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    Home»Uncategorized»मरने के बाद देहदान कैसे करें ? देहदान करने की प्रोसेस
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    मरने के बाद देहदान कैसे करें ? देहदान करने की प्रोसेस

    arif khanBy arif khanMarch 28, 2019No Comments12 Mins Read
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    दान कैसे करें
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    दोस्तों दुनिया के अंदर सबसे बड़ा दान होता है। अंगदान यदि आप चाहते हैं कि मरने के बाद आपके अंग किसी के काम आएं तो आप अंगदान कर सकते हैं। इसके अलावा यदि आप चाहें तो मरने के बाद अपनी देहदान भी कर सकते हैं। ‌‌‌यह भी किसी भले के लिए ही होती है। आमतौर पर जो देह दान के अंदर दी जाती है। उसको बड़े बड़े रिसर्च इंस्टयूट अपने यहां पर रख लेते हैं। और इन पर रिसर्च किया जाता है। लेकिन सच तो यह है कि आज भी बहुत कम लोग देह दान करते हैं।

    ‌‌‌वैसे भारत के अंदर देहदान के बारे मे ज्यादा लोग नहीं जानते हैं। बस इस वजह से भी देहदान नहीं कर पाते हैं। इस लेख के अंदर हम आपको विस्तार से बताने वाले हैं कि आप मरने के बाद अपनी देह दान कैसे कर सकते हैं ?

    ‌‌‌देह दान कैसे करें , शरीर दान करने का तरीका ,

    Table of Contents

    • ‌‌‌देहदान क्या होता है देह दान के बाद मेरी देह का क्या उपयोग होगा ?
    • ‌‌‌देहदान कौन कर सकता है ?
    • ‌‌‌मुझे अपनी देहदान कहां पर किया जाना चाहिए ?
    • ‌‌‌अस्पताल की पहचान के बाद की प्रक्रिया
      • ‌‌‌मरे शरीर का इस्तेमाल कहां पर किया जाएगा ?
      • ‌‌‌क्या उपयोग के बाद मेरे शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा ?
      • ‌‌‌शरीर का कौनसा हिस्सा परिजनों को दांह संस्कार के लिये दिया जाएगा ?
      •  मृत्यु के बाद अस्पताल से संपर्क कैसे करें ? शव परिवहन कैसे होगा ?
      • ‌‌‌यदि मौत किसी दूसरे शहर के अंदर होती है तो क्या करें ?
      • ‌‌‌देहदान के लिए कौन कौनसे दस्तावेज आवयश्यक हैं ?
      • ‌‌‌किन परिस्थितियों के अंदर देहदान स्वीकार नहीं करेगा ?
    • ‌‌‌देहदान पंजीकरण
      • ‌‌‌क्या मैं कोई भी अस्पताल चुन सकता हूं?
      • ‌‌‌पंजीकरण के बाद दी जाने वाली सुविधाएं क्या हैं ?
      • डोनर कार्ड अपने आप ही स्वीकार हो जाएगा ?
    • ‌‌‌देहदान के बारे मे अपने परिजनों को बताना
      • डॉक्टर से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें
    • ‌‌‌देह को अस्पताल को सौंपना
      • ‌‌‌मैं शरीर से पहले नैत्रदान करने के प्रक्रिया ।
      • ‌‌‌ब्रेन डोनेशन
      • ‌‌‌देहदान के संबंध मे भुक्तान
      • ‌‌‌क्या मृत व्यक्ति का रिश्तेदार शरीर दान कर सकता है ?
    • ‌‌‌देहदान हास्पिटल कैसे ढूंढे ?
    • ‌‌‌देहदान का प्रारूप

    ‌‌‌देहदान क्या होता है देह दान के बाद मेरी देह का क्या उपयोग होगा ?

    दोस्तों देहदान का मतलब होता है। मरने के बाद इंसान के शरीर को किसी मेडिकल कॉलेज या हॉस्पिटल को दान करदेना । वैसे यह कॉलेज या हॉस्पिटल दान की गई देह का प्रयोग छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए ‌‌‌करते हैं।यदि  आप चाहें तो अंगदान भी कर सकते हैं जो और भी अच्छा है।

    • मानव शरीर की कार्यप्रणाली के बारे मे छात्रों को बताया जाता है।
    • दान की गई देह का प्रयोग वैज्ञानिक रिसर्च के लिए भी किया जाता है।
    • शिक्षा और प्रशिक्षण देने के लिए दान की गई देह का यूज किया जा सकता है।

    ‌‌‌देहदान कौन कर सकता है ?

    वैसे तो देहदान कोई भी कर सकता है। देहदान के लिए किसी भी धर्म या जाति और लिंग व आर्थिक आधार पर कोई भी भेद भाव नहीं होता है। और कम आयु के बच्चे भी देह दान कर सकते हैं। लेकिन इसमे कुछ मेडिकल कंडिशन भी शामिल होती हैं। कैंसर, हृदय रोग, ल्यूपस, एएलएस, गठिया, स्ट्रोक और मधुमेह जैसे रोगी भी अपने शरीर को  दान कर सकते हैं।

    क्योंकि शरीर दान के बाद इस बात की कोई संभावना नहीं है कि उस दान किये गए शरीर के किसी पार्ट का यूज अन्य व्यक्ति के अंदर किया जाए। बस उस शरीर का प्रयोग मात्र अध्ययन के लिए ही होता है। आत्महत्या जैसी स्थिति के अंदर शव का परीक्षण आवश्यक होता है। हालांकि उस शव को मेडिकल कॉलेज को तीन दिन के भीतर प्राप्त करना होता है।‌‌‌लेकिन पोस्मार्टम के बाद देह दान नहीं होता है।

    ‌‌‌मुझे अपनी देहदान कहां पर किया जाना चाहिए ?

    ऐसा नहीं है कि आप किसी भी अस्पताल के अंदर गए और उसे देहदान के बारे मे पूछने लगे । हर अस्पताल मे देहदान नहीं होता है। कुछ ऐसे बड़े अस्पताल या मेडिकल कॉलेज होते हैं। जिनके अंदर दान की गई देह का प्रयोग अनुसंधान के अंदर किया जाता है। यह अस्पताल राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है। ‌‌‌हर राज्य के अंदर यह अलग अलग होते हैं।

    ‌‌‌अस्पताल की पहचान के बाद की प्रक्रिया

    यदि आपने किसी ऐसे अस्पताल को पहचान लिया है जोकि देहदान को स्वीकार करता है। तो उसके बाद आपको आगे की प्रोसेस करनी होगी । आगे की प्रोसेस को जानने के लिए आप उस अस्पताल के अंदर कॉल कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो दो तीन अस्पताल के अंदर कॉल करके पूछ सकते हैं। ‌‌‌हालांकि हर अस्पातल के अंदर नियमों मे फर्क होता है।इस वजह से अस्पताल के अधिकारियों से आपको खुलकर बात करनी चाहिए ताकि आप यह अच्छे से जान सकें कि आप किस काम के लिए अपने शरीर का दान कर रहे हैं। ‌‌‌आप अस्पताल अधिकारियों से कुछ क्युशन पूछ सकते हैं ।

    ‌‌‌मरे शरीर का इस्तेमाल कहां पर किया जाएगा ?

    आप अपने शरीर को दान करने से पहले यह पूछ सकते हैं कि शरीर का इस्तेमाल कहां पर किया जाएगा ? जैसे चिकित्या या रिसर्च वैगरह के अंदर यह हो सकता है। इस संबंध मे अधिकारी आपको अच्छे ढंग से बता पाएंगे ।

    ‌‌‌क्या उपयोग के बाद मेरे शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा ?

    भारत के अंदर अस्पतालों के अंदर दान की गई देह का कई प्रकार से प्रयोग किया जाता है। जैसे की कई बार देह का परीक्षण करने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। वहीं कुछ मामलों के अंदर कंकाल प्राप्त करने के लिए ऐसा किया जाता है। ‌‌‌हालांकि अधिकतर मामलों के अंदर दाहसस्कार के बाद राख को परिजनों को नहीं दिया जाता है।

    ‌‌‌शरीर का कौनसा हिस्सा परिजनों को दांह संस्कार के लिये दिया जाएगा ?

    आमतौर पर जब देहदान किया जाता है तो शरीर का कोई भी हिस्सा दांहसंस्कार के लिए परिजनों को सौंपा जाता है। अधिकतर केसों के अंदर यह सिर के बाल ही होते हैं।

     मृत्यु के बाद अस्पताल से संपर्क कैसे करें ? शव परिवहन कैसे होगा ?

    मौत के 6 घंटों के भीतर शरीर को अस्पताल पहुंचाया जाना होता है। अधिकतर मामलों के अंदर अस्पताल शव को लेने के लिए एक वाहन भेजता है। यदि आप 100 किलोमिटर के दायर के अंदर रहते हैं तो । ‌‌‌इसके अलावा यदि आपने पहले पंजियन नहीं करवाया है तो आपको पंजियन करनवाना होगा ।यदि आप देह को 48 घंटे तक रखना चाहते हैं तो आप अस्पताल की मोर्चरी सुविधा का यूज कर सकते हैं।

    ‌‌‌यदि मौत किसी दूसरे शहर के अंदर होती है तो क्या करें ?

    यदि मौत किसी दूसरे शहर के अंदर होती है। जोकि देहदान स्वीकार करने वाले अस्पताल से दूर है। तो आप उस अस्पताल को कॉल कर सकते हैं। मैंन अस्पताल आपको इसके लिए कोई उचित उपाय सूझा सकता है। वह आपको निकटतम अस्पताल की सुविधा दे सकता है।

    ‌‌‌देहदान के लिए कौन कौनसे दस्तावेज आवयश्यक हैं ?

    वैसे देहदान के लिए आपको सबसे पहले अस्पताल के अंदर पंजीकृत होना होगा । यदि आप  पहले से पंजीकृत हैं तो मौत के बाद डॉक्टर द्वारा जारी किया गया मृत्यु प्रमाण पत्र और डोनर का आईडी कार्ड आवश्यक होगा ।

    ‌‌‌किन परिस्थितियों के अंदर देहदान स्वीकार नहीं करेगा ?

    यदि मृत्यु का कारण प्राकृतिक नहीं है और यदि किसी व्यक्ति की मौत हुए अधिक समय मतलब 3 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके अलावा मर चुके व्यक्ति को कोई संक्रामक रोग है। तो ऐसी स्थिति के अंदर देहदान अस्पताल अस्वीकार कर सकता है।

    ‌‌‌देहदान पंजीकरण

    वैसे देखा जाए तो आप बिना पंजीकरण के भी देह दान कर सकते हैं। लेकिन देहदान पंजीकरण एक कानूनी प्रक्रिया है। ताकि दान की गई देह का कोई दुरपयोग नहीं कर सके । देहदान के लिए एक पंजीकरण फोर्म होता है। जिसको आप अस्पताल से भी प्राप्त कर सकते हैं। या आप उनसे मेल पर प्राप्त कर सकते हैं।‌‌‌इस फोर्म पर आपको 2 से तीन आपकी फोटो भी चिपकानी होगी । पंजीकरण फॉर्म  को इच्छा पत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस पर दो गवाहों के हस्ताक्षर भी होगे । जिनमे से कम से कम एक आपका रिश्तेदार होना चाहिए। आवश्यक प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद अस्पताल आपको निम्न चीजे देता है।

    • acknowledgement letter
    • सम्मान प्रमाण पत्र
    • डोनर आईडी कार्ड जिस पर पंजिकरण संख्या होगी
    • संपर्क नंबर भी दिया जाएगा । जिस पर आप अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं।

    ‌‌‌क्या मैं कोई भी अस्पताल चुन सकता हूं?

    यह आप तय कर सकते हैं कि आपकी मौत के बाद आपके शरीर को किस अस्पताल के अंदर दान किया जाना चाहिए। हालांकि आप यह नहीं चुन सकते हैं कि आपकी मौत के बाद आपके शरीर के साथ क्या होगा ? मतलब उसका यूज क्या होगा ?

    ‌‌‌पंजीकरण के बाद दी जाने वाली सुविधाएं क्या हैं ?

    आमतौर पर अधिकांश अस्पताल देहदान मे नामांकन करा चुके व्यक्तियों और उनके परिवार को कई सुविधाएं प्रदान करते हैं।नि: शुल्क सामान्य और चिकित्सा जांच इसमे प्रमुख होती है।इसके अलावा मरने के बाद फ्री परिवहन ।

    डोनर कार्ड अपने आप ही स्वीकार हो जाएगा ?

    डोनर कार्ड अपने आप ही स्वीकार नहीं होता है। डोनर कार्ड तब स्वीकार होता है। जब आपका शरीर दान किया जा चुका है। कई बार डोनर कार्ड देने के बाद भी अस्पताल देहदान लेने से इंनकार कर देते हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं।‌‌‌जिसके अंदर यदि म्रत शरीर को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया हो । इसके अलावा यदि हड़ियों को किसी गम्भीर क्षति होने की वजह से ।पंजीकरण फार्म पर हस्ताक्षर नहीं होने की वजह से और भंडारण की जगह न होने की वजह से भी मना किया जा सकता है।

    ‌‌‌देहदान के बारे मे अपने परिजनों को बताना

    दोस्तों यदि आप देहदान पंजिक्रत करा चुके हैं तो सबसे अच्छी बात यह होगी कि इस बारे मे अपने परिवार को बताएं । बेहतर होगा उनको इस बारे मे खुलकर समझाएं कि आप ने किस अस्पताल के अंदर देहदान करने का निश्चय किया है ? वहां के संपर्क नंबर भी आपको अपने‌‌‌ परिजनों को देने होंगे ताकि आपकी मौत के बाद वे उचित कार्यवाही कर सके । इसके अलावा उनको पूरी प्रक्रिया संमझानी होगी कि उन्हें क्या करना होगा ?

    ‌‌‌निधन के बाद की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार से होगी ।

    डॉक्टर से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करें

    व्यक्ति के निधन के बाद आपको सबसे पहले एक डॉक्टर से मृत्यु प्रमाण पत्र  प्राप्त करने की आवश्यकता होगी । क्योंकि आपको देह को 6 घंटे के अंदर अंदर उस अस्पताल पहुंचाना होगा । जिसमे देह को दान करना है।‌‌‌यदि व्यक्ति की मौत अस्पताल के अंदर हुई है तो फिर डॉक्टर वहीं डेथ सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। लेकिन यदि मौत घर मे हुई है तो फिर आपको किसी डॉक्टर को बुलाकर यह बनाना होगा । इस मे प्रमाण पत्र में डॉक्टर दस्तावेजों का विवरण जैसे कि व्यक्ति का नाम और अनुमानित आयु, पता और अन्य पहचान का विवरण, मृत्यु की तारीख और समय, और संभावित कारण ‌‌‌दिये होते हैं।

    मृत्यु प्रमाण पत्र काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जिसकी आवश्यकता आपको कई जंगहों पर पड़ेगी । जैसे दाहसंस्कार करना या देह दान मे भी। इस वजह से मृत्यु प्रमाण पत्र के मूल की कई प्रतियां अपने पास रखनी चाहिए।

    ‌‌‌आपको बतादें कि आप नगरपालिका के द्वारा जारी किये गए  मृत्यु प्रमाण पत्र  का यूज नहीं कर सकते हैं। क्योंकि इसका प्रयोग केवल विरासत का दावा करने के लिए किया जाता है।अप्राकृतिक मौत की स्थिति के अंदर शव का परीक्षण किया जाता है। और ऐसी स्थिति के अंदर उस शव को उस अस्पताल के अंदर नहीं ‌‌‌दिखाया जा सकता है। जिसके अंदर आपने दान के लिए साइन अप किया है। कई मामलों के अंदर परीजन भी शव परीक्षण करवा लेते हैं। लेकिन आपको बतादें कि शव परीक्षण के बाद उस शव को स्वीकार नहीं किया जाता है। वह दान करने योग्य नहीं होता है।

    ‌‌‌यदि आप मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए शरीर को अस्पताल लाते हैं तो डॉक्टर उसे म्रत घोषित करदेंगे और पुलिस को कॉल करदेंगे । ऐसी स्थिति के अंदर पुलिस उस शव का परीक्षण करवा सकती है। भले ही वह स्वाभाविक मौत हो । सो अच्छा होगा आप किसी ऐसे डॉक्टर से संपर्क करें जोकि आपके घर आकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर सके ।

    ‌‌‌देह को अस्पताल को सौंपना

    जैसा कि हम आपको उपर बता चुके हैं कि मौत के बाद जल्दी से जल्दी देह को अस्पताल को दान कर देना चाहिए। इसके लिए आप एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। यदि आप शव को अस्पताल नहीं पहुंचा सकते हैं तो आप किसी स्थानिए अस्पताल के अंदर शव को फर्जिर के अंदर रखवा सकते हैं। ‌‌‌कुछ अस्पतालों के अंदर फरिजर की व्यवस्था होती है। जहां पर कभी कभी लोग अपने मर चुके परिजन का शव रखवाते हैं। मृत्यु से पहले मृतक के द्वारा लिखित दस्तावेज होना चाहिए कि वह मौत के बाद अपने शरीर को दान करना चाहता है। यदि मर चुके व्यक्ति ने पहले देहदान के लिए पहले से ही पंजीकरण किया गया है। तो यह काफी आसान हो जाएगा ।

    ‌‌‌मैं शरीर से पहले नैत्रदान करने के प्रक्रिया ।

    यदि आप शरीर दान करने से पहले अपने नैत्रों को दान करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलग से पंजियन करवाने की आवश्यकता होगी । मौत के बाद नैत्र अस्पताल के अंदर कॉल करना होगा । जब तक डॉक्टर आएगा । तब तक आंखों पर गिला कपड़ा रखें । ‌‌‌आपको बतातें कि नैत्रदान के अंदर आंखों की पूतलियों को वैसा का वैसा रखा जाता है। और वे बंद ही रहती हैं। जिससे यह पता नहीं चलता है कि नैत्र निकाले जा चुके हैं।

    ‌‌‌ब्रेन डोनेशन

    ब्रेन डोनेशन केवल बंग्लौर के अंदर स्वीकार किया जाता है। यदि आप यहां पर रहते हैं तो आप अस्पताल वालों सं संपर्क कर सकते हैं। यह रिसर्च के लिए किया जाता है।NIMHANS बैंगलोर पूरे शरीर के दान को स्वीकार नहीं करता है। लेकिन यह शरीर को उस स्थान पर ले जाने मे मदद अवश्य करता है। ‌‌‌जहां पर आपने शरीर दान के लिए पंजिक्रत करवा रखा है। क्रपया इस बात पर ध्यानदें कि यदि आपने ब्रेन दान कर दिया है तो फिर अधिकतर अस्पताल शरीर दान को स्वीकार नहीं करते हैं।

    ‌‌‌देहदान के संबंध मे भुक्तान

    वैसे यदि कोई देह दान करता है तो उसे किसी भी तरह का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। और इसके लिए अस्पताल आम चिकित्सा सुविधाएं डोनर के परिवार को दे सकता है। इसके अलावा परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र और परिवहन का खर्च खुद ही झेलना पड़ता है।

    ‌‌‌क्या मृत व्यक्ति का रिश्तेदार शरीर दान कर सकता है ?

    यदि आप मृत व्यक्ति के रिश्तेदार हैं और आपके परिजन ने देहदान के लिए पंजिकरण नहीं करवाया है तो भी आप देहदान कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ प्रोसेस को पूरा करना होता है। आप इसके लिए अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं।

    ‌‌‌देहदान हास्पिटल कैसे ढूंढे ?

    हमारे रीडर अनेक जगहों से आते हैं। सबसे बड़ी समस्या जो उनके लिए है। वह यह है कि कैसे वे देहदान के लिए अस्पताल तलास सकते हैं तो दोस्तों आपको बतादें कि यह काफी ईजी है। आप वेब साइट पर जाकर ‌‌‌आप उस राज्य को सलेक्ट करें जहां पर आप रहते हैं। उसके बाद आपको वहां पर उन हॉस्पीटल की लिस्ट मिल जाएगी जोकि देहदान को स्वीकार करते हैं। आपको नीचे इनका फोन नम्बर भी मिल जाएगा आप इन पर संपर्क कर और अधिक पता लगा सकते हैं।

    ‌‌‌देहदान का प्रारूप

    देहदान का फोर्म देखने के लिए आप नीचे की लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। यह फोर्म https://www.dehdan.org के लिए बनाया गया है। आप चाहें तो इस संस्थान के अंदर भी अपनी देहदान कर सकते हैं।

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