सबसे सुखी पक्षी ज्ञानवर्धक और शिक्षा प्रद स्टोरी in hindi

सबसे सुखी पक्षी

एक कौवा जंगल के अंदर रहता था । वह पूरी तरह से संतुष्ट था । लेकिन उसने एक दिन एक हंस को देखा । हंस के श्वेत रूप को देखकर सोचने लगा कि मैं ही काला हूं । यह देखो कितना सुंदर है। वह हंस के पास गया और यह बात हंस को बताई तो हंस बोला –

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भाई पहले ‌‌‌मैं भी ऐसा ही सोचता था ।लेकिन जब से हमने तोते को देखा है। वह खूबसूरत रंग का पक्षी अवश्य ही संसार का सबसे अधिक सुखी पक्षी होगा । अब कौवा तोते के पास गया और उसे सारी बात बताई तब तोता बोला … मैं भी पहले खुद को खूबसूरत मानता था लेकिन जब से मैंने मोर को देखा है मुझे लग रहा है कि मोर मेरे से सुंदर ‌‌‌उसके बाद कौआ मोर से मिलने चला गया। वह मोर के पास पहुंचा और उसे सारी बात बताई तो मोर बोला पहले मैं ऐसा सोचता था कि मैंही दुनिया का सबसे खूबसूरत पक्षी हूं । लेकिन मेरी खूबसूरती की वजह से मेरे को लोग मारते हैं और पिंजरे के अंदर बंद रखते हैं। मेरे से खूबसूरत और सुखी आप हैं जो आजाद घूम रहे हैं।

‌‌‌सीख

दोस्तों यह कहानी कौवे और मौर की नहीं है । वरन यह कहानी हम लोगों की है। हम लोग भी ऐसा ही करते हैं । जिसके पास साईकिल है वह बाइक को देखकर दुखी होता है कि काश उसके पास ऐसी बाइक होती । बाइक वाले कार को देखकर दुखी हैं। कहने का मतलब है दुखी होना किसी प्रोब्लमस का सौल्यूसन नहीं है। ‌‌‌बस प्रयास करो वह हर समस्या का हल है।

‌‌‌खुद को बदलो दुनिया बदल जाएगी

बहुत प्राचीन समय की बात है एक राज्य के अंदर एक राजा अपने प्रदेश का भ्रमण करने के लिए निकला । उसको कहीं रस्त के अंदर चोट लग गई। तो महल मे आकर उसने सभी मंत्रियों को आदेश दिया कि प्रदेश की सारी सड़कों को अच्छी तरह से बनाया जाए उनके उपर संगमरमर लगाया जाए । राजा ‌‌‌के आदेश की अवहेलना करना किसी के बस की बात नहीं थी। और संगमरमर को सड़क पर लगाने मे बहुत सारा पैसा खर्च हो जाता । यही बात सोच कर एक मंत्री राजा के पास गया और बोला …. महाराज इस काम मे बहुत सारा खर्चा आएगा । यह सब करना हमारे राज्य के बस की बात नहीं है।लेकिन आप अपने लिये जूते बनाकर इस समस्या ‌‌‌से बच सकते हैं राजा को मंत्री का विचार पसंद आया ।

सीख

हम अपने अनुकूल चीजों को बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन हम खूद कभी बदलना नहीं चाहते हैं। यदि आप दुनिया को बदलना चाहते हैं तो पहले खुद को बदलना होगा ।

‌‌‌जिंदगी की रेत

एक किसान अपने बैल कको चराने के लिए कहीं पर ले जा रहा था । इसी बीच अचानक से उसका बैल कुंए के अंदर गिर गया । बैल बहुत रोया चीखा लेकिन बैल की सुनने वाले किसान को कुछ भी नहीं समझ मे आ रहा था कि वह क्या करें । किसान ने बैल को बाहर निकालने की कई तरकीब सोची लेकिन कोई तरकीब काम ‌‌‌नहीं आई। उसके बाद किसान ने बैल को कुए के अंदर ही जिंदगा गाड़ देने की सोची और अपने सारे रिश्तेदारों और गांव वालों को बुलाकर ले आया । सबने कुंए के अंदर रेत डालना चालू कर दिया । कुआ ज्यादा गहरा नहीं था । जब बैल ने रेत उपर गिरती देख देखा तो समझ गया । जोभी रेत उसके उपर गिरती वह उसको शरीर से ‌‌‌झिड़क देता और खुद उसके उपर आ जाता । इस प्रकार से धीरे धीरे वह कुए से बाहर आ गया ।

‌‌‌सीख

दोस्तों हमारी जिंदगी मे जैसा बैल के साथ हुआ था । वैसा ही होता है। जो इंसान अपनी परेशानियों के सामने अपने घुटने टेक देता है। वह इंसान कभी सफल नहीं हो पाता है। सोचो अगर बैल हार मान लेता तो वह जमीन के अंदर जिंदा दफन हो जाता ।

‌‌‌भेड़िया और मेमना

एक बार बहुत सारी बकरियां एक जंगल के अंदर घास चर रही थी । एक मेमना चरते चरते अपने झुंड से कामी दूर निकल गया । जब एक भेडिये की नजर उस मेमने पर पड़ी तो उसने उसको पकड़ लिया । मेमना पहले तो काफी डर गया लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया । वह मेमने से बोला …. मैं घास खाकर काफी ‌‌‌मोटा हो गया हूं । यदि तुम कुछ समय वेट करो तो मेरा सारा खाना पच जाएगा । और उसके बाद मुझे खाओगे तो मेरा खाना जल्दी पच जाएगा । भेडिया मान गया । कुछ देर बात मेमना बोला आप मरे गले मे बंधी घंटी बजाएं और मैं नाचूंगा तो मेरा खाना और भी जल्दी पच जाएगा ।

‌‌‌भेडिये ने ऐसा ही किया । और पास ही चारावाहे मेमने को तलास रहे थे । वे आ पहुंचे भेडिये को भगा दिया ।

सीख

इंसान का बल उतना महत्वपूर्ण नहीं होता है। जितना कि इंसान की बुद्वि तेज बुद्वि से हर संमस्या का हल संभव होता है।

‌‌‌गलतियों से सीख

जब एडिसन बल्ब के आविष्कार के अंदर बीजी थे। तो उन्होंने बल्ब बनाने की बहुत सारी कोशिशें कि किंतु कोई भी तरीका काम नहीं आ रहा था । वे 999 बार असफल हो चुके थे । उनके शिष्य भी थक हार चुके थे । काफी परेशान होने के बाद उनका एक शिष्य बोला

…. सर हमने इतनी मेहनत करने के बाद ‌‌‌भी असफल हो गए हैं। क्याकरें सर लगता है हमने गलत प्रोजेक्ट को हाथ मे लेलिया है।

तब एडिशन बोले …. नहीं हमने असफल होकर कोई गलती नहीं कि है। हम 999 ऐसे तत्वों को जानते हैं जो बल्ब बनाने मे काम नहीं आते हैं। और अब तो हमे और ही उम्मीद हो चुकी है कि हम कामयाब होके रहेंगे ।

‌‌‌सागर की मछलियां

एक बार समुद्र के अंदर काफी तेज तुफान आया और समुद्र की सारी मछलियों को तूफान ने बाहर फेंक दिया सारी मछलियां किनारे पड़ी पड़ी तड़पने लगी । एक बच्चा जो उनको तड़पता हुआ देख रहा था । उससे रहा नहीं गया और उसने एक एक करके मछलियों को तेजी से वापस पानी के अंदर फेंकना शूरू कर दिया।

‌‌‌उसकी मां ने बच्चे को ऐसा करते देख कर कहा … बेटा मछलियां बहुत सारी हैं। तुम्हारे एक एक मछली के पानी मे फेंकने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा तब बेटा बोला …. मां मानता हूं कि कोई फर्क नहीं पड़ेगा । लेकिन इनको तो बहुत फर्क पड़ेगा ।

‌‌‌सीख

छोटे छोटे प्रयास से ही बड़ी मिशाल कायम की जाता है। एक ईंट से ईंट जुड़कर ही कितनी बड़ी ईमारत बनती है। बूंद बूंद मिलकर ही घड़ा भरता है। कहने का मतलब है हमारा छोटा सा प्रयास भी दुनिया को बदल सकता है।

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