कांच की बोतल कैसे बनती है glass bottle making process

कांच की बोतल मे क्या पदार्थ उपयोग होता है और कांच की बोतल कैसे बनती है  इसकी पूरी प्रोसेस के बारे मे हम नीचे जानेंगे । दोस्तों आज पूरी दुनिया के अंदर कांच की बोतलें प्रयोग मे ली जाती हैं।

हालांकि प्लास्टिक के प्रयोग के बाद कांच की बोतलों का वर्चस्व कम हो गया है। क्योंकि प्लास्टिक की बोतले कांच की तुलना मे काफी सस्ती होती हैं। आमतौर पर लगभग 200 मिलीलीटर और 1.5 लीटर के बीच कांच की बोतले बनाई जाती हैं।कांच की बोतलों के लिए आम उपयोग में खाद्य मसालों, सोडा, शराब, सौंदर्य प्रसाधन, अचार और संरक्षक शामिल हैं। इनका उपयोग उधोगों के अंदर भी किया जाता है।

‌‌‌आज दुनिया भर के घरों के अंदर कांच के जार का प्रयोग किया जाता है।कांच की बोतलों का उत्पादन दक्षिण पूर्व एशिया में लगभग 100 ईसा पूर्व और अमेरिका की कांच की बोतल और ग्लास जार उद्योग का जन्म 1600 दशक के आस पास हुआ था।

कांच की बोतल कैसे बनती है

जब जेम्सटाउन में बसने वालों ने पहली ग्लास पिघलने वाली भट्टी का निर्माण किया था। 1880 में स्वचालित कांच की बोतल उड़ाने की मशीन के आविष्कार ने बोतलों को बनाने की प्रक्रिया का औद्योगिकीकरण किया गया था।

‌‌‌प्राचीनतम लोगों ने कांच के बर्तन और कांच के बोतल बनाए थे । वे कांच को पिघलाने के लिए एक भटटी के अंदर गर्म करते थे और उसके बाद ठंडा करने के लिए एक तरल के अंदर डूबो देते थे । हालांकि उस समय कांच की बोतल को सही तरीके से नहीं बनाया जा सकता था क्योंकि उस समय कांच को गर्म करने वाली ‌‌‌भटियां उतनी अधिक शक्तिशाली नहीं थी ।

‌‌‌कुछ समय बाद ब्लोइप का आविष्कार किया गया था और पिघले हुए कांच को इसके अंदर एकत्रित किया जाता था और उसके बाद कांच को आकार प्रदान किया जाता था।

‌‌‌दोस्तों वैसे तो कांच की बोतल को बनाने के लिए कांच के कच्चे पदार्थों को पहले पिघलाया जाता है और उसके बाद बोतल के आकार के बने सांचों के अंदर उडेल दिया जाता है। फिर इस कांच की बोतल को ठंडा किया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया सुनने मे बहुत ही सरल लगती है। लेकिन एक अच्छी गुणवकता की कांच की ‌‌‌बोतल को बनाने के लिए बहुत ही बातों का ध्यान रखना होता है।

‌‌‌ कांच की बोतल कैसे बनती है कांच की बोतल बनाने के लिए कच्चा माल

  • ‌‌‌कांच की बोतल को बनाने के लिए सैंड, सोडा ऐश, चूना पत्थर और कललेट का प्रयोग किया जाता है।
  • सिलिका ग्लास बनाने की ताकत देता है। इसका प्रतिशत कांच के उपयोग के आधार पर अलग अलग होता है यह 70 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कम ज्यादा हो सकता है।सिलिका को कुचल कर रखा जाता है और इसे भंडारण हॉपर के अंदर ‌‌‌संग्रहित किया जाता है।
  • सोडा ऐश का उपयोग फ्लक्सिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। जो ग्लास में मौजूद सिलिका के गलनांक को कम करने में मदद करता है।
  • कललेट का मतलब होता है कांच के पुराने टुकड़े । दोस्तों जो कांच हम तोड़ देते हैं या जो किसी काम का नहीं होता है। उसको हम बेच देते हैं और बोतल बनाने वाली कम्पनी उस कांच का प्रयोग ‌‌‌करती हैं और उससे दुबारा बोतल बना लेती हैं।इसके लिए कांच के कच्चरे को तोड़ा जाता है और उसके बाद उसको महिन कणों के अंदर पीसा जाता है। और उसकी अशुद्वियों को अलग अलग किया जाता है।
  • ‌‌‌इसके अलावा रंगीन कांच का उत्पादन करने के लिए आक्साइड जोड़ा जाता है।

Batching Process

  • बेल्ट कन्वेयर की मदद से कच्चे माल को निरंतर भटटी के अंदर भेजा जाता है।
  • कच्चे माल को हॉपर्स मे डाला जाता है और मिक्स किया जाता है।और अनलोड करके भटटी के अंदर भेजा जाता है।
  • कन्वेयर के अंदर एक शक्तिशाली चुंबक लगी होती है जो कच्चे माल से लौहे की सामग्री को हटाने का काम करती है।लौहे की सामग्री को इस वजह से हटाना जरूरी है क्योंकि यह पिघल नहीं पाएगी ।ऐसी स्थिति के अंदर कांच की बोतल मे क्रेंक आ जाएगा और यह खराब हो जाएगी ।

‌‌‌कांच की बोतल बनाने के लिए कांच को पिघलाना

‌‌‌कांच की बोतल बनाने के लिए कांच को पिघलाना
By The Portable Antiquities Scheme, CC BY 2.0,wiki

‌‌‌उसके बाद भटटी के अंदर आने वाले कच्चे माल को पिघलाया जाता है। और इसके अंदर तीन चरण होते हैं। पहला पिघलना और दूसरा भिगोना और तिसरा शितलन । कांच को पिघलाने के लिए भटटी का तापमान यह आमतौर पर 1400 डिग्री सेल्सियस से 1600 डिग्री सेल्सियस तक होता है।

‌‌‌ कांच की बोतल कैसे बनती है पिघलाना

  • ‌‌‌चिपचिपा द्रव्यमान प्राप्त करने के लिए कांच के पदार्थों को पिघलाया जाता है।गर्मी की वजह से सिलिका के अंदर बदलाव आता है और पदार्थ पिघलना शूरू हो जाते हैं।
  • कच्चे माल के किसी भी संदूषण से बचने के लिए कांच की बोतल पिघलने वाली भट्ठी सिलिका-आधारित अपवर्तक से बनती है।उच्च दक्षता को प्राप्त करने के लिए वायु और इंधन के अनुपात को सही रखना बहुत अधिक जरूरी होता है।
  • आधुनिक भट्ठी सबसे अच्छा ईंधन दक्षता प्राप्त करने के लिए बहुत उपयोगी होती है।यदि कोई समस्या आती है तो मशीन के अंदर अलार्म लगा होता है और यह अपने आप बंद हो जाती है।

‌‌‌भिगना

  • ‌‌‌संरचना का सारा हिस्सा तेजी से हीटिंग के कारण पिघल नहीं सकता ।इस वजह से यह निश्चित करने के लिए कि सब कुछ पिघलाया जा चुका है। संरचना के तापमान को 3 से 8 घंटे तक उच्च स्थिति के अंदर रखा जाता है।
  • ‌‌‌पिघले हुए कांच के अंदर हवा हो सकती है।और यह हवा उत्पादन के अंदर दोष पैदा करने के लिए जिम्मेदार होती है। सो इसको बाहर निकालना जरूरी होता है।
  • ‌‌‌कांच की बोतल का शीतलन
  • अब इस चरण के अंदर पिघला हुआ कांच को कम तापमान के द्वारा ठंडा किया जाता है।और एक बार यह ठंडा हो जाता है तो उसके बाद इसको फीडर के अंदर भेजा जाएगा ।

‌‌‌कांच की बोतल बनाने के लिए कांच को फीडर के अंदर भेजना

  • ‌‌‌उसके बाद तैयार ग्लास को ग्लास ब्लोअर के पास भेजा जाता है।
  • Low shear panels ग्लास की आवश्यक द्रव्यमान की मात्रा को काटते हैं । जितनी की आवश्यकता होती है।
  • द्रव्यमान के विभिन्न आकार को प्राप्त करने के लिए पैनलों की गति को नियंत्रित किया जाता है। यदि बड़े आकार के ग्लास की जरूरत है तो सरासर पैनल की गति कम होगी ।
  • ‌‌‌कट चूके ग्लास के द्रव्यमान को गर्ब्स के नाम से जाना जाता है।और यह लंबी आक्रती के होते हैं।

Blowing glass bottle

Blowing glass bottle
  • forming machine र्गाब्स को कंटैनर के अंदर भेज देती है।
  • जब garbs को मोल्ड के अंदर रखा जाता है तो उसके अंदर से हवा को पास करवाया जाता है। गर्म हवा का उपयोग कांच से अचानक टकराने या अचानक थर्मल शॉक से बचने के लिए किया जाता है।
  • ‌‌‌उसके बाद मोल्ड के दो हिस्सों को पास लाया जाता है और फिर इसके अंदर कांच को एक बोतल का आकार दिया जाता है। एक बार जब दोनो हिस्सों को बंद कर दिया जाता है तो बोतल के अंदर कोई भी बदलाव  करना संभव नहीं होता है। ‌‌‌यदि आप बदलाव करना चाहते हैं तो आपको दोबारा सम्पूर्ण प्रक्रिया को दौहराना होगा ।
  • ‌‌‌एक बार जब इस प्रक्रिया का चरण पुरा हो जाता है तो बोतल को अगले चरण के लिए भेज दिया जाता है इसको हॉट एंड कोटिंग कहा जाता है।

‌‌‌कांच की बोतल के उपर कोटिंग चढ़ाना

कांच की बोतल पर कोटिंग चढ़ाना इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि यह कांच को अधिक मजबूती प्रदान करती है।कांच की बोतल पर टिन की कोटिंग 350 डिग्री सेल्सियस  के आस पास चढ़ाई जाती है।

एनीलिंग

यह एक प्रक्रिया है। जब कांच की बोतल बनती है तो यह आंतरिक सतह की तुलना मे बाहर तेजी से ठंड़ी होती है। इस प्रक्रिया से तनाव पैदा होता है। लेकिन इससे बचने के लिए एनीलिंग किया जाता है। ‌‌‌जिससे कांच की बोतल को अंदर और बाहर समान रूप से ठंडा किया जाता है।

खरोंच प्रतिरोधी परत

कई कांच की बोतल के अंदर एक बहुलक की एक पतली परत लगाई जाती है।इसका काम यह होता है कि यह कांच को खंरोच से सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि यह बोतल के अंदर नहीं होती है किंतु चश्मा के वैगरह के ग्लास मे इसका उपयोग किया जाता है।

‌‌‌कांच की बोतलों का निरिक्षण करना

एक बार जब कांच की बोतल बनकर तैयार हो जाती हैं तो उनका निरिक्षण किया जाता है। ‌‌‌निरिक्षण के अलग अलग स्तर हो सकते हैं।इसके अंदर कांच के बोतलों की स्वचालित और मैन्यूअल दोनों रूपों से जांच की जाती है। और दोषों को पकड़ा जाता है।

उत्पाद के आकार, उत्पाद का आकार, शरीर में दरारें, पिनहोल और संदूषण और बोतलों के अंदर फंसी हवा की जांच होती है।यह सब निरिक्षण कन्वेयर के अंदर किया जाता है। जहां से बोतले गुजरती हैं।

‌‌‌और एक बार वर्गिकरण हो जाने के बाद सही बोतलों को पैकिंग के लिए भेज दिया जाता है और दोषपूर्ण बोतलों को वापस रिवर्क के लिए भेजा जाता है।

‌‌‌कांच की बोतलों को पैक करना

दोस्तों अंतिम चरण आता है कांच की बोतलों को पैक करना । कांच की बोतलों को पैक करने के लिए एक अच्छे बॉक्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह लकड़ी का हो सकता है। ‌‌‌इनको अच्छी तरह से पैक किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो ।

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arif khan

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