हिममानव क्या है ? हिममानव का रहस्य, हिममानव yeti का सच क्या है ?

‌‌‌इस लेख के अंदर हम आपको हिममानव का रहस्य और हिममानव क्या है और इसके बारे मे विस्तार से बताएंगे ।

हिम मानव जिसको येति भी कहा जाता है। का नाम आपने भी सुना होगा । और आप इसके बारे मे यह भी जानते होंगे । कि हिममानव होता है। जिसके पूरे शरीर पर बाल होते हैं। और वह इंसानों के जैसे चलता है।

हिममानव का रहस्य-yeti
हिममानव भागते हुए काल्पनिक चित्र

उसके दो हाथ और दो पैर भी होते हैं। लेकिन हिममानव आकार के अंदर इंसानों से काफी ‌‌‌बड़ा  होता है। अबोमिनेबल स्नोमैन या हिममानव एक ऐसा जीव होता है। जो कि हिमालय और तिब्बती क्षेत्रों के अंदर निवास करता है।वैसे देखा जाए तो यह एक कहानी के रूप मे मौजूद है। और इतिहास के अंदर अनेक कहानियों मे हिममानव का उल्लेख मिलता है।

‌‌‌ ‌‌‌हिममानव का रहस्य पहली बार कब हुई हिममानव की खोज

सन 1921  तक हिममानव होने की कोई जानकारी नहीं थी । लेकिन इसी साल को लेफ्टिनेंट कर्नल चार्ल्स हॉवर्ड-बरी ने ऐवरेस्ट अभियान के दौरान इसकी खोज की थी ।इस संबंध मे माउंट एवरेस्ट द रिकॉनिसन्स, 1921 किताब मे उल्लेख मिलता है। 21,000 फीट की उंचाई पर जब वे थे तो उनको ऐसे पदचिन्ह मिले जो किसी लम्बी डग भरने वाले इंसान के थे । उसके बाद देखा कि यह एक नंगे पंगों के निशान थे । जो देखने मे इंसान के पैरों के निशानों से मिलते थे । लेकिन यह उनसे बड़े थे ।

उनके शेरपा ने उनको बताया कि यह निशान जरूर किसी बर्फिले मानव के हैं। जिसको उन्होंने

“मेतोह-कांगमी” नाम दिया गया जिसका अर्थ होता है। हिममानव । वैसे विकीपिडिया पर और भी बहुत कुछ दिया गया है। लेकिन हमे लगता है। उन चीजों का यहां पर उल्लेख करना आवश्यक नहीं है।

‌‌‌ ‌‌‌हिममानव का रहस्य हिममानव का इतिहास

एक नजर हम हिममानव के इतिहास पर भी डाल लेते हैं। किस सदी के अंदर हिममानव को देखने की घटनाएं क्या हुई थी । वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया आदि के बारे मे विस्तार से जानते हैं।

‌‌‌हिममानव का इतिहास 19वीं सदी

1832 में, जेम्स प्रिन्सेप के जर्नल ऑफ़ द एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल ने पर्वतारोही बी.एच. हॉजसन व उनके पथ दर्शकों ने एक ऐसे प्राणी को देखा जो दो पैरों पर चल रहा था और डर की वजह से भाग रहा था । जिसको देखकर यही अनुमान लगाया गया कि वह हिममानव था।yeti in real

रिकॉर्ड 1889 में लॉरेंस वाडेल ने भी एक ऐसे प्राणी होने का दावा किया जो इंसानों के जैसे चलता था । और उसके पूरे शरीर पर बाल थे । हालांकि इस संबंध मे वह कोई सबूत को पेश करने मे असमर्थ रहा । कुछ समय पहले तक तो वह उसे भालू समझ रहा था । लेकिन बाद मे पता चला कि वह एक हिममानव था।

20वीं सदी और हिममानव

20वीं सदी के आने के बाद हिममावन की खोज मे कई लोगों ने दिलचस्पी लेनी शूरू करदी थी । और अनेक दावे भी किये गए ।सन् 1925 में एन. ए. टोम्बाज़ी, जो एक फोटोग्राफर था । उसने  ज़ेमू ग्लेशियर के पास लगभग 15,000 फीट की उंचाई पर एक ऐसा प्राणी देखने का दावा किया जो ‌‌‌बिल्कुल इंसान के जैसा था । उसका पूरा शरीर बालों से ढ़का हुआ था । और वह आकार मे इंसान से काफी बड़ा था ।वह सीधे चल रहा था और बीच बीच मे रूक भी रहा था । हिममानव चले जाने के बाद उन लोगों ने उसके पद चिन्ह को देखा जो  छः से सात इंच लम्बे और चार इंच तक चौड़े थे।

1951 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास करते समय एरिक शिप्टन ने सागर तल से लगभग 6,000 मीटर पर अनेक ऐसे पदचिन्हों के निशानों की तस्वीरें ली जो देखने मे बिल्कुल हिममानव की तरह ही लग रहे थे । यह तस्वीरे हमेशा ही बहस का हिस्सा रही । कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह मानव के पैरों के निशान हैं । ‌‌‌जो बर्फ पड़ने से विक्रत हो गए थे ।

1953 में सर एडमंड हिलेरी और तेनज़िंग नोर्गे ने ऐवरेस्ट पर चढ़ने के दौरान बड़े बड़े पदचिन्हों के होने की खबर दी और यह दावा किया गया कि यह हिममानव के हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने खुद हिममानव को कभी नहीं देखा था । बाद मे वे खुद इसके अस्तित्व को लेकर उलझन मे पड़गए थे ।

1954 मे अपर्वतारोहण नेता जॉन एंजेलो जैक्सन ने एवरेस्ट से कंचनजुंगा तक पैदल यात्रा की और  तेंगबोचे गोम्पा  के अंदर उन्होंने येति के पैरों के निशानों की अनेक तस्वीरे लीं । जिनमेसे अधिकांश पहचानी जा सकने योग्य थी । और कुछ तस्वीरें ऐसी भी थी जो विक्रत हो चुकी थी । मतलब येति के पद चिन्ह पहचान ‌‌‌जाने योग्य नहीं थे । क्योंकि धूल और मिटटी की वजह से उन पदचिन्हों का आकार बिगड़ चुका था।

19 मार्च 1954 को डेली मेल के अंदर छपी एक खबर के अनुसार हिममानव के बालों का एक गुच्छा मिला था । और उसका वैज्ञानिक विश्लेषण भी किया गया था । लेकिन इस बारे मे वैज्ञानिक  फ्रेडरिक वूड जोन्स सही सही पता नहीं लगा सके । उनका मानना था कि यह बाल किसी प्राणी के गर्दन के बाल हैं। यह हिममानुष के बाल ‌‌‌नहीं थे ।1937_yeti_footprints

स्लावोमिर राविक्ज़ ने 1956 मे प्रकाशित पुस्तक द लाँग वॉक में  मे यह दावा किया गया कि जब वे 1940 के अंदर हिमालय पार कर रहे थे । तो उनके मार्ग को कई घंटों तक येती ने अवरूद्व किया था । हालांकि इस किताब को पूरी तरह से सच नहीं माना जाता।

1970 में ब्रिटिश पर्वतारोही डॉन ह्विलंस ने अन्नपूर्णा पर चढ़ते समय अजीब सी आवाजे सुनी । जिसको उसके शेरपा ने येति की आवाज बताया । इसके अलावा उन्होंने अगले दिन येति के पदचिन्हों को देखा । और जब वे दूरबीन से इधर उधर देख रहे थे तो येति को देखा जो पास ही भोजन की तलास मे था।

‌‌‌हिममानव का रहस्य 21वीं सदी

वर्ष 2007 के अंदर अमेरिकी tv प्रस्तुत करता जोशुआ गेट्स ने नेपाल के ऐवरेस्ट क्षेत्र के अंदर कुछ ऐसे पदचिन्ह होने की सूचना दी जो हू बहू हिममानव के लगते थे । उसके बाद इन पदचिन्हों का अध्ययन  इडाहो स्टेट यूनिवर्सिटी के जेफ्रे मेल्ड्रम ने किया। जेफ्रे मेल्ड्रम ने यह दावा किया कि यह पदचिन्ह किसी मानव के बनाए नहीं हो सकते । वरन यह किसी ना किसी हिममानव के ही हैं। उसके बाद नेपाल के अंदर ही एक जगह पर बाल मिले । जिनको वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए ले आए । जिनका विषलेश्ण करने के बाद यह साबित हो गया कि यह किसी हिममानव के ही थे ।

25 जुलाई 2008 के अंदर कुछ ऐसे बाल भी मिले थे । जिसके सबंध मे यह कहा जा रहा था कि यह हिममानव के हो सकते हैं।ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड ब्रूकेस विश्वविद्यालय ने इन बालों का विश्लेषण किया तो पता चला की यह बाल हिममानव के नहीं थे । वरन हिमालय के अंदर रहने वाले अन्य जीव हिमालयन गोरल के थे ।

20 अक्टूबर 2008 के अंदर कुछ जापानी लोगों ने भी येति के पदचिन्हों की तस्वीर ली थी । सन 2003 के अंदर इन लोगों ने येति को देखे जाने के दावे भी किये थे ।

‌‌‌क्या हिममानव वास्तव मे होता है ?

लेख के अंत मे हम इस प्रश्न पर विस्तार से चर्चा करेंगे । बहुत से लोगों को आज भी लगता है कि हममानव का रहस्य आज भी मौजूद है। और हिमालय की बर्फिली पहाड़ियों के अंदर इंसान के जैसा हिममानव रहता है। लेकिन क्या यह सच है? इस सबंध मे हम बात करते हैं।

‌‌‌आप येति के बारे मे कहानियों और फिल्मों के अंदर पढ़ते और देखते हैं कि येति एक विशाल शरीर वाला होता है। जिसको बर्फिले स्थानों पर घूमते हुए चित्रित किया जाता है। बिगफुट  और यति का गहरा कनेक्सन रहा है। अनेक समुदायों के अंदर यति की कहानियों को बताया जाता है। जिनमे यह माना जाता है कि ‌‌‌येति  12,000 फीट की औसत ऊंचाई पर रहते हैं। अनेक कहानियों के अंदर येति का उल्लेख मिलता है। यह कहानियां पूरी तरह से काल्पनिक हैं। इनके सच होने का कोई आधार भी नहीं है।

शिव ढकल ने अपनी एक किताब के अंदर 12 येति की कहानियों का उल्लेख किया है। जो स्थानिय लोगों के अंदर प्रचलित हैं। एक कहानी मे तो येति को बलात्कार करते हुए भी दिखाया गया है। ‌‌‌वैसे इन कहानियों की बात करें तो यह सभी कहानियां सिर्फ प्रेरक और सब देने के लिए लिखी गई हैं।

और जंगली जानवरों की चेतावनी भी देती हैं।  जिसकी वजह से बच्चे अपने झुंड के अंदर रहें और दूर न जाएं । कुछ लोग तो इतना तक कह रहे हैं कि येति जैसी कोई चीज नहीं होती है। येति सिर्फ एक डर है ‌‌‌जो लोगों के दिमाग के अंदर बैठ गया है। ‌‌‌लेकिन जब पश्चिमी पर्वतारोहियों ने हिमालय की यात्रा शूरू कदी तो यह मिथक और जोर पकड़ने लगा ।

 

ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में जेनेटिक्स के प्रोफेसर ब्रायन साइक्स ने कुछ अनुमानित यतिस का परीक्षण करने का फैसला किया। उन्होंने येतिस के बालों का परीक्षण किया तो पाया की यह आज से 40000 साल पहले पाये जाने वाले धुव्री भालू के समान थे । ‌‌‌उसके बाद वैज्ञानिकों ने कहा की यदि हिमालय के अंदर इस प्रकार के भालू पाये जाते हैं तो निश्चित रूप से येति की कथा आसानी से तैयार हो गई होगी । क्योंकि इनके अंदर हिममानव के अनेक गुण मौजूद हैं। हालांकि यह दावा भी फैल हो गया ।

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डेनमार्क में कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के रॉस बार्नेट  और उनके सहयोगियों ने दुबारा नमूनों की जांच करने का फैसला किया तो उन्हें एक बड़ी गलती मिली । उनके अनुसार यह नमूने प्राचीन भालू के साथ ऐक्जेक्ट मैच न करते हुए आधुनिक भालू के साथ मैच करते हैं। वाशिंगटन, डी.सी. और लॉरेंस में कान्सास विश्वविद्यालय के रोनाल्ड पाइन में स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के एलियसर गुतिरेज़ ने इन नमूनों को दोबारा परिक्षण किया तो पाया की यह नमूने ब्राउन भालू के अलावा और किसी के नहीं थे ।

Alleged Yeti footprint found by Michael Ward
Alleged Yeti footprint found by Michael Ward

हॉबिट की खोपड़ी को सन 2008 के अंदर साइबेरिया की एक गुफा के अंदर खोजा गया था । जिस संबंध मे वैज्ञानिकों ने बताय की यह मानव की एक प्रजाति थी । जो 40,000 साल पहले विलुप्त हो चुकी थी । इसका सर आज के इंसान से बड़ा था।

होमो फ्लोरोसेंसिस नामक मानव की एक अन्य प्रजाति की खोज के बाद यह दावा किया गया कि हो सकता है। मानव की इस प्रजाति की वजह से येतिस की कहानयां प्रचलित रही होगी । लेकिन इस संबंध मे कोई सबूत नहीं है।

2011 के अंदर रूसी अभियान के अंदर येति के अचूक सबूत होने का दावा किया गया था । बाद मे वह भी झूंठा निकला दावा करने वालों ने यह कहा कि यह एक प्रचार स्टंट था ।ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के पहाड़ों के हर गांव में ‘यती गवाह’ नामित एक गांव था, जिसका काम आगंतुकों को लंबी कहानियों को बताना था,इसके लिए ‌‌‌वे लोग बहुत अधिक पैसा चार्ज करते थे । हालांकि इनलोगों का काम आगंतुओं का मार्गदशन करना रहता है।

हिमालय में अज्ञात प्राइमेट के अस्तित्व का कोई सख्त सबूत नहीं है, और इस बात पर संदेह करने के कई कारण हैं कि यह संभवतः अस्तित्व में नहीं हो सकता है। ‌‌‌येति केवल पौराणिक कथाओं के अंदर का जीव है। और यह शायद ब्राउन भालू की गलत व्याख्या भी हो सकती है। आपको बता दें कि ब्राउन भालू 2 फीट तक खड़ा हो सकता है। येति की खोज तब तक खत्म नहीं होगी जबतक हम पौराणिक कहानियों का आनन्द लेंगे और उनको सच मानेंगे ।

‌‌‌‌‌‌हिममानव का रहस्य अंतिम शब्द

अब तक आपने येति के रहस्यों और उसके दावों के बारे मे विस्तार से जाना । अब हम आपको बता दें कि येति या हिममानव का रहस्य अब कोई रहस्य नहीं रह गया है। हिममानव वास्तव मे नहीं होते हैं। अनेक लोककथाओं और किवदंतियों के अंदर जिस हिममानव का उल्लेख मिलता है। वह सिर्फ ब्राउन ‌‌‌भालू है। जिसको येति कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों द्वारा परीक्षण किये गए नमूनों की बात करें तो उनमे से एक भी ऐसा नमूना नहीं मिला है। जो किसी अज्ञात प्रजाति के हों । वरन अधिकतर नमूने ब्राउन भालू के व कुत्ते के मिले हैं। जिससे यह कहा जा सकता है कि येति जैसी कोई चीज नहीं होती है।

‌‌‌इसके अलावा जो पदचिन्ह हिमालय के अंदर मिले हैं वे भी येति के नहीं हैं। ऐसा कहने का कारण यह है कि ब्राउन बियर जो हिमालय के अंदर पाया जाता है वह खड़ा हो सकता है। और इस बात की संभावना है कि यह पदचिन्ह उसी के भी हो सकते हैं। जो बाद मे हवा वैगरह की वजह से बदल गए होंगे ।youtube ‌‌‌और अन्य न्यूज साइटों पर जो विडियो दिये गए हैं। उनमे अधिकतर सच नहीं हैं।  और हिममानव होने के अभि तक कोई भी सबूत वैज्ञानिकों को नहीं मिले हैं। सब कोरी कल्पना ही है।

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