मौत का कुआ मे कैसे चलती हैं कार और बाइक जानिए पूरा रहस्य death well working principle

 

मौत का ‌‌‌कुआं जिसके बारे मे आपने बखूबी सुना ही होगा । मौत का ‌‌‌कुआं एक इस प्रकार का ‌‌‌कुआं होता है जिसकी दिवारें बांस आदि से बनी होती हैं । वैसे ‌‌‌मौत का ‌‌‌कुआं ज्यादा गहरा नहीं होता है। यह 20 से 26 फीट का होता है और व्यास 11 मीटर के लगभग होता है। आपने मौत का ‌‌‌कुआं गेम के अंदर देखा होंगा । जब आप कहीं पर ‌‌‌मेले मे गए होंगे । आपको यह देखकर आश्चर्य हुआ होगा कि इसके अंदर चलने वाली कार और बाइक बड़ी आसानी से खड़ी दीवार पर कैसे चल लेती हैं ? और बाइकर और कार बड़ी तेंज स्पीड से मौत के कुए के अंदर कैसे चलती हैं ?

‌‌‌ऐसा नहीं है की मौत के ‌‌‌कुआं का यह गेम केवल भारत के अंदर ही खेला जाता हो । वरन इस गेम को अमेरिका जर्मनी आदि देशों के अंदर भी खेला जाता है।

‌‌‌वैसे देखा जाए तो इस स्टंट को करना उन लोगों के लिए ज्यादा मुश्किल होता है। जिसका इस मामले मे कोई अभियास नहीं होता है। और यह कोई जादू नहीं है। बस एक तरह की कला है। जिसको कोई भी अभियास करके कर सकता है। लेकिन इसमे मौत का खतरा भी सबसे ज्यादा है। यदि बीच मे कहीं भी बाइक रूक कई तो हो सकता है ‌‌‌आप सीधे नीचे आएं ।

‌‌‌मौत का कुआ और विज्ञान

कहीं ना कहीं इसमे बाइकर की प्रतिभा भी होती है। लेकिन इसमे विज्ञान के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। जब कोई व्यक्ति किसी खड़ी दीवार पर बाइक चलाता है तो इसमे कई सारे बल काम करते हैं। गुरूत्वाकर्षण बल जो बाइक को नीचे की और खींचता है। और घर्षण बल जो कि गुरूत्वाकर्षण ‌‌‌बल के विपरीत दिसा के अंदर लगता है। व एक समान्य प्रतिक्रिया बल होता है। जिससे बाइक आगे की ओर चलती है।संक्षेप में, दो बलों, गुरुत्वाकर्षण बल और घर्षण की शक्ति, विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं और एक दूसरे की भरपाई करते हैं, जबकि दीवार से सामान्य प्रतिक्रिया होती है जो बाइक को चलती रहती है

हालांकि, यह आसान नहीं है बाइक के टायर पर लगाए गए घर्षण बल बाइक की गति पर निर्भर करता है क्योंकि यह मंडली के साथ चलता है। इसका मतलब यह है कि मोटर की न्यूनतम गति होनी चाहिए जो अधिकतम घर्षण शक्ति का उत्पादन करती है, गुरुत्वाकर्षण बल को प्रभावी रूप से संतुलित कर देती है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक है, तो बाइक नीचे गिर जाएगी और सवार गिर जाएगा। तेज गति के रूप में घर्षण अधिक हो जाता है, लेकिन बढ़ती गति के साथ, सवार के लिए सुरक्षित रूप से वाहन चलाने के लिए यह और अधिक कठिन हो जाता है

 

‌‌‌मौत के ‌‌‌कुआं मे गाड़ी कैसे चला पाते हैं ?

दोस्तों मौत के कुए के अंदर गाड़ी और बाइक चलाना हर किसी के बस की बात नहीं होती हैं। मैं आपको बतादूं कि मौत का कुआ कोई ट्रिक नहीं है। जिसको आप एक पल मे सीखकर मौत के कुए के अंदर गाड़ी दौड़ादें । इसके अंदर गाड़ी चलाने के लिए आपको कई सालों का अनुभव चाहिए

‌‌‌होता है। और केवल अनुभव से ही काम नहीं चलता है आपको खूब प्रेटिस भी करनी पड़ती है। इस कुए मे गाड़ी चलाने के लिए उसकी स्पीड को भी मेंटेन रखना होता है। यही कोई 60 से 70 के आस पास नहीं तो आप नीचे गिर सकते हैं।

 

‌‌‌इसक काम मे रिस्क बहुत ज्यादा

मौत के कुए के अंदर गाड़ी चलाने वाले लोग यह बताते हैं कि यह काम बहुत ज्यादा रिस्की होता है। थोड़ी सी भी लापरवाही से इसेमे बड़ा हादसा हो सकता है। यदि चालक की नजर भी गड़बड़ हो गयी हो । या बइक की चैन उतर गई हो या उसका कोई नट बोल्ट ल्यूज हो गया हो । ‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर सवार नीचे गिर सकता है और उसकी मौत हो सकती है।

‌‌‌ऐसा नहीं है कि मौत के कुए के अंदर काम करने वाले लोगों के साथ एक्सीडेंट ना होते हों । महाराष्ट्र के कल्याणपूर के अंदर एक बड़ा हादसा हुआ था । इसमे दो लड़की कार के अंदर स्टंट कर रही थी कि एक लड़की का पैर पिसलकर उपर बांस की लकडी के अंदर फंस गया । और लड़की मौत के कुए के अंदर लटक गई।

‌‌‌आपको बतादें की मौत के कुए के अंदर चलने वाली बाइक और कार अचानक से रूक नहीं सकती । यदि उन्होने ऐसा किया तो वे खुद मौत के मुंह के अंदर समा जाएंगी । उसी कुए के अंदर चलने वाली कार ने लड़की को एक जोरदार टक्कर मार दी और वह जमीन पर आ गिरी ।

‌‌‌फाईनली तौर पर कहें तो मौत का कुआ के अंदर बाइक चलाना मौत से खेलने के बराबर है।

This post was last modified on November 7, 2018

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