seema mishra ka jeevan parichay सीमा मिश्रा सक्सेस स्टोरी

सीमा मिश्रा का नाम सुनते ही आपके दिमाग मे एक मीठी ध्वनी और संगीत की याद आती है।सीमा मिश्रा आज पूरे भारत के अंदर राजस्थानी सिंगर के रूप मे काफी ज्यादा मसहूर हो चुकी है। सीमा मिश्रा के नाम को आज बच्चा बच्चा जानता है। ‌‌‌लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो कि सिमा मिश्रा को केवल नाम से जानते हैं। शक्ल से नहीं जानते हैं।

तो इसके पीछे भी बहुत बड़ी वजह है और वो यह है कि वे अपने गानों के अंदर बहुत ही कम बार दिखाई देती हैं। ‌‌‌पर कुछ भी हो यदि आपको शांत और सकून भरे गाने सुनने हैं तो आपको सिमा मिश्रा के गाने सुनने चाहिए । वाकाई मे उनके गाने का अंदाज काफी निराला है। आज भी लोग सीमा मिश्रा के सॉंग्स के उतने ही दिवाने हैं । जितने की काफी सालों पहले थे । ‌‌‌एक समय ऐसा भी था ।जब हरियाणवी सॉंग कोई ज्यादा हिट नहीं हुआ करते थे । तो लगभग हर जगह पर ही सिमा मिश्रा के गानें ही चला करते थे । ‌‌‌सीमा जी के गानों के अंदर राजस्थानी संस्कृति और सभ्यता की अनोखी झलक मिलती है।

seema mishra ka jeevan parichay
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उनका जन्म 3 नवंबर, 1976 को राजस्थान बिसाऊ के झुंझनू जिले के अंदर हुआ था। उस समय कोई नहीं जानता था।। कि सीमा मिश्रा एक दिन  पूरे देश के अंदर अपना नाम रोशन करेगी । लेकिन समय के साथ वे अभियास करती गई और उनकी संगीत के अंदर रूचि थी तो उनको उनका मुकाम भी मिल गया ।

‌‌‌सीमा मिश्रा का पारिवारिक जीवन

सीमा मिश्रा की आठ क्लाश तक पढ़ाई कोटा के अंदर हुई। क्योंकि उनके पिता की जॉब कोटा के अंदर थी। उनके पिता का नाम शांतिकुमार मिश्रा था। जिनका देहांत हो चुका है। और उनकी माता का नाम लक्ष्मी मिश्रा है।सीमा मिश्रा ने एक इंटरव्यू के अंदर बताया कि हम लोग 5 बहन भाई हैं। इनकी सबसे बड़ी बहन वंदना है। उसके बाद भाई राजीव उसके बाद आती है सीमा मिश्रा व विजय मिश्रा ,यश मिश्रा हैं। ‌‌‌उनके दादाजी का नाम गजानन्द मिश्रा है।

सीमा मिश्रा का शैक्षणिक जीवन

सीमा मिश्रा ने 8 क्लाश तक कोटा के अंदर पढ़ाई की । उसके बाद अपने पिता की जॉब छूटने के बाद वे रामगढ़ आ गई। और आगे की पढ़ाई वहां पर हुई। सन 1995 के अंदर वे जयपुर चली गई। यहां आने के बाद उनकी पढ़ाई छूट सी गई। सीमा मिश्रा ने बताया कि उनका पढ़ने मे मन नहीं था। जब भी संगीत का कोई कार्यक्रम होता था। तो वे जरूर जाती थी। कुल मिलकार कर उन्होंने 1ईयर के अंदर ही पढ़ाई को छोड़ दिया था।

सीमा मिश्रा का वैवाहिक जीवन

सीमा मिश्रा के पति का नाम रामवतार शर्मा । बड़ी बेटी शुभांगी 14साल की है। छोटी बेटी प्राची 7 साल की है।  उनके ससुर जी का नाम दामोदर शर्मा है। और उनके पति अंजता ग्रुप के अंदर मैनेजर के पद पर काम करते हैं। सीमा जी ने बताया कि उनकी शादी अरैंज मैरीज ही था। जो बाद मे लव ‌‌‌मैरिज के अंदर कन्वर्ट होगई ।

‌‌‌पसंदिदा फिल्मे और कलाकार

सीमा जी ने बताया कि वे फिल्मे तो बहुत अधिक देखती हैं। लेकिन उनको आज की तरह की फिल्मे पसंद नहीं हैं। उनको पारिवारिक फिल्मे ज्यादा पसंद हैं। जैसे कुछ कुछ होता है। कलाकारों के अंदर उनको लता मंगेशकर है। नए एक्टर के अंदर कॉजोल और माधुरी दिक्षित । इसके अलावा ‌‌‌ उनको सलमान खान और शारूखान की मूवी भी पसंद हैं।

‌‌‌खाने पीने की पसंदीदा चीजें

  • पानी पूरी
  • फार्स्ट फूड इनको पसंद हैं।
  • कचोरी
  • काजूं कतली

‌‌‌ ‌‌‌खाना बनाना बिल्कुल भी पसंद नहीं

मजाक मजाक के अंदर सीमा मिश्रा ने बताया कि उनको कुकिंग करना पसंद नहीं है। क्योंकि यह एक बोरिंग काम है। हालांकि वे अपने परिवार के सब लोगों के लिए खाना बनाती हैं। लेकिन उनको यह काम बस बे मन से ही करना पड़ता है।

गाने की शूरूआत कैसे हुई

सीमा मिश्रा ने बताया की गाना उनके परिवार से उनको मिला है। उनके दादाजी , पिताजी और मांसी भी बहुत अच्छा गाती थी। इनके नानाजी भी एक अच्छा लेखक थे । और अच्छा गाते थे । उन्होंने गाना अपनी मां से सीखा था। इसके अलावा वे कम्पीटिशन के अंदर भी भाग लेती थी। ‌‌‌इसके अलाव उन्होंने लता जी के गाने को सुन सुन कर सीखा था। ‌‌‌कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सीमा मिश्रा को बचपन से ही संगीतकार बनने का शौक था। और संगीत के लिए वे स्कूल से बंक भी मार लेती थी। निरंतर अभियास के बाद वे धीरे धीरे चीजों को सीखती चली गई। और एक सुपर गायक कलाकार बन गई।

सीमा मिश्रा का पहला ओडियो केसिट

आजकल ओडियो कैसिट बंद हो चुका है। क्योंकि लोग नेट पर से ही गाने सुन लेते हैं। और वहीं से ही गाने डाउनलोड कर लेते हैं। सीमा मिश्रा का सबसे पहला ओडियो कैसिट सन 1993 के अंदर फतेहपूर के दो जांटी बालाजी का निकला था। वह काफी पसंद किया गया । और इससे सीमा मिश्रा को आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली। ‌‌‌यह गाना था आओ बालाजी मम्हारे आंगणे । सीमा ने हिंदी राजस्थानी आदि गाने गए हैं। सीमा जी को खड़ी नीम के नीचे गाना बहुत पसंद है। और उनके फेंस को सबसे ज्यादा पसंद हैं। चांद चढयो गिगनार , ‌‌‌वीणा कैसिट का सबसे पहला एलबम यही था।

सीमा मिश्रा काफी समय तक स्टेज शो करती रही थी। और उनको काफी बाद मे कामयाबी मिली थी। स्टेज शो के दौरान उनके अनेक भजन और गाने काफी लोगों के द्वारा पसंद किये गए । इसी दौरान उनकी भेंट निर्मल मिश्रा के साथ हुई जो उनको वीणा कम्पनी के मालिक के पास लेकर गए । उसी समय के बाद सीमा मिश्रा वीणा कम्पनी के ‌‌‌साथ जुड़ गई।

‌‌‌वीणा म्यूजिक कम्पनी और इसके एलबंम

वीणा म्यूजिक कम्पनी  का प्रमुख उदेश्य राजस्थानी कल्चर को बनाए रखना है। अब तक वीणा म्यूजिक कम्पनी ने राजस्थानी कल्चर और भाषा पर अनेक बेहतरीन सॉंग दिये हैं। कुछ खास एलबंम जो सीमा जी के हैं।

  • Gorband
  • घूमर (4 भाग)
  • बलम छोटो तो
  • कुवे पार एकाली (2 भाग)
  • चुड़ी चमके

seema mishra award

अब तक seema mishra ने अपने नाम कई सारे आवार्ड भी किये हैं। उनकी अच्छी प्रफोर्मेंस की वजह से सम्मानित किया जा चुका है।

  • झुंझुनू नगर कला मंच- राजस्थान कोकिला 2002
  • दैनिक जागरण 2002 की जर्नलिज्म एसोसिएशन,
  • सुर संगम (मास्टर मदन मोहन नेशनल सुगम 1993, संगीत प्रतियोगिता-डीजी सिविल डिफेंस -राजस्थान-प्रशस्ति पत्र + गोल्ड मेडल -2000)
  •  घुमार प्लैटिनम डिस्क अवार्ड
  • श्री रूप रामका लोकजीत पुरस्कार 2005)

‌‌‌आवार्ड के बारे मे अधिक जानकारी के लिए आप निम्न वेब पर जा सकते हैं।

सीमा मिश्रा के विचार और थॉटस

अब तक हमने सीमा मिश्रा के जीवन परिचय के बारे मे जाना । तो आइए अब यह जान लेते हैं कि सिमा मिश्रा  ‌‌‌के

‌‌‌जीवन परिचय से हमे क्या संदेश मिलता है। और इस संबंध मे सीमा मिश्रा   युवाओं को क्या कहना चाहती है ?

‌‌‌———रिमिक्स और फयूजन ठीक नहीं है।यह संगीत की आत्मा के साथ खिलवाड़ जैसा है । संगीत के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।राजस्थानी गीत और संगीत मेरी आत्मा है मेरे प्राण बसते हैं इसमे ।लोगों ने मुझे अपना प्यार दिया इसके लिए मैं आभारी हूं ।शेखावाटी के आंचल के अंदर सैंकड़ो सीमा मिश्रा हैं। बस उन्हें अवसर की जरूरत है।

जीव ‌‌‌अपना लक्ष्य एक रखो

मिडिया को दिए गए एक इंटरव्यू के अंदर सीमा मिश्रा  ने खुद यह बताया था। कि जब वे आठ साल की थी तब भी उनकी गाने के अंदर रूचि थी। और बड़ी होने के साथ ही यह बढ़ती चली गई। पढ़ने के अंदर उनका मन नहीं था। कुल मिलाकर उनका यह कहना था। कि यदि किसी इंसान को सफल होना है तो अपना लक्ष्य ‌‌‌एक ही रखना होगा । जो लोग बार बार अपना लक्ष्य बदलते हैं। वे कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं।

‌‌‌निरंतर प्रयास और मेहनत करते रहो

सीमा मिश्रा आज जिस मुकाम पर है। वह ऐसे ही हाशिल नहीं हुई है। वरन यह सब उनकी मेहनत का ही परिणाम है। सीमा मिश्रा  पहले मात्र स्टेज पर ही गाती थी। लेकिन वीणा कम्पनी ने उनको आमंत्रण दिया था। ‌‌‌यह सब उनकी मेहनत का ही नतीजा था।

‌‌‌अपनी रूचि को इग्नोर ना करें

इंटरव्यू के अंदर  सीमा मिश्रा ने इस बात पर जोर देकर कहा कि अपनी रूचि को इग्नोर नहीं करना चाहिए। अपने मन से सोचे की आप लाइफ के अंदर क्या करना चाहते हैं ? यदि आप का मन डॉक्टर बनने को कर रहा है तो संगीत के क्षेत्र मे ना आएं । क्योंकि ऐसा करके आप कभी भी सफल नहीं ‌‌‌नहीं हो सकते हैं।मतलब जिस वर्क के अंदर आपकी रूचि है। वही काम करें तो अच्छा होगा ।

seema mishra ka jeevan parichay पर एक संक्षिप्त नजर

‌‌‌शेखावाटी की बेटी और दौसा की बहू सीमा अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। सब लोग उन्हें जानते हैं।उनका विवाह सन 2002 के अंदर रामवतार शर्मा के साथ हुआ था। विवाह के बाद उनको अपने  पति का पूरा सहयोग मिला और जिसकी वजह से वे नई उंचाइयों को छू सकी । ‌‌‌उनके द्वारा रिलीज किये गए एलबम घूमर के 4 भागों की पूरी सफलता के बाद उनको जयपुर के अंदर कोकिला सम्मान से नवाजा गया था।सन 2003 के अंदर उनको भारत व्यास आवार्ड से सम्मानित भी किया गया था। ‌‌‌1976 ई के अंदर बिसाउ के अंदर जन्म होने के बाद मात्र 11 साल की उम्र मे ही उन्होंने गाना र्स्टाट कर दिया था।  उनके भाई राजीव भी गीत लिखा करते थे । वे भी उनका पूरा सहयोग करते थे ।

‌‌‌1993 के अंदर जवाहरकला केंद्र जयपुर के अंदर आयोजित प्रतियोगिता मे सीमा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

‌‌‌1995 के अंदर वह जयपूर के अंदर मामा के यहां पर आगई। जहां पर वे कई बड़े शहरों के अंदर राणी सती ,सालासर बालाजी आदि पर भजन गए ।और सन 2000 ई के अंदर वीणा की तरफ से उनको गाने का अवसर मिला । बस उसके बाद वे पूरे भारत के अंदर फेमस हो गई। ‌‌‌आज उनके लगभग 40 कैसिट बाजार के अंदर हैं।

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