नींद मे चलने की बीमारी के लक्षण और ईलाज

नींद मे चलने की बीमारी सबसे आम है। यह एक विचित्र प्रकार का मनोरोग होता है। जिसके अंदर व्यक्ति नींद मे चलता है। इसको स्लिपिंग डिसऑडर भी कहा जाता है। व्यक्ति रात के अंदर जब सो जाता है तो अचानक से बिस्तर से उठकर चलने लगता है। उसे यह नहीं पता होता है कि वह कया कर रहा है।

‌‌‌उसके दिमाग का एक हिस्सा काम कर रहा होता है। जबकि दूसरा हिस्सा सुप्त अवस्था के अंदर होता है। व्यक्ति इस दौरान वैसे ही काम करता है। जैसे कि वह जागते हुए करता है। नींद मे वह 15 मीनट या दो घंटे भी चल सकता है।

‌‌‌ कुछ काम करने के बाद व्यक्ति अपने आप बिस्तर पर जाकर सो जाता है। और जब उसे सुबह पूछा जाता है तो उसे याद नहीं रहता है कि वह रात मे क्या कर रहा था।

भारत के अंदर इस विकार से लग भग 14 प्रतिशत किशोर पिड़ित हैं। एक रिसर्च के अनुसार 15 प्रतिशत रोगी 12 साल तक के होते हैं।

‌‌‌यह विकार मनौवेज्ञानिक होने के साथ ही साथ तंत्रिका से जुड़ा विकार भी है।

‌‌‌नींद की चार अवस्थाएं होती हैं और चौथी अवस्था के अंदर नींद मे चलने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इस स्टेज की अधिक अधिक होती है। इसके अंदर मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं। सांस और नाड़ी की गति भी धीमी हो जाती है।

Night walker

‌‌‌नींद मे चलने के कारण

कुछ रिसर्चकारों का मानना है कि स्लिपवाकिंग अधिकतर दिमाग को जाग्रत करने वाली प्रणाली सही से काम नहीं कर पाती है। हालांकि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो उनको इस समस्या से छूटकारा मिल जाता है।

‌‌‌ऐसा अधिक मानसिक दबाव की वजह से और स्लीप टेरर व मिर्गी की वजह से भी हो सकता है। स्लीप टेरर वाले बच्चे कुछ समय गहरी नींद लेते हैं फिर अचानक से नींद से जाग जाते हैं। यानि उसे किसी डर का एहसास होता है। हांलाकि कुछ समय बाद वे अपने आप सो जाते हैं। यह बुरे सपने से अलग है। बुरा सपना सुबह तक याद ‌‌‌रहता है किंतु स्लीप टेरर बच्चों को रात की घटनाएं याद नहीं रहती हैं।

‌‌‌वयस्कों के अंदर यह विकार बहुत कम पाया जाता है। हांलाकि यह कोई जरूरी नहीं है कि बच्चे बड़े होकर नींद मे चलना छोड़ दें । वयस्क के अंदर नींद मे चलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे गम्भीर चिंता तनाव अनद्रिा आदि हो सकते हैं। कई बार थोड़ी न्यूरोलॉजिकल गड़बड़ी की वजह से भी वयस्क नींद मे

‌‌‌चलने लगते हैं। हांलाकि कारण दूर होने के बाद समस्या भी अपने आप ही दूर हो जाती है। वयस्क व्यक्ति भी नींद मे उठकर सड़क पर जा सकता है। जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इसका ईलाज सम्मोहन के द्वारा किया जा सकता है। व्यक्ति को सम्मोहित करके उसे वहीं क्रियाएं करने को कहा जाता है। हांलाकि ईलाज ‌‌‌मे समय लगता हे लेकिन समस्या दूर हो जाती है।

‌‌‌इस रोग का ईलाज बिहेवियर थैरेपी से भी किया जाता है।

‌‌‌कुछ वैज्ञानिकों का तो यह मानना है की यह सब हमारे डिएनए के अंदर दोष की वजह से होता है। क्रोमोसोम 20 के अंदर थोड़ा सा भी दोष होने से नींद मे चलने की बीमारी हो सकती है। और यह पीढ़ीदर पीढी चलती रहती है। शोध के आंकड़ों पर नजर डाले तो इस बिमारी से ग्रस्ति परिवार की दूसरी पीढ़ी मे इसके स्थानान्तरण ‌‌‌की संभावना 50 प्रतिशत होती है।

‌‌‌सावधानियां

नींद मे चलने वाले व्यक्ति ध्यान भी अधिक रखना चाहिए । क्योंकि कई बार नींद मे ही व्यक्ति की जान भी जा सकती है। पीछले दिनों एक महिला नींद मे चलने की वजह से छत से गिर गई और उसकी मौत हो गई थी ।

1.नींद मे चलने वाले व्यक्ति को छत पर नहीं सोना चाहिए

  1. ‌‌‌अपने सोने वाले कमरे को पूरी तरह से बंद करदें । हो सके तो बाहर से बंद करें ताकि नींद मे आप उसे खोल ना सके । अपने परिचित की सहायता लें यदि कोई समस्या हो तो ।
  2. ‌‌‌लापरवाही ना बरते वरना आपको नुकसान हो सकता है
  3. ‌‌‌किसी भी ऐसी सामग्री के आस पास ना सोए जिससे आपको नुकसान हो सकता हो जैसे लाईट के नंगे तार और ज्वलनशील सामग्री । क्योंकि कई बार नींद मे चलने वाले लोग नींद मे ही गैस तक ऑन कर लेते हैं।

‌‌‌उपचार

वैसे कुछ बच्चों के अंदर यह रोग होता है। उनमेसे कुछ का तो समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। जबकि कुछ बच्चों के अंदर यह रोग वयस्क होने के बाद भी ठीक नहीं हो पाता है। ऐसे लोगों को उपचार की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए आप किसी बढ़िया मनौवेज्ञानिक से परामर्श ले सकते हैं। आजकल इससे ‌‌‌जुड़ी कई दवाएं उपलब्ध हैं। यदि स्थिति अधिक गम्भीर होतो जल्दी उपचार कराना लाभकारी रहता है।

इसके साथ ही आपको खुद भी प्रयास करने होंगे ताकि रोग के उपचार मे मदद मिल सके ।

‌‌‌द्रढ निश्चय कर सोएं

आपको सोने से पहले अपने दिमाग के अंदर अच्छी तरह से यह बिठा लेना होगा कि आपको नींद के अंदर नहीं उठना है। आपको सोने से पहले अपने मन मे इस बात को कई बार सोचना होगा । जिससे आपके नींद मे चलने की समस्या मे कमी आ सकती है।

‌‌‌तनाव से दूर रहें

कई बार जब हम तनाव के अंदर होते हैं तो भी नींद मे चलने की आदत हो जाती है। इसलिए अपने दिमाग को एकदम से फ्रेस रखने की कोशिश करें । तनाव के अंदर तो बिल्कुल भी ना रहें ।

‌‌‌नशे से दूर रहें

यदि आप शराब आदि का सेवन करते हैं तो आपको इनका सेवन करना बंद करदेना चाहिए । ताकि रोग के उपचार के अंदर मदद मिल सके । यदि आप चाहते हैं कि इस रोग का अच्छे से उपचार हो तो नशा न करें ।

‌‌‌समय समय तक अपने डॉक्टर से परामर्श लें

नींद मे चलने की बिमारी का ईलाज संभव है लेकिन इसमे समय लगता है। इसलिए जबतक आपके डॉक्टर ना कहें तब तक आपको ईलाज करवाना बंद नहीं करना है। कई बार हम सोचते हैं कि सब ठीक हो गया किंतु इस बिमारी के कुछ लक्षण रह जाते हैं सो अपने डॉक्टर की सलाह मानें ।

‌‌‌समय पर ईलाज

कुछ बच्चों के अंदर यह बिमारी शुरूआती अवस्था के अंदर होती है। जिसको पहचान लेना चाहिए और समय परउसका ईलाज किया जाना चाहिए । यदि इसका समय रहते ईलाज हो जाता है तो यह जल्दी से आसानी से दूर हो जाती है।

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