भारत का नाम हिंदुस्तान , इंडिया और भारत कैसे पड़ा ? all name of india

भारत को कई नामों से जाना जाता है। जैसे हिंदुस्तान , इंडिया और भारत । इस लेख के अंदर हम बात करेंगे कि भारत का नाम कैसे पड़ा ? भारत का नाम हिंदुस्तान कैसे पड़ा और भारत को इंडिया क्यों कहते हैं ? ‌‌‌भारत की नामोत्पति से पहले हम भारत के बारे मे थोड़ा सा जान लेते हैं। भारत दक्षिण ऐसिया के अंदर स्थिति उपमहाद्विप का सबसे बड़ा देश है। उत्तरी गोलार्द मे स्थिति भारत  विश्व मे सातवां सबसे बड़ा और जनसंख्या की द्रष्टि से विश्व मे दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार हैं।हिंद महासागर के दक्षिण पश्चिम मे मालदीव दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सीमा भी लगती है। पूर्व के अंदर बंगाल की खाड़ी है तो पश्चिम मे अरब सागर है।

‌‌‌भारत का नाम भारत कैसे पड़ा ?

‌‌‌भारत का नाम भारत कैसे पड़ा इस बारे मे वैसे कोईपुख्ता जानकारी नहीं है। लेकिन इस संबंध मे जो मत प्रचलित हैं। हम  उनके बारे मे आपको जरूर बताना चाहेंगे । भारत काभारत नाम पड़ने के पीछे तीन मत मुख्य रूप से प्रचलित हैं। तो आइए उनके बारे मे जानतेहैं।1 9 50 में भरत को भारत के देश के नाम के रूप में चुना गया था।


‌‌‌भारत का नाम भारत कैसे पड़ा ?

‌‌‌सम्राट भरत

ऐसा माना जाता है की भगवान राम के पूर्वज सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा था।

‌‌‌भरत प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र थे । और हिंदु पुराणों के अनुसार उन्हीं के नाम पर भारत को भारतवर्ष कहा जाने लगा था।हिन्दू ग्रन्थ, स्कन्द पुराण अध्याय ३७ के अंदर यह लिखा गया है।ऋषभदेव नाभिराज के पुत्र थे और ऋषभदेव  के पुत्र भरत थे ।विष्णु पुराण के अंदर इस बात का उल्लेख मिलता है कि ‌‌‌यह भूमी तब से भारत वर्ष के नाम से जानी जाती है। जबसे ऋषभदेव   अपने पुत्र को राज्य सौंप कर वन के अंदर तपस्या के लिए चले गए थे । आदिपुराण के अंदर भरत और उनके पिता के 10 जन्मों के बारे मे बताया गया है।

‌‌‌भरत का जन्म और विश्व विजय

भरत के जन्म के बारे मे उल्लेख मिलता है कि जन्म से पूर्व उनकी माता से स्व्पन देखा था । जिसके फल के बारे मे ऋषभदेव ने बताया की उनके एक पुत्र होगा और वो चक्रवर्ती  सम्राट बनेगा । ऋषभदेव के 100 पुत्र थे। ऋषभदेव ने बाद मे अपना राज्य अपने पुत्रों को सौंप दिया और खुद वन के अंदर जाकर तपस्या करने लगे । ‌‌‌उसके बाद उनके एक पुत्र भरत ने विश्व विजय करने का निश्चय किया और सम्पूर्ण विश्व पर विजय करने के बाद उन्होंने अपने भाइयों से अधिनता स्वीकार करने को कहा तो उनमे से 98 भाईयों ने राज्य छोड़कर तपस्या के अंदर चलेगए । ‌‌‌

किंतु बाहुबली ने यह नहीं माना दोनों के बीच तीन तरह के युद्व होना बताया जाता है।दृष्टि युद्ध ,जल युद्ध,मल युद्ध इन सभी के अंदर बाहुबली जीत गए किंतु उसके बाद उन्हें राज्य को त्याग दिया और तपस्या के अंदर लीन हो गए । ‌‌‌उसके बाद भरत ने कर्म युग की शुरूआत की थी। ‌‌‌ आपको बतादें कि शकुंतला और दुष्यंत का पुत्र भी भरत था । लेकिन वह महाभारतकालिन का समय था । इस वजह से कन्फयूजन के अंदर ना रहें यह भरत अलग था । और इसने भारत को नहीं बसाया था।

‌‌‌प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राजा भरत का क्षेत्र बहुत बड़ा था । और भारतवर्ष के अंदर  पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्सों शामिल थे। तिब्बत, नेपाल और बांग्लादेश भी आते थे । ‌‌‌मतलब भरत एक विश्व विजेता था। और उसके शासन काल के अंदर इस तरह से एक बड़े भूभाग का नाम भारतवर्ष था । जो बाद मे बंटने के बाद भारत को भारत कहा जाने लगा।

देश  जो समुद्र के उत्तर और बर्फ के पहाड़ों के दक्षिण में स्थित है, को भरतम कहा जाता है, वहां भरत के वंशज रहते हैं।” विष्णु पुराण

‌‌‌पुराणों के अनुसार प्रियवर्थ के शासन काल के अंदर धरती को सात भागों के अंदर बांटा गया था । जो कुछ इस प्रकार से थे ।जंबू, प्रकाश, शालमली, कुशा, क्रुंका, शाका और पुष्कारा। इस बारे मे कुछ नहीं दिया हुआ है कि यह नाम क्यों दिये गए थे। जंबुद्वीपा के अंदर भरत के द्वारा शसन किया गया था।

‌‌‌कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भरत एक विश्व विजेता था और उसने एक बड़े भूभाग का नाम भारतवर्ष रखा था। आपको बतादें कि राजा भरत के पिता के समय भारत को अजनाभवर्ष भी कहा जाता था। ‌‌‌ऐसा संभव हो सकता है कि भरत ने ही अपने नाम पर भारत का नाम भारत रखा हो ।

‌‌‌भारत मे आर्य कबिला

ऐसा माना जाता है कि भारत के अंदर जब आर्य लोग आये तो एक बड़े कबिले का नाम भरत था और इस वजह से भारत देश का नाम भारत पड़ा। ‌‌‌इतिहास के अंदर इस बात का उल्लेख मिलता है कि आर्य कबिलों के अंदर रहते थे और । आर्यों के पांच प्रमुख कबिले भी रहे थे । पुरू , यंदू , तर्वस , अणु , द्रेहू इसके अलावा और भी कबिले थे । भरत कबिला भी था । ‌‌‌हालांकि इस कबिले के बारे मे मुझे कोई जानकारी नहीं मिल सकी लेकिन इतना माना जाता है कि आर्य एक घुमकड़ जाति थी । और यह लोग कबिले बनाकर रहते थे । और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्राचीन काल के अंदर भरत कबीले के नाम पर भारत  का नाम भारत पड़ा होगा ।

‌‌‌हालांकि यह एक संभावना या अनुमान हम इसको कह सकते हैं। लेकिन इसमे सच्चाई भी हो सकती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ‌‌‌आर्य जब भारत के अंदर आये थे तो उनका एक कबिला ईरान के अंदर भी बस गया था। ‌‌‌ईरान का पूराना नाम आयरान है। जबकि भारत का पूराना नाम आर्याव्रत भी है। जिससे लगता है कि यह नाम आर्यों के आधार पर रखे गए हों ।

‌‌‌कुछ जगह पर इस बात का उल्लेख मिलता है कि आर्यों के आने से पहले यहां पर कोई रहता नहीं था । आर्यों ने आकर भारत को बसाया । इस वजह से भारत को पहले आर्याव्रत के नाम से भी जाना जाता था।

‌‌‌एक अन्य मत के अनुसार ऋग्वेद के अंदर दस राजाओं के युद्व का वर्णन मिलता है।राजा सुदास  जो भरत जनजाति से थे और यह दस राजा महासंघ के बीच हुआ । इस युद्व के अंदर राजा सुदास की जीत हुई।राजा सुदास की लोकप्रियता बढ़ गई और लोग भरत के नाम से उसके क्षेत्र को जानने लगे थे । आगे चलकर यही नाम भारतवर्ष बन गया।‌‌‌हालांकि इस मत के अंदर कितनी सच्चाई है। इस बारे मे कुछ कहा नहीं जा सकता ।

‌‌‌भारत का नाम हिंदुस्तान कैसे पड़ा

भारत का एक नाम हिंदुस्तान भी है। अरबी और ईरान के अंदर हिंदुस्तान या हिंद शब्द का प्रयोग किया जाता है। हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग हिंदकुश पहाड़ियों के पीछे की जगह के लिए प्रयोग किया जाता था। मुगल जब भारत आए तो उन्हें इन पहाड़ियों का सामना करना पड़ा ‌‌‌था। इस वजह से भी हो सकता है। बाद मे मुगल पूरे भारत को हिंदुस्तान कहने लगे हो ।‌‌‌

एक अन्य मत के अनुसार हिमालय के पश्चिम के अंदर सिंधु नदी बहती है। और इसके एक बड़े भूभाग को सिंदू घाटी कहते हैं। मध्ययुग के अंदर जब कई ईरानी लुटैरे भारत आए तो उन्होंने यहां के निवासियों को हिंदू नाम दिया था।इस वजह से पूरे देश को हिंदुस्तान कहा जाने लगा।

‌‌‌एक अन्य बुक के अंदर कुछ और ही उल्लेख मिलता है। उसके अनुसार भारत का हिंदुस्तान केवल उच्चारण मे हुई गलतियों की वजह से पड़ा । बुक के अनुसार आर्यों के दो समूह थे । जिनमे से एक समूह ईरान के अंदर बस गया था और दूसरा समूह भारत के अंदर बस गया था।‌‌‌ईरान के अंदर जो आर्य बसे थे ।वे स का उच्चारण है कि तरह करते थे । और जब वे भारत के अंदर बसे सगे संबंधियों से मिलने आये होंगे तो उन्होंने सिंधु नदी को हिंदु नदी कहा होगा । और इस देस को हिंदुस्तान कहा होगा ।

‌‌‌हिंद शब्द से ही भारत का नाम हिंदुस्तान पड़ा है।हिंद शब्द का प्रयोग फारसी के अंदर किया जाता था।अक्मेनिड सम्राट दारायस ने लगभग516 ई पूर्व सिंधु घाटी पर विजय प्राप्त की थी । उस समय सिंधु बेसिन के लिए  हिंदुश शब्द का प्रयोग किया जाता था।‌‌‌इस नाम काप्रयोग 500 ईसा पूर्व मिस्र के अक्मेनिड प्रांत के अंदर एक प्रतिमा पर लिखा गया था।सिंधको सम्राट शापुर प्रथम के शास्त्री-ए-रुस्तम शिलालेख में हिंदुस्तान के नाम से पुकाराजाता था।बाबर जब भारत आया था तो उसने कहा था

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पूर्व में, दक्षिण और पश्चिम में यह महासागर से घिरा हुआ है। तो आपको बतादें कि भारत का नाम हिंदुस्तान बाद मे पड़ा था । पहले भारत को केवल अल-हिंद कहा जाता था ।11 वीं शताब्दी में लिखे ग्रंथ तारख अल-हिंद मतलब भारत का इतिहास । मे भारत को हिंद नाम से पुकारा गया है।‌‌‌जिससे यह तो साबित हो जाता है कि हिंद शब्द से ही हिंदुस्तान बना है।

11 वीं शताब्दी के अंदर यह नाम अरबी और फारसी के अंदर मौजूद था ।

‌‌‌वैसे तो अनेक मत हो सकते हैं। लेकिन अंतिम मत सबसे ज्यादा प्रमाणित माना जाता है । क्योंकि इसके सबूत भी मौजूद हैं। तो हम यह कह सकते हैं। कि भारत का नाम हिंदूस्तान सिंधु नदी की वजह से पड़ा और वहां के आस पास के क्षेत्र को उच्चारण की गलतियों की वजह से हिंद कहने लगे और बाद मे हिंद से‌‌‌ हिंदुस्तान बना।

‌‌‌भारत का नाम इंडिया कैसे पड़ा

भारत का एक नाम इंडिया भी है।ऐसा माना जाता है कि इंडिया शब्द सिंधु नदी से निकला था।हेरोडोटस  ने सिंधु नदी के निचले बेसिन के अंदर रहने वाले लोगों के लिए इंडिन शब्द का इस्तेमाल किया । आपको बतादें कि सिंधु नदी को यह लोग Indus River कहा करते थे । इस वजह से ‌‌‌इसके आस पास रहने वाले लोगों को इंडस कहा जाने लगा।लुसियान  ने दूसरी शताब्दी के अंदर लैटिन इंडिया का प्रयोग किया था।‌‌‌ऐसा माना जाता है कि जब अंग्रेज भारत आए थे तो उनको हिंदुस्तान शब्द बोलने मे कठिनाई होती थी। इस वजह से वे भारत को इंडिया कहने लगे।‌‌‌अंग्रेज हिंदुस्तान शब्द की जगह कागजी कार्यवाही के अंदर भी इंडिया शब्द का प्रयोग करते थे । इस वजह से भारत का नाम इंडिया पड़ा ।

जम्बुद्वीप

भारत का नाम भारत पड़ने से पहले इस क्षेत्र को जम्बुद्वीप के नाम से भी जाना जाता था।जैसाकि हमने आपको उपर बताया है।पुराणों और वेदों के अंदर द्विपों का वर्णन मिलता है।जम्बुद्वीप सभी द्विपों के बीचो बीच स्थिति था। पुराणों के अंदर पूरी धरती को पहले अलग अलग द्विपों के अंदर बांटा गया था।

जम्बूद्वीप का अर्थ होता है। संपूर्ण एशिया खंड।  इसके अंदर कई सारे क्षेत्र आते थे । जैसाकि उपर हम आपको बता चुके हैं।

नभीवार

भारत के कई सारे नाम रहे हैं। इन नामों के अंदर भारत का एक नाम नभीवार भी रहा है। ग्रंथों के अनुसार भरतवराण  कहने से पहले भारत को नभीवार भी कहा जाता था । नभी एक चक्रवर्ति सम्राट था।

हिब्रू

भारत को एक समय हिब्रू नाम से भी जाना जाता था।यहूदी तनाख और ईसाई ओल्ड टैस्टमैंट के एस्थर भाग की पुस्तक में भारत को हिब्रू नाम से भी जाना गया है।

‌‌‌भारत के विभिन्न नाम

भारत को अलग अलग समय के अंदर अलग अलग नाम से पुकारा गया था । कुछ नामों की टेबल आपको नीचे दी जा रही है।

Year Name of india Source Explain
c. 440 BCE India Herodotus ” ‌‌‌भारत के लिए इंडिया शब्द का प्रयोग अंग्रेजों से कुछ पहले हुआ था।
c.400-300 BCE Hodu Book of Esther Bible “अहसाउरस जिन्होंने 127 प्रांतों में हुड (भारत) से कुश (इथियोपिया) से शासन किया”
300 BCE Aryavarta Vashistha, Vashistha Dharmasutra ” ‌‌‌पश्चिम मे  सीमा-नदी (सिंधु), पूर्व में वह क्षेत्र जहां सूर्य उगता है (हिमालय), – जहां तक काले एंटीलोप्स घूमते हैं वह आर्याव्रत है।
c. 300 BC India/Indikē Megasthenes Megasthenes बुक के अंदर भारत शब्द का उल्लेख मिलता है। इस बुक के अंदर भारत की चारों सीमाओं का भी जिक्र मिलता है।
200 BCE Jambudvipa Chanakya Arthashastra “(ब्रह्मपुत्र) जंबुद्वीपा की पूर्वी सीमा है, इसकी पश्चिमी सीमा सिंधु के मुंह हैं और इसकी दक्षिणी सीमा हिंद महासागर है
पहली शताब्दी ईसा पूर्व और नौवीं शताब्दी सीई के बीच Bhāratavarṣa (realm of Bhārata Vishnu Purana “उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् । वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः ।।” 
देश (varamam) जो समुद्र के उत्तर और बर्फीले पहाड़ों के दक्षिण में स्थित है, को भरतम कहा जाता है, वहां भरत के वंशज रहते हैं।”
100 CE or later Bhāratam Vishnu Purana “उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् । वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र संततिः ।।” 
i
c. 140. Indoi, Indou Arrian उत्तर की तरफ भारत की भूमि की सीमा माउंट टॉरस है और पूर्वी महासागर तक पहुंचता है,
c. 590. Hind Istakhri ” हिंद की भूमि के लिए यह पूर्वी साम्राज्य द्वारा इस्लाम के देशों और एन पर डब्ल्यू और एस पर फारसी सागर (यानी हिंद महासागर) द्वारा पूर्व में घिरा हुआ है
c. 650 Five Indies Xuanzang 5 इंडीज की परिधि लगभग 90,000 ली है; तीन तरफ यह एक महान समुद्र से घिरा हुआ है, उत्तर में इसे बर्फदार पहाड़ों से समर्थित है। यह उत्तर में चौड़ा है और दक्षिण में संकीर्ण हैं।
c. 1020 Hind Al-Birūnī “हिंद पूर्व में चिइन और माचिन द्वारा पश्चिम में सिंध (बलुचिस्तान) और काबुल और दक्षिण में सागर से घिरा हुआ है।”
Hindustan John Richardson,  “हिंदुस्तान की सीमाएं प्राकृतिक विशेषताओं से हर तरफ चिह्नित होती हैं, उदाहरण के लिए, हिमालय, एन पर, पटोई पर्वत, टिपेरा हिल्स, और सी।, पूर्वोत्तर, सागर, ई, एस, और डब्ल्यू। और हला, और सुलेमान पर्वत, एनडब्ल्यू पर ”

‌‌‌सन 944 के अंदर भारत को Al-Hind नाम से जाना जाताथा । जिसका उल्लेख Muruj adh-dhahab wa ma’adin al-jawhar के अंदर किया गया है।

1205 ई के अंदर भारत को Hind नाम से जाना जाता था ।जिसके बारे मे Hasan Nizāmīमे लिखा हुआ मिलता है।

‌‌‌1298 ईं के अंदर इंडिया को Greater

India  के नामसे भी जाना जाता था । जिसके बारे मे Marco Polo के अंदर वर्णन मिलता है।

1328 ई के अंदर भारत को इंडिया भी कहा जाता था ।Friar Jordanus Catalani  मे भारत को इंडियाकहा गया है।

‌‌‌1404 ई के अंदर एक ग्रंथ मे इंडिया को IndiaMinor कहा गया है।

1590 ई के अंदर भारत को Hindustānके नाम से जाना जाता था।Abu’l-Fazl ibn Mubarak

Ain-i-Akbari के अंदर इसी नाम का उल्लेख किया गया है।

‌‌‌different name of india

दुनिया के विकास से लेकर अब तक भारत को कई नामों से पुकारा जा चुका है। मतलब आज जिससे हम भारत कह रहे हैं। नाम बहुत बाद मे आया है। इससे पहले भारत के कई सारे नाम रहे हैं। नीचे हम भारत के विभिन्न नामों की लिस्ट दे रहे हैं। जिससे ‌‌‌आपको पता चलेगा कि भारत के कितने नाम थे । हालांकि इस बारे मे हम आपको उपर बता चुके हैं। लेकिन उपर हमने आपको पूरे नामों की लिस्ट नहीं दी है। इससे आपको समझने मे मदद मिलेगी ।

Jambudvipa

जंबुद्वीपा के बारे मे हम आपको पहले ही बता चुके हैं।जंबुद्वीपा का मतलब होता है। जंबू पेड़ों की भूमी । अनेक बौद्व जैन और हिंदू ग्रंथों के अंदर इस नाम का उल्लेख मिलता है।

Nabhivarsha

Nabhivarsha के नाम से भी भारत को जाना जाता था । इसका अर्थ होता है। नाभी की भूमी । प्राचीन काल के अंदर ‌‌‌नभी नामका राजा रहता था । इस वजह से भारत का यह नाम पड़ा।

Aryavrata / द्रविड़

मनु स्मृति में बताया गया है कि पूर्वी बंगाल की खाड़ी से पश्चिम अरबसागर व हिमालय और विंध्य पर्वत के बीच के मार्ग को आर्याव्रत कहा जाता था।

दूसरी और दक्षिण भारत को द्रविड़ के नाम से भी जाना जाता था।

भारतवर्ष / Bharatam

विष्णु पुराण के अंदर भारत को भारतवर्ष भी कहा जाता था। जो समुद्र के उत्तर में स्थित है और बर्फीले पहाड़ों के दक्षिण में भरतम कहा जाता है; भरत के वंशज रहते हैं।

भरत

भरत नाम भारत नाम का संक्षिप्त रूप है। और भरत प्राचीन वैदिक काल के राजा के नाम से लिया गया है।

हिंद

हिंद नाम सिंध के उच्चारण से जुड़ा है। इतिहासकारों के अनुसार सिंध का सही उच्चारण नहीं करने की वजह से फारसी लोग सिंध को हिंद कहने लगे थे ।

हिंदुस्तान

11 वीं शताब्दी के अंदर मुस्लिम विजेताओं ने भारत को हिंदुस्तान कहकर बुलाया था । इसका मतलब होता है। हिंद की भूमी।

अल-हिंद

कुछ अरबी ग्रंथों के अंदर भारत को अल हिंद के नाम से दर्शाया गया है। जिसका अर्थ होता है। हिंद

Tianzhu

Tianzhu भारत के लिए चीनी इतिहासिक नाम है। जिसका अर्थ होता है। हिंद

Tenjiku

तेनजिकू भारत के लिए चीनी नाम का जापानी संस्करण है

Cheonchuk

चेओन्चुक भारत का ऐतिहासिक कोरियाई नाम है। यह भारत के लिए चीनी नाम की तरह है।

Shendu

सिमा कियान के शिजी में, द स्क्रिप्स रिकॉर्ड्स, भारत का उल्लेख शेंडू के रूप में किया गया है। शायद “सिंधु”  शब्द का अनुवाद है।

Tiandu

Hou Hanshu  की पुस्तक के अंदर हान राजवंश के इतिहास के अंदर भारत को Tiandu नाम से जाना गया है।

Yintejia

यिनटेजिया नाम कुच के चीनी राजवंश के अभिलेखों में भारत का एक और ऐतिहासिक नाम है।

Wutianzhu

चीन में, भारत को वुतियाज़ू भी कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “पांच भारत”। चूंकि भारत पांच प्रमुख क्षेत्रों, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी भारत में विभाजित होता है।

वू यिन

वू यिन नाम प्रसिद्ध चीनी बौद्ध विद्वान जुआनजांग द्वारा भारत को दिया गया नाम है। उन्होंने भारत के अंदर अपनी 70 वर्ष की यात्रा पूरी की थी ।629 – 645 सीई मे । इसका मतलब होता है पांच भारत ।

Yindu

भारत के लिए वर्तमान चीनी शब्द यन्दु है और यह हिंदू या सिंधु से लिया गया हो सकता है।

Hidush

हिदुश भारत का एक और फारसी नाम है, जो दारायस द ग्रेट के खातों में पाया जाता है। दारायस ने इस नाम का उल्लेख 515 ईसा पूर्व किया था।

Hodu

Hodu भारत के लिए बाइबिल के हिब्रू नाम है। एस्तेर की किताब में इसका उल्लेख है। एस्तेर 1 में, अहश्वेरोस (ज़ेरेक्स) को राजा के शासन  में वर्णित किया गया था।

इंडो

यह भारतिए गण राज्य के लिए जापानी नाम है।

इंडिका

प्राचीन ग्रीक इतिहासकार मेगास्थेन्स  ने भारत को इंडिका के नाम से बुलाया था । हालांकि अब यह बुक खो गई है। बस इसके कुछ टुकड़े ही बचे हुए हैं। जिनको संग्रह किया गया था।

सोन की चिडिया

ऐसा माना जाता है कि अंग्रेज जब भारत आए थे तो भारत के अंदर अपार धंन संम्पदा थी । इस वजह से लोग भारत देश को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था । अंग्रेजों ने भारत को लूटकर इस नाम को भी मिटटी मे मिला दिया।

‌‌‌विचार विमर्श

भारत को हिंदुस्तान क्यों कहा जाता है ? भारत का नाम भारत कैसे पड़ा ? भारत को इंडिया क्यों कहते हैं ? इस सभी सवालों के जवाब आपको इस लेख के अंदर मिल गए होंगे ।‌‌‌आपने एक बात को नोटिस किया होगा । कि प्राचीन समय के अंदर आज के जैसा कुछ भी सिस्टम नहीं था । और इस वजह से भारत का कोई अधिकारिक नाम भी नहीं था। जैसे जैसे समय बदलता गया । वैसे वैसे भारत के नाम भी बदले । ‌‌‌अधिकारिक नाम नहीं होने की वजह से मेगस्थनीज भारत आया तो उसने इंडिका

कहना आरम्भ कर दिया । और फारसी लोग सिंधु के गलत उच्चारण की वजह से भारत को अल हिंद कहने लगे । कुछ इतिहास कारों ने कोई नाम नहीं होने की वजह से भारत को अलग नाम देदिया । इस वजह से भारत के कई नाम हो गए । ‌‌‌और एक ही समय भारत को अलग अलग नामों से भी पुकारा जाता था। कुल मिलाकर यह कहना सही होगा कि समय के अनुसार भारत के नाम बदलते रहे ।

भारत को हिंदुस्तान क्यों कहा जाता है ? भारत का नाम भारत कैसे पड़ा ? भारत को इंडिया क्यों कहते हैं ?  लेख आपको कैसा लगा कमेंट करके बताएं।

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