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    Home»‌‌‌धर्म और त्यौहार»कोड़ामार होली jabab gajab holi in rajasthan
    ‌‌‌धर्म और त्यौहार

    कोड़ामार होली jabab gajab holi in rajasthan

    arif khanBy arif khanOctober 3, 2018Updated:October 29, 2018No Comments5 Mins Read
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    holi
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    इस लेख मे हम राजस्थान की कोड़ामार होली के बारे मे जानेंगे । कोड़ामार होली क्यों मनाई जाती है।

    होली को भारतिए लोग विभिन्न तरीके से मनाते हैं। जैसे कुछ जगह पर होली के दूसरे दिन रंग लगाने की परम्परा है तो कुछ जगहों पर होली को काफी अजीब तरीके से ही मनाया जाता है। जैसा कि आप उपर जान चुके हैं लठमार होती के बारे मे । लेकिन होली मनाने की इसके अलावा एक और परम्परा है जिसको कोड़ामार होली कहा ‌‌‌जाता है। . रंगतेरस पर जीनगर समाज के अंदर कोड़ामार होली भी प्रचलित है। हालांकी यह होली की परम्परा सिर्फ भिलवाड़ा के अंदर ही प्रचलित है। इस प्रकार की परम्परा एक खास समाज के अंदर ही है।

    ‌‌‌लग हाथ जान लेते हैं कि कोड़ामार होली कैसे खेली जाती है। इसके अंदर क्या होता है ?

    Table of Contents

    • रंग डालकर बड़ा पानी से भरा टब रखा जाता है
    • ‌‌‌महिलाएं कपड़े की रस्सी बनाती हैं
    • ‌‌‌कोड़ामार होली मे पुरूष अपने पास बाल्टी रखते हैं
    • ‌‌‌पानी की टंकी का प्रयोग भी होता है
    • ‌‌‌कोड़ामार होली खेलने की जगह
    • ‌‌‌लोग देखते हैं बड़े चाव से
    • ‌‌‌महिलाओं और पुरूषों मे कांटे का मुकाबला
    • ‌‌‌200 साल पुरानी है कोड़ामार होली
    • ‌‌‌कोड़ामार होली क्यों खेली जाती है

    रंग डालकर बड़ा पानी से भरा टब रखा जाता है

    कोड़ामार होली को खेलने के लिए सबसे पहले एक बड़ा बर्तन लिया जाता है। और उसके अंदर पानी के अंदर रंग को घोल कर रख दिया जाता है। ‌‌‌यह सब काम पुरूष करते हैं। बर्तन इतना बड़ा लिया जाता है कि उसके अंदर से पानी चुराने मे कोई समस्या ना आए ।

    ‌‌‌महिलाएं कपड़े की रस्सी बनाती हैं

    कोड़ामार होली के अंदर महिलाएं कपड़े की रस्सी का प्रयोग करती हैं। आमतौर पर वे किसी चूनी वैगरह को गूंथ कर रस्सी बना लेती हैं। जिसकी उतनी ज्यादा लगती नहीं है। जितनी की एक आम रस्सी की लगती है। प्रत्येक महिला के पास केवल एक रस्सी होती है। ‌‌‌महिलाएं इस रस्सी का प्रयोग पुरूषों को मारने के लिए करती हैं। ‌‌‌यह रस्सी दो या तीन दिन पहले ही बनाकर रख दिये जाते हैं। वहीं कई बार इनको पानी के अंदर भिगोकर भी रखा जाता है।

    ‌‌‌कोड़ामार होली मे पुरूष अपने पास बाल्टी रखते हैं

    कोड़ामार होली के अंदर पुरूष अपने पास कोई बाल्टी या कोई बड़ा बर्तन का प्रयोग करते हैं। वे इस बर्तन की मदद से टब से रंग चुराने का प्रयास करते हैं। इसमे कई पुरूष और महिलाएं शामिल हो सकती हैं।

    ‌‌‌कोड़ामार होली कैसे खेली जाती है

    कोड़ामार होली खेलने के लिए इसके अंदर कुछ महिलाएं और पुरूष शामिल होते हैं। महिलाएं पानी से भरे टब के चारों ओर कोड़ा लेकर खड़ी हो जाती हैं। और पुरूष इस टब से दूर बाल्टी लेकर खड़े हो जाते हैं। अब पुरूष अपनी बाल्टी की मदद से महिलाओं के टब से पानी चुराते हैं।

    ‌‌‌महिलाएं पुरूषों को पानी चुराने से रोकने के लिए उन पर कोड़े बरसाती हैं। और उन्हें भगाने का प्रयास करती हैं। महिलाओं के कोड़े पुरूषों को खाने पड़ते हैं। पुरूष बदलने के अंदर महिलाओं मे रंग घूला पानी डालते हैं।

    ‌‌‌पानी की टंकी का प्रयोग भी होता है

    कई विडियो के अंदर मैने देखा है कि कोड़ामार होली के अंदर पानी की टंकी का प्रयोग भी होली खेलने के लिए किया जाता है। जैसेकि हमारे सर्वाजनिक जगहों पर जो पानी के होध होते हैं। उनके अंदर परंग मिला दिया जाता है। फिर उससे कोड़ामार होली खेली जाती है।

    ‌‌‌कोड़ामार होली खेलने की जगह

    कोड़ामार होली कहीं पर भी खेली जा सकती है। आप इसको अपने आंगन के अंदर भी खेल सकते हैं तो आप चाहें तो इसको पूरे गांव के बीच मे भी खेल सकते हैं। कुल मिलाकर खेलने वाले इसको कहीं पर भी खेल सकते हैं। जहां पर उनको सब सुविधाएं मिल जाएं।

    ‌‌‌लोग देखते हैं बड़े चाव से

    कोड़ा मार होली देखने मे काफी मजेदार होती है। लोग इसको बड़े ही चाव से देखते हैं। महिलाओं और पुरूषों का कांटे का मुकाबला होता है। जो लोग होली के अंदर हिस्सा नहीं लेते हैं। वे कोड़ामार होली खेलने वालों के ओर एकत्रित हो जाते हैं और बड़े ही मजे से इस होली को देखते ‌‌‌हैं।

    ‌‌‌महिलाओं और पुरूषों मे कांटे का मुकाबला

    कोड़ामार होली के अंदर पुरूष महिलाओं के अंदर पानी डालकर उनको टब से दूर हटाने की कोशिश करते हैं। एक तरह से यह युद्व होता है। और महिलाएं कोड़े मारकर पुरूषों को उस टब से भगाने के लिए विवश करती हैं। ‌‌‌देखने वालों को यह एक घमासान की तरह नजर आता है। वहीं कुछ महिलाएं होली के इस स्थल पर डांस भी करती है।

    ‌‌‌200 साल पुरानी है कोड़ामार होली

    समाज के कुछ लोग बताते हैं की भीलवाड़ा की कोड़ामार होली कोई ज्यादा पुरानी नहीं है। इसको यही कोई 200 साल हो चुके हैं। 200 साल पहले कोड़ामार होली यहां पर नहीं खेली जाती थी । लेकिन बाद मे इसको कुछ विद्वानों ने शुरू करवाया था ।

    ‌‌‌कोड़ामार होली क्यों खेली जाती है

    समाज के कुछ लोग बताते हैं कि आज से 200 साल पहले हमारे समाज के अंदर महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी । सब कुछ आज की तरह नहीं था । आज महिलाओं को हर क्षेत्र के अंदर पुरूषों के बराबर का हक है। उस समय ऐसा नहीं था । तब इस कोड़ामार ‌‌‌होली को शूरू किया गया था । इसका मकसद था समाज के अंदर महिलाओं की स्थिति के अंदर सुधार करना । और इसका असर भी काफी हुआ ।

    arif khan
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