नासा ने खोज लिया प्रथ्वी जैसा ग्रह kepler 22b

एक न्यूज वेब के अनुसार नासा ने एक ऐसे ग्रह की खोज की है जोकि बिल्कुल प्रथ्वी की कार्बन कॉपी बताया जा रहा है। इस ग्रह का वातावरण न तो गर्म है। और नहीं ठंडा है। फिल्हाल इस ग्रह का नाम केपलर 22 बी रखा गया है। ‌‌‌
                 
इस खोज के बाद वैज्ञानिक समुदाय के अंदर खुशी का माहौल है। नासा ने ‌‌‌अंतरिक्ष के अंदर जीवन की तलास करने के लिए । केपलर नाम टेलिस्कोप धरती से बाहर भेजा था। दो साल तक इस दिसा के अंदर कोई खास सफलता नहीं मिल सकी किंतु तीसरी साल । केपलर नाम टेलिस्कोप ने आश्चर्य जनक ‌‌‌तस्वीरें भेजी।

‌‌‌इस ग्रह के बारे मे बताया जा रहा है। की इसके अंदर वो सभी चीजे मौजूद हैं जोकि हमारी धरती के अंदर हैं। इसका तापमान 22 डिग्री के आस पास है। जोकि जीवन के योग्य सही है। और यहां पर पानी भी उपलब्ध है।

‌‌‌क्या खास बात है केपलर 22 बी की

‌‌‌यह ग्रह हमारी धरती की तरह ही अपनें सूर्य की परिक्रमा करता है। इसपर भी दिन और रात हमारी तरह ही होते हैं। इस ग्रह को अपनें सूर्य की परिक्रमा करने मे धरती से करीब 0 महीने कम का वक्त लगता है। 290 दिन का वक्त लगता है। यह हमारी धरती की तुलना मे 2.5  गुना बड़ा है। ‌‌‌इसकी बनावट पत्थरों सें बनी है।
‌‌‌वैज्ञानिकों के अनुसार वे अभी इस ग्रह के बारे मे जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। अभी वैज्ञानिकों का कहना है। कि इसके बारे मे और अधिक रिसर्च की आवश्यकता की जरूरत है ताकि पता चल सके कि ग्रह के कौनसे हिस्से के अंदर क्या है। जैसे कहां पर चटटाने हैं। कहां पर समल जमीन है। और कहां पर बर्फ जमी है।
‌‌‌यह ग्रह हमारी धरती से कोई 600 प्रकाश वर्ष दूर है। अब जिस क्षमता के विमान वैज्ञानिकों के पास हैं। उनसे इस ग्रह पर नहीं पहुंचा जा सकता । इसकी वजह है कि यह हमारी धरती से बहुत ज्यादा दूर है। यदि इन विमानों से इस ग्रह पर पहुंचने के लिए दो करोड़ साल लग जाएंगे । अब वैज्ञानिकों के सामने यह भी एक ‌‌‌सबसे बड़ी चुनौती है। कि ऐसा विमान बनाना जोकि प्रकाश की गति से चलता हो ताकि वे इस ग्रह पर पहुंच सकें । देखिए आगे हो सकता है। वैज्ञानिक इस तरह का भविष्य के अंदर आविष्कार कर पाएं तो हम केपलर 22 बी पर पहुंच पाएंगे।

‌‌‌आसान नहीं है  धरती जैसे ग्रहों की खोज

केपलर अतंरिक्ष के अंदर उन ग्रहों को टारगेट करता है जोकि अपने सूर्य के चारों और चक्कर लगाते हैं। इस तरह के ग्रहों का पता करने के लिए काफी सालों तक उन ग्रहों की निगरानी करनी पड़ती है। और उनके पूरे चक्कर को देखना होता है। ‌‌‌यह यान वैज्ञानिकों के पास समय समय पर सूचना भेजते रहते हैं। और वैज्ञानिक उन सूचनाओं के आधार पर यह तय करते हैं कि ग्रह कैसा है।

 

 ‌‌‌वैज्ञानिकों मे इस ग्रह के मिलने से काफी उत्साह दिखा है। क्योंकि नासा ने बहुत बार अपने यानों के द्वारा बाहरी दुनिया के अंदर ऐसे स्थान के खोजने की कोशिश की थी । लेकिन सन 2011 के अंदर इस खोज से वैज्ञानिकों को कुछ उम्मीद जगी है।

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