भगवान को किसने बनाया ? एक अनसुलझा प्रश्न Unsolved Mysteries of god

जब आप ब्रहमांड के रहस्यों के बारे मे सोचते हो तो आपके मन मे एक सवाल आता है कि अगर इस धरती और ब्रह्रमांड को भगवान ने बनाया है तो भगवान को किसने बनाया ?

यह प्रश्न आपके दिमाग मे भी बहुत बार आया होगा । और आपने इसका उत्तर जानने की बहुत कोशिश की होगी । नेट पर सर्च किया ‌‌‌होगा कि भगवान को किसने बनाया ? लेकिन आपको इसका सही सही उत्तर कहीं पर भी नहीं मिला होगा । आपको सही उत्तर तब मिलेगा जब इसका कोई उत्तर होगा । इस लेख के अंदर भी हम आपको इस प्रश्न का सही उत्तर नहीं दे पाएंगे । बस हम इस संबंध मे विचार करेंगे ।

bhagwan ko kisne banaya,

‌‌‌बहुत से लोग इस बात का दावा करते हैं। कि दुनिया के अंदर जो व्यवस्था है। वह अपने आप नहीं बनी है। बल्कि उसको बनाया गया है। और वो भी किसी अद्रश्य ताकत ने इन चीजों को बनाया है। उनका कहना सही हो सकता है। यह संभव है कि दुनिया के अंदर जो चीजे हैं। उनको भगवान ने बनाया है। लेकिन कुछ ऐसे तथ्य ‌‌‌भी हैं जो साबित करते हैं कि वे सब चीजें अपने आप ही बनी हैं। कुल मिलाकर भगवान होने या ना होने दोनों ही संभावनाएं मौजूद हैं।‌‌‌तो इस लेख के अंदर हम आपको भगवान को किसने बनाया ? प्रश्न का उत्तर दो संदर्भों के अंदर देंगे ।‌‌‌जहां तक मुझे लगता है।

 भगवान ना हो ऐसा असंभव है। मतलब यदि आप यह सोच रहे हैं कि भगवान नहीं होता तो मेरे हिसाब से आप गलत सोच रहे हैं। और यदि आप सोच रहे हैं कि भगवान ने ही सब कुछ बनाया है तो भी आप गलत सोच रहे हैं। सच्चाई दोनों की बीच की है। जिसको आइए हम समझाने का प्रयास करते हैं।

‌‌‌जब हम यह प्रश्न किसी धर्म के ठेकेदार से पूछते हैं कि भगवान ने हमको बनाया है तो भगवान को किसने बनाया ? तो वे लोग इस चीज का सीधा सा उत्तर देते हैं कि भगवान को  किसी ने नहीं बनाया वरन भगवान एक निराकार हैं। उनका कोई आकार नहीं है।‌‌‌ चलो मान लेते हैं कि भगवान एक निराकार हैं। मतलब वे किसी का रूप ले सकते हैं। उनका खुद का कोई रूप नहीं है। लेकिन फिर भी भगवान कुछ तो है। मतलब कोई ऐसी चीज तो है। जिसको हम भगवान कह सकें । यदि ऐसी कोई चीज नहीं है तो इसका मतलब भगवान नहीं है।

‌‌‌पर एक चीज तय है कि भगवान का भले ही कोई आकार ना हो लेकिन बिना आकार के भी चीजे हो सकती हैं। मैं यह कहूं कि पानी का कोई रंग नहीं है । लेकिन फिर भी पानी है। इसी तरह से मैं कहूं कि हवा निराकार है। मतलब उसे महसूस किया जा सकता है। लेकिन फिर भी हवा है।‌‌‌ बस यही ईश्वर के साथ है। भले ही उसका कोई आकार ना हो लेकिन एनर्जी जरूर है।

‌‌‌हम क्यों मानते हैं कि सब चीजों को भगवान ने बनाया है ?

बहुत से व्यक्ति यह मानते हैं कि इस दुनिया को भगवान ने बनाया है। उनके कहने का अर्थ है। कि इस दुनिया के अंदर जितने भी जीव जंतु हैं। पेड़ पौधे हैं। उन सबको भगवान ने बनाया है। और इतना ही नहीं पूरे ब्रह्रमांड को ही भगवान ने बनाया है।‌‌‌

दुनिया को भगवान ने बनाया है। ऐसा हम इसलिए मानते हैं क्योंकि अभी भी हम दुनिया के पूरे रहस्यों को खोल नहीं पाएं है। अभी भी बहुत से रिसर्च होने बाकी हैं। बस इन्हीं रहस्यों की वजह से हम मानते हैं कि दुनिया को भगवान ने बनाया है। और दूसरा जो सबसे बड़ा रिजन है। वह यह है कि दुनिया की

‌‌‌व्यवस्था की वजह से कुछ लोग मानते हैं कि दुनिया को किसी ने बनाया है। मतलब इस दुनिया के अंदर हर चीज अपनी सही जगह पर है। कुछ भी गड़बड़ नहीं है। यह सब चीजें सही जगह पर कैसे है ? बस इसका उत्तर है भगवान की वजह से ।‌‌‌यदि दुनिया को भगवान ने नहीं बनाया तो कुछ तो गलत होना चाहिए था ? पर यहां पर कुछ भी गलत नहीं है ।

‌‌‌इस तरह की सोच रखने वाले लोगों को हम बतादें कि उनका कहना सही है। हर चीज अपनी जगह पर व्यवस्थिति है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हर चीज सिर्फ भगवान ही व्यवस्थित करता है। बहुत सी चीजे हैं जो अपने आप भी व्यवस्थित होती हैं।

‌‌‌इंसान को किसने बनाया है ?

यदि आप किसी भी आम आदमी से यह प्रश्न पूछेंगे कि इंसान को किसने बनाया ? तो आपको उत्तर मिलेगा कि इंसान को भगवान ने बनाया है। लेकिन वास्तव मे जहां तक मुझे लगता है कि यह सब सच नहीं है। या मात्र आधा सत्य हो सकता है।‌‌‌इंसान को भगवान ने नहीं बनाया है।वरन इंसान को बनाने वाली यही प्रक्रति है। अब आप यह कहोगे कि प्रक्रति भगवान ही तो है। लेकिन प्रक्रति भगवान नहीं है। भगवान एक अलग चीज है। और प्रक्रति उसकी रचना हो सकती है।

‌‌‌अब आप के मन मे  आ रहा होगा कि जब इंसान को भगवान ने नहीं बनाया तो इंसान को केसे बना ?

‌‌‌इंसान बना होगा उत्परिवर्तन की वजह से । आपको बता दें कि उत्परिवर्तनएक ऐसी प्रक्रिया होती है। जिसकी मदद से किसी नई जाती का विकास होता है। मतलब पुरानीजाति के के डीएनए के अंदर कुछ बदलाव होता है। उससे नई जाति का विकास होता है।‌‌‌औरइंसान का विकास भी कुछ ऐसे ही तरीके से हुआ होगा । ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं।‌‌‌लगभग1.8 मिलियन साल पहले सबसे पहले Homo erectus का विकास हुआ था । जो आज के इंसानों सेबहुत अलग थे । आपको पता होगा की  इन लोगों की उत्पति बंदरों के डीएन ए के अंदर परिवर्तन से हुई है। ऐसा माना जाता है कि इंसानोंका सबसे करीबी चिंपाजी था। ‌‌‌इसी तरह से एक जाति के अंदर कुछ फेर बदल होतेहुए इंसान की उत्पति हुई। Homo erectus की यदि आप शक्ल देखेंगे तो वह आपको बंदर केजैसा नजर आएगा । लेकिन आज के इंसान बंदरों से बहुत अलग हो चुके हैं।

‌‌‌अब तक इंसानों की 15 प्रजातियों का पता लगाया जा चुका है। मतलब हर एक प्रजाति अपने  करीबी से ही पैदा हुई है। यह सिर्फ इंसानों के अंदर ही नहीं है। वरन जानवर भी अपने करीबी दूसरी प्रजाति से पैदा हुए हैं। जैसे गधा ,घोड़ा और जेबरा । कहने का मतलब इतना है कि इंसान को किसी भगवान ने नहीं वरन प्रक्रति ‌‌‌न ही बनाया है।

‌‌‌इसके अलावा प्राक्रतिक वरण के सिद्वांत के अनुसार इंसानों के अंदर और दूसरी जाति के अंदर परिवर्तन होते रहे हैं। प्राक्रतिक वरण का मतलब है। प्रक्रति खुद चुनती है कि कौनसा परिवर्तन जीवों के अंदर होना चाहिए । और उस हिसाब से डीएन ए के अंदर बदलाव होते हैं।

‌‌‌भगवान पहले पैदा हुआ या इंसान ?

यह एक दिलचस्प प्रश्न है कि भगवान पहले पैदा हुआ या इंसान ? इसकाउत्तर है कि इंसान भगवान से पहले पैदा नहीं हुआ । आपको हम पहले यह बता दें कि भगवानएक स्पेसल प्रकार की चेतना हो सकती है। जिसके नियमों के बारे मे हम अभी नहीं जानतेहैं। या यह कह सकते हैं कि भगवान ‌‌‌ तक अभी हम पहुंच नहीं पाए हैं।

‌‌‌भले ही विज्ञान भगवान को या आत्मा को नहीं मानता हो । लेकिन वास्तव मे आत्मा होती है। और विज्ञान का इसके नहीं मानने के पीछे की वजह यह है कि अभी भी विज्ञान का विकास होना बाकी है। मात्र 3000 साल के अंदर विज्ञान ने इतनी तरक्की अभी नहीं की है कि वह इन चीजों को समझ सके । ‌‌‌शायद आने वाले समय के अंदर वह इन चीजों को समझ पाएगी।

‌‌‌चेतना के रहस्य को जिस दिन विज्ञान समझ लेगा । उस दिन विज्ञान भगवान को समझ लेगा । जहां तक मुझे लगता है। आत्मा की वजह से चेतना पैदा होती है। और इंसान के पैदा होने से पहले कई सारे जीव पैदा हो चुके थे ।

और उनके अंदर चेतना थी । ‌‌‌आत्मा या चेतना वैसे दो अलग अलग चीजेहैं। लेकिन हम इनका प्रयोग एक ही संदर्भ मे कर रहे हैं। आत्मा बनना एक प्राक्रतिक क्रियाहै। और इस संबंध मे हमारा विज्ञान कुछ नहीं जानता है। ‌‌‌आत्माके भी अपने नियम होते हैं। आत्मा भी किसी ना किसी चीज की बनी होती है। जिसका हमे ज्ञाननहीं है।

यदि हमे इन चीजों का पता चल जाता है। तो निश्चय ही बहुत सी चीजें हल हो जाएंगी। ‌‌‌मेरा कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि जीव बनने से पहले आत्माएं बनी होंगी और उसके बाद हीजीव बना होगा । अब बात करें भगवान की तो भगवान एक आत्मा है। या कहें कि वह एक पवित्र आत्मा है। जिसका विकास शरीर की उत्पति से बहुत पहले हुआ है।

‌‌‌जिस तरह से प्रक्रति ने हमको बनाया है। उसी तरह से प्रक्रति ने आत्माओं को भी बनाया होगा । यह बात अलग है कि अभी हम उन चीजों  तक पहुंच नहीं सके। आप यह न सोचे की आत्मा पर विश्वास करना अंधविश्वास है। वरन यह सोचें की आत्मा संभव है। लेकिन उस तक पहुंचने का तरीका हमारे पास नहीं है। ‌‌‌यह ठीक वैसे ही है जैसे जब हवाई जहाज का आविष्कार नहीं हुआ था तो लोग यह सोचते थे कि हवाई जहाज जैसी कोई चीज संभव नहीं है। और मोबाइल के बारे मे किसी ने नहीं सोचा था कि हम इतनी दूर बैठे किसी से बात कर पाएंगे । लेकिन यह सब हो गया । बस यही बात आत्मा पर लागू होती है।

‌‌‌भगवान को किसने बनाया ?

‌‌‌इस सवाल का मेरे पास वैसे कोई सही जवाब नहीं है। लेकिन मे आपको इस सवाल के दो संभव जवाब देने का प्रयास कर रहा हूं हो सकता है। वे जवाब सही नहीं हो किंतु इन जवाब से आपको कुछ हद तक आपके प्रश्न का सही उत्तर मिल सकता है।

हिंदु धर्म के अंदर ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की उत्पति अपने आप हुई थी । वैसे देखा जाए तो यह संभव है कि भगवान शिव की उत्पति अपने आप हुई हो । मतलब शिव की उत्पति प्राक्रतिक नियमों से हुई होगी । यदि आप यह मानने से इनकार करदें की भगवान की शिव की उत्पति ‌‌‌प्राक्रतिक नियमों से नहीं हुई । तो आप एकदम से गलत हैं। आप जरा सोचें की बिना किसी के बनाए कोई नहीं बनता है। और भगवान भी बिना किसी के बनाए नहीं बन सकता । ‌‌‌लेकिन इसका एक अपवाद भी है और वो यह है

 कि एक ऐसी ताकत जो बहुत पहले से इस ब्रह्रमांड मे है। या यह कहें कि उसको किसी ने नहीं बनाया तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी । वह ही सबसे बड़ा भगवान है। ‌‌‌और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि वह भगवान शिव भी हो सकते हैं। यदि भगवान शिव सबसे बड़े भगवान हैं तो फिर उनकी उम्र 13.772 billion years हो चुकी है। क्योंकि भगवान यूनिवर्स से पहले के हैं। जबकि हमारे यूनिवर्स की उम्र 13.772 billion years हो चुकी है। ‌‌‌लेकिन यदि शिव सबसे बड़े भगवान हैं तो उनका नाम कई पुरानी सभ्यताओं के अंदर क्यों नहीं आता ? दूसरी बात इंसान को पैदा हुए लगभग 4 मिलियन साल हुई हैं। इसका उत्तर जहां तक मैं सोच पा रहा हूं कि हो सकता है। दूसरी सभ्यताओं के अंदर शिव को दूसरे नाम के रूप मे पूजा जाता हो । ‌‌‌हालांकि भगवान शिव दुनिया के सबसे पुराने भगवान हैं। या कहें की सबसे पहले के हैं। इस बात के सबूत मिल चुके हैं। और यह भी संभव है कि ‌‌‌भगवान शिव ने अपने बारे मे बताने के लिए बाद मे सोचा होगा।

‌‌‌जैसा कि बहुत बार कहा जाता है। कि भगवान सिर्फ एक है। और यह सही भी है। जब इंसान  पैदा हुआ तो कोई धर्म नहीं था। इस्लाम धर्म की उत्पति तो 610 ईस्वी के अंदर हुई थी। बात करें हिंदु धर्म की तो वह आर्यों ने पैदा किया था । हिंदु धर्म यही कोई 6000 साल पुराना होगा । कहने का मतलब है धर्म भगवान ने ‌‌‌नहीं इंसान ने बनाय हैं। परमेश्वर सिर्फ एक है। और उसको किसी ने नहीं बनाया । ‌‌‌और उसने कोई धर्म नहीं बनाया है। धर्म सिर्फ इंसानों की देन हैं।

‌‌‌भगवान को भगवान ने बनाया है।

भगवान को किसने बनाया इस प्रश्न का दूसरा उत्तर है। भगवान को भगवान ने ही बनाया है।‌‌‌हिंदु धर्म के अंदर करोड़ों देवता बताए जाते हैं। मैं यह नहीं कहता हूं कि वे सब देवता नहीं हैं। देवता हैं। लेकिन भगवान या सबसे बड़ा भगवान उनसे अलग है। जिन देवताओं को हम भगवान समझ रहे हैं। असल मे वे भगवान का दर्जा प्राप्त हैं या कहें की वे देवगण के अंदर हैं। कोई भी इंसान यदि सत कर्म करता है‌‌‌तो वह देवगण के अंदर चला जाता है। भगवान महावीर और भगवान बुद्व ऐसे ही देवगण हैं। हिंदु धर्म के अंदर और भी बहुत से देव हैं। तो आपको इस चीज के अंदर फर्क समझ लेना चाहिए कि भगवान जिसके नियम इस दुनिया मे चलते हैं । वह अलग है और देव अलग हैं।

‌‌‌भगवान को इंसानों ने बनाया है

भगवान को किसने बनाया ? इस प्रश्न का एक उत्तर यह भी हो सकता है कि भगवान को इंसानों ने बनाया है। और इस बात को सिद्व भी किया जा सकता है।‌‌‌जो लोग भगवान को नहीं मानते हैं। उन से जब पूछा जाता है कि भगवान को किसने बनाया ? तो उनका एक ही उत्तर होता है कि भगवान को सिर्फ इंसानों ने बनाया है। ‌‌‌

यदि हम बात करें 300,000 साल पहले के की Homo erectus  के समय की तो उस समय कोई धर्म नहीं था । इसका मतलब साफ है कि धर्म इंसानों ने बनाए हैं। और धर्म का विकास धीरे धीरे हुआ था। ‌‌‌ अब तक हुए रिसर्च के अनुसार हिंदु धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। अफ्रिका के अंदर 6 हजार साल पुराना शिव मंदिर मिल चुका है। ‌‌‌मेरा यह बताने का मकसद था की दुनिया के अंदर धर्म पहले नहीं था। इंसानों की उत्पति के बहुत बाद धर्म पैदा हुआ है। और धर्म को इंसानों ने बनाया है। तो उसके अंदर जो देवी देवता हैं। उनको भी इंसानों ने ही बनाया है। आप भले ही इस चीज को ना माने लेकिन विज्ञान कम से कम यही मानता है।

‌‌‌भगवान को आपकी पूजा की जरूरत नहीं है

वास्तव मे इंसान मूर्ख हैं। भगवान को वास्तव मे किसी की पूजा कीजरूरत नहीं है। आज इस ब्रह्रमांड को बने 13 बिलियन साल हो चुकी हैं तो भगवान तो उससे पहले का है। आपको बतादें की पहले यह देव नहीं थे । देव मात्र भगवान की रचना हो सकतेहैं। ‌‌‌और इतनी सालों के अंदर भगवान को किसी ने नहीं पूजा था ।

तो भगवान को क्या फर्क पड़ता है। कि कोई उसकी पूजा करे या ना करे । सच तो यह है कि उस भगवान का नाम तक हम नहीं जानते जिसने इस ब्रह्रमांड को बनाया है। ‌‌‌सच माने तो वो बहुत बड़ा है। हम उसके सामने कुछ नहीं हैं। इंसान मरने से पहले जो सत कर्म करता है तो उसी इंसान को मरने के बाद देवगण मिलता है। और जो इंसान बुरे कर्म करता है। उसे राक्षस गण मिलता है। यह सब नियम किसने बनाये हैं। तो हम यह कह सकते हैं कि यह नियम दुनिया को बनाने वाले ने बनाये हैं।

‌‌‌दुनिया के अंदर रहने वाली पवित्र आत्माओं को उन पर बनाए नियमों को फोलो करना पड़़ता है। मतलब यह जरूरी हैं। यह सिद्व होता भी है। काफी समय दो से 5 साल पहले एक व्यक्ति की मौत हो गई थी । वह व्यक्ति हमारा रिश्तेदार था । मरने के बाद उसकी आत्मा भटकने लगी और हमेशा कुछ ना कुछ बुरा करने की सोचती ‌‌‌उस आत्मा ने बहुत बार घरवालों का बुरा किया । फिर रात को एक दिन आवाज आई की बेटा मैं तुम्हारा दादा हूं अब मेरे बस की बात नहीं है। तब मैं समझ गया कि इंसान की तरह आत्मा की भी मजबुरी होती है। ‌‌‌जिस तरह से इंसान को बहुत से नियमों का पालन करना पड़ता है। उसी तरह से आत्मा को भी अपने नियमों का पालन करना पड़ता है। यह जरूरी होता है। वरना आत्मा को भी इंसान की तरह कष्ट होता है।

‌‌‌क्या संभव है इंसान कभी भगवान को जान पाएगा ?

जहां तक हम सोचते हैं। इंसान कभी भी भगवान तक नहीं पहुंच पाएगा ।हां इतना कह सकते हैं कि वह भगवान के कुछ रहस्यों को खोल पाएगा । लेकिन वह भगवान तक नहीं पहुंच पाएगा । इंसान को भगवान ने इतनी भी बुद्वि नहीं दी है कि वह उसके सामने जाकर उसी को चुनौती दे सके। ‌‌‌जिसने यह दुनिया बनाई है। मुझे लगता है। भगवान को चुनौती देने वाला इस  दुनिया के अंदर पैदा नहीं हुआहै। और जो इंसान भगवान को चुनौती देते हैं। वास्तव मे उनको अपने मामूली ज्ञान पर घमंडहै। इतनी बड़ी दुनिया को बनाने वाले को हम जैसे तुछ जीव चुनौती देंगे तो मूर्ख कौनहोगा ?

‌‌‌भगवान को किसने बनाया अंतिम शब्द

‌‌‌भगवान को किसने बनाया ? इस लेख के अंदर मैंने तीन संभव उत्तर देने की कोशिश की है। जिसमे पहला उत्तर मेरा यह था कि भगवान को किसी ने नहीं बनाया है। वरन भगवान अपने आप बना है। लेकिन इस उत्तर के साथ समस्या है कि भगवान अपने आप कैसे बना ? इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है।

मेरा दूसरा उत्तर था ‌‌‌कि भगवान को भगवान ने बनाया है। यह कुछ हद तक सही हो सकता है। लेकिन यह प्रश्न से थोड़ा हटकर है।

‌‌‌मेरा तीसरा उत्तर था कि भगवान को किसी ने नई बनाया । इसका अर्थहै कि भगवान है ही नहीं और वह हमारी कल्पना का नाम है। धर्म और भगवान को सिर्फ इसलिए बनाया गया है कि लोग अच्छे कर्म कर सके और दुनिया के अंदर अमन और शांति कायम रह सके।

‌‌‌इस लेख के अंदर बहुत से विरोधाभाष रहे । और हो सकता है कहीं पर आपको दोगली बातें लगे । लेकिन यह लेख एक ऐसे प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास है। जिसका कोई उत्तर नहीं है।

‌‌‌भगवान को किसने बनाया ? यदि इस प्रश्न का सही उत्तर की बात करेंतो मुझे तो यही लगता है कि भगवान को किसी ने नहीं बनाया वरन भगवान अपने आप बना है।और इसका दूसरा उत्तर यह हो सकता है कि देव या जिसे हम भगवान मान रहे हैं। वे दुनिया के सबसे बड़े रचनाकार के बनाए नियमों से बने हैं। संभव है कि दुनिया के रचनाकार के बनाए नियमों की वजह से देवताओं को पूजा की आवश्यकता हुई होगी और बस इसी से प्रेरित होकर धर्मों की उत्पति हुई होगी ।‌‌‌रही बात विज्ञान की तो विज्ञान अभी भगवान की पहुंचसे बहुत दूर है। उसे इसको समझने मे समय लगेगा । इस वजह से उसे भगवान को चुनौती नहीं देनी चाहिए।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!