गति होती है वह  (70-102 मील प्रति घंटे / 112-164) km / h) तक पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति के अंदर आप समझ सकते हैं कि यदि जरा सी भी ‌‌‌ असावधानी बरती जाती है तो फिर जान का जोखिम हो सकता है। सवार की सुरक्षा करने के लिए उसे हेलिमेंट और विशेष प्रकार के कपड़े पहनाए जाते हैं। इसी तरीके से ‌‌‌सवार को अपने पैर से ही बोर्ड को रोकना होता है।

स्ट्रीट ल्यूज का जन्म दक्षिणी कैलिफोर्निया में डाउनहिल स्केटबोर्डर्स के रूप में हुआ था, उन्होंने पाया कि वे अपने स्केटबोर्ड पर लेटकर तेज गति तक पहुंच सकते हैं। उसके बाद 1975 में, पहली पेशेवर दौड़ सिग्नल हिल, कैलिफोर्निया में आयोजित की गई थी ।

बाइसिकल मोटोक्रॉस (BMX)

बाइसिकल मोटोक्रॉस (BMX)

इस खेल को बाइसिकल मोटोक्रॉस या BMX के नाम से जाना जाता है। BMX एक प्रकार की बाइक होती है जोकि मार्केट के अंदर काफी महंगी मिलती है। एक तरह से देखा जाए तो यह एक रेसिंग बाइक होती है जोकि कई तरह के स्टंट क करने का काम करती है। और यह खेल काफी डेंजर होता है। क्योंकि ‌‌‌इसके अंदर सिर्फ सीधी रोड़ पर ही बाइक को चलाना नहीं होता है । वरन बाइक के रस्ते के अंदर कई तरह की चढ़ाई और गढढे आते हैं जिसके अंदर बाइक उछलती है और फिर चलती है। खेल को देखने वालों को यह किसी विडियो गेम से कम नहीं होता है। लेकिन यह काफी डेंजर होता है। और किसी की भी इसके अंदर आसानी से जान जा ‌‌‌ सकती है।

बीएमएक्स 1970 के दशक में शुरू हुआ जब युवा साइकिल चालकों ने मनोरंजक उद्देश्यों और स्टंटिंग के लिए मोटोक्रॉस ट्रैक्स को विनियोजित किया, अंततः विशेष बीएमएक्स बाइक और प्रतियोगिताओं में विकसित हुआ।

‌‌‌दोस्तों यह जो खेल होता है उसके अंदर एक तरह से बाइक रेसिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। जिसके अंदर होता यह है कि हर इंसान एक दूसरे से आगे जाने की होड़ के अंदर होता है। और इसके लिए वह अपनी बाइक को और तेज चलाता है। आमतौर पर तेज भागती बाइक जब गढ्ढों आदि के अंदर गिरती है तो फिर वह काफी ‌‌‌तेजी से उछलती है। और यदि सही तरीके से उसको मैनेज नहीं किया गया तो उसके बाद सवार गिर सकता है और उसके हाथ पैर टूटने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।

duniya ke sabse khatarnak khel  Rafting

  Rafting

Rafting भी एक प्रकार का डेंजर खेल होता है। जिसके अंदर किसी की भी जान जा सकती है।यह काफी तेज बहने वाले पानी के अंदर खेले जाने वाला एक खेल होता है। इसके अंदर एक नाव जैसी संरचना मे कई लोग एक साथ सवार हो सकते हैं। यह काफी डेंजर हो सकता है। इसके अंदर सिर मे चोट लगना और पैर टूटना और पानी के अंदर डूबना ‌‌‌ जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

यह अक्सर सफेदी या खुरदरे पानी की विभिन्न डिग्री पर किया जाता है। जोखिम से निपटना अक्सर अनुभव का एक हिस्सा होता है।एक साहसिक खेल के रूप में यह गतिविधि 1950 के दशक से लोकप्रिय हो गई है, यदि पहले नहीं तो, 10 फीट (3.0 मीटर) से 14 फीट (4.3 मीटर) राफ्ट में डबल-ब्लेड वाले पैडल या ओअर्स के साथ एकल द्वारा चालित बहु-व्यक्ति राफ्ट ‌‌‌ का उपयोग इसके अंदर हो सकता है।

राफ्टिंग जो खेल होता है वह नदियों के कुछ हिस्सों के अंदर काफी डेंजर माना जाता है। जबकि नदियों के कुछ हिस्सों मे उतना अधिक डेंजर नहीं होता है। वैसे आपको बतादें कि इस खेल के लिए भी एक प्रतियोगिता आयोजित होती है।

  • आधुनिक वाइटवाटर राफ्ट आमतौर पर उन्नत नायलॉन या केवलर से जुड़े प्लास्टिक जैसे पीवीसी या यूरेथेन के साथ बनाए जाते हैं।
  • पैडल स्तरित लकड़ी, प्लास्टिक, एल्यूमीनियम, कार्बन फाइबर, या अन्य उन्नत कंपोजिट का एक संयोजन है। इन सामग्रियों के कई प्रकार और संयोजन हैं, जिनमें निचले स्तर के प्रवेश स्तर के पैडल सस्ते एल्यूमीनियम और प्लास्टिक से बने होते हैं।
  • व्हाइटवाटर राफ्टिंग का पता 1811 में लगाया जा सकता है। वैसे यह जो खेल होता है उसके अंदर आपको अनुभव की आवश्यकता होती है। यदि आपको किसी भी तरह का अनुभव नहीं है तो नदी के अंदर उतरना आपके लिए काफी घातक साबित हो सकता है। इसलिए नदी के अंदर नहीं उतरना चाहिए । केवल अनुभवी लोग ही इस कार्य को कर सकते है।
  • पानी राफ्टिंग के अंदर ग्रेडिंग सिस्टम होता है। इसका मतलब यह होता है कि कम खतरनाक जगह से लेकर डेंजर जगह तक होती है। और अनुभव के आधार पर इसके अंदर राफ्टिंग की जा सकती है।
  • ‌‌‌इसके अंदर कक्षा एक से लेकर कक्षा 6 तक होती हैं और अनुभव के आधार पर नदी के अंदर उतरा जाता है। हालांकि कक्षा 1 के अंदर रफटिंग करना बहुत ही आसान होता है वहीं कक्षा 6 के अंदर रफटिंग करना बहुत ही कठिन कार्य होता है।
  • उचित सावधानियों का उपयोग करते हुए राफ्टिंग यात्रा पर समग्र जोखिम स्तर कम होता है। हर साल हजारों लोग सुरक्षित रूप से राफ्टिंग ट्रिप का आनंद लेते हैं। ‌‌‌वैसे रिसर्च के अंदर पता चला है कि यदि अनुभवी लोग साथ होते हैं तो फिर चोट की दर काफी कम होती है। हालांकि कभी कभी चट्टानों से टकराने की वजह से सामान्य चोटें आ सकती हैं लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है यह आसानी से ठीक भी हो जाती हैं।

Rope Walking

Rope Walking

Rope Walking एक तरह से देखा जाए तो यह सबसे अधिक डेंजर खेल के अंदर आता है। यदि आपने सर्कस देखा है तो उसके अंदर कुछ लोग होते हैं जो अपने हाथ के अंदर बड़ी सी लकड़ी लेते हैं और उसके बाद उस लकड़ी को पकड़ कर किसी रस्सी पर चलते हैं। यह देखकर हमको यही लगता है कि यह किसी भी समय गिर सकते हैं। लेकिन ‌‌‌ वे अपना बैलेंस बनाकर चलते हैं। रियल लाइफ के अंदर यह सर्कस वाले लोग रस्सी की अधिक उंचाई पर नहीं रखते हैं। जिसकी वजह से इनके गिरने के बाद भी मौत की संभावना काफी कम होती है। लेकिन यदि आपने विडियो के अंदर देखा होगा कि कुछ लोग न जाने कितनी उंचाई पर रस्सी को बांधते हैं और उसके बाद उसके उपर ‌‌‌ चलते हैं एक तरह से यह दुनिया का सबसे खतरनाक खेल है। और यदि वे जरा से चूक जाते हैं तो उनकी मौत तय होती है। क्योंकि वे बिना किसी सुरक्षा के उस रस्सी के उपर चल रहे होते हैं।

टाइटवायर दो बिंदुओं के बीच एक तनावग्रस्त तार के साथ चलते हुए संतुलन बनाए रखने का कौशल है। लेकिन वजन को बैलेंस मे रखने के लिए हाथों के अंदर छाता और लकड़ी जैसी चीजों की जरूरत हो सकती है।स्काईवॉक हाईवायर का एक रूप है जो बहुत ऊंचाई और लंबाई में किया जाता है। ऊंची इमारतों, घाटियों, झरनों या अन्य प्राकृतिक और मानव निर्मित संरचनाओं के बीच बाहर एक स्काईवॉक किया जाता है।

  • चार्ल्स ब्लोंडिन , उर्फ जीन-फ्रांस्वा ग्रेवलेट, ने कई बार नियाग्रा फॉल्स को पार किया
  • रॉबर्ट कैडमैन , 18वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश हाईवायर वॉकर और रोपस्लाइडर
  • राफेल ज़ुग्नो ब्रिडी ने जमीन से एक मील से अधिक ऊंचे दो गर्म हवा के गुब्बारों के बीच चलकर, अब तक के सबसे ऊंचे टाइट वॉक का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
  • मौरिज़ियो ज़वट्टा आंखों पर पट्टी को बांध कर रस्सी पर चलते थे जोकि अपने आप मे एक दिलचस्प पहलू है।
  • शिनजियांग से आदिली वूक्सर एक ऐसे इंसान थे जोकि 60 ‌‌‌दिन तक सिर्फ तार पर ही रहे थे ।
  • फ्लाइंग वॉलेंडास के संस्थापक कार्ल वालेंडा की 22 मार्च 1978 को 73 वर्ष की आयु में एक तार से गिरने के बाद मृत्यु हो गई।

Rope Walking एक बहुत ही डेंजर खेल होता है। और यदि इसके अंदर जरा सी असावधानी होती है तो उसके बाद सब कुछ घातक हो सकता है आपको इस बात को अच्छी तरह से समझना होगा । आपको बतादें कि कई लोगों की मौत रस्सी पर चलने की वजह से हो चुकी है। और अधिक उंचाई पर रस्सी पर चलना और अधिक डेंजर हो जाता है। रस्सी से ‌‌‌ गिरने के बाद मौत होना एकदम से तय होता है। बचने के चांस ना के बराबर होते हैं।

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arif khan

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