मनुष्य अपने दिमाग का कितना प्रतिशत इस्तेमाल करता है

यह कहावत काफी मसहूर हो चुकी है कि हम अपने मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं। बाकि का सारा हिस्सा हम किसी वजह से इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। यह बात सबसे पहले 1930 के अंदर सामने आई थी । उस वक्त इस बात को ‌‌‌बहुत से लोग मानते थे । लेकिन अब इस पर वैज्ञानिक संदेह करते हैं। कुछ वैज्ञानिक यह मानने को तैयार नहीं हैं कि हम अपने मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं।

मनुष्य अपने दिमाग का कितना प्रतिशत इस्तेमाल करता है

फंतासी फिल्मों के लिए यह तैयार-निर्मित ब्लूप्रिंट आम जनता के बीच भी पसंदीदा है। एक सर्वेक्षण में, 65 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बयान के साथ सहमति व्यक्त की है, “लोग केवल अपने मस्तिष्क का 10 प्रतिशत दैनिक आधार पर उपयोग करते हैं।” लेकिन सच्चाई यह है कि हम हर समय हमारे सभी मस्तिष्क का उपयोग करते हैं।

हम कड़ी सबूत के साथ इन तार्किक निष्कर्षों का समर्थन करने में सक्षम हैं। इमेजिंग तकनीक, जैसे पॉजिट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी (पीईटी) और कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एफएमआरआई), डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को वास्तविक समय में मस्तिष्क गतिविधि को मानचित्र करने की अनुमति देती है। डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मस्तिष्क के बड़े क्षेत्रों में 10 प्रतिशत से अधिक का उपयोग सभी तरह की गतिविधियों के लिए किया जाता है, जैसे कि सरल या आसान चित्रों जैसे चित्रों को पढ़ने या देखने के लिए गणित पढ़ने या गणित करना। वैज्ञानिकों को अभी तक मस्तिष्क का एक क्षेत्र नहीं मिला है जो कुछ भी नहीं करता है।

तो हम कैसे विश्वास करते कि हमारे मस्तिष्क का 9 0 प्रतिशत बेकार है? मिथक को अक्सर 1 9वीं शताब्दी के मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिन्होंने प्रस्तावित किया कि हमारी अधिकांश मानसिक क्षमताएं अप्रत्याशित हैं। लेकिन उन्होंने कभी प्रतिशत निर्दिष्ट नहीं किया। उद्धरण के गलत वितरण के लिए एक चुंबक अल्बर्ट आइंस्टीन भी जिम्मेदार ठहराया गया है।

हकीकत में, अवधारणा सबसे अधिक संभावना अमेरिकी स्व-सहायता उद्योग से आई थी। डेल कार्नेगी के 1 9 36 मेगा सर्वश्रेष्ठ विक्रेता, हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इंफ्लुएंंस पीपल के प्रस्ताव में सबसे शुरुआती उल्लेखों में से एक प्रतीत होता है। विचार है कि हमने अपने मस्तिष्क की पूर्ण क्षमता का केवल एक अंश उपयोग किया है, तब से प्रेरक गुरु, न्यू एज हकस्टर और अनियंत्रित स्क्रीन राइटर्स के लिए प्रमुख है।

जाहिर है, रातोंरात एक प्रतिभा बनने के लिए रहस्य खोजने की उम्मीद रखने वाले किसी के लिए यह बुरी खबर है। अच्छी खबर, हालांकि, यह कड़ी मेहनत अभी भी काम करती है। इस बात पर विश्वास करने के बहुत सारे कारण हैं कि आप नियमित रूप से चुनौतीपूर्ण मानसिक कार्यों पर काम करके मस्तिष्क शक्ति का निर्माण कर सकते हैं, जैसे संगीत वाद्य यंत्र बजाना, अंकगणित करना, या उपन्यास पढ़ना।

‌‌‌कैसे लोगों ने माना कि हम अपने दिमाग का 10 प्रतिशत ही यूज करते हैं

लिमिटल्स, फ्लाइट टू द नेविगेटर जैसी हॉलिहुड फिल्मों के अंदर यही सब दिखाया गया है। जिसकी वजह से भी लोगों ने यह मानलिया कि इंसान अपनी दिमागी क्षमता का केवल 10 प्रतिशत ही प्रयोग लेता है। ‌‌‌वैज्ञानिक डेला साला ने यह मानने से इनकार कर दिया कि कोई इंसान अपने दिमाग का केवल 10 प्रतिशत ही प्रयोग करता हो ।निदरलैंड और ब्रिटेन के अंदर हुए सर्वे के अंदर लगभग 50 प्रतिशत लोगों ने माना की यह धारणा सही है।

‌‌‌लेकिन कुछ लोग इस सिद्वांत को एक मनगढ़त कहानी मानते हैं।

 

‌‌‌दिमाग का 100 प्रतिशत प्रयोग

वैज्ञानिकों ने दिखाया कि इंसान अपने दिमाग का 100 प्रतिशत प्रयोग करता है। वैज्ञानिकों ने शोध मे पाया कि जब इंसान कोई भी काम करता है तो दिमाग का हर हिस्सा काम करता है। ऐसा कोई भी हस्सा नहीं होता है जो काम ना करता हो । इससे यह साबित होता है कि दिमाग का ‌‌‌100 प्रतिशत उपयोग होता है।

यदि आप अपने मस्तिष्क के 100 इस्तेमाल कर सकते हैं तो क्या होगा

यदि आप अपने दिमाग की क्षमताओं का 100 प्रतिशत यूज करने लग जाएंगे तो अदभुत चमत्कार हो जाएंगे । एक इंसान के पास अरबो रहस्य छुपे होते हैं । और वे सारे रहस्य उजागर हो जाएंगे । हम इंसान लोगों के पास ऐसी अदभुत ताकते आजाएंगी । जिनका कोई आदि ‌‌‌और अंत नहीं होगा । आइए जानते हैं यदि इंसान का दिमाग 100 प्रतिशत प्रयोग होने लग जाए तो क्या होगा?

मनुष्य अपने दिमाग का कितना प्रतिशत इस्तेमाल करता है

‌‌‌दुनिया के रहस्य का अंत हो जाएगा

यदि इंसान अपने दिमाग का 100 प्रतिशत प्रयोग करने लग जाएगा तो । दुनिया के उन सारे रहस्यों का जवाब मिल जाएगा जो अभी तक अनसुलझे हुए हैं। जिनको आजकत कोई समझ नहीं सका । फिर रहस्य नाम की कोई चीज होगी ही नहीं ।

‌‌‌इंसान प्रक्रति के नियम को बदल देगा

अब इंसान के हाथ मे कुछ भी नहीं है लेकिन यदि इंसान अपने मस्तिष्क की 100 प्रतिशत क्षमता का प्रयोग करता है तो वह प्रक्रति के बनाए हर नियम को भी बदल देगा । और इंसानों को और बेहतर लाइफ मिल सकेगी।

‌‌‌इंसान भगवान बन जाएगा

उसके बाद इंसान और भगवान के अंदर कोई फर्क नहीं होगा । इंसान वो सब कर पाएगा जो भगवान कर सकता है। पूरे समय चक्र को इंसान बदल पाएगा जो आज का इंसान नहीं बदल पाता है।

‌‌‌अंतिम शब्द

और अंत मे हम आपको इतना ही कहना चाहेंगे कि इंसान का दिमाग अपनी क्षमताओं का 10 प्रतिशत उपयोग नहीं करता है। वरन इससे ज्यादा उपयोग करता है। दिमाग के सारे हिस्से का सक्रिय होंने का यह अर्थ नहीं है कि दिमाग अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग कर रहा है। एक इंसान के पास अनन्त क्षमताएं ‌‌‌होती हैं। लेकिन वह अपनी क्षमताओं का किसी कारणवश उपयोग नहीं कर पाता है। रही बात दिमाग के हिस्से सक्रिय होने की तो दिमाग का हिस्से सक्रिय होने का संबंध जरूरी नहीं क्षमताओं के उजागर करने से संबंध रखता हो वह सूचनाओं के प्रोसेस से भी जुड़ा हो सकता है जो पहले से जाग्रत क्षमता के लिए हो सकता हैं।

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