प्रेम या love kya hai ? प्यार की 10 परिभाषाएं

प्यार शब्द वैसे देखा जाए तो बहुत अधिक व्यापक शब्द है। और इसको किसी एक तरीके से या किसी एक परीभाषा से परिभाषित करना संभव नहीं है।  कहा जाता है कि प्यार एक खूबसूरत एहसास होता है। एक फिलिंग होती है जब हम किसी से प्यार करने लग जाते हैं। तो अचानक ‌‌‌से वह इंसान हमको अच्छा लगने लग जाता है। हम उसके प्रति पूरूी तरह से सकारात्मक हो जाते हैं।

यदि वह इंसान भी हमसे प्यार करता है। तो सेम उसके अंदर भी ऐसा ही होता है। वैसे पहले प्यार के बारे मे यह  कहा जाता है कि उसे भूलाना आसान नहीं होता है। क्योंकि पहला प्यार इस वजह से भूलाना आसान नहीं होता ‌‌‌क्योंकि वह सबसे पहले हमारे दिल के अंदर अच्छी फिलिंग पैदा करता है। आपको बतादें कि प्यार का यह खूबसूरत एहसास करवाने के लिए हमारे दिमाग के अंदर डोपामाइन हार्मोन स्त्रावित होता है। जो विशेष कर परिकल्पनात्म आनंद को बढ़ाने का काम करता है।

‌‌‌आमतौर पर प्यार क्या होता है ? और इसे परिभाषित करना काफी जटिल इस वजह से हो जाता है क्योंकि यह किसी एक रूप मे नहीं होता है।  और इस वजह से इसको किसी एक परिभाषा के अंदर नहीं बांधा जा सकता है। प्यार के अंदर कई सारी चीजें शामिल होती हैं। ‌‌‌यदि हम यह कहें कि प्यार एक फीजिकल अट्रैक्सन है तो हर प्यार के अंदर फीजिकल अट्रेक्सन मौजूद हो जरूरी नहीं ।

जैसे भाई बहन का प्यार । यदि हम यह कहें कि प्यार एक जनून है तो भी हर प्यार के क्षेत्र को यह परिभाषा कवर नहीं कर पाएगी । यदि हम यह कहें कि प्यार एक अच्छी फिलिंगस है तो शायद ‌‌‌यह प्यार के एक बड़े क्षेत्र को कवर कार पाएगी । लेकिन फिर भी पूरे क्षेत्र को कवर करने मे असमर्थ है। मतलब प्यार कि कई परिभाषाएं हैं। हम सभी को आपको बताने की कोशिश करेंगे । ताकि आप आसानी से समझ सकें कि प्यार क्या है ?

‌‌‌प्यार क्या होता है love kya hai ?

‌‌‌वैसे देखा जाए तो प्यार एक खूबसूरत एहसास है । और यह एहसास जिसकी वजह से पैदा होता है। उसके लिए यह कहा जाता है कि हम उससे प्यार करते हैं। खूबसूरत एहसास वास्तव मे एक अलग प्रकार की फीलिंगस होती है। जरूरी नहीं है कि यह फिलिंगस आप किसी लड़की से प्यार करें तो ही पैदा होती हो । लेकिन यदि आप‌‌‌किसी अन्य चीज से प्रेम करते हैं तो भी इस तरह की फिलिंग पैदा हो सकती है। लेकिन आमतौर पर यह देखा गया है कि प्यार के अंदर जो फिलिंग पैदा होती हैं। वह काफी मजबूत होती हैं। दूसरे प्रकार की फिलिंग की  तुलना मे ।

‌‌‌‌‌‌प्यार क्या है ? प्यार एक नशा है

कुछ लोग कहते हैं कि प्यार एक नशा होता है। उनका कहना भी बिल्कुल सही है । प्यार एक नसा होता है। जिस तरह से हम नशा करते हैं। उसकी तलब लगती है। उसी तरह से प्यार की भी इंसान को लत लग जाती है। प्यार एक नशा होता है। यदि किसी इंसान को यह नशा चढ़ जाता है तो इससे छुटकारा पाना ‌‌‌आसान नहीं होता है। जिस तरह से इंसान नशा करने के बाद पागल सा फिरता है। उसी प्रकार से प्यार का नशा भी इंसान को पागल बना देता है। प्यार हो जाने के बाद इंसान केवल दिन और रात अपने प्रेमी के बारे मे ही सोचता रहता है। उसे और कुछ नहीं दिखाई देता है। दिखाई देता है तो सिर्फ प्रेमी ।‌‌‌जिस तरह से इंसान नशा करने के बाद बेसुध सा हो जाता है। प्यार का नशा भी इंसान को बेसुध बना देता है।

‌‌‌‌‌‌प्यार क्या है ? प्यार एक जनून है

अगर हम यह  कहें कि प्यार एक जनून है तो कोई गलत नहीं होगा । क्योंकि प्यार के अंदर भी जनून होता है। जब हमको किसी से सच्चा प्यार हो जाता है । तो हम उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। आपने देखा और सुना होगा कि अमुख लड़के  या लड़की ने अपने घरवालों को का कत्ल ‌‌‌कर दिया क्योंकि वे उसकी शादी के खिलाफ थे । प्रेमी प्रेमिका ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया । यह चीजें साबित करने के लिए काफी हैं कि प्यार के अंदर इंसान बहुत हद तक जनूनी हो जाता है। एक बार प्यार हो जाने के बाद वह उसे पाने के लिए कुछ भी कर सकता है। यही जनून है।

‌‌‌प्यार एक फीजिकल अट्रेक्सन है

आप इस बात को जानते ही होंगे कि  जब हम किसी के साथ प्यार करते हैं। तो हम उसकी तरफ फिजिकली रूप से अट्रेक्ट हो जाते हैं। मैं यदि यह कहूं कि 99 प्रतिशत लोगों का प्यार सिर्फ एक फीजिकल अट्रेक्सन है ।

तो कोई गलत नहीं होगा । क्योंकि बिना फिजिकल अट्रेसन के ‌‌‌प्यार होना संभव नहीं है। यदि हम दो लड़के और लड़कियों के बीच की बात करें तो । ‌‌‌और सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्यार मे फीजिकल अट्रेक्सन होता क्यों है ? तो आपको बतादें कि यदि प्यार के अंदर फीजिकल अट्रेक्सन ही नहीं होगा तो भगवान का प्यार जैसी चीज बनाने का कोई फायदा नहीं होगा । यदि आप किसी से प्यार करते हैं और उसके अंदर फीजिकल अट्रेक्सन नहीं है तो इसका मतलब वह

‌‌‌प्यार तो हो सकता है। लेकिन सामान्य प्रेम है । ‌‌‌फीजिकल अट्रेक्सन का मतलब है। आप किसी लड़के या लड़की की खूबसूरती उसके चेहरे और उसे सेक्सुअली रूप से पसंद करते हैं।

‌‌‌‌‌‌प्यार क्या है ? प्यार एक परिकल्पनात्मक आनन्द भी है

आपको बतादें कि प्यार के अंदर हमार दिमाग जो आनन्द महसूस करता है। वह बहुत ज्यादा होता है। जब हमको किसी से प्यार हो जाता है तो हम अपने लवर के बारे मे सोच सोच कर बहुत ज्यादा खुश होते रहते हैं। मतलब हम प्यार मे पड़ने के बाद कल्पनाओं मे अधिक जीते हैं। ‌‌‌जैसे आप सोचते हैं कि आपका लवर आएगा आप उससे यह कहेंगे वो कहेंगे ।

पार्टी के अंदर जाएंगे । मतलब ऐसी हजारों तरह की कल्पनाएं आप करने लगते हैं। और उन कल्पनाओं की वजह से आपको आनन्द मिलता जाता है। आप का प्यार जब तक जिंदा है आप इन कल्पनाओं से बोर बिल्कुल भी नहीं होते हैं। और ‌‌‌प्यार के अंदर पड़ने के बाद लोग ऐसी ऐसी कल्पनाएं कर लेते हैं जिनके कोई हाथ पैर नहीं होते हैं। और बाद मे जब प्यार का नशा उतर जाता है तो उन कल्पनाओं को सोच कर ही हंसी आती है।

 

love kya hai love is chemistry ‌‌‌प्यार क्या है ? प्यार एक रसायन है

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, प्यार एक शक्तिशाली और स्थायी तंत्रिका संबंधी स्थिति है। ऐसा कुछ नहीं है कि आप इसको नियंत्रित कर सकें ।यदि प्यार और वासना की बात करें तो वासना के अंदर दिमाग मे टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का अधिक पैदा होना है। यह कुछ समय के लिए होता है। उसके बाद इंसान सामान्य ‌‌‌स्थिति के अंदर आ जाता है। इसके अलावा यदि आप किसी से सच्चा प्यार करते हैं तो आपको अलग ही एहसास होगा क्योंकि ऐसी स्थिति के अंदर आपका दिमाग रसायनों का एक पूरा सेट जारी करता है।

‌‌‌प्यार क्या है ? LOVE IS COMPATIBILITY

यदि हम यह कहें की प्यार एक संगतता है तो इसमे कोई बुराई नहीं है। यदि आप किसी लड़की या लड़के से प्यार करते हैं तो इसका अर्थ है कि आपके विचार या आप जो चाहते हैं। वह सब कुछ उस लड़की के अंदर या लड़के के अंदर है। मतलब आपका प्रेमी आपकी ख्वाईस को पूरा कर सकता है। ‌‌‌संगतता का अर्थ है कि आप जिससे प्यार करते हैं उसकी रूचियां विचार हाव भाव और रहन सहन वैगरह मे से कुछ चीजे ऐसी हैं जिनको आप स्पोर्ट करते हैं। मतलब पसंद करते हैं। यदि प्यार के अंदर से संगतता समाप्त हो जाती है। तो प्यार भी समाप्त हो जाता है। सो प्यार के अंदर संगतता अवश्य ही होती है। बिना ‌‌‌संगतता के प्यार होना संभव नहीं है।

‌‌‌ love kya hai दुनिया को आगे बढ़ाने का जरिया है

क्या आपने कभी इस बात पर सोचा है कि भगवान ने प्यार और फिजिकल रिलेशन को इतना आनन्ददायक क्यों बनाया है? मेरे पास इसका एक सीधा सा जवाब है। और वो यह है कि उसने प्यार जैसी चीज को इस वजह से बनाया है ताकि दुनिया को आगे बढ़ाया जा सके ।

‌‌‌मतलब प्यार बनाने का उसका एक ही मकसद है दुनिया को आगे बढ़ाना । यदि उसका यह मकसद ही नहीं होता तो जरा सोचो प्यार के अंदर इतना आनन्द देने की क्या आवश्यकता थी । वह प्यार को सूखा भी तो बना सकता था ।‌‌‌क्या आपने कभी सोचा है कि हम लोग बार बार सेक्स ही क्यों करते हैं। और हर वक्त करना चाहते हैं ? हम हर वक्त और कोई काम जैसे तेज दौड़ना तो नहीं चाहते हैं ? क्योंकि हम आनन्द लेना चाहते हैं। यही आनन्द दुनिया को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी था ।

‌‌‌अमेरिका के अंदर 88 प्रतिशत लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि उन्होंने शादी इस वजह से की क्योंकि उनको प्यार हो गया था । मतलब प्यार होना और शादी करना और फिर दुनिया को आगे बढ़ाना बस यह प्यार का अंतिम मकसद है।

‌‌‌लव एक रिस्पेक्ट है

आपको बतादें कि जब हम किसी बड़े से प्यार करते हैं।  जैसे अपने माता पिता से प्यार तो वहां पर प्यार का अर्थ एक रिस्पेक्ट हो जाता है। मतलब वहां पर हमारे प्यार का अर्थ सेवा भाव आदर से जुड़ जाता है। मतलब प्यार शब्द वही है। लेकिन संदर्भ बदल गया तो उसकी परिभाषा भी बदल ‌‌‌गई। हालांकि पति पत्नी वाले प्यार के अंदर भी रिस्पेक्ट होता है। लेकिन उसके अंदर फिजिकल अट्रेक्सन होता है। जो इसमे नहीं होता है।‌‌‌आप अपने बड़े भाई बहन से प्यार करते हैं तो यह एक रिस्पेक्ट है। जोकि दूसरे प्रकार के प्यार से बहुत अलग है।

‌‌‌प्यार एक अपनत्व भी है

जब आप अपने छोटे भाई या बहन से प्यार करते हैं तो इसका मतलब है अपनत्व । इसके अलावा आप उनको कुछ भी लाकर देते हैं। या उनके लिए आप जो कुछ भी करते हैं । वह अपनत्व होता है। यह प्यार दूसरे प्रकार के प्यार से सर्वथा अलग होता है। इसमे आप अपने से आयु मे छोटों के लिए कुछ फिलिंगस ‌‌‌रखते हैं।

‌‌‌प्यार शब्द को परिभाषित करने के लिए हमने उपर जो परिभाषाएं दी हैं वो काफी कम हैं और प्यार का दायरा तो इससे भी बड़ा होता है। पति पत्नी का प्यार या प्रेमी प्रेमिका का प्यार दूसरे प्यार से काफी अलग होता है। और सबसे महत्वपूर्ण तो यही है। क्योंकि इसके अंदर बहुत सी चीजें होती हैं। ‌‌‌जैसे यह आपको सबसे ज्यादा आनन्द देता है , यह आपको सबसे ज्यादा खुश रख सकता है । यही वजह है कि यदि कोई इस प्यार के अंदर पड़ जाता है तो उसका इससे निकलने का मन नहीं करता है। और वो यह चाहने लगता है कि काश यह दिन हमेशा रहें ।

‌‌‌प्यार एक दयाभाव भी है

पालतू जानवरों पर दया करना भी एक प्रेम है। आप अपने पालतू कुत्ते का ख्याल रखते हैं और उसे हमेशा खुश रखने की कोशिश करते हैं आपका यह पशु प्रेम एक तरह का दया भाव है। क्योंकि आप अपने पालतू कुत्ते को पसंद करते हैं। उसके प्रति दया रखते हैं।

‌‌‌लवर का प्यार

अच्छी फिलिंगस ,फिजिकल अट्रेक्सन, रिस्पेक्ट, परिकल्पनात्मक आनन्द इसके अलावा और भी बहुत सी चीजें होती हैं। लेकिन यह मुख्य हैं। बिन फीजिकल अट्रेक्सन के आप अपने लवर से लव नहीं कर सकते । फिलिंग तो ऐसे मे जरूर होती हैं। और आनन्द के बिना तो प्यार हो ही नहीं सकता ।

‌‌‌रिस्पेक्ट लव

इसके अंदर कुछ चीजे शामिल होती हैं। अपने से बड़ों के प्रति आदर और सेवा भाव जब आप किसी के साथ रखते हैं तो वह एक रिस्पेक्ट लव होता है। याद रखें रिस्पेक्ट लव के अंदर किसी तरह की कामवासना वैगरह नहीं होता है। और यह परिकल्पनात्मक आनन्द को नहीं जगाता है।

अपनत्व love

जैसा माता पिता अपने पुत्र के प्रति जो अपनत्व रखते हैं। मां जो अपनी संतान के प्रति ममता रखती है वह अपनत्व लव है। या जिसको हम संतान प्रेम कह सकते हैं। जोकि पुत्र के हितो से जुड़ा हुआ होता है। यह प्यार दूसरे प्रकार के प्यार से अलग होता है।

Love kya hai ? ‌‌‌प्यार क्या होता है? प्यार की सभी परिभाषाओं के बारे मे हमने इस लेख के अंदर जाना । यदि लेख आपको समझने मे समस्या आ रही है तो नीचे कमेंट करें ।

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