इलेक्ट्रान क्या होता है ? इलेक्ट्रान कैसे काम करता है

दोस्तों इलेक्ट्रान क्या होता है ? इसके बारे मे हम बहुत पहले से ही किताबों के अंदर पढ़ते आए हैं। उनके अंदर बताया होता है कि इलेक्ट्रान क्या होता है ? किस तरीके से काम करता है। आपको कुछ याद होगा कि इलेक्ट्रान नाभिक के चारो और चक्कर ‌‌‌लगाता है। जबकि ‌‌‌नाभिक  स्थिर बनी रहती है। आपने परमाणु के बारे मे भी पढ़ा होगा कि एक परमाणु होता है। उसके अंदर इलेक्ट्रान प्रोटोन और न्यूट्रोन होते हैं। तो दोस्तों इलेक्ट्रान क्या होता है ? इस बारे मे हम संक्षेप के अंदर यह जान लेते हैं कि परमाणु क्या होता है। क्योंकि यह जानना बहुत ही ‌‌‌जरूरी है नहीं तो आप इलेक्ट्रान को अच्छे से नहीं समझ पाओगे । तो दोस्तो पदार्थ का छोटे से छोटा कण जिसको और विभाजित नहीं किया जा सकता है परमाणु कहलाता है। अब बात करें आपके आस पास की तो आपका शरीर अरबो खरबों परमाणुओं से बना हुआ है। और उस परमाणुओं के अंदर इलेक्ट्रान होते हैं।

‌‌‌इलेक्ट्रान क्या होता है ?

‌‌‌इलेक्ट्रोन नाभिक के चारो ओर चक्कर लगाता है। और इसका द्रव्यमान सबसे छोटे परमाणु (हाइड्रोजन) से भी हजारगुना कम होता है।प्रत्येक इलेक्ट्रॉन एक इकाई ऋणात्मक आवेश 1.602 x 10-19 कूलाम होता है।और इसमें न्यूट्रॉन या प्रोटॉन की तुलना में बहुत कम द्रव्यमान होता है। एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.10938 x 10-31 किलोग्राम है। व एक प्रोटॉन का द्रव्यमान 1/1836 होता है।‌‌‌

इलेक्ट्रान के अंदर नगेटिव आवेश को e– के द्वारा दर्शाया जाता है।‌‌‌इलेक्ट्रान परमाणु को नगेटिव और पॉजिटिव चार्ज करने के लिए जिम्मेदार बनाते हैं। यदि किसी परमाणू के अंदर इलेक्ट्रान और प्रोटोन की संख्या बराबर हो जाती है। तो वह उदासीन परमाणु होता है। और यदि परमाणु पर इलेक्ट्रान की संख्या अधिक हो जाती है तो वह नगेटिव चार्ज होता है। जबकि न्यूट्रोनो की ‌‌‌संख्या अधिक होने पर वह पॉजिटिव चार्ज होता है।

‌‌‌इलेक्ट्रान क्या हैं दैनिक लाइफ के अंदर

दोस्तों हम इलेक्ट्रान को देख नहीं सकते हैं। लेकिन महसूस कर सकते हैं। क्या आपने अद्र्वचालक सुचालक और कुचालक का नाम सुना है। यदि आपने सुना है तो आपको पता होगा कि कुचालक वह पदार्थ होता है जिसके अंदर इलेक्ट्रान का प्रवाह नहीं होता है। जबकि सुचालक के ‌‌‌अंदर इलेक्ट्रान का प्रवाह होता है।

‌‌‌आप एक लौहे के सरिये को आग के पास लेकर जाएं और उसे कुछ समय तक गर्म करें । आप देंगे कि लौहे का एक सिरा गर्म होने के बाद दूसरा सिरा अपने आप ही गर्म हो जाता है। ऐसा क्यों होता है ? तो दोस्तों ऐसा होता है इलेक्ट्रान के फलो की वजह से ।‌‌‌लौहे के अंदर इलेक्ट्रान कम आकर्षण बल के द्वारा बंधे होते हैं और इस वजह से वे उर्जा लेकर लौहे के एक सीरे से दूसरे सीरे की ओर यात्रा करते हैं। लेकिन यदि आप एक लकड़ी को गर्म करेंगे तो उसके दूसरे सीरे के गर्म होने की दर बहुत ही कम होगी ।‌‌‌क्योंकि लकड़ी उष्मा का कोई अच्छा चालक नहीं है।

‌‌‌आपको यह जान लेना चाहिए कि हर चीज परमाणुओं से मिलकर बनी होती है। और परमाणु इलेक्ट्रान प्रोटोन और न्यट्रान से मिलकर बने होते हैं। कहने का मतलब है हर चीज के अंदर इलेक्ट्रान होते हैं।

इलेक्ट्रॉन बंधुता क्या है ?

इलेक्ट्रान बंधुता के अंदर कोई परमाणु एक इलेक्ट्रान को ग्रहण करता है और नगेटिव चार्ज हो जाता है। और उर्जा मुक्त करता है। सीधा अर्थ है कि जब एक उदासीन परमाणु पर एक इलेक्ट्रान प्रोटोनो की संख्या से अधिक हो जाता है तो वह नगेटिव चार्ज होता है।

‌‌‌इलेक्ट्रान कैसे काम करते हैं ?

दोस्तों एक नाभिक होता है। और उसके अंदर इलेक्ट्रान होते हैं। नाभिक पदार्थ के केंद्र मे स्थिति रहती है। जिस तरीके से सूर्य स्थिर रहता है। और नाभिक पर धनात्मक आवेश होता है। जबकि इलेक्ट्रोनों पर नगेटिव चार्ज होता है। नाभिक के पॉजिटिव चार्ज को इलेक्ट्रोनों ‌‌‌के द्वारा संतुलित किया जाता है। इलेक्ट्रान बल की वजह से नाभिक के चारो ओर चक्कर लगाते रहते हैं। और वे नाभिक से एक विशेष दूरी पर स्थिति होते हैं। हालांकि इलेक्ट्रोन को उससे अधिक उर्जा क्षेत्र मिल जाता है तो वह उस नाभिक के ऐरिया से मुक्त हो जाता है।

‌‌‌एक परमाणु के अंदर इलेक्ट्रान और प्रोटोन की संख्या समान होती है। मतलब प्रोटोन को धनात्मक आवेश वाले कण और इलेक्ट्रोन को नगेटिव चार्ज वाले कण के नाम से जाना जाता है। जब एक परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन की संख्या समान होती है तो परमाणु उदासीन होता है।‌‌‌मतलब उसके बाद वह किसी और के साथ बंध बनाने का इच्िछुक नहीं होता है।यदि एक परमाणु के पास एक इलेक्ट्रॉन कम हो जाता है तो उसके पास अधिक पॉजिटिव चार्ज हो जाता है। और इसके परिणाम स्वरूप वह अस्थिर हो जाता है।

‌‌‌यदि इसी तरीके से किसी परमाणु के पास 2 इलेक्ट्रॉन अधिक हो जाते हैं तो उसके पास नगेटिव चार्ज अधिक हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप भी परमाणु अस्थिर हो जाता है। ऐसी स्थिति के अंदर वह अधिक इलेक्ट्रोनों को छोड़ने का प्रयास करता रहता है। और यदि उसके पास इलेक्ट्रॉन की संख्या ‌‌‌कम है तो वह अधिक इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने की कोशिश करता रहता है। ‌‌‌यदि बात करें सोडियम की तो सोडियम के पास स्थाई होने के लिए 10 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। लेकिन उसके पास 11 इलेक्ट्रॉन हैं। इस वजह से सोडियम यह चाहता है कि उसका अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन कोई और लेले । ‌‌‌अब बात करे क्लोरीन की तो इसके पास 17 इलेक्ट्रान हैं और उसे एक इलेक्ट्रान की आवश्यकता है। यह एक इलेक्ट्रान सोडियम से लेलेगा और स्थाई उदासीन बन जाएगा ।

आयन के लक्षण

दोस्तों आपने आयन का नाम सुना होगा ।जब सोडियम एक इलेक्ट्रॉन खो देता है। तो वह एक आयन बन जाता है। वह तब एक पूर्ण सोडियम परमाणु नहीं कहलाता है। दोस्तों यह आयन तब भी बनता है जब एक इलेक्ट्रॉन अतिरिक्त हो जाता है। ‌‌‌सोडियम पर यदि नकारात्मक आवेश आ गया है तो यह नकारात्मक आवेश दूसरे आयनों को आकर्षित करेगा । मतलब जिनके पास अधिक धनात्मक आवेश है। और उनके साथ एक बंध बना लेगा ।

Electrovalence

Electrovalence का मतलब ऐसे परमाणुओं से है जोकि आयन बन गए हैं।यदि आप आवर्त सारणी को देखते हैं, तो आप नोटिस कर सकते हैं कि बाईं ओर के तत्व आमतौर पर सकारात्मक रूप से चार्ज किए गए आयन  हैं और दाईं ओर के तत्वों को नकारात्मक चार्ज  मिलता है। इसका मतलब है कि बाईं ओर एक सकारात्मक वैलेंस है और राइट साइड में एक नकारात्मक वैलेंस होता है।यह इन चीजों का माप है कि कौनसा तत्व अधिक से अधिक बंध बनाने को उत्सुक रहता है।

electrons की मदद से बिजली का प्रवाह होता है

दोस्तों आपने देखा होगा कि आपके और हमारे घरों के अंदर आने वाली बिजली एक स्थान से दूसरे स्थान पर कैसे आ जाती है? तो दोस्तों यह सब कुछ कमाल होता है इलेक्ट्रॉन का । आपको बतादें कि इलेक्ट्रॉन चार्ज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। ‌‌‌जब तारों पर उर्जा को लगाया जाता है तो इनके इलेक्ट्रोन के अंदर गति उत्पन्न होती है। और वे चार्ज को तेजी से आगे ट्रांसफर करने लग जाते हैं और जिस बंध के अंदर स्थिर होते हैं। वे इस बंध को छोड़ देते हैं। ऐसा सुचालक के मामले मे होता है।

‌‌‌इलेक्ट्रॉन नाभिक मे क्यों नहीं गिरता है ?

दोस्तों आपने पढ़ा होगा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर चक्कर लगाता है। लेकिन उसके बाद भी वह नाभिक के अंदर नहीं गिरता है। क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्यों नहीं होता है ? ‌‌‌19 वी शदी के अंदर यह पता चला की इलेक्ट्रॉन एक विधुतिए आवेशित कण है और यह त्वरण की वजह से विधुत चुम्बकिये तरंगे उत्सर्जित करता है।इस तरह से उसकी उर्जा के अंदर कमी हो जाती है। और एक समय ऐसा आता है जबकि इलेक्ट्रॉन नाभिक के अंदर गिर जाएगा और नाभिक सिकुड़ जाएगी ।

‌‌‌जैसे जैसे इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर जाता है। उसकी स्थितिज ऊर्जा के अंदर कमी आती जाती है। लेकिन ऐसी स्थिति के अंदर परमाणु की कुल उर्जा के अंदर कोई बदलाव नहीं होता है। परमाणु की कुल उर्जा वही रहती है। इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा मे कमी की आपूर्ति ‌‌‌उसकी गतिज उर्जा से होती है।जैसे ही इलेक्ट्रॉन नाभिक के नन्हे आयतन मे प्रवेश करता है। उसकी स्थितिज उर्जा कम हो जाती है और गतिज उर्जा बढ़ जाती है।लेकिन इन ऊर्जाओं मे कोई भी विजय नहीं हो पाता है। जिसके परिणाम स्वरूप इलेक्ट्रॉन नाभिक के अंदर नहीं गिर पाता है।

‌‌‌तो दोस्तों इलेक्ट्रॉन क्या होता है ? के बारे मे हमने विस्तार से जाना और पता किया कि इलेक्ट्रॉन काम कैसे करता है। यदि आपको यह लेख अच्छा लगा तो कमेंट करें बताएं।

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This post was last modified on May 8, 2019

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