इस किले से बरसाए गए थे चांदी के गोले

क्या आपने चांदी के गोले बरसाने वाले युद्व के बारे मे सुना है। मुझे लगता है आपने ऐसा नहीं सुना । दुनियां के अंदर अभी तक हुए युद्वों की बात करें तो किसी भी युद्व के अंदर चांदी और सोने के गोलों का इस्तेमाल नहीं किया गया ।‌‌‌इस लेख के माध्यम से हम आपको एक ऐसी जगह के बारे मे बताने वाले हैं। जहां पर युद्व के लिए चांदी के गोलों का इस्तेमाल किया गया । और यह जानकारी इतिहास के अंदर भी दर्ज है।

चांदी के गोले दागने वाला किला कहां है ?

चांदी के गोले बरसाने वाला किला राजस्थान के जिले चूरू के अंदर पड़ता है। प्राचीन समय के अंदर यहां पर चांदी के गोले बरसाये गए थे । इस वजह से यह जगह काफी प्रसिद्व हो चुकी है। और इस जगह को देखने के लिए कई पर्यटक भी यहां आते हैं।‌‌‌वैसे राजस्थान के अंदर यह अकेला किला ही नहीं है। वरन बहुत सी ऐसी जगह  हैं। जहां पर शानदार सतापत्य कला के नमूने मौजूद हैं। जो इतिहास की कहानियों को बयां करते हैं।

 

चांदी के गोले दागने वाला किला का निर्माण और राजा

चूरू किले का निर्माण ठाकुर कुशल सिंह ने 1694 के अंदर करवाया था ।ठाकुर शिवजी सिंह ठाकुर कुशल सिंह के वंशज थे । अगस्त 1814 के अंदर यह घटना हुई थी । शिवजी सिंह के बारे मे यह कहा जाता है। कि वे एक बहुत अच्छे राजा थे और अपनी प्रजाकी अच्छी देखभाल भी करते थे । ‌‌‌प्रजा उनके युद्व काल के दौरान उनके तन मन और धन से पूरी तरह से साथ थी ।बीकानेर में महाराज सूरत सिंह का शासन था वे काफी महत्वकांक्षी शासक थे । और उनका विवाद अक्सर चूरू के शासक से चलता रहता था ।

‌‌‌चांदी के गोले दागने वाला किला

‌‌‌युद्व कैसे हुआ

वैसे इस बारे मे मैंने काफी कुछ सर्च किया लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी । जो जानकारी मिल रही है। उसी को आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा हूं । कहा जाता है कि बिकानेर और चूरू के राजा के बीच युद्व होने का जो मैन कारण था।‌‌‌वह दोनों राजाओं का आपसी विवाद बताया जाता है। जिस वजह से युद्व हुआ था । इसके अलावा कहा जाता है। कि इस युद्व के बार 1857 के अंदर भी बिकानेर और चूरू के बीच युद्व हुआ था । इसकी वजह यह थी कि चूरू के शासक ने अंग्रेजों के विरूद्व मोर्चा खोल दिया था । तब अंग्रेजों ने बिकानेर से सैना बुलाई थी ।

युद्व के अंदर सैना

ठाकुर शिवजी सिंह की सैना के बारे मे कर्नल टॉड ने बताया है कि 200 पैदल और 200 घूडूसवार थे । इसके अलावा यह भी कहा गया है कि स्थानिए लोग भी इस युद्व के अंदर शामिल थे । जो अपने राजा का साथ दे रहे थे ।

‌‌‌चांदी के गोले दागे गए

1814 ई के अंदर बिकानेर के राजा सूरत सिंह ने अपने सेना को लेकर चूरू पर चढ़ाई करदी थी । ऐसी स्थिति के अंदर दोनों तरफ घमासान युद्व हुआ । कहा जाता है कि यह युद्व कई दिनों तक चला था । और जब काफी दिन बीत गए तो चूरू के राजा के पास गोला बारूद्व खत्म हो गए । और अब  शिवजी सिंह को निराश होना पड़ा । उन्हें लग रहा था कि अब वे हारने वाले हैं। लेकिन जनता ने उनका साथ दिया और अपने घरों के आभूषण लाकर राजा को सौंप दिए गए । लूहारों ने उनके गोले बनाए और दुश्मन सेना पर दागने शूरू कर दिये । चांदी के गोलों को देखकर दुश्मन सेना हैरान रह गई।

‌‌‌युद्व के परिणाम

ऐसा माना जाता है कि जब चूरू के राजा ने चांदी के गोले दागने शूरू किये तो दुश्मन सेना पीछे हट गई और डरकर भाग गई। वहीं कई जगहों पर यह उल्लेख मिलता है कि दुश्मन सेना ने इंनसानियत की जीत मानते है। युद्व करना बंद कर दिया था और पीछे हट गई।

‌‌‌लेकिन कुछ भी हो अब वह किला जिसके अंदर से चांदी के गोले दागे गए थे उसे चांदी के गोले वाले किले के नाम से जाना जाता है। आस पास और राजस्थान के अंदर यह किला काफी फेमस है।‌‌‌आपको बतादें कि विश्व के इतिहास के अंदर चांदी के गोले दागने वाला यह एकमात्र किला है।

 

‌‌‌इस संबंध मे एक प्रसिद्व लोकोक्ती भी है

धोर ऊपर नींमड़ी धोरे ऊपर तोप।

चांदी गोला चालतां, गोरां नाख्या टोप।।

वीको-फीको पड़त्र गयो, बण गोरां हमगीर।

चांदी गोला चालिया, चूरू री तासीर।।

‌‌‌इंटरनेट पर एक वेबसाइट पर यह भी दिया हुआ है कि यह लड़ाई अंग्रेजों के साथ हुई क्रांति की वजह से हुई थी । जैसा कि आप उपर कविता के अंदर लिखा हुआ देख सकते हैं कि चांदी के गोले अंग्रेजों पर चलाए गए थे । हालांकि सच का पता नहीं है।चांदी के गोले दागने वाला किला लेख आपको कैसा लगा

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