पसंद और प्यार में क्या अंतर है होते हैं और लव के फैक्टस

‌‌‌आइए बात करते हैं पसंद और प्यार मे अंतर pyar aur pasand me kya antar hai ? पसंद और प्यार में क्या अंतर बहुत से लोग नहीं जानते हैं।दोनो शब्द बोलने मे एक दूसरे के जैसे ही लगते हैं लेकिन दोनो के अंदर काफी अंतर होता है। बहुत जगह पर आप यह बोलते हैं कि अमुक चीज आपको पसंद है जबकि कई बार आप यह भी बोल देते हैं कि आपको उस चीज से प्यार है। आपको यह पता होना चाहिए कि ‌‌‌प्यार शब्द और पसंद शब्द को कभी भी एक परिभाषा के अंदर नहीं बांधा जा सकता है। फिर भी हम यहां पर इनको परिभाषित करने का प्रयास करेंगे ताकि आप प्यार और पसंद मे अंतर आपको अच्छे से समझ मे आ सके ।

Table of Contents

पसंद और प्यार मे अंतर प्यार क्या होता है ?

प्यार का अर्थ है किसी चीज के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव का होना ।

‌‌‌बहुत से लोग चीजों के साथ भावनात्मक रूप से तो जुड़ जाते हैं लेकिन उसके बाद भी वे स्वीकार नहीं करते हैं कि उनको प्यार हो चुका है। असल मे प्यार के स्वीकार करने या ना करने से कुछ नहीं होता है। भावनात्मक जुड़ाव हो गया है तो वह नहीं स्वीकार करोगे तो भी बना रहेगा ।

‌‌‌जैसे यदि आपको एक खरगोश के साथ भावनात्मक जुड़ाव गहरा हो गया तो वह प्यार कहलाता है।आमतौर पर भावनात्मक जुड़ाव होने की स्थिति मे हम उस इंसान या चीज के बिना खुद को अकेला महसूस करते हैं। यही प्यार के अंदर होता है यदि आप किसी लड़की के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो आपके रातों की नींद  ‌‌‌हराम हो जाती है।अब यदि इस जुड़ाव मे भावनाएं निकालदी जाएं तो फिर हम इसको प्यार नहीं कह सकते हैं ,पसंद  कह सकते हैं।

‌‌‌अब यदि हम बात करें स्त्री पुरूष के प्यार की तो उसके अंदर यौन आकर्षण होता है और इसी वजह से इसके अंदर विवेक नहीं होता है। जबकि आम भावनात्मक जुड़ाव के अंदर यौन आकर्षण नहीं होता है।

‌‌‌ प्रेम और पसंद में अंतर पसंद क्या है ?

‌‌‌किसी भी चीज का चुनाव आपकी पंसद होती है। या आकर्षण का होना आपकी पसंद ‌‌‌हो सकता है

‌‌‌जैसे आप किसी दुकान पर गए और वहां पर आपने कई सारे मोबाइल देखे और उसके बाद उनमे से एक मोबाइल आपने पसंद कर लिया । मतलब आपने कुछ विचार करने के बाद उस मोबाइल को चुन लिया तो वह आपकी पसंद है लेकिन यदि आप किसी दुकान पर जाते हैं और बिना चुनाव के मोबाइल चुन लेते हैं तो उसे हम आपकी पसंद नहीं कह सकते हैं।

‌‌‌अब आप यहां पर कह सकते हैं कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका चुनाव संभव नहीं होता है लेकिन उसके बाद भी हम उनको पसंद करते हैं । इसका कारण यह है कि आप उन चीजों की ओर आकर्षित होते हैं और आकर्षण भी पसंद मे बदल सकता है। ‌‌‌जैसे आप अपनी मां का चुनाव नहीं करते हैं। लेकिन उसके बाद आपके घर मे कुछ व्यक्तियों को मां के प्रति आकर्षण होता है मतलब उनसे प्रेम होता है तो उसके अंदर ही तो पसंद निहित होती है।

1.पसंद और प्यार में क्या अंतर है  – ‌‌‌पसंद मे हम भावनात्मक नहीं होते हैं लेकिन प्यार का जुड़ाव गहरा भावनात्मक होता है

दोस्तों आपको बतादें कि पसंद के अंदर हम भावनात्मक नहीं होते हैं। यदि आप चप्पल की जोड़ी बाजार से खरीदने के लिए जाते हो तो ‌‌‌आप अपनी पसंद की चप्पल का चुनाव करने के लिए अपनी भावनात्मकता का इस्तेमाल नहीं करते हैं। जिससे यह साबित हो जाता है कि पसंद भावनात्मक नहीं होती है लेकिन यदि आप अपने किसी लवर के साथ हैं तो आप उसके साथ रहकर अच्छा महसूस कर रहें हैं मतलब आप भावनाओं के अंदर उसके साथ बंधे हुए हैं यही प्यार ‌‌‌है।

‌‌‌2.पसंद को बदलना आसान है प्यार मे ‌‌‌बदलाव करना कठिन होता है

दोस्तों जैसा कि हमने उपर बताया केवल पसंद मे भावनात्मक रिश्ते नहीं होते हैं लेकिन यदि आप प्यार मे आ चुके हैं तो भावनात्मक रिश्ते बन चुके हैं। पंसद को भावनात्मक रिश्ते नहीं होने की वजह से छोड़ना आसान होता है। लेकिन प्यार को ‌‌‌छोड़ना उतना ही कठिन होता है।जैसे आप किसी दुकान से मोबाइल लेने गए वहां पर आपको एक मोबाइल पसंद आ गया लेकिन पैसे नहीं होने के कारण आप नहीं खरीद सके तो आप कुछ ही घंटों बाद आप उसे भूल जाएंगे । अब यदि आप अपनी गर्लफ्रेंड के पास जाते हैं और वह आपको बोलती है कि आप उसके साथ सारे रिश्ते तोड़लें तो ‌‌‌क्या आप यह कर पाएंगे । यकीन से कह सकते हैं कि आप ऐसा नहीं कर पाएंगे क्योंकि प्यार को बदलना कठिन होता है।

‌‌‌3.प्यार एक गहराई है लेकिन पसंद एक सतह है

दोस्तों बात करें प्रेम की तो वह आपके मन के साथ गहरे से जुड़ा होता है। लेकिन पसंद आपके मन के साथ सतह से जुड़ी होती है। आपके मन को वह अधिक प्रभावित नहीं कर पाती है। जैसे यदि आप अपनी पत्नी से प्रेम करते हैं और यदि आपकी पत्नी को बुखार भी हो जाता है तो ‌‌‌आप अंदर तक हिल सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने पड़ोसी को पसंद करते हैं और उसे कुछ हो जाता है तो आपको ज्यादा कुछ प्रभाव नहीं पड़ेगा । मतलब पसंद आपके मन को प्रभावित करने की अधिक क्षमता नहीं रख पाती है।

‌‌‌कभी आपने कुवै की गहराई देखी है आप उस गहराई को प्यार समझ सकते हैं। अब यह गहराई अलग अलग प्यार करने वालों की अलग अलग होती है। लेकिन कुवै की जो सतह होती है वह पसंद की तरह होती है। ‌‌‌जो अपने मन के सतह पर ही होती है।

‌‌‌4.पसंद का संबंध बुद्धि से है लेंकिन प्यार का संबंध विवेकहीनता से है

‌‌‌यदि हम पसंद की बात करें तो उसका सिधा संबंध बुद्धि से होता है।क्योंकि जब भी आप पसंद करते हैं या कुछ आपको अच्छा लगता है तो आप अपने दिमाग का इस्तेमाल अधिक कर सकते हैं। यह आपके दिमाग पर हावी नहीं होती है लेकिन यदि बात करें प्यार की तो प्यार मे पड़ने के बाद कितने लोग हैं जो पूरे होश और ‌‌‌हवाश मे रहते हैं।अधिकतर लोग जो प्यार मे पड़ चुके हैं वे आपको किसी कोने के अंदर बात करते हुए मिलेंगे । उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि वे गंदगी के अंदर खड़े हैं या ट्रेन की पटरी पर ।

‌‌‌पिछले दिनों एक न्यूज मे आई थी कि महिला अपने प्रेमी से बात करने मे इतनी मशगूल हो गई कि छत से पैर फिसल गया और जमीन पर गिरकर मर गई।

‌‌‌5.पसंद का दूसरा रूप नापसंद  है लेकिन प्यार का दूसरा रूप नफरत है

यदि हम पसंद के दूसरे रूप की बात करें तो वह नापसंद होता है। जिसमे हम चीज से किनारा कर लेते हैं और यह बहुत ही सहज तरीके से होता है लेकिन प्यार का दूसरा रूप नफरत मे हम किनारा तो करते हैं लेकिन यह सहज नहीं होता है वरन यह हमारे ‌‌‌दिल और दिमाग को परेशान करके रख देता है।

‌‌‌जैसे आप किसी जगह पर मोबाइल कवर देखने के लिए गए वहां पर आपको कोई कवर आपको पहले पसंद आ गया लेकिन उसके तुरन्त बाद आपने उसी कवर को सहज ही ना पसंद कर दिया ।

 इसी तरीके से यदि आप किसी से प्यार कर बैठे और किसी वजह से वह लड़की बेवफा निकल गई और आपको उससे नफरत हो गई। ऐसी स्थिति मे आप सहज ही उसे ‌‌‌ अपने दिमाग से नहीं निकाल पाएंगे । यह असहज आपको बना देता है। पसंद को छोड़ना आपके लिए सहज है लेकिन प्यार को छोड़ना आपके लिए असहज है।

‌‌‌6.पसंद मे आप विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन प्रेम तो अंधा होता है

यदि आप अपने लिए एक अच्छी घड़ी खरीदने जा रहे हो और आपने वहां पर बहुत सारी घड़ियां देखी तो आप अपनी समझ के अनुसार कोई भी घड़ी खरीद सकते हैं मतलब सीधा है कि आप अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ‌‌‌लेकिन प्यार के मामले मे यह बात लागू नहीं होती है। आप किसी से प्यार करने लगते हैं तो उसमे विवेक का इस्तेमाल करना भूल जाते हैं।

जैसे आपने किसी लड़की को विवेक का इस्तेमाल करके पसंद कर लिया लेकिन उसके बाद आपकी पसंद प्यार मे बदल गई और उसके बाद आप उसके हजारों खून माफ करते चले जाएंगे । तभी ‌‌‌तो कहा है कि प्यार अंधा होता है।आपने देखा होगा कि एक खूबसूरत लड़की एक बदसूरत लड़के से प्यार कर बैठती है यह विवेक से नहीं होता है बस हो जाता है।

‌‌‌7.हर प्यार मे पसंद है लेकिन हर पसंद मे प्यार हो यह आवश्यक नहीं है

क्या आपने ऐसा प्यार देखा है जिसमे पसंद ही नहीं हो ?मतलब हर प्यार के अंदर पसंद होती है लेकिन हर पसंद मे प्यार नहीं होता है। आप सब्जी खाना पसंद करते हैं लेकिन क्या आप उस सब्जी से प्यार करते हैं ? आप जलेबी खाना पसंद करते ‌‌‌हैं

लेकिन क्या आप उन जलेबी से प्यार करते हैं तो कहने का मतलब यह है कि पसंद मे प्यार नहीं होता है। पसंद का प्यार के बिना रहना संभव है लेकिन प्यार का पसंद के बिना रहना असंभव है। प्यार बनता ही पसंद से मिलकर । पसंद प्यार की ईंट है तो प्यार इस ईंट से बना हुआ मकान है। यदि आप इस ईंट को ‌‌‌निकाल देते हैं तो क्या प्यार बच पाएगा ।

‌‌‌8.पसंद तेजी से बदल सकती हैं लेकिन प्यार मे बदलाव तेजी से नहीं होता है

दोस्तों इंसान की पसंदों मे बदलाव तेजी से होता है। वे अधिक समय तक स्थाई रहें यह कोई आवश्यक नहीं होता है लेकिन प्रेम मे बदलाव तेजी नहीं होता है ।

 आज भी बहुत सारे पति और पत्नी हैं जो शादी के 20 से 30 साल बीत जाने के बाद ‌‌‌एक दूसरे से बहुत अधिक प्यार करते हैं लेकिन इस दौरान उनकी पसंद और ना पसंद बहुत अधिक बार बदल गई लेकिन प्यार अभी भी कायम है। ‌‌‌इसी तरीके से मैं बहुत से ऐसे लोगों को भी जानता हूं जो पिछले 10 सालों से एक कुत्ते से गहरा प्रेम कर रहे हैं। जबकि उन्होंने बहुत सी पसंदिदा चीजों को छोड़ दिया है।

‌‌‌9.प्यार आपके अंदर तड़प पैदा कर सकता है लेकिन पसंद नहीं कर सकती

प्यार आपको बैचेन बना सकता है लेकिन आपकी पसंद ऐसा करने की क्षमता नहीं रखती है। जैसे कि आपको मिठाई खानी है जो आपको पसंद है बस । तो वह आपके अंदर तड़प पैदा नहीं कर सकती है।

 आप बस उसके बाद मे थोड़ा सोच सकते हैं। ‌‌‌उसके साथ आपका गहरा भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता है लेकिन यदि आप किसी लड़की के साथ प्रेम करते हैं और वह लड़की आपके साथ धोखा करे तो आपको तड़प होगी । और हो सकता है यह आपके लिए समस्या बन जाए ।

‌‌‌10.प्यार मे यौन आकर्षण होता है लेकिन पसंद मे यह नहीं होता है

पति पत्नी के प्यार के अंदर यौन आकर्षण भी होता है। बल्कि कुछ का रिश्ता तो केवल यौन आकर्षण पर ही टिका होता है। और इसका परिणाम आपको शादी के काफी साल बाद देखने को मिलता है।‌‌‌

जब यौन आकर्षण खत्म हो जाता है तो फिर दोनों के बीच झगड़ होने लग जाते हैं और प्यार होने की बजाय तलाक तक बात  पहुंच जाती है। और यदि हम बात करें पसंद की तो इसके अंदर यौन आकर्षण नहीं होता है । क्या एक मोबाइल खरीदने के पीछे यौन आकर्षण काम करता है ? सच मायने मे पसंद का यौन आकर्षण से सीधा संबंध हो यह ‌‌‌आवश्यक नहीं है।

‌‌‌11.प्यार मे समय का पता नहीं चलता है लेकिन पसंद मे सयम का आपको एहसास होता है

जब आप अपने प्यारे काम के साथ बैठे होते हैं तो आपको यह पता नहीं चलता है कि कैसे तेजी से समय निकल गया । यदि आपने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बात करते हैं तो आपका पता ही नहीं चलता है कि कब समय बीत जाता है।‌‌‌जब मैं और मेरी वाइफ की शादी होने वाली थी तो हम लोग देर रात तक बात करते थे और ऐसे ही 3 बज जाते थे । यही तो प्यार था।

‌‌‌लेकिन पसंद के साथ आप अपना समय अधिक देर तक नहीं गुजार सकते हैं। यदि आपको कोई गाना सुनना पसंद है तो आप कुछ समय उसके साथ गुजार सकते हैं लेकिन अधिक समय तक आप नहीं रह पाएंगे ।

‌‌‌12.पसंद आनन्द है तो प्यार गहन आनन्द है

पंसद आपको केवल आनन्द दे सकता है लेकिन आपको यह गहन आनन्द नहीं दे सकता है। यदि आपको गहन आनन्द चाहिए तो प्यार मे जाना होगा । प्यार के अंदर आपको पसंद से भी अधिक आनन्द मिल सकता है।

‌‌‌13.पसंद कई हो सकती हैं लेकिन प्यार आपको सीमित चीजों से होता है

दोस्तों यदि संख्या के आधार पर आप देखें तो पसंद कई सारी हो सकती हैं जैसे खाने के अंदर अलग पसंद। पहनने के अंदर अलग पसंद बोलने मे अलग पसंद लेकिन यदि बात करें प्यार की तो आपके पास प्यार की संख्या बहुत ही कम होती है जिसको आप ‌‌‌आसानी से गिन सकते हैं।इसका अर्थ यह है कि आपकी पसंद व्यापक होती हैं लेकिन यदि प्यार की बात करें तो बस आप सीमित चीजों से प्यार कर पाते हैं।

‌‌‌पसंद कितने प्रकार की होती है ?

दोस्तों पंसद को अलग अलग प्रकारों के अंदर अलग अलग आधारों से बांट सकते हैं। हमने यहां पर पसंद को मुख्य रूप से 3 प्रकारों के अंदर बांटा है। ताकि आपको समझने मे आसानी होगी ।

‌‌‌गुणात्मक पसंद

गुणात्मक पसंद वे होती हैं ,जो गुण की वजह से अस्तित्व मे आती हैं जैसे आप किसी दुकान पर कपड़े खरीदने के लिए गए और वहां पर आपने अच्छा कपड़ा देखा और आपको वह पसंद आ गया यह आपकी गुणात्मक पसंद होती है। मतलब आप गुण को देखकर उसे पसंद कर रहे हैं। ‌‌‌इसी प्रकार से आप किसी लड़की को देखते हैं और उसकी सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं तो यह भी आपकी एक गुणात्मक पसंद हो सकती है।‌‌‌गुणात्मक पसंद की सबसे बड़ी बात यह होती है कि यह गुण के आधार काम करती है। गुण खत्म हुआ पसंद खत्म हुई ।

‌‌‌आकर्षणात्मक पसंद या भावनात्मक पसंद

दोस्तों कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं जिनके साथ रहते हुए या अनजाने रूप से आप आप उस चीज से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं । यही भावनात्मक पसंद होती है। यह इंसान के स्वाभाव की वजह से पैदा होती है।‌‌‌जैसे अब्दुल का पिता एक कुत्ते को घर लेकर आया । वैसे अब्दुल को कुत्ता कुछ खास नहीं लगता था लेकिन कुत्ते के पास रहते रहते उसे उस कुत्ते से लगाव हो गया या उसके साथ उसका भावनात्मक संबंध स्थापित हो गया ।‌‌‌इसी वजह से वह उस कुत्ते को पसंद करने लगा तो यही भावनात्मक पसंद है।

‌‌‌संयुक्त पसंद

दोस्तों संयुक्त पसंद का मतलब होता है कि जिसके साथ आपके भावनात्मक और गुणात्मक जुड़ाव दोनो हो जाते हैं तो उसे संयुक्त पसंद कहा जाता है। जैसे आप किसी दुकान से कुछ खरीद कर लाये तो खरीदते समय आपका उस वस्तु के साथ कोई ‌‌‌भावनात्मक जुड़ाव नहीं था लेकिन खरीदने के बाद आप उसके साथ जुड़ गए और वह आपको भावनात्मक रूप से अच्छी लगने लगी ।

‌‌‌प्यार से जुडे मजेदार तथ्य

आपको यह पता होना चाहिए कि एक रिश्ता अपने पतन के साथ आता है। एक रिश्ता आपके जीवन के अंदर बहुत अधिक फायदेमंद होता है। यह आपकी मानसिक संरचना मे बहुत अधिक सुधार करता है। और आपको तनाव से बचाने का काम करता है।‌‌‌यहां पर हम प्रेम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य दे रहे हैं।

‌‌‌प्रेम एक ड्रग्स के जैसा होता है

द जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार जब आप प्यार मे पड़ जाते हैं तो आपको एक नशे के जैसा अनुभव होता है। डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन आपके शरीर के अंदर ड्रग्स के जैसा प्रभाव पैदा कर देते हैं।‌‌‌और यह बात सच भी है आपने देखा होगा कि प्रेमी जोड़ों को कुछ होश भी नहीं होता है वे हर कहीं पर शूरू हो जाते हैं।

‌‌‌यदि मोबाइल की बात करें तो प्रेमी जोड़ों का फोन सबसे अधिक चलता है। वह पूरे दिन और रात तक चलता रहता है।

‌‌‌आपने प्रेमी को गले लगाना तनाव को कम करता है

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के मनोचिकित्सकों ने एक रिसर्च किया और इसके अंदर उन व्यक्तियों को शामिल किया गया जिनके अंदर तनाव का स्तर मौजूद था। और इनको गले लगाने से पहले ऑक्सीटोसिन के स्तर को चैक किया गया और गले लगाने के बाद चैक किया गया तो ऑक्सीटोसिन के स्तर मे बदलाव आया ।

ऑक्सीटोसिन का स्तर इस दौरान बढ़ गया था । जो इस तनाव को कम करता है। तो यदि आपको अगली बार तनाव हो तो आप अपने प्रेमी के साथ गले मिल सकते हैं।यह आपके तनाव को दूर करने मे राहत प्रदान करेगा ।

‌‌‌खुश इंसान स्वस्थ दिल

यदि आपका रिश्ता प्यार भरा है तो यह आपके मानसिक और शारिरिक दोनों के लिए बेहतर होता है।3.5 मिलियन से अधिक लोगों का मेटा विश्लेषण किया गया । जिसके अंदर यह  पता चला कि जो व्यक्ति विवाहित थे और खुश थे उनमे दिल की समस्या उन व्यक्तियों की तुलना मे 12  ‌‌‌प्रतिशत कम थी जो एकल रह रहे थे या जिनका तलाक हो चुका था।

‌‌‌जानवर भी मनुष्य की तरह एक साथी से प्यार करना पसंद करते हैं

केवल मनुष्य भी नहीं है।जो एकल साथी के साथ रहता है। वरन बहुत सारे जानवर ऐसे हैं जो एकल रिश्ते मे रहना पसंद करते हैं। जैसे ऊदबिलाव, भेड़िये, समुद्री घोड़े, और खलिहान उल्लू ऐसी कुछ प्रजातियाँ हैं।

‌‌‌दिल के जोड़े की धड़कन समन्वयित होती है

जब आप अपने प्रेमी के गले मिलकर उसके आंखों मे झांकेत हैं तो इसके उपर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस के वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार आपके दिल की धड़कन समन्वयित हो जाती है। इस संबध मे 32 विषमलैंगिक जोड़ों का विश्लेषण किया और 3 मिनट तक उन्होंने एक दूसरे ‌‌‌का सामना किया ।इस दौरान उनकी हर्ट की गति सामान्य थी और भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तरों पर भागीदारों के बीच मजबूत संबंध के कारण हुआ।

‌‌‌अमेरिका मे   प्रेम विवाह का कारण सिर्फ प्रेम होना है

प्यू रिसर्च सेंटर के 2013 मे अमेरिका के अंदर एक सर्वेक्षण किया गया जिसमे 10 मे से 9 व्यक्तियों ने कहा कि प्रेम विवाह करने का प्रमुख कारण प्यार मे पड़ना है। लेकिन केवल 28 प्रतिशत व्यक्तियों ने कहा कि यह वितिय स्थिरता के लिए ‌‌‌उपयोगी होता है।

पुनर्विवाह सबसे अधिक लोकप्रिय

भारत मे कभी एक जमाना था जब एक बार महिलाएं विधवा हो जाने के बाद पुनर्विवाह नहीं करती थी ।लेकिन अब भारत मे भी पुनर्विवाह काफी लोकप्रिय हो चुका है। यदि बात करें विदेशों की तो यहां पर तो पुनर्विवाह सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जब साथी से मन ‌‌‌भर जाता है तो उसके बाद यहां पर लोग दूसरा विवाह कर लेते हैं। यहां पर यह कोई नई बात नहीं है लेकिन भारत मे अभी यह मामले बड़े शहरों मे अधिक देखने को मिलते हैं।

‌‌‌प्यार एक नशे की लत है

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि प्यार एक नशे की लत कैसे है ? लेकिन असल मे यही सच्चाई है कि प्यार एक नशे की लत की तरह होता है। जब आप प्यार मे होते हैं तो आपके अंदर से कुछ ऐसे हार्मोन रिलिज होते हैं जो बहुत ही व्यग्र होते हैं और आपको इसका आदी बना देते हैं। ‌‌‌भारत के अंदर तो इस संबंध मे एक पुरानी कहावत है कि शराब और शबाब के अंदर बहुत से लोगों को बरबाद होते हुए देखा है। यह बात सच ही है प्यार एक लत है।

लव हार्मोन आपको खुशी प्रदान करता है

जब आप अपने साथी को किस करते हैं या उसको पुचकारते हैं तो आप एक हार्मोन ऑक्सीटोसिन को ट्रिगर करते हैं जो आपके मूड को अच्छा बनाने का काम करता है। यदि आपका मूड खराब है तो आप कुछ समय कें लिए अपने साथ के पा स जाएं और उनसे प्यार भरी बातें करेंगें तो आपको अलग ही ‌‌‌एहसास होगा

‌‌‌पुराने दर्द को कम कर सकता है प्रेम

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्यार आपके दर्द को कम कर सकता है। हालांकि यह अभी चिकित्सा की जगह नहीं लेने वाला है लेकिन नए रिसर्च मे यह बात प्रमाणित की जा चुकी है।स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के अंदर हुए रिसर्च के अनुसार जब आपको शरीर मे कहीं पर दर्द रहता है या वह अधिक परेशान करता है तो आप कुछ समय के लिए अपने साथी के साथ आलिंगन कर सकते हैं। ऐसा करने का फायदा यह है कि यह दर्द के एहसास को कम करता है।

‌‌‌निराशावादी लोगों के लिए बेहतर है प्यार

जो लोग निराशावादी होते हैं उनके लिए प्यार बेहतर होता है।नौ महीने तक 245 युवा जोड़ों कि उपर रिसर्च किया गया । परिणाम के अंदर यह देखा गया कि जो लोग  अपने प्रेमी के साथ थे वे अधिक आशावादी थे और सकारात्मक भावनाओं से भरे हुए थे ।‌‌‌इसका अर्थ यह है कि जो लोग प्रेम विहिन की स्थिति के अंदर रहते हैं जल्दी ही उनको निराशा घेर लेती है और उनके मन पर नकारात्मक विचार हावी होने लग जाते हैं।

‌‌‌ईमानदारी प्यार के रिश्ते को स्थाई बनाती है

यदि आप अपने रिश्ते के अंदर ईमानदार होते हैं तो आपका रिश्ता लंबे समय तक चलता है।पर्सनल रिलेशनशिप के अंदर छपे एक रिसर्च के अनुसार जो जोड़े अपने रिश्ते के अंदर ईमानदारी रखते हैं उनका रिश्ता सबसे अधिक लंबे समय तक चलता है।‌‌‌मतलब कि आपको प्रेम मे भी ईमानदारी बनाए रखने की आवश्यकता होगी ।वरना आपका रिश्ता टूट जाएगा । आज कल तो वैसे भी ईमानदारी की बहुत अधिक कमी है।

‌‌‌प्यार मे दूरी बनाए रखना रिश्ते को बनाए रखता है

दोस्तों प्यार के अंदर दूरियां किसी को पसंद नहीं होती हैं। हर इंसान अपने प्रेमी के पास आना चाहता है लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च यह बताते हैं कि प्यार मे दूरियां होना बहुत आवश्यक होता है।

जर्नल के अंदर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार रिश्तों के अंदर दूरियां ना केवल रिश्ते को लंबे समय तक टिका कर रखती हैं वरन उनके अंदर विश्वास भी बनाएं रखते हैं। और आपने भी इस बात का अनुभव किया होगा कि जब हम अपने प्रेमिका या प्रेमी से दूर होते हैं तो अचानक से हमारे अंदर उसके प्रति प्रेम बढ़ जाता  ‌ है।

‌‌‌प्यार आपके सिर दर्द को कम करता है।

दोस्तों यदि आप प्यार मे होते हैं तो आपका सिरदर्द आधा हो जाता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में हुए रिसर्च मे जब ऑक्सीटोसिन की खुराक दी गई तो उनके सिर दर्द के अंदर 50 प्रतिशत तक कमी देखी गई ।जबकी 27 प्रतिशत लोगों ने यह रिपोर्ट किया कि ‌‌‌उनको सिर दर्द बिल्कुल भी नहीं हुआ ।

‌‌‌लोग सबसे अधिक यात्रा मे अपने प्यार से मिलते हैं

यदि पूछेंगे कि अपने पहले प्यार का मिलन कहां पर हुआ है तो अधिकतर लोग यही कहेंगे कि पहले प्यार का मिलन यात्राओं के दौरान हुआ था। और यही बात सच ही है।एचएसबीसी ने 50 हजार लोगों पर सर्वेक्षण किया जिसमे से पाय की हर 50 यात्री मे से एक को ‌‌‌अपना प्यार यात्रा के अंदर ही मिलता है।

‌‌‌पुरूष जल्दी प्यार मे पड़ जाते हैं

दोस्तों यह बात सच है कि पुरूष महिलाओं की तुलना मे जल्दी से प्यार मे पड़ जाते हैं। पुरूषों का स्वाभाव ही ऐसा होता है। गली चौराहे पर लड़कियों को इम्प्रेस करने वाले बहुत सारे मर्द मिल जाएंगे । लेकिन लड़कियों के मामलों मे यह बात लागू नहीं होती है।द जर्नल ऑफ सोशल साइकोलॉजी  के अंदर हुए रिसर्च मे यह पता चला है कि पुरूष जल्दी प्यार मे पड़ते हैं। जबकि महिलाएं सोच समझ कर प्यार मे पड़ती हैं क्योंकि वे नहीं चाहती है कि कोई बाद मे उनका दिल तोड़दे ।

‌‌‌जब प्यार मे होते हैं तो कम बार डॉक्टर के पास जाते हैं

आपको यह अध्ययन चौका सकता है लेकिन यह बात सच है । जब आप प्यार मे होते हैं तो आपको डॉक्टर के कम दौरे करने पड़ते हैं हालांकि इसके पीछे का कारण शायद यह हो सकता है कि आप एक दूसरे की परवाह करते हैं और अच्छे से ख्याल रखते हैं और भावनात्मक ‌‌‌रूप से काफी मजबूत होते हैं।

‌‌‌प्यार आपको तेजी से ठीक करता है

यदि आप बीमार हैं और या घायल हैं तो प्यार आपको तेजी से ठीक होने मे मदद करता  है।ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के अंदर कुछ जोड़ों पर प्रयोग किया गया जिसमे यह पाया गया की प्यार के अंदर उन जोड़ों के घाव दूसरे आम इंसानों की तुलना मे काफी तेजी से ठीक हो रहे थे।

‌‌‌प्यार रक्तचाप को कम करने का काम करता है

रक्तचाप को कम करने के लिए साथी का प्यार काफी उपयोगी होता है।एनेल्स ऑफ बिहेवियरल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात सिद्ध हो चुकी है। यदि आपका रक्तचाप अधिक रहता है तो आपको अपने साथी के साथ नजदिकियां बढ़ानी चाहिए ।‌‌‌आप खुद इसके असर को देख सकते हैं।

‌‌‌आपका प्यार कई चरणों मे विकसित होता है

प्यार के साथ एकाएक ऐसा नहीं होता है कि आपने किसी को देखा और प्यार हो गया । असल मे प्यार चरणों के अंदर पूरी तरह से विकसित होता है। जब आप किसी के साथ जैसे जैसे जुड़ते जाते हैं आपका प्यार गहरा होता चला जाता है।हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने तो प्यार की गहराई से जांच की है । उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्यार धीरे धीरे परिपक्वता की ओर जाता है।

गंध का भी प्यार मे अधिक महत्व होता है

भले ही आज हम इंसान बदल चुके हैं । और गंध जैसी चीजों का उतना अधिक महत्व नहीं रहा है लेकिन आज भी वैज्ञानिक यह मानते हैं कि फेरोमोन का भी प्यार मे उतना ही योगदान होता है जितना की द्रश्यों का होता है।‌‌‌जिसका सीधा सा अर्थ यह है कि हम आज भी गंध से जुड़ें हैं। इस संबंध मे एक रिसर्च मे महिलाओं को उनके पतियों की गंध वाली शर्ट पहचानने के लिए कहा गया था । तो हैरानी की बात यह थी कि वे केवल सूंघ कर अपने पतियों की शर्ट को पहचान गई। जबकि उनकी आंखों को बंद रखा गया । लेकिन पुरूष इस मामले मे अधिक ‌‌‌सफल नहीं हो पाए।

‌‌‌ Difference Between Love And Like प्यार आपको पागल बना देता है

आपने एक वर्ड सुना ही होगा कि प्यार अंधा होता है तो यह पागल भी होता है।भारत के अंदर रोज ऐसी घटनाएं होती रहती हैं कि कभी प्रेमी युगल पेड़ पर लटक कर सुसाईड कर लेते हैं। या ट्रेन के आगे कट जाते हैं। ‌‌‌प्यार आपके विवेक को छीन लेता है और उसके बाद सही और गलत जैसी चीजें आपको दिखाई नहीं देती हैं। सब कुछ अपने आप ही हो जाता है।

‌‌‌प्यार आपको लंबे समय तक जीने मे मदद कर सकता है

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब आप प्यार मे रहते हैं तो आपका जीवन लंबा चल सकता है और आप एक लंबा जीवन जी सकते हैं।जर्नल ऑफ मैरेज एंड फैमिली रसर्च के अनुसार प्यार करने वाले कपल्स आम कपल्स की तुलना मे लंबा जीवन जीते हैं। यह काफी मजेदार है।

‌‌‌लाल गुलाब के फुलों को प्यार के फूल कहते हैं

दोस्तों यदि हम प्यार की बात करते हैं तो हमारे सामने लाल गूलाब के फूल आ जाते हैं। लाल गूलाब के फूलों को प्यार का प्रतीक माना जाता है।क्योंकि चमकीले फूल प्यार की रोमन देवी वीनस के आधिकारिक पसंदीदा हैं।

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पसंद और प्यार में क्या अंतर है ? लेख के अंदर हमने प्यार और पसंद के बारे मे विस्तार से जाना । इनके अलावा हमने प्यार के बारे मे कुछ मजेदार तथ्यों के बारें मे भी चर्चा की । हमे यकीन है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा । यदि आपका इस लेख के बारे मे कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट कर सकते हैं।

This post was last modified on July 11, 2020

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