टिड्डी क्या है टिड्डी दल के बारे मे जानकारी व टिड्डी का आक्रमण

टिड्डी के बारे मे तो आपने अवश्य ही सुन रखा होगा । वैसा आजकल टिड्डी आने के समाचार बहुत ही कम सुनने को मिलते हैं। लेकिन कई साल पहले टिड्डी पूरे झुंड के साथ खेतों पर आक्रमण करती थी । और किसान उनके आगे बेबस था । वह बेचारा कुछ नहीं कर सकता था । उसकी नजरों के सामने उसके पूरे खेत को चट कर जाती थी ।

मरुस्थलीय टिड्डियाँ

टिड्डी (Locust) ऐक्रिडाइइडी (Acridiide) परिवार के ऑर्थाप्टेरा (Orthoptera) गण का कीट है। हेमिप्टेरा (Hemiptera) गण के सिकेडा वंश का कीट भी टिड्डी या फसल डिड्डी (Harvest Locust) कहलाताहैं

टिड्डी क्या है टिड्डी दल

टिड्डी की प्रजातियां

टिड्डी की प्रमुख रूप से चार जातियां पाई जाती हैं।

  1. स्किस टोसरका ग्रिग्ररिया नामक की मरूस्थल मे रहने वाली टिड्डी
  1. उतरी अमरिका की रॉकी पर्वती की टिड्डी
  1. साउथ अमरीकाना

इटालीय तथा मोरोक्को टिड्डी उष्ण कटिबंधीय आस्ट्रेलिया, यूरेशियाई टाइगा जंगल के दक्षिण के घास के मैदान , अफ्रीका, ईस्ट इंडीज, तथा न्यूजीलैंड में पाई जाती हैं।

  1. दक्षिण अफ्रीका की भूरी एवं लाल लोकस्टान पारडालिना

टिड्डी की प्रजनन स्थिति

‌‌‌मादा टिड्डी रेत के अंदर सैल बनाकर 10 से लेकर 100 अंडे देती है। जो गर्म जलवायु होने पर 20 दिन के अंदर फूट जाते हैं। लेकिन शीतकाल के अंदर अंडे सुप्त बने रहते हैं। मादा टिड्डी के पंख नहीं होते हैं। बस वह अन्य बातों के अंदर अन्य टिड्डी के समान ही होती है। ‌‌‌उसका भोजन वनस्पति है। यह 5 से 6 सप्ताह के अंदर व्यवस्क हो जाती है। इस अवधी के अंदर टिडडी की त्वचा कई बार बदलती है। वह 20 से 30 दिन के अंदर पूरी प्रौढ हो जाती है। कुछ प्रजातियों के अंदर यह कुछ महिनों का काम होता है।टिडडी का विकास आद्रता और ताप पर काफी हद तक निर्भर रहता है।

टिड्डियों की दो अवस्थाएँ होती हैं

  1. एक चारी
  2. यूथचारी

‌‌‌प्रत्येक अवस्था कायकी व्यवहार और आक्रति आदि के अंदर एक दूसरे से अलग अलग होती है।एकचारी के अंदर अपना रंग परिवर्तित करने की क्षमता होती है। यह पर्यावरण के अनुसार खुद को बदल लेती है। इसकी ऑक्सिजन लेने की गति मंद होती है। जबकि यूथचार के अंदर ‌‌‌इसका रंग फिक्स पीला होता है। इसकी ऑक्सिजन लेने की दर उंची होती है। यह ताप को अ धिक अवशोषित कर लेता है। इसकी म्रत्यूदर काफी अधिक होती है। फिर भी यह खुद को जीवित रखती हैं।

‌‌‌एकचारी टिड्डी यदि झूंड के अंदर पलती है। तो वह बाद मे यूथचारी के अंदर बदल जाती है। और यदि यूथचारी टिड्डी एकांत के अंदर रहती हैं तो वह एकचारी हो जाती हैं।

 

टिड्डी के निवास स्थान

टिड्डी अपने निवास स्थानों को ऐसी जगह पर बनाती हैं। जहां पर जलवायु असंतुलित होता है।ऐसी जगह काफी कम ही होती हैं।

  1. फिलिपीन के आर्द्र तथा उष्ण कटिबंधीय जंगलों को जल चुके घास के मैदान
  1. कैस्पियन सागर ऐरेल सागर व बालकश झील में गिरनेवाली नदियों के बालू से घिरे डेल्टा
  2. रूस के शुष्क तथा गरम मिट्टी वाले द्वीप, यह नम और ठंडे रहने की वजह से काफी उपयुक्त हैं। इस क्षेत्र में बहुत अधिक संख्या में टिड्डियाँ एकत्र होती हैं

‌‌‌4. मरूस्थल के अंदर घास के मैदान जहां पर जलवायु विषमता रहती है।

यूथचारी टिड्डियाँ गर्मी के दिनों के अंदर उड़ती हैं। जिसकी वजह से इसकी पेशियां सक्रिय रहती हैं। और इसके शरीर का ताप अधिक होता है। वर्षा की स्थिति के अंदर इनकी उड़ान नहीं होती है।मरुभूमि टिड्डियों के झुंड गर्मीकाल के अंदर उड़ान भरती हैं। यह कई देशों के अंदर आते हैं। जिसमे अरब देस भारत ईरान ‌‌‌और अफ्रिका आदि आते हैं। लोकस्टा माइग्रेटोरिया भारत अर्फिका के अंदर आकर फसल को पूरी तरह से बरबाद कर देती है।

टिड्डी क्या है टिड्डी दल

‌‌‌यह टिडडी पहले पूर्वी अफ़्रीकी देशों जैसे इथियोपिया, सोमालिया मोरोक्को, मोरिटानिया के साथ साथ अरब देश यमन के अंदर तबाही मचाकर भारत की और रूख करते हैं। टिड्डी हिंद महासागर को पार करके भारत और पाकिस्तान के अंदर आ जाती हैं। टिड्डी दल हिंद महासागर को पार करना एक प्राक्रतिक चक्र का हिस्सा है। यह ‌‌‌कई बार हो चुका है।

टिड्डियों का भोजन और कुछ खास बातें

टिड्डियों के दलों के खेत पर आक्रमण करने से खेत को भारी नुकसान होता है। समझो खेत के अंदर कुछ नहीं बचता है। एक कीट अपने वजन के बराबर फसल खा जाता है। इसका वजन 2 ग्राम होता है।

‌‌‌एक छोटे से टिडडी दल का हिस्सा एक दिन मे उतनी खाध्य सामग्री खा जाते हैं जितनी कोई 3000 हजार इंसान खा सकते हैं। लेकिन टिडडे की उम्र कोई ज्यादा नहीं होती है। यह 4 से 5 महिने ही जीवित रह पाते हैं।

‌‌‌इन कीडों की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह हवा के अंदर 150 किलोमिटर एक सांस मैं उड़ सकते हैं। और हिंद महासागर को पार करने के लिए इनको 300 किलोमिटर की दूरी पार करनी होती है।

टिड्डी नियंत्रण

टिड्डी का नियंत्रण करना भी कोई आसान काम नहीं है। सरकार टिड्डी के नियंत्रण के लिए विशेष दल का गठन करके रखती है। टिड्डी को हवा के अंदर नष्ट करने के लिए विषैला चारा और विषैली ओषधियों का छिड़काव किया जाता है। गेंहू की भूसी का भी छिड़काव होता है। अंडों को नष्ट करने के लिए तेल ‌‌‌का छिड़काव किया जाता है।

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