भगवान शिव की उत्पति और रहस्य ? सच मे ईश्वर कौन है ?

हिंदुओं के देवता भगवान शिव का नाम तो आपने सुना ही होगा । आपको बतादें कि भगवान शिव का नाम बहुत पुराना है। हिंदुओं के देवता भगवान शिव अन्य देवताओं की तरह नहीं हैं। क्योंकि कहीं पर भी भगवान शिव की उत्पति के बारे मे कोई जानकारी नहीं मिलती है।‌‌‌भगवान शिव का नाम इस दुनिया के अंदर बहुत पुराना है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार भगवानशिव का 6000 साल पुराना मंदिर भी मिल चुका है।

‌‌‌इस लेख के अंदर हम बात करेंगे भगवान शिव की उत्पति के बारे मे ।‌‌‌यह तो आपको पता ही होगा कि हिंदु धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। और भगवान शिव हिंदु धर्म के सबसे बड़े देव माने जाते हैं।‌‌‌हिंदु धर्म के अंदर ऐसा माना जाता है कि बाकी सभी देवों को भगवान शिव ने ही बनाया है।

‌‌‌वैसे देखाजाए तो शिव की उत्पति के बारे मे  जानकारी आपको अनेक वेबसाइट पर मिल जाएगी । लेकिन अधिकतर जानकारी बहुत गलत तरीके से दी गई हैं। और उन जानकारी को पढ़कर आप कुछ भी समझ माने मे असमर्थ रहेंगे । कहीं पर आपको लिखा हुआ मिलेगा कि भगवान शिव के पिता थे तो कहीं पर आपको यह भी लिखा मिलेगा कि ‌‌‌भगवान शिव के पिता नहीं थे । कहीं पर आपको उनकी जन्म कथा के बारे मे लिखा हुआ भी मिल जाएगा ।

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‌‌‌क्या शिव दुनिया के सबसे पुराने भगवान हैं ?

यह बात सच हो चुकी है कि भगवान शिव दुनिया के सबसे पुराने भगवान हैं। अफ्रिका के अंदर 6000 साल पुराना शिव मंदिर मिलना इस बात का सबूत है। इसके अलावा  हिंदु धर्म पहले पूरे विश्व के अंदर फैला हुआ था। रोम, रूस, चीन व यूनान के अंदर भी हिंदु धर्म को ‌‌‌मानने वाले लोग रहते थे ।चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, लाओस, जापान में राम और हनुमान की प्रतिमाएं मिलना इस बात का एक और सबूत है कि हिंदु धर्म सम्पूर्ण विश्व के अंदर फैला हुआ था।सुमेरियन सभ्यता(2300 B.C ] से भी इस बात के प्रमाण मिले हैं। हमारा यह सब बताने का मकसद है कि जब हिंदु धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है तो भगवान शिव भी दुनिया के सबसे पुराने ‌‌‌भगवान हैं।

‌‌‌भगवान शिव की उत्पति कैसे हुई ?

वेदों के संबंध मे यह कहा जाता है कि वेद‌‌‌ पुराण लिखेतो बहुत बाद मे थे । लेकिन लोग इनको एक स्त्रुति के रूप मे इनका प्रयोग बहुत पहले सेकरती आ रही थी । तो यह संभव है कि वेद‌‌‌ पुराण लिखे गये उससे बहुत अधिक पुराने हो।‌‌‌ भगवान शिव की उत्पति के बारे मे वर्णन शिव पुराण के अंदर मिलता है।‌‌‌उसके अनुसारभगवान शिव की उत्पति अपने आप हुई थी । मतलब भगवान शिव को बनाने वाला कोई नहीं था ।भगवान शिव कैसे बने ? इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दे सकता । और मुझे लगता है। इसकाउत्तर कम से कम इंसान तो कभी नहीं दे पाएगा।‌‌‌कुछ लोग यह सवाल कर सकते हैं कि जिसतरह से बिना बीज के फल पैदा नहीं होता है। वैसे ही बिना माता पिता के भगवान कैसे पैदाहो गए ।

शिवलिंग भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक है

तो उन लोगों को हम कहना चाहेंगे कि भगवान के चमत्कार केवल प्राचीन समय के अंदरही मौजूद नहीं थे । वरन आज भी हैं ‌‌‌और विज्ञान जिससे हम भगवान को समझने का प्रयासकर रहे हैं। वास्तव मे यह भगवान को समझने के लिए काफी नहीं है। हर चीज को तर्क से नहींसमझा जा सकता ।

‌‌‌चमत्कार की बात करें तो हमारे गांव के पास खासोली गांव है। जिला चूरू राजस्थान के अंदर आता है। वहां पर एक ऐसा रहस्यमय पेड़ है। जिससेअनाज के दाने गिरते हैं। ‌‌‌यदि यकीन नहीं आता है तो इस

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लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं। यह है भास्कर ने खुद कहा है। हालांकि हम इसको तब मानते हैं। क्योंकि हमने इसे आंखो से देखा है।‌‌‌जब एक पेड़ से अनाज के दाने गिर सकते हैं। वो भी मूंग मोठ और बाजरा के तो सोचो यह दाने कहां से आए ? कौन इनको गिरा रहा है ? तो फिर भगवान शिव भी अपने आप‌‌‌ क्यों नहीं  बन सकते हैं।

‌‌‌भगवान शिव की उत्पति पुराणों की कथाओं मे

पुराणों के अंदर भी शिव की उत्पति के बारे मे नहीं बताया गया है। हालांकि उनके अंदर शिव की उत्पति से जुड़ी कथाएं मिलती हैं। जिनको हम आपको बताना चाहेंगे । पुराणों के अंदर उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव निराकार हैं। वे ही अनादि और और वे ही अंत हैं। ‌‌‌भगवान शिव से ही दुनिया बनी है। या कहें की भगवान शिव ने ही दुनिया को बनाया है।

‌‌‌भगवान शिव की उत्पति के संदर्भ मे पुराणों के अंदर एक स्टोरी मिलती है। इस कथा के अनुसार एक बार नारदजी ने ब्रह्मा से सवाल किया कि इस धरती की रचना किसने की ? आपने या आप तीनों ब्रह्मा  ,विष्णु और महेश ने । ‌‌‌इस संबध मे ब्रह्मा  जी ने नारदी जो बताया कि उन तीनों ने मिलकर कैसे स्रष्टी की रचना की थी ।

‌‌‌एक अन्य स्टोरी के अनुसार जब भगवान शिव ने सोचा कि दुनिया की रचना करनी है तो उन्होने भगवान विष्णु को जन्म दिया और विष्णु की नाभी से ब्रह्मा का जन्म हुआ। इन दोनों का जन्म तो हो गया लेकिन इनको यही पता नहीं था कि उनके माता पिता कौन हैं? और दोनो बहुत शक्तिशाली थे । ‌‌‌एक बार दोनों के अंदर इस बात को लेकर झगड़ा हो गया कि विष्णु ने कहा कि मैं तेरा पिता हूं क्योंकि मेने तेरे को जन्म दिया है। लेकिन ब्रह्मा  इस बात से संतुष्ट नहीं थे । तो दोनों के अंदर घमासान युद्व चलने लगा।

‌‌‌यह युद्व लगभग 10 हजार साल तक चलता रहा । उसके बाद भगवान शिव दोनों के बीच मे शिवलिंग के रूप मे प्रकट हुए और आकाश वाणी हुई कि दोनोंमे से जो कोई इस लिंग का अंत तलास लेगा वही सबसे बड़ा कहलाएगा । ‌‌‌दोनों देव कई सालोंतक शिलिंग का अंत तलासते हुए भटकते रहे किंतु इसका अंत उन्हें नहीं मिल सका । उसकेबाद भगवान विष्णु ने आकर कहा कि हे शक्तिशाली प्रभु अब तक मैं मानता था कि मैं सबसेबड़ा हूं तो यह मेरी गलती है। मुझे माफ करदें आप तो अनादी हैं। आपका कोई अंत नहीं है।

शंकर या भोले नाथ

‌‌‌उधर ब्रह्मा  को भी शिव लिंग का अंत नहीं मिला तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना मैं झूठ जाकर बोल देता हूं और उसके बाद मैं विष्णु से बड़ा कहलाने लगूंगा ।और उसके बाद ब्रह्मा  ने भगवान  शिव से जाकर झूंठ बोल दिया । हालांकि भगवान शिव तो सब जानते ही थे ।तब भगवान शिव ने भगवान ब्रह्मा  को शाप दिया ‌‌‌कि तुझे कोई नहीं पूजेगा ।उसके बाद ब्रह्मा  को अपनी गलती का एहसास हुआ ।

ब्रह्मा और विष्णु जब संसार की रचना की बातें कर रहे थे तो भगवान शिव भी वहां पर पक्रट हुए तो ब्रह्मा ने भगवान शिव को पहचानने से इनकार कर दिया । उसके बाद विष्णु ने अपनी दिव्य द्रष्टी से उन्हें शिव की याद दिलाई और ‌‌‌उसके बाद ब्रह्रमा ने भगवान शिव से माफी मांगी और शिव को पुत्र के रूप मे पाने का आशिर्वाद लिया।

‌‌‌विष्णु पुराण के अंदर भगवान शिव के अज्ञात तरीके से प्रकट होने की जानकारी मिलती है। इसके अनुसार ब्रह्रमा को संसार की रचना के लिए एक बालक की आवश्यकता थी । तो उन्होंने तपस्या कि तो उनकी गोद के अंदर एक रोता हुआ बालक आ गया । ‌‌‌उसके बाद ब्रह्रमा जी ने उसे रोता देख उसका नाम रूद्र रखदिया । जिसका अर्थ होता है रोने वाला । बालक को यह नाम पसंद नहीं आये तो ब्रह्रमा ने बालक के नए 8 नाम रखे । रूद्र ,शर्व ,भाव , उग्र , भीम , पशुपति , ईसान , महादेव आदि ।

महादेव और शिव के अंदर क्या अंतर है ?

‌‌‌दोस्तों महादेव या शंकर या जिसे हम भोलेनाथ कहते हैं और शिव यह दोनो अलग अलग हैं। मतलब शिव का अंस महादेव हैं। जैसाकि मैं आपको पहले ही बता चुका हूं कि शिव या सबसे बड़े परमात्मा कभी भी जन्म नहीं लेते । उनका कोई अंत नहीं है। वे इन सब चीजों से परे हैं।

‌‌‌आपको यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि तब भगवान शिव और महादेव का नाम एक साथ हम लेते आए हैं। तो आपको बतादें कि महादेव शिव का अंस होने की वजह से इनका नाम शिव के साथ लिया जाता है। और आप जो मंदिरों के अंदर शिव की प्रतिमा देखते हैं। वे  परमात्मा शिव नहीं हैं। वरन महादेव हैं। जिनका जन्म हुआ है। ‌‌‌और वे निराकार नहीं हैं।

‌‌‌और आप जो शिव लिंग देखते हैं। वह भोलेनाथ की नहीं है। वरन वह परमात्मा शिव की प्रतिमा है। मतलब उनका कोई आकार नहीं होता है। उनको केवल शिवलिंग के रूप मे पूजा जाता है।

‌‌‌वैसे देखा जाए तो  ब्रह्मा ,विष्णु और भगवान महादेव , भगवान शिव के पुत्र की भांति है। और इनका अपना अपना कार्य है। भगवान ने इनको अलग अलग काम सौंपे हैं। जैसे भगवान महादेव संहार के लिए हैं। संसार की उत्पति करना इनका काम नहीं है। इसके विपरित ब्रह्मा ,विष्णु संसार की उत्पति से जुड़े हैं। ‌‌‌ भले ही यह सब अलग अलग हों लेकिन हम यह कह सकते हैं कि दुनिया के हजारों देवी देवता केवल भगवान या परमात्मा शिव के बनाए नियमों का पालन करते हैं। इस वजह से शिव को इन सबका राजा कहा जा सकता है।

‌‌‌निराकार ईश्वर भगवान शिव ने खुद को खुद से अलग किया

कुछ जगह पर यह माना जाता है कि भगवान शिव पहले अकेले ही थे । और पूरी दुनिया के अंदर वे ही भगवान थे । उसके बाद उनके मन मे खुद को अलग करने का विचार आया और उन्होंने अपने शरीर से अम्बिका को जन्म दिया । जिसको हम दुर्गा कहते हैं।‌‌‌यह सदाशिव की पत्नी भी हैं। और ऐसा माना जाता है कि ब्रह्रमा , विष्णु और महेशा माता दुर्गा की संतान हैं।

‌‌‌जहां तक मुझे पता चला है। माता अम्बे भगवान शिव के बाद दुनिया के अंदर दुसरी सबसे ताकतवर देवी हैं।हालांकि सदाशिव और भगवान शिव के बीच क्या अंतर है। यह मुझे समझ मे नहीं आ पाया है। जहां तक मुझे लगता है कि सदाशिव और भगवान शिव दोनों एक ही हैं।

शक्ति अम्बिका  और माता दुर्गा को वैसे तो हम एक ही मानते हैं। लेकिन आपको बतादें कि जब देवी अम्बिका  ने राक्षसों का संहार करने के लिए अवतार लिया तब उनको दुर्गा के रूप मे जाना गया ।

‌‌‌भगवान कौन होता है ?

जैसा कि हम आपको बतादें कि पुराणों के अंदर उल्लेख मिलता है कि जो जन्म लेता है। वह ईश्वर नहीं हो सकता है। ईश्वर अजर है अमर है और उसका कोई जन्म नहीं होता है। अब बात करें देवताओं की तो भारत के लगभग सभी देवता धरती पर जन्में हैं । इसका मतलब है वे भगवान नहीं हैं। ‌‌‌जिनको हम भगवान मानकर पूजते हैं। वे मात्र भगवान के अंश हैं। जैसे हनुमान राम , गोगाजी , क्रष्ण । दुनिया के अंदर सबसे बड़े भगवान हैं। शिव जिनका कभी जन्म नहीं होता है। और न ही कभी मौत होती है। वे हमेशा अमर हैं।

‌‌‌भगवान शिव से जुड़ी कुछ खास बातें

जैसा कि आपको स्पष्ट हो चुका होगा कि हम किस की बात कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं। ईश्वर की या भगवान शिव की जिसने इस दुनिया को बनाया है।

‌‌‌भगवान शिव निराकार हैं

भगवान शिव के बारे मे पुराणों के अंदर यह कहा गया है कि वे निराकारहैं और उनका कोई भी आकार नहीं होता है। निराकार का मतलब है वे किसी भी रूप रंग से बंधेहुए नहीं हैं। वे हर तरह से स्वतंत्र हैं। और उनको किसी भी आकार के अंदर नहीं बांधाजा सकता ।

‌‌‌भगवान शिव ने प्रत्यक्ष रूप से दुनिया नहीं बनाई

आपको यह जानकर हैरानी होगी की प्रत्यक्ष रूप से भगवान शिव ने दुनिया को नहीं बनाया है। वरन दुनिया को बनाने का काम भगवान शिव ने अपने से पैदा होने वाले देव जैसे विष्णु महेश और ब्रह्रमा को दुनिया को बनाने का और चलाने का काम सौंपा है।

‌‌‌भगवान शिव अजर अमर और मौत जन्म से परे हैं

भगवान शिव ही हिंदु धर्म के अंदर एकमात्र ऐसे भगवान हैं जो अजर अमर और जन्म मौत से परे हैं। मतलब भगवान शिव का जन्म न तो कभी हुआ है। और न ही भविष्य के अंदर होगा । और वे मौत से परे हैं। उनकी मौत नहीं होती । वे हमेशा से ही अमर हैं।

‌‌‌भगवान शिव से बड़ा कोई नहीं है

आपको बतादें कि भगवान शिव ही ईश्वर हैं और उनसे बड़ा कोई नहीं है। कहने का अर्थ है। वे इस दुनिया के राजा हैं। और वे जो चाहते हैं। इस दुनिया के अंदर वही होता है। उनका निर्णय अंतिम होता है। इस दुनिया के अंदर उनसे बड़ा कोई नहीं है। वे ही परमात्मा हैं।

‌‌‌भगवान शिव सबसे अधिक ताकतवर हैं

भगवान शिव के अंस ब्रह्रमा विष्णु और महेश हैं। वे ही इतने अधिक ताकतवर हैं तो फिर भगवान जिन्होंने उनको बनाया है। खुद कितने ताकतवर होंगे । इस बात का अनुमान आप खुद लगा सकते हैं। उनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है।

‌‌‌भगवान शिव माया मोह से बहुत परे हैं

हम बात करें भोलेनाथ की या किसी दूसरे देवता की तो उनको इस बात से दुख होता है कि उनका भक्त उनकी उपासना नहीं करता है। और इसके अलावा उनका जन्म भी हुआ है। और जन्म के बाद उन्होंने शादी भी की है। जबकि भोलेनाथ ने तो तीन तीन शादियां की हैं। हमारे कहने का मतलब ‌‌‌है कि भगवान शिव जिनसे सदा शिव को अलग भी किया जाता है। और सदाशिव की पत्नी को अम्बे कहा जाता है। पर असल मे वह भगवान शिव का ही अंश हैं।

‌‌‌भगवान शिव एकांकी हैं

भगवान ईश्वर या शिव को वेदों के अंदर एकांकी बताया गया है। वेदों के अंदर एक कथा के अंदर यह बताया गया है कि जब  ब्रह्रमा विष्णु आपस मे लड़ रहे थे तो भगवान शिव काफी सालों बाद उनके युद्व को रोकने के लिए प्रकट हुए थे । तब उन्होंने ‌‌‌शिवलिंग के आकार के जैसी वस्तु को दोनों के बीच खड़ा कर दिया था । दूसरे ब्रह्रमांड को बने हुए 13 बिलियन साल हो चुकी हैं। जबकि धरती की उम्र 4.543 बिलियन साल हो चुकी हैं।लगभग 9 बिलियन साल तक भगवान अकेले ही रहेहोगें । जिससे लगता है कि भगवान शिव एकांकी हैं।

‌‌‌भगवान शिव को किसने बनाया ?

इस प्रश्न का आज तक कोई भी उत्तर नहीं दे सका है कि ईश्वर को किसने बनाया है। वेदों और पुराणों के अंदर बस इतना लिखा गया है कि भगवान शिव अपने आप बने हैं। लेकिन भगवान की लिला को कोई नहीं जा सका कि वे अपने आप कैसे बने ?

‌‌‌शिवलिंग शक्ति का प्रतिक है

कई जगह पर ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग का अर्थ लिंग से है। हिंदु धर्म के अंदर लिंग की पूजा की जाती है।लेकिन वास्तव मे शिवलिंग का अर्थ लिंग नहीं होता है। इस बारे मे शिव पुराण के अंदर उल्लेख मिलता है कि ‌‌‌जब ब्रह्रमा और विष्णु आपस मे लड़ रहे थे । तब दोनों के बीच एक शक्ति प्रकट हुई। जिसको भगवान शिव के प्रतिक के रूप मे पूजा जाता है।‌‌‌आपको बतादें कि शिवलिंग ईश्वर की पूजा है। उस ईश्वर की जिसने दुनिया को बनाया है। शिवलिंग के अलावा शिव की तस्वीर किसी के पास उपलब्ध नहीं है।

‌‌‌क्या भगवान शिव दुनिया के रचनाकार हैं ?

यहां पर हम आपको कुछ ऐसे तथ्य बताने जा रहे हैं। जिससे यह सिद्व होता है कि भगवान शिव ही एक मात्र भगवान हैं। और विभिन्न धर्मों के लोग इन्हीं को मानते हैं। भले ही यह बात मुस्लिमों को और दूसरे धर्म के लोगों को बुरी लगे ।

‌‌‌उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले के अंदर तिवारी मे झारखंडी के अंदर एक महादेव का मंदिर है। जिसकी पूजा हिंदु और मुसलमान दोनों करते है। इस मंदिर के बारे मे यह कहा जाता है कि एक बार मोहम्द गजनवी ने इसको तोड़ने का प्रयास किया था किंतु वह इसे लाख कोशिश के बाद भी तोड़ नहीं सका ।‌‌‌उसके बाद अरबी के अंदर उसने इस मंदिर के अंदर कुछ लिखवादिया था कि हिंदु इसकी पूजा ना कर सके ।‌‌‌यह बहुत प्रसिद्व मंदिर है।

प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने मुस्लमानों के तीर्थ स्थल मक्का के बारे मे अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास मे लिखा है कि मक्का के अंदर मक्केश्वर महादेव का मंदिर था । वहां पर एक शिवलिंग था ।अश्वेत यानी काला कहकर आज भी मुस्लमान इसे पूजते हैं।‌‌‌ जिससे सिद्व होता है कि भले ही नाम अनेक हो किंतु भगवान शिव एक ही हैं।

‌‌‌बात करें जैन धर्म की तो ऋषभदेव  जिनकों जैनधर्म के प्रथम तिर्थकर माना जाता है। और उन्हीं ऋषभदेव  को हिंदु धर्म के अंदर भगवान विष्णु का आठवा अवतार माना जाता है।इस संबध मे आप अनेक प्रमाण भी जुटा सकते हैं।

विद्वान प्रोफेसर सीएस  के अनुसार बौद्व धर्म के अंदर भगवान शंकर ने ही बुद्व के रूप मे अवतार लिया था ।और प्राचीन काल के अंदर बौद्व और शिव मंदिर एक स्थान पर बनाए जाते थे ।

द सेकंड कमिंग ऑफ क्राइस्ट: द रिसरेक्शन ऑफ क्राइस्ट विदिन यू’ किताब के अनुसार  ईसा मसीह ने महाचेतना नाथ के आक्ष्रम मे रहकर साधना की थी । वे शिव भक्त थे ।

पारसी धर्म के लोग अत्रि कुल के माने जाते हैं। और अत्रि ऋषि भगवान शंकर के भक्त थे ।

‌‌‌अब आपको समझ मे आ ही गया होगा कि धर्म अलग अलग होने से या नाम अलग अलग होने से ईश्वर अलग अलग नहीं हो जाते । ईश्वर एक ही है और हमेशा से ही एक ही था । आपसी असंतोष सिर्फ इंसानों के अंदर होता है।

 और वे टुकड़ों मे बंट जाते हैं। अपने धर्म देश घर अलग कर लेते हैं। ‌‌‌लेकिन भले ही लोग अपने धर्म को बचाने के लिए लड़ रहे हों । पर उनको पता नहीं है कि ईश्वर एक है और तुम्हारी औकात ही क्या है उसको बचाने और मिटाने कि । तुम उसके सामने जीरो हो जीरो । जिसने इतनी बड़ी दुनिया बनाई है।‌‌‌उसके सामने तुम्हारी औकात ही क्या है ? ‌‌‌हम धर्म के आधार पर एक दूसरे से लड़कर खत्म हो रहे हैं। एक तरह से भगवान की बनाई दुनिया को नष्ट कर रहे हैं।

भगवान शिव की उत्पति कैसे हुई ?  लेख के अंदर हमने आपको समझाने का पुरा प्रयास किया है। और आपके सारे डाउट क्लियर करने की कोशिश की है।‌‌‌फिर भी यदि कुछ ऐसी चीजे रह गई हैं जिनका इस लेख के अंदर उल्लेख करना जरूरी था तो आप नीचे कमेंट करें । और यदि हमको कुछ अन्य सटीक जानकारी मिलती है तो हम इस लेख भगवान शिव की उत्पति कैसे हुई ? को अपडेट करते रहेंगे ।

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