देवता और भगवान में होते हैं यह 15 बड़े अंतर

‌‌‌देवता और भगवान क्या आपने इन दोनो शब्दों के बारे मे कभी सोचा है। क्या आप जानते हैं देवता और भगवान मे अंतर क्या है ? क्या देवता या भगवान दोनो एक ही हैं ? क्या देवता और ईश्वर अलग अलग हैं ? कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारे मे हमे बखूबी जान लेना चाहिए । ‌‌‌बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनको यह पता नहीं है कि देवता और भगवान मे अंतर क्या है। और लोग गलतीवश यह मान लेते हैं कि देवता और भगवान दोनो एक ही हैं। लेकिन यह सच नहीं है। देवता और भगवान एक नहीं हैं।

यह दोनों अलग अलग हैं। ‌‌‌इन दोनों के बीच बहुत ही गहरा अंतर है। इस लेख के अंदर हम आपको देवता और भगवान मे अंतर विस्तार से बताने वाले हैं। दोस्तों अक्सर हिंदु धर्म के अंदर राम को भी भगवान माना जाता है। और हनुमान को भी भगवान माना जाता है। लेकिन सही मायने मे यह भगवान नहीं हैं। वरन देवता हैं। ‌‌‌बहुत से लोग देवता और भगवान के अंदर फर्क  नहीं जानने की वजह से देवता और भगवान को एक ही मान लेते हैं। जोकि वास्तव मे सही नहीं है।

Table of Contents

‌‌1.देवता का जन्म हुआ है लेकिन भगवान का जन्म नहीं होता

आप किसी भी देवता के बारे मे यह पता करें उनका जन्म हुआ है। हिंदु धर्म के अंदर आप चाहे राम की बात करें या क्रष्ण की या शिवजी की या रामदेव की । मतलब हर देवता का जन्म हुआ है। लेकिन हिंदु धर्म के अंदर एक ऐसा भगवान भी है। जिसका जन्म नहीं ‌‌‌हुआ है। और वह नाम है भगवान शिव का ध्यान रहे भगवान शिव भोलेनाथ से अलग हैं। ऐसा माना जाता है। भगवान शिव का कभी जन्म नहीं होता है। और पुराणों के अंदर भी लिखा गया है। कि भगवान का कभी भी जन्म नहीं होता है। भगवान जन्म और म्रत्यु से बहुत परे हैं। ‌‌‌सबसे पहला अंतर देवता और भगवान के अंदर यही है कि भगवान का कभी जन्म नहीं होता है। और देवता का जन्म होता है। देवता धरती पर अवतरित होते हैं।

‌‌‌2.देवता माया से परे नहीं हैं लेकिन भगवान माया से परे हैं

भू लोक से लेकर स्वर्ग लोक तक माया के अधीन आते हैं। मतलब इंसान और देवता दोनों  ही माया के अधीन हैं। वे इंद्रियों के वश मे हैं। लेकिन भगवान माया से परे हैं। सब देवता काम क्रोध , लोभ , मोह के अधीन हैं। इस बात का प्रमाण मिलता है । स्वर्ग मे ‌‌‌तो सुंदरी उर्वशी रहती है। जबकि इंद्र अहिल्या से संभोग करने को आतुर हो जाता है। इसी तरह से ध्रुव जैसे तपस्वी जब तपस्या करते हैं तो इंद्र को अपने सिंहासन पर खतरा मंढराता दिखाई देता है। और देवता अपनी भक्ति पर प्रसन्न और क्रोधित भी होते हैं। जिससे सिद्व होता है कि देवता माया के अधीन हैं। ‌‌‌लेकिन भगवान शिव को कोई भी माया अपने वश मे नहीं कर सकती क्योंकि वे इसस परे हैं और उन्होंने ही माया को बनाया है।

‌‌‌3.देवता भगवान के सेवक हैं

इंद्र , शंकर देवता , राम , और विष्णु सब भगवान के सेवक हैं। इनको जो भी पॉवर मिला है। वह सब भगवान शिव की सेवा से ही मिला है। लेकिन भगवान शिव किसी के सेवक नहीं हैं। असली राजा तो भगवान शिव हैं। जो किसी के आगे नहीं झुकते हैं लेकिन सब उनके आगे झुकते हैं।

‌‌‌4.देवताओं का आकार होता है लेकिन भगवान निराकार होते हैं

देवता और भगवान मे अंतर  मे सबसे बड़ा अंतर यह ही है कि देवताओं का आकार होता है। लेकिन भगवान शिव निराकार  है। आप दुनिया के किसी भी कौने के अंदर चले जाएं आपको हर देवता की ‌‌‌मूर्ति मिल जाएगी और‌‌‌इसका मतलब है कि देवताओं का आकार होता है। लेकिन भगवान शिव की आपको कोई भी मूर्ति नहीं मिलेगी । क्योंकि उनका जन्म नहीं हुआ है। और उनका कोई आकार नहीं है। आप जो शिवलिंग देखते हैं वह भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक है।

‌‌‌5. देवता और भगवान में अंतर ,भगवान सिर्फ एक है

दुनिया के अंदर आपको करोड़ों देवता मिल जाएंगे । लेकिन भगवान सिर्फ एक ही है। और वो हैं भगवान शिव हैं। देवताओं की वजह से दुनिया के अंदर अनेक धर्म भी बने हैं।दुनिया के अंदर देवता करोड़ों होने के पीछे का कारण यह है कि यदि कोई इंसान अच्छे कर्म करता है तो वह मरने के बाद देवता ‌‌‌बन जाता है। लेकिन भगवान कैसे बनते हैं इसका रहस्य कोई नहीं जान सका है। और मुझे नहीं लगता है कि कोई उसे कभी जान ही नहीं पाएगा । यही वजह है कि भगवान सिर्फ एक है और कैसे भगवान बने हैं। इस बात का भी कोई पता नहीं है। भगवान को किसने बनाया इसका कोई उत्तर नहीं दे सका है।

‌‌‌6.भगवान के भय से देवता सही काम करते हैं

दुनिया के अंदर जितने भी देवता हैं। सब भगवान के भय से काम करते हैं। उनको डर रहता है कि यदि उन्हें कुछ भी गलत किया है तो उनको उनके कर्मों की सजा मिलेगी । इसी वजह से भगवान से सब देवता कांपते हैं। लेकिन भगवान किसी के अधीन नहीं है।कठोपनिषद के अंदर भी यही ‌‌‌बात कही गई है।

‌‌‌7. देवता और भगवान में अंतर ,भगवान को पाना  नामुमकिन है

विष्णु ,बह्रमा और हमेश जिनको भगवान ने बनाया था। उन खुद को भी यह पता नहीं था कि उनको किसने बनाया है। वे  खुद नहीं जानते थे कि उनको बनाने वाला कैसा है। कहा जाता है कि एक बार जब विष्णु और ब्रह्रमा की इस बात पर लड़ाई हो गई कि वे दोनों एक दूसरे‌‌‌ से बड़ा साबित करने के लिए आपस मे लड़ने लगे और उनकी लड़ाई कई हजारों सालों तक चलती रही । तब भगवान की शक्ति प्रकट हुई और आवाज आई कि तुम से वही बड़ा है जो इस शक्ति के किनारे को तलास लेगा । ब्रह्रमा उपर की तरफ गए और विष्णु नीचे की तरफ हजारों सालों तक वे इस शक्ति का किनारा नहीं ढूंढ सके ।‌‌‌तब उनको महसूस हुआ कि इस संसार के अंदर उनसे भी ज्यादा पॉवर फुल कोई है।

‌‌‌जब खुद विष्णु और ब्रह्रमा जैसे देवता भी भगवान को नहीं पा सके तो आम इंसान के लिए यह नामुमकिन है।लेकिन देवता को तो बड़े बड़े महात्मा पा चुके हैं। प्राचीन ग्रंथों के अंदर रावण भोलेनाथ की तपस्या करते थे और वे रावण के सामने प्रकट होकर उनको ‌‌‌वरदान भी दिया था।

‌‌‌8.भगवान का अंत नहीं होता है

देवता और भगवान मे अंतर यह भी है कि भगवान का अंत कभी भी नहीं होता है। जब से यह दुनिया बनी है। जब से यह ब्रह्रमांड बना है। तब से भगवान हैं। उनका अंत कभी नहीं होता है। लेकिन गीता के अंदर कहा गया है कि देवता तब तक स्वर्ग के अंदर रह सकते हैं । जब तक उनके पास पुण्य होते हैं। ‌‌‌जैसे ही पुण्य समाप्त हो जाते हैं । उनको फिर से जन्म लेना ही पड़ता है। और जन्म लेता है। उसको मरना भी पड़ता है। लेकिन भगवान शिव का जन्म कभी नहीं होता है।

‌‌‌9.देवता कोई भी बन सकता है

देवता और भगवान के अंदर अंतर यह भी है कि देवता तो कोई भी बन सकता है। यदि आप अपने इस जन्म के अंदर अच्छे कर्म करते हैं तो आप देवता बन सकते हैं। कहने का मतलब है। जितने भी देवता बने हैं। वे अपने सतकर्मों की वजह से बने हैं। देवता बनने से पहले वे भी एक आम इंसान की तरह ही ‌‌‌थे । लेकिन भगवान कोई नहीं बन सकता है। और वैसे भी भगवान एक अज्ञात रहस्य है। जिसके बारे मे कोई भी ठीक से नहीं जानता है। और ना ही कभी जान पायेगा । क्योंकि आज ब्रह्रमांड को बने 16 बिलियन साल के लगभग हो चुके हैं। आज तक कोई भगवान को नहीं जान पाया है तो अब क्या जान पाएगा ।

‌‌‌10. देवता और भगवान में अंतर ,भगवान सर्वशक्तिमान है

देवताओं के पास जो शक्तियां हैं। वह भगवान की शक्तियां हैं। क्योंकि भगवान सर्वशक्तिमान है। और उसके पास किसी भी चीज की कमी नहीं है। वह कुछ भी कर सकते हैं। उनके लिए कोई भी काम असंभव नहीं है। उनकी सूचि के अंदर यह शब्द आज तक बना ही नहीं है। लेकिन देवता बहुत सीमित हैं। ‌‌‌उनके पास केवल सीमित ताकते हैं और वे भी नियमों से बंधी हुई हैं। देवता उन नियमों को तोड़ नहीं सकते हैं।

‌‌‌11.भगवान दुनिया के रचियता हैं

इस ब्रह्रमांड की संरचना बहुत जटिल है। इस दुनिया को भगवान ने बनाया है। मतलब इस दुनिया को बनाने वाले भगवान शिव हैं। जबकि देवता सिर्फ भगवान की बनाई दुनिया के नियमों का पालन करते हैं। और दुनिया को चलाने का काम करते हैं। सो देवता दुनिया के रचियता नहीं हैं।

‌‌‌12. देवता और भगवान में अंतर ,भगवान की उम्र अनन्त है

भगवान और देवता के अंदर यह भी सबसे बड़ा अंतर है कि भगवान की उम्र अनन्त है। मतलब आज से मिलियन साल पहले भी भगवान मौजूद थे । लेकिन आपके यह देवता आज से मिलियन साल पुरानी सभ्यताओं के अंदर मौजूद नहीं हैं। जिससे यह सिद्व होता है कि देवताओं की उम्र एक समय सीमा से बंधी हुई। ‌‌‌उनको तब तक स्वर्ग के अंदर रहना होता है। जब तक उनके पुण्य होते हैं। जैसे ही पुण्य समाप्त हो जाते हैं उनको दुबारा से जन्म लेना पड़ता है। अर्थात दुनिया के बनाए नियमों को वे खुद भी नहीं तोड़ सकते ।

‌‌‌13.देवता स्वर्ग मे रहते हैं

आपको बतादें कि सभी देवता स्वर्ग के अंदर ही रहते हैं। लेकिन वे इसके अंदर कर्म नहीं कर सकते । स्वर्ग एक भौग्य योनी होती है। जिसके अंदर देवता अपने पुण्य का फल भोगते हैं। पुण्य पुरा होने के बाद वापस धरती पर आते हैं। जबकि भगवान कहां पर रहते हैं। इस बारे मे कोई भी नहीं ‌‌‌जान सका है। आज तक किसी भी देवता को भी यह पता नहीं चल पाया है कि भगवान शिव कहां पर रहते हैं? और वहां पर क्या करते हैं ?

‌‌‌14.देवता भगवान की पूजा करते हैं

आपको बतादें कि भगवान शिव इस दुनिया के भगवान हैं और सभी देवता भगवान शिव की ही पूजा करते हैं। हालांकि भगवान शिव की पूजा इंसान भी करते हैं क्योंकि वे ही सबसे बड़े ईश्वर हैं। उनके आगे किसी की नहीं चलती है। और देवता की पूजा इंसान करते हैं।

‌‌‌15. देवता और भगवान में अंतर ,भगवान सम्पूर्ण हैं

सम्पूर्ण होने का मतलब है । कि जिसे सब कुछ आता हो । भगवान शिव ही एक मात्र ऐसे हैं जोकि सम्पूर्णं हैं। उन्हें हर चीज का ज्ञान है। उनके पास अन्नत ज्ञान है। लेकिन देवताओं का ज्ञान काफी सीमित है। वे सम्पूर्ण नहीं हैं।

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दोस्तों अब आप भगवान और देवताओं के अंदर अंतर समझ ही चुके होंगे । वैसे तो देवता और भगवान के अंदर हजारों अंतर हो सकते हैं। लेकिन हमको उन सभी की जानकारी नहीं है। जो मुख्य अंतर थे वे सब हम आपको बता ही चुके हैं। ‌‌‌तो दोस्तों देवता और भगवान को कभी भी एक ही नहीं समझना चाहिए । आप भगवान शिव की तुलना किसी भी देवता से नहीं कर सकते । क्योंकि भगवान शिव देवता नहीं देवताओं के राजा हैं और देवता तो उनके सेवक हैं।  भला सेवक और राजा की तुलना नहीं की जा सकती है।

‌‌‌दोस्तों आपको देवता और भगवान मे अंतर लेख कैसा लगा कमेंट करके बताएं ।

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