आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? suicide करने के कारण क्या हैं ?

आत्महत्या के बारे मे तो आप जानते ही होंगे आत्महत्या का मतलब होता है कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से अपनी जिंदगी को समाप्त कर लेता है। तो उसे आत्महत्या या सुसाइड कहा जाता है। ‌‌‌आपके आस पास भी बहुत सी आत्महत्या करने की घटनाएं होती होंगी । आमतौर पर जो लोग आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं और बच जाते हैं। बाद मे उनको बुरी नजरों से देखा जाता है और लोग उनसे घ्रणा करते हैं। ‌‌‌और करते भी क्यों नहीं देश की सरकार भी अब जाकर यह समझ पाई है कि आत्महत्या एक प्रकार का मानसिक रोग है। इससे पहले आत्महत्या को एक जुर्म पाना जाता था। ऐसी  स्थिति के अंदर अधिकतर लोग  आज भी यही सोचते हैं कि आत्महत्या करना इंसान के बस मे होता है।

‌‌‌बहुत पहले तक तो मैं भी यही सोचता था। लेकिन जब काफी कुछ रिसर्च किया पढ़ा और समझा तो पाया की आत्महत्या करना इंसान के बस मे नहीं होता है वरन वह तो एक मानसिक रोग होता है। ‌‌‌जो लोगों से उनका खुद का कत्ल करवाता है।

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आत्महत्या एक तरह का मानसिक रोग कैसे होता है ?

आत्महत्या क्यों करते हैं लोग के बारे मे जानने से पहले हम आपको यह बतादेना चाहेंगे कि आत्महत्या एक तरह का मानसिक रोग कैसे होता है ?  ताकि अगली बार जब कोई आत्महत्या करले तो आप यह ना कह सकें कि उसे नहीं मरना चाहिए था। ‌‌‌कोई व्यक्ति तभी आत्महत्या करता है जब उसके दिमाग की सारी स्थितियां ‌‌‌प्रतिकूल हो जाती हैं।

 ‌‌‌मतलब कि इंसान हमेशा  कूल और प्रतिकूल प्रभावों से कंट्रोल होता है। भगवान ने जब उसका शरीर बनाया तो यही पक्रिया उसके शरीर के अंदर डाली थी। यदि यह सब नहीं होती तो इंसान जिंदा नहीं रह पाता । उदाहरण के तौर पर जब आप अपने हाथ को आग के उपर ले जाते हैं तो आपको वह जलने लगता है और आपको अच्छा महसूस नहीं ‌‌‌होता है।  इसी वजह से आप आग से अपना हाथ दूर कर लेते हैं। इसी तरह से जब आपको कोई मारता है तोभी आपको अच्छा महसूस नहीं होता है। और आप दूर भाग जाते हैं।  इसी तरीके से कोई भी चीज आपको नुकसान पहुंचाती है उस चीज से इंसान दूर रहना पसंद करता है।

‌‌‌जिस तरह से आग मे हाथ जलना और आग से हाथ खींचना दो विपरित चीजे हैं। उसी तरीके से दिमाग के अंदर भी कई सारी विपरित चीजे होती हैं। जिनकी वजह से इंसान कंट्रोल होता है।‌‌‌दिमाग के अंदर कई सारे ऐसे सूचनाओं के समूह होते हैं जो एक समूह दूसरे समूह के विपरित काम करता है। या कहें कि यह एक दूसरे कों कंट्रोल करने के लिए बने होते हैं। जैसे कि  कांग्रेस और बिजेपी हैं ।

यह एक दूसरे को कंट्रोल करने के लिए बनी हुई हैं। अब आप कल्पना करें कि पहली स्थिति के अंदर‌‌‌ बिजेपी  कांग्रेस से ज्यादा पॉवर फुल है क्योंकि वह नैचुरल पार्टी है मतलब उसे नेचर का स्पोर्ट है।तो इसका अर्थ है वह एक अच्छी पार्टी है। लेकिन किसी वजह से यह स्पोर्ट डाउन हो जाता है तो कांग्रेस प्रभावी हो जाती है तो जो नैचर के विरूद्व काम करेगी ।

‌‌‌अब हम अपनी बात को दिमाग पर लेकर चलते हैं। अब आप सोचो की आपके दिमाग मे दो विचार आ रहे हैं एक तो यह है कि आपको कल जयपुर जाना है दूसरा आपको विदेश जाना है ऐसी स्थिति के अंदर आप दोनों कामों मे से एक ही काम करेंगे और आप वोही काम करेंगे जो प्रभावी होगा । उस वक्त आपके दिमाग मे ।

‌‌‌इसी तरीके से आत्महत्या की रूप रेखा लंबे समय से तैयार होती रहती है। और समय आता है तब एक आत्महत्या का विचार इतना प्रभावी हो जाता है। जबकि उसके सामने दूसरे विचार गौण हो जाते हैं। इसी वजह से इंसान आत्महत्या कर लेता है। ‌‌‌यह कंडीशन किसी भी इंसान के अंदर हो सकती है। हालांकि कुछ इंसानों की मानसिक स्थिति  इस प्रकार की होती है कि वे आसानी से आत्महत्या के लिए तैयार नहीं होते ।

आत्महत्या क्यों करते हैं लोग

‌‌‌दोस्तों आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? इसके पीछे कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। आत्महत्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। जिसमे कुछ कारण सामाजिक होते हैं तो कुछ कारण पारिवारिक  हो सकते हैं तो कुछ कारण वैज्ञानिक हो सकते हैं। आत्महत्या के कारणों पर आइए विस्तार से जान लेते हैं। इसके ‌‌‌अलावा आत्महत्या करने के मनौवेज्ञानिक कारणों पर भी हम विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।

‌‌‌आत्महत्या का सामाजिक कारण

इंसान समाज के अंदर रहता है। हमारे समाज के अंदर हजारों कुरितियां मौजूद हैं। और इन कुरितियों की वजह से व्यक्ति आत्महत्या कर सकते हैं। यदि इन कुरितियों की लिस्ट बनाने लग जाएं तो निश्चिय ही बहुत लंबी हो जाएंगी । फिर भी यह कुरितियां कभी कभी इंसान के दिमाग ‌‌‌पर इतनी हावी हो जाती हैं कि जिसके परिणाम स्वरूप इंसान आत्महत्या कर लेता है। नीचें हम आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? के सामाजिक कारणों पर कुछ चर्चा कर लेते हैं।

‌‌‌अवैध संबंध

अवैध संबंध का मतलब आप जानते ही होंगे । जब कोई शादी शुदा पुरूष या महिला अपने पति या पत्नी को छोड़कर किसी दूसरे के साथ संबंध बना लेता है तो उसे अवैध संबंध कहा जाता है। आजकल अवैध संबंध की वजह से सुसाइड के मामले बहुत अधिक प्रकाश मे आ रहे हैं। ‌‌‌अवैध संबंध के मामले के अंदर पुरूष सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं। आमतौर पर इसमे होता यह है कि जब कोई पत्नी किसी दूसरे पुरूष के साथ संबंध स्थापित कर लेती है तो कई पुरूषों को गहरा आघात लगता है।और वे आत्महत्या कर लेते हैं। हालांकि कुछ केस ऐसे भी सामने आते हैं। जिनमे वे पत्नी का कत्ल तक ‌‌‌कर देते हैं।

‌‌‌ आत्महत्या क्यों करते हैं लोग  घरेलू कलह

आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण है घरेलू कलह की वजह से भी लोग आत्महत्या कर लेते हैं। आमतौर पर जब किन्हीं वजह से घर का माहौल खराब हो जाता है। पति पत्नी का आपस मे झगड़ा हो जाता है। ऐसी स्थिति के अंदर कुछ लोग आत्महत्या का कदम उठा लेते हैं। ‌‌‌कुछ पति अपनी पत्नी को ज्यादा प्रताड़ित करते हैं। इस वजह से वे सुसाइड कर लेती हैं। हालांकि घरेलू कलह की वजह से पति भी आत्महत्या करते हैं। इसके अलावा घर के अंदर बुजुर्गों के साथ दूरव्यवहार की वहज से वे भी सुसाइड करते हैं।

‌‌‌आत्महत्या के लिए उकसाना

कई बार कुछ व्यक्ति इस वजह से भी आत्महत्या  कर लेते हैं क्योंकि कुछ लोग उन्हें आत्महत्या करने के लिए उकसाते हैं। पीछले दिनों एक व्यक्ति की पत्नी किसी के साथ भाग गई थी। अब उस व्यक्ति का घर से निकलना मुश्किल हो गया था । क्योंकि लोग उसे हर बात पर ‌‌‌ताने मारने लगे थे । ऐसी स्थिति के अंदर कुछ दिनों बाद ही उसने सुसाइड कर लिया था। इसतरह के उकसाने की वजह से बहुत से लोग आत्महत्या कर लेते हैं। यदि किसी व्यक्ति के साथ कुछ गलत हुआ है तो इसका मतलब यह नहीं कि आप उसे ताने मारें वरन आपको उससे सहानूभूति होनी चाहिए। ‌‌‌बहुत से लोगों का जिन कामों के अंदर कोई हाथ ही नहीं होता है उसके बाद भी लोग उन्हें ताने देते हैं जोकि सबसे गलत बात है।

‌‌‌ आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ब्लैकमैलिंग

ब्लैकमैलिंग की वजह से भी लोग सुसाइड करते हैं। ब्लैकमैलिंग कई तरह की हो सकती है।जैसे किसी ने किसी लड़की या महिला की नीजी तस्वीरें लेली और अब वह उसे बार बार यह धमकी दे रहा है कि उसने उसकी मांग पूरी नहीं की तो वह उसकी तस्वीरें सर्वाजनिक कर देगा । ‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर उस महिला के दिमाग पर गहरा असर पड़सकता है।और वह सुसाइड भी कर सकती है।  इस मामले के अंदर महिलाएं सबसे ज्यादा आत्महत्या करती हैं। और कई बा र महिलाओं के फ्रेंड ही उनको ब्लैकमेल करने लग जाते हैं। ‌‌‌इसके अलावा कई बार पुरूष भी अपनी पत्नी या किसी दूसरे के ब्लैकमैलिंग के शिकार हो जाते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति के अंदर पुरूषों की आत्महत्या दर कम होती है।

‌‌‌अत्याचार

कई बार आपने देखा और सुना होगा कि दबंग किस्म के लोग दूसरे लोगों पर अत्याचार करते हैं। और कमजोर किस्म के लोग उनके अत्याचार की वजह से इतने डर जाते हैं कि उनको सुसाइड तक करना पड़ जाता है। ‌‌‌पीछले दिनों यूपी के बलिया के अंदर ऐसा ही मामला सामने आया था। जिसमे एक किसान आत्महत्या करने की बात कह रहा था। किसान का कहना है कि भू माफियाओं ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है और यदि उनको जमीन नहीं मिली तो वह सुसाइड कर लेगा । ‌‌‌इसी तरह के अनेक मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर गुंडों का आतंक इस कदर है कि वहां पर यह लोग दूसरों को जिने नहीं दे रहे हैं।

आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ‌‌‌ आर्थिक कारण

‌‌‌भारत की जनसंख्या सन 2019 के अंदर 1.37 billion हो चुकी है। और इतने लोगों को रोजगार देना सरकार के बस की बात भी नहीं है। ऐसी स्थिति के अंदर आर्थिक समस्याएं तो पैदा होगी ही । ‌‌‌इन आर्थिक समस्याओं की वजह से बहुत से लोग आत्महत्या कर रहे हैं। आजकल हर चीज महंगी पर महंगी होती जा रही है। ऐसी स्थिति के अंदर खर्चे बहुत अधिक बढ़ गए हैं और उनकी तुलना मे आमदनी कम हो रही है। ‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर गरीब लोग और गरीब होते जा रहे हैं और अमीर और अमीर होते जा रहें हैं। इंडिया के अंदर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं है। और इसकी वजह से लोग खूब बच्चे पैदा कर रहे हैं।

National Crime Records Bureau इंडिया ने सन 2014 के अंदर 5,650  किसान आत्महत्या को दर्ज किया था। वैसे देखा जाए तो भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। और अकाल वैगरह पड़ने से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति के अंदर उनके पास आत्महत्या के अलावा और कोई चारा नहीं ‌‌‌है।

‌‌‌ आत्महत्या क्यों करते हैं लोग बेरोजगारी

भारत के अंदर बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्याओं के अंदर एक है। और बेरोजगारी की वजह से बहुत से लोग आत्महत्या कर लेते हैं। बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार ने अभी तक बहुत सारी कोशिशें भी की हैं। लेकिन बिचौलिए और लोगों को यौजनाओं की सही जानकारी नहीं होने की वजह से कोई फायदा नहीं हुआ है। ‌‌‌जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बेरोजगार होता है तो वह डिप्रेशन मे चला जाता है। अंत मे वह सुसाइड कर लेता है। आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? इसका बड़ा कारण बेरोजगारी रही है

‌‌‌सरकार की आर्थिक नीति

आमतौर पर भारत के अंदर जो सरकार आती है। वह गरीबी दूर करने और लोगों को स्वरोजगार दिलाने के लिए अनेक योजनाएं चलाती है। लेकिन सही मायने मे कोई भी योजना सही तरीके से सक्सेस नहीं हो पाती है। इसके पीछे कई सारे पेचिदगियां हैं। ‌‌‌और बहुत से लोगों को इन योजनाओं की सही सही जानकारी भी नहीं होती है। यही वजह है कि लोग आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं।और सरकार अपनी आर्थिक नीति को सही तरीके से लागू करने मे नाकाम साबित हो रही है।

‌‌‌आत्महत्या क्यों करते हैं लोग मनौवेज्ञानिक कारण

दोस्तों आत्महत्या के पीछे सबसे पहले सामाजिक और दूसरे कारण काम करते हैं। और उसके बाद यह आत्महत्या को मनौवेज्ञानिक बना देते हैं। मतलब सामाजिक और आर्थिक कारण कुछ ऐसे कारण हैं जो व्यक्ति के  मनौविज्ञान को इसके लिए तैयार करते हैं।‌‌‌मानलिजिए एक व्यक्ति गम्भीर आर्थिक समस्याओं से सूझ रहा है

पहले धीरे धीरे उसके सामने यह आर्थिक समस्याएं आती हैं। उसके बाद यह गम्भीर रूप धारण करती चली जाती हैं। तो उसके दिमाग के अंदर एक तरह से यह मनौविज्ञान तैयार होता चला जाता है।‌‌‌और अंत मे वह व्यक्ति सोचने लगता है कि आत्महत्या से सरल उपाय कोई नहीं है। आइए जानते हैं यह कारण किस तरह से आत्महत्या का मनोविज्ञान तैयार करते हैं।

‌‌‌आप चित्र के अंदर देख रहे हैं। हर इंसान के दिमाग के अंदर दो चीजें जरूर होती हैं। जिसमे  एक तरफ तो उनके पास खुद की समस्याएं होती हैं। और दूसरी तरफ खुद को उनके लिए बनाए रखने का विचार होते हैं।‌‌‌अधिकतर लोगों के अंदर यह विरोधी विचार उनकी समस्याओं से बहुत अधिक प्रभावी होते हैं। या कहें की व्यक्ति इनके सामने हार नहीं मानता है। ऐसी स्थिति के अंदर वह अपनी जिंदगी से निराश नहीं होता है। विरोधी विचारों के अंदर ऐसे विचार आते हैं। जैसे आत्महत्या गलत चीज है और वह खुद इन समस्यों से ‌‌‌निपट सकता है।  और भी बहुत सारा दिमाग मे पड़ा डेटा इस तरफ हो सकता है। इस संबंध मे दिमाग के अंदर दो पक्ष हो जाते हैं। एक आत्महत्या को रोकने वाला और दूसरा उसकी तरफ उकसाने वाला । इन दोनों के बीच झगड़ा चलता रहता है।

‌‌‌और ऐसी स्थिति के अंदर कई मनौवेज्ञानिक परिवर्तन होते हैं। धीरे धीरे विरोधी विचार कमजोर होने लगते हैं। जब व्यक्ति को आसा की कोई किरण नहीं दिखाई देती है। जबकि सामाजिक और आर्थिक समस्याएं या तो ज्योंकि त्यों रहती हैं या  फिर बढ़ती रहती हैं।

‌‌‌ऐसी स्थिति को नहीं रोका जाता है तो एक समय ऐसा आता है। जब व्यक्ति के विरोधी विचार आत्महत्या वाले विचारों से दब जाता है। जिसको मनौवेज्ञानिक सुसाइड जो रियल नहीं होता है। और हमेशा रियल सुसाइड से पहले घटित होता है। ऐसी स्थिति के अंदर व्यक्ति मनौवेज्ञानिक रूप से मर चुका होंता है।

‌‌‌और इस स्थिति के बाद व्यक्ति कभी भी मर सकता है। कोई भी व्यक्ति यार दोस्त इस स्थिति को पहचानकर यदि चाहें तो उसे डॉक्टर के पास ले जा सकते हैं।

‌‌‌आइए इन सब चीजों को  एक उदाहरण की मदद से समझतें हैं ।

रावश गांव के अंदर रबी नामक एक युवक रहता था । उसके जीवन के अंदर बहुत अच्छा चल रहा था । उसका खुद का धंधा अच्छा चमक रहा था। लेकिन एक समय ऐसा आया कि उसका धंधा धीरे धीरे  करके चौपट होने  लगा ।‌‌‌उसे कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा था कि वह क्या करें? उसने लाख कोशिशें की किंतु वह अपने व्यापार के अंदर नुकसान होने से नहीं बचा पा रहा था। और अंत मे उसने अपने बिजनेस को बचाने के लिए बहुत प्रयास किया लेकिन अगले एक साल के अंदर उसे मार्केट को छोड़कर भागना पड़ा।

‌‌‌अब एक तो उसके उपर कर्ज हो गया और दूसरा उसके बड़े परिवार के सामने रोटी की समस्या भी पैदा हो गई। उसे कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए ? वह इतनी बुरी तरह से हार चुका था कि उसे धीरे धीरे यह लगने लगा था कि उसके पास इन सब परेशानियों से बचने का एक ही रस्ता है और ‌‌‌वह रस्ता है आत्महत्या ।‌‌‌आत्महत्या क्यों करते हैं लोग ? तो इस प्रश्न का उत्तर मनौवेज्ञानिक कारणों के आधार पर आपको समझ मे आ ही गया होगा । आपने स्टोरी के अंदर देखा कि किस तरह से परिस्थितियां युवक के विपरित होती चली जाती हैं ? और किस तरह से उसके दिमाग मे आत्महत्या का विचार पैदा होता है।

‌‌‌बिल्कुल इसी तरीके से ही व्यक्ति मनौवेज्ञानिक रूप से आत्महत्या के लिए तैयार होता है। जिस तरह से इस व्यक्ति को बिजनेस मे नुकसान हुआ उसी तरीके से बहुत से लोग इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं कि उनकी प्रिय चीजों को नुकसान हो , जैसे कोई लड़का किसी लड़की से प्यार करता है।‌‌‌और उन दोनों की शादी एक दूसरे से न करके यदि लड़की की शादी कहीं और  हो जाती है तो इस बात की संभावना हो सकती है की लड़का सुसाइड करलेगा । हालांकि यह लड़के के दिमाग पर निर्भर करता है।

‌‌‌चिकित्सिय कारण

आत्महत्या करने के पीछे चिकित्सिय कारण भी बहुत जिम्मेदार है।  कुछ साल पहले तक तो सरकार भी आत्महत्या को एक रोग नहीं मानती थी। और दूसरा भारत के गांव और दूर दराज के ईलाकों के अंदर आपको एक भी डॉक्टर ऐसा नहीं मिलेगा जो मनौवेज्ञानिक हो ।‌‌‌और यहां की सरकार ने भी इस संबंध मे कोई खास व्यवस्था भी नहीं की है। ऐसी स्थिति के अंदर जब कोई व्यक्ति की मानसिक स्थिति खराब होती है तो उसे किसी डॉक्टर के पास भी नहीं लेकर जाया जाता है। जो आत्महत्या की एक बड़ी वजहों मे से एक है।

‌‌‌ज्ञान का अभाव

आज भी भारत की 80 प्रतिशत आबादी ऐसी है जोकि आत्महत्या को एक रोग मानने से इनकार करती है। और बहुत से लोग यह मानते हैं कि आत्महत्या कोई रोग नहीं है। वरन यह सिर्फ व्यक्ति जानबूझ कर  करता है जोकि सच नहीं है।‌‌‌यह स्थिति सुसाइड के अंदर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसी जगहों पर जब व्यक्ति सुसाइड करने के विचार धारा के साथ रहता है तो भी उसे पहचानना मुश्किल होता है।और तो और तब उसका उपचार किया जाना भी दूर की बात है।

‌‌‌इस संबंध मे हमारे ही गांव की एक घटना का उल्लेख करना चाहूंगा ।‌‌‌मंगलाराम नामक एक युवक ने काफी साल पहले जहर खा लिया था। उसे उपचार के लिए अस्पताल  ले जाया गया । डॉक्टरों ने उसे बचा लिया और कुछ दिन वहां पर रखा लेकिन उसे किसी मनौवेज्ञानिक के पास नहीं भेजा गया । और जहर का उपचार करने के बाद छूटटी देदी गई।‌‌‌जिससे यह साफ जाहिर होता है कि लोगों को अभी भी आत्महत्या के बारे मे जानकारी नहीं है। और इसी वजह से लोग आत्महत्या करते हैं।

‌‌‌सुसाइड के प्रति सजगता का अभाव

दुनिया के 90 प्रतिशत लोग आज भी ऐसे हैं जोकि सुसाइड के मनौविज्ञान को नहीं समझ पाते हैं। और खुद के दिमाग को इस प्रकार से तैयार नहीं कर पाते हैं कि उनके दिमाग के अंदर सुसाइड का विचार आसानी से पैदा ही नहीं हो ।‌‌‌इस संबंध मे लोगों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए । खास कर उनलोगों को जिनमे सुसाइड करने की संभावनाएं सबसे अधिक होती हैं। भारत के अंदर तो कम से कम इस तरह के प्रशिक्षण केंद्र  नहीं हैं।

‌‌‌किन लोगों की सुसाइड की संभावना अधिक होती है ?

वैसे यह पता लगाना संभव नहीं है कि किन लोगों के अंदर सुसाइड की संभावना अधिक होती है। लेकिन इस संबंध मे एक साधारण सा नियम काम करता है और वो यह है कि आप रबर की गेंद को जितनी तेज गति से  जमीन पर‌‌‌ मारोगे वह उतनी ही तेज गति से विपरित दिशा के अंदर जाएगी । उसी तरीके से जिन लोगों की चीजों के साथ जितनी अधिक दिल्लगी होती है उनके सुसाइड करने के चांस उतने ही अधिक होते हैं।

‌‌‌जैसे आपको अपनी पत्नी से बहुत अधिक दिल्लगी है। और आपकी पत्नी आपके साथ धौखा करती है तो आपके दिल को उतनी अधिक ठेस लगती है। ऐसी स्थिति के अंदर भावनाओं मे बहकर आप ऐसा कदम उठा सकते हैं।‌‌‌इसके विपरीत एक तरफ वो सख्स है जो कोई भी चीज को दिल पर नहीं लेता है। तो उसको कुछ गलत होने का गम नहीं होगा तो भला वह कैसे सुसाइड कर सकता है।

‌‌‌ऐसे लोग चिकने घड़े की तरह होते हैं जिन पर पानी कभी ठहर ही नहीं सकता है।तो दोस्तों कहा भी जाता है कि

किसी भी चीज को दिल पर नहीं लेना चाहिए यारो

‌‌‌सुसाइड की संभावना को तय करने के लिए निम्न चीजों को ध्यान मे रखा जाता है।

‌‌‌व्यक्ति की दिल्लगी

उन सभी चीजों को नोट किया जाता है। जिनको व्यक्ति अथाह प्रेम करता है। और हर व्यक्ति की जिंदगी के अंदर कुछ ऐसी चीजे होती हैं। इन चीजों की आप चाहे तो उनके महत्वपूर्णता के आधार पर लिस्ट बना सकते हैं। जैसे पैसा मकान वैगरह आदि ।‌‌‌इन चीजों के आधार पर यह तय किया जाता है कि  इनमेसे कौनसी चीज आपको आत्महत्या के लिए उकसा सकती है। आमतौर पर सबसे पॉवरफुल चीज की वजह से भी इंसान आत्म हत्या करता है। ध्यानदें दिल्लगी हमेशा पॉजिटिव चीजों के साथ या जिन्हें इंसान अच्छी मानता है के साथ होती है।

‌‌‌आपको बतादें कि हमेशा एक नंबर या सुपर पॉवर फुल चीज के प्रभावों सेही इंसान सुसाइड करता है। यदि वह चीज सबसे पॉवर फुल नहीं है तो इंसान ऐसा उसकी वजह से कभी नहीं कर सकता ।

‌‌‌विरोधी विचार

विरोधी विचार वे चीज होते हैं जो कि इंसान को सुसाइड करने से रोकते हैं। इनका भी परिक्षण किया जाता है। व्यक्ति पर हर प्रकार की कंडिशन से सवाल जवाब किया जाता है। आमतौर पर यह मनोवैज्ञानिक करते हैं।‌‌‌सवाल जवाब की मदद से यह आसानी से जाना जाता है कि व्यक्ति हर कंडिशन के अंदर क्या कर सकता है ? और इनकी संभावनाओं पर विचार किया जाता है।

‌‌‌इंसान इन मनौवेज्ञानिक तरीकों से करता है सुसाइड

आमतौर पर सुसाइड करने से पहले दिमाग के अंदर कुछ मनौवेज्ञानिक परिवर्तन होते हैं। और उन्हीं परिर्वतन की वजह से इंसान सुसाइड करता है।

                  ‌‌‌जैसा कि आप चित्र के अंदर देख रहे हैं। सबसे पहले व्यक्ति कोई भी पॉजिटिव प्रभाव प्राप्त करता रहता है। लेकिन किन्हीं वजहों से वह पॉजिटिव प्रभाव नगेटिव के अंदर बदल कर सुसाइड प्रोटेक्सन लेयर या विचारों पर अटैक करता है। और उनको कमजोर बना देता है। ‌‌‌इससे पहले व्यक्ति सुसाइड को गलत मानता था लेकिन उसके अंदर हुई इस दिमागी क्रिया के बाद वह अपने आप ही सुसाइड को सही मानने लग जाता है। और मनौवेज्ञानिक रूप से सुसाइड के लिए तैयार हो जाता है।

‌‌‌इस चीज को एक सरल उदाहरण से समझें तो मान लिजिए एक व्यक्ति किसी लड़की से बहुत ज्यादा प्यार करता है। वह उसके बिना नहीं रह सकता । अचानक से उसे यह पता चलता है कि उस लड़की की कहीं और शादी करदी गई है। तो उसे गहरा धक्का लगता है। ऐसी स्थिति के अंदर यदि विरोधी विचार कमजोर पड़ गए तो वह सुसाइड ‌‌‌भी कर सकता है।

‌‌‌आत्महत्या करने का कारण बिमारियां

दोस्तों लोग अनेक तरह की शारीरिक और मानसिक बिमारियों की वजह से भी आत्महत्या कर लेते हैं। पीछले दिनों हमारे ही परिवार के एक व्यक्ति ने आत्महत्या करली थी। क्योंकि वह कई दिनों से मानसिक रूप से बिमार चल रहा था।‌‌‌इसी तरीके से 3 जून 2018 को एक मनु नामक व्यक्ति ने रेल से कटकर आत्महत्या करली थी क्योंकि उसके पेट के अंदर गांठ थी और असहनिय दर्द की वजह से वह काफी परेशान हो चुका था।

‌‌‌इसी तरीके से एक अन्य व्यक्ति ने इसलिए आत्महत्या करली थी क्योंकि वह डिप्रेसन के अंदर चल रहा था। सन 2011 से लेकर सन 2015 तक लगभग 4 लाख लोग आत्महत्या कर चुके थे । और  इनमे वे लोग थे जिन्होंने किसी ना किसी शारिरिक या मानसिक बिमारी की वजह से आत्महत्या की थी।‌‌‌जब लोग किसी गम्भीर मानसिक या शारिरिक बिमारी से पीड़ित होते हैं। तो वे कई बार इतने निराश हो जाते हैं कि उनको लगता है कि आत्महत्या करना ही इस बिमारी का हल है। इसकी वजह यह है कि जो लोग लंबे समय तक दवाई लेते हैं और फिर उन्हें यह लगने लगता है कि वे अब ठीक नहीं होंगे और घुट घुट कर मरने

‌‌‌से अच्छा है एक ही बार मे जान गवांदे ।भारत में वर्ष 2015 में 1,33,625 लोग मरे थे । और उनमे से 21178 ऐसे थे जिन्होंने इसलिए आत्महत्या करली क्योंकि वे किसी ना किसी बिमारी से पीड़ित थे । 2001 से 2015 के बीच भारत में कुल 18.41 लाख लोगों ने आत्महत्या की थी और उनमे से 4 लाख लोग ऐसे थे जिन्होंने किसी ना किसी बिमारी के चलते आत्महत्या करली थी।मतलब कहा जा सकता है कि हर 5 आत्महत्या मे से 1 बिमारी की वजह से ही होती है।

‌‌‌एक ओर बिमार व्यक्ति को उसकी बिमारी अंदर ही अंदर ही अंदर कचोटती है। वहीं दूसरी औरसमाज और परिवार के लोगों के लिए ऐसा व्यक्ति बोझ हो जाता है। परिवार के लोग ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाने लगते हैं। जिससे वह एकदम से अकेला पड़ जाता है और टूट सा जाता है। भला अकेला व्यक्ति किस किस से लड़ेगा।

‌‌‌एक तरफ उसे अपनी बिमारी से लड़ना होता है। वहीं दूसरी और परिवार के लोगों के ताने सहन करने पड़ते हैं और उसके बाद अपनी जीने की इच्छा को बचाए रखना पड़ता है। वैसे देखा जाए तो मरने वाले इतने लोगों मे बहुत कम लोग ऐसे होंगे । जिनके परिवार वालों ने उनकी बिमारी के बाद उनके साथ सही व्यवहार किया हो।‌‌‌इंसान केवल बिमारी की वजह से नहीं मरता है वरन अपनो द्वारा किये गए बर्ताव से वह काफी परेशान हो जाता है। कुछ लोगों तो यह लगने लगता है कि बेहतर है किसी पर बोझ बनने से मर जाना ही अच्छा है।

‌‌‌पीछले दिनों हमारे पास के ही एक व्यक्ति ने आत्महत्या करली थी। इसकी वजह भी उसकी बिमारी ही थी। वह लंबे समय से कैंसर जैसे रोग से लड़ रहा था। जब डॉक्टरों ने जवाब देदिया कि वह अब ठीक नहीं हो सकता तो  उसके बाद वह बूरी तरह से निराश हो गया । घरवाले भी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे । तो ‌‌‌उसने मरना ही उचित समझा ।

‌‌‌सन 2001 से 2015 के बीच बिमारियों से की जाने वाली आत्महत्याएं एक अंग्रेजी वेबसाइट के अनुसार

  • महाराष्ट्र के अंदर लगभग 27 प्रतिशत लोगों ने बिमारियों की वजह से आत्महत्या की थी। जिनकी संख्या 63000 के आस पास थी।
  • आंध्रप्रदेश के अंदर लगभग 30 प्रतिशत लोगों ने बिमारियों की वजह से सुसाइड किया।
  • ‌‌‌तमिलनाडू के अंदर 23 प्रतिशत लोगों ने बिमारियों की वजह से आत्महत्या करली थी।
  • कर्नाटक के अंदर 26 प्रतिशत लोगों ने बिमारियों की वजह से सुसाइड किया । लोगों की कुल संख्या 48000 थी।
  • ‌‌‌केरल के अंदर 28 प्रतिशत लोगों ने सुसाइड किया था। मतलब 37 हजार लोग थे ।
  • पश्चिम बंगाल के अंदर 24548 लोगों ने बिमारियों की वजह से जान देदी थी। जोकि कुल सुसाइड का 12 प्रतिशत था।
  • ‌‌‌गुजरात के अंदर 20957 लोगों ने बिमारियों की वजह से मरने को चुना । जो कुल सुसाइड का 23 प्रतिशत के आस पास था।
  • ‌‌‌मध्य प्रदेश , राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अंदर क्रमश 17,15 और 13 प्रतिशत लोगों ने मौत को गले लगाया था।

‌‌‌‌‌‌आत्महत्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के अंदर मानवियता का अभाव

भारत के अंदर भले ही आज हजारों मेडिकल कॉलेज खुल गए हों । लेकिन बहुत कम डॉक्टर ऐसे हैं जो अपने मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं। बहुत से डॉक्टर तो ऐसे हैं जो सरकारी मे लगने के बाद मरीजों से बात तक नहीं करते हैं। जैसे ही कोई मरीज उनके पास आता ‌‌‌है। वे दवा लिखकर दे देते हैं। और उसे यह तक नहीं पूछते हैं कि उसके स्वास्थ्य के अंदर क्या सुधार है ? उसकी बिमारी ठीक होगी या नहीं ? मतलब उनको इन सब चीजों से कोई खास मतलब नहीं होता है। बहुत बार तो ऐसा होगा है कि मरीज डॉक्टर की लिखी दवाई लेते रहते हैं और उनको खुद ही पता नहीं होता है कि

‌‌‌उनको हुआ क्या है ? तो ऐसी स्थिति के अंदर मरीज दवा लेते हुए भी तंग आ जाता है। कई बार डॉक्टर खुद भी मरीज को अच्छे करने की स्थिति के अंदर नहीं होते हैं। कहने का मतलब है। की आज की स्वास्थ्य सेवाओं के अंदर मानवियता का अभाव है।

‌‌‌यदि कोई मरीज गम्भीर रूप से बिमार है तो डॉक्टर कभी भी उसका मनोबल नहीं बढ़ाते हैं कि वह ठीक हो जाएगा । ऐसी स्थिति के अंदर मरीज भी टूट जाता है। और वह आत्महत्या नहीं करेगा तो और क्या करेगा ।

आत्महत्या के अन्य कारण

दोस्तों अब तक हमने आत्महत्या के बहुत से कारणों पर चर्चा की लेकिन लेख के अंदर हम आत्महत्या के कुछ सामान्य कारणों के बारे मे भी बात कर लेते हैं। जिनकी मदद से आपको आत्महत्या को और अधिक बेहतर ढंग से समझने मे मदद मिलेगी । आइए जानते हैं आत्महत्या के कारणों के बारे मे।

‌‌‌इन सब कारणों का उल्लेख करना इसलिए जरूरी हो जाता है क्योंकि यह कॉमन कारण हैं जिनकी वजह से अधिकतर लोग आत्महत्या करते हैं।

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‌‌‌असफलता को ना झेलपाना

दोस्तों कहा जाता है कि जो इंसान गिरकर संभल सकता है। वही आगे बढ़ता है। और जो गिरकर उठना नहीं जानता है वह कभी आगे नहीं बढ़ पाता है। बहुत से लोगों के अंदर गिरकर संभलने की क्षमता नहीं होती है। बस वे इसी कारण की वजह से ‌‌‌आत्महत्या कर लेते हैं। मानलिजिए एक स्टूडेंट परीक्ष के अंदर अच्छी मेहनत करता है। लेकिन किसी कारण की वजह से वह फैल हो जाता है तो उसे बहुत बुरा लगता है। और कइयों को तो इतना बुरा लग जाता है कि वे आत्महत्या कर लेते हैं। इसी तरीके से एक बिजनेस मैन जब बिजनेस मे सफलता नहीं प्राप्त कर पाता है। ‌‌‌तो वह आत्महत्या का रस्ता चुन लेता है।

‌‌‌अपमानित होने की वजह से आत्महत्या

अपमान शब्द वैसे बहुत बुरा है और कोई भी अपमानित नहीं होना चाहेगा । लेकिन आपने और हमने कभी ना कभी अपमान को सहा ही है। भले ही कॉलेज की बात हो या किसी और जगह की । किंतु इसका यह मतलब नहीं है कि आत्महत्या करली जाए ।‌‌‌वैसा छोटे मोटे अपमान पर कोई भी आत्महत्या नहीं करता है। लेकिन कुछ ऐसा हो जाता है कि उसके सामने इसके अलावा कुछ चारा नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर पीछले दिनों एक न्यूज पेपर मे एक खबर आई थी कि एक लड़के ने एक लड़के का शोषण किया और उसके बाद उस लड़के ने आत्महत्या करली ।‌‌‌इस तरह से कुछ ऐसे अपमान होते हैं। जोकि बर्दाश्त से बाहर हो जाते हैं। इसी वजह से व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है।

‌‌‌अपने प्रिय से दूरी

आपने बहुत बार न्यूज के अंदर पढ़ा होगा कि अमुख लड़की और अमुख लड़के ने पेड़ से लटकर आत्महत्या करली । भारत के अंदर प्रेमी प्रेमिका सुसाइड के अनेक मामले समाने आते हैं। आत्महत्या करने का यह भी एक बड़ा कारण है।‌‌‌जब लड़के और लड़की के बीच प्यार पनजाता है। और वे शादी करना चाहते हैं तो समाज उन्हें शादी नहीं करने देता है। उनके घरवाले भी इसके लिए तैयार नहीं होते हैं। जिसके फलस्वरूप वे दोनो आत्महत्या का रस्ता चुनते हैं। क्योंकि वे दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं सकते ।‌‌‌इसके अलावा कई बार पति पत्नी से कोई एक मर जाता है तो दुख की वजह से वे भी आत्महत्या कर लेते हैं। लेकिन इस प्रकार के मामले कम ही देखने को मिलते हैं।

‌‌‌खुद को मूर्ख और हीन समझ लेना

आमतौर पर कई बार हमारे आस पास के लोग हमे हमारी गलतियों के लिए हीन और मूर्ख कहना शूरू कर देते हैं। और ताने मारते रहते हैं। इस तरह के तानों से जब व्यक्ति बहुत अधिक परेशान हो जाता है तो वह सुसाइड कर लेता है।‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर सुसाइड करने की सबसे ज्यादा संभावना तब होती है। जब हम अपने किसी प्रिय कार्य को कर रहे होते हैं और उसके अंदर ही असफल हो जाते हैं तो फिर हमे लोगों के वो ताने याद आने लगते हैं । वे हमे अंदर ही अंदर खाते हैं। ऐसी स्थिति के अंदर सुसाइड के अलावा और कोई चारा नहीं बचता है। ‌‌‌लेकिन यदि मनौवेज्ञानिक को दिखाया जाए तो उचित उपचार हो सकता है।

‌‌‌भावनाओं पर काबू ना रहना

दोस्तों जिंदगी के अंदर कई बार कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं। जब भावनाओं पर काबू रहना मुश्किल हो जाता है। और इस वजह से भी कई बार लोग सुसाइड कर लेते हैं। जैसे कि आप अपनी पत्नी को अपनी जान से ज्यादा प्यार करते हैं। और अचानक से आपको यह पता चले की आपकी पत्नी का किसी और‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर बहुत से लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाते हैं और कुछ ना कुछ गलत कदम उठा लेते हैं। अक्सर इस तरह की स्थिति तब आती है जब कोई व्यक्ति जिससे हमे भवनात्मक लगाव होता है और वह हमारे साथ विश्वासघात करता है।

‌‌‌छात्र आत्महत्या के कारण

आत्महत्या के कारण

दोस्तों  अब तक हमने आम आत्महत्या के कारणों के बारे मे विस्तार से चर्चा की । लेकिन लेख के अंदर हम छात्र आत्महत्या के कारणों पर भी विस्तार से चर्चा करना उचित समझते हैं। हालांकि छात्र आत्महत्या कहीं ना कहीं उपर दिये गए कारणों की वजह से करते हैं।‌‌‌लेकिन छात्र आत्महत्या के पीछे कुछ सूक्ष्म कारण हैं। जिनकी व्याख्या अलग से करना आवश्यक हो जाता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 2015 मे एक रिपोर्ट जारी की थी। उस रिपोर्ट के अनुसार भारत के अंदर प्रति घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है।वर्ष 2015 में, 8,934 छात्र सुसाइड के मामले सामने आये थे । जबकि पीछले 5 सालों के अंदर 39,775  छात्रों ने मौत को गले लगा लिया था। 2012 के अंदर आई एक रिपोर्ट के अनुसार 15 से 29 वर्ष के छात्र अधिक सुसाइड करते हैं। मतलब उनके अंदर सुसाइड करने की दर अधिक है।

‌‌‌आइए आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं ।

  • वर्ष 2015 के अंदर अकेले महाराष्ट्र मे 1230 स्टूडेंटों ने मौत को गले लगाया था।
  • तमिलनाडू के अंदर पूरे साल मे 955 छात्रों ने सूसाइड कर लिया था।
  • चंढीगढ के अंदर 730 स्टूडेंट ने सुसाइड किया ।
  • जबकि मध्य प्रदेश के अंदर 625 छात्रों ने आत्महत्या करली थी।

दोस्तों यह तो थे छात्र आत्महत्या के कुछ आंकडे आइए अब छात्र आत्महत्या के कारण पर प्रकाश डालते हैं।

‌‌छात्र आत्महत्या का ‌आर्थिक कारण

दोस्तों एक रिसर्च के अनुसार आत्महत्या किये जाने वाले 70 फीसदी स्टूडेंटों की परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रूपये से कम थी। ऐसा माना जाता है कि स्टूडेंट की आत्महत्या मे आर्थिक कारण काफी अधिक रोल प्ले करता है। जो छात्र गरीब होते हैं। ‌‌‌उनको जब लगता है कि वे अपनी माली हालत को सुधारने मे सक्षम नहीं हैं तो फिर वे सुसाइड कर लेते हैं। क्योंकि गरीबी के अंदर रहकर वे काफी अधिक परेशान हो जाते हैं।

‌‌‌असफलता को पचा पाने की क्षमा नहीं होना

दोस्तों आत्महत्या का यह कारण हमने आपको उपर भी बताया था। राजस्थान का कोटा शहर पढ़ाई के मामले के अंदर अव्वल माना जाता है। और यहां पर विदेशों के स्टूडेंट भी पढ़ने आते हैं। लेकिन बहुत से छात्र जब अपने कार्य मे सफल नहीं हो पाते हैं तो वे असफलता को पचा नहीं ‌‌‌पाते हैं और आत्महत्या कर लेते हैं। इसका मतलब है कि वे असफल होने पर सोचने लगते हैं कि घरवालों ने उनको कितना पैसा लगाकर यहां पर पढ़ने भेजा था और वे उनके सपनों को पूरा करने मे असमर्थ हैं।

‌‌‌परिवार का स्पोर्ट नहीं मिला

स्टूडेंट आत्महत्या का बड़ा कारण यह भी है कि भारत के अंदर पढ़ने वाले अधिकतर स्टूडेंट को उनके परिवार का पूरा स्पोर्ट नहीं मिल पाता है। जब वे असफल होते हैं तो उनके परिवार के अंदर उनको बूरी तरह से लताड़ा जाता है। बस इसी वजह से वे खुद को अकेला महसूस करते हैं । ‌‌‌और डिप्रेसन के अंदर चले जाते हैं। आपको बतादें कि जिन बच्चों के माता पिता अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखते हैं। उनके बच्चे बहुत कम सुसाइड करते हैं।

‌‌‌नशीले पदार्थों का सेवन

आज दारू जैसी चीजों का सेवन स्टूडेंट बहुत अधिक करने लगे हैं। यह सब चीजें हमारे दिमाग पर बहुत बुरा असर डालती हैं। और नशे की अवस्था के अंदर कई बार हमारा दिमाग उल्टा काम करने लगता है और कोई भी गलत कदम उठा लेते हैं। अक्सर कहा जाता है कि नेशे किए हुए व्यक्ति ‌‌‌की सोचने और समझने की शक्ति सही से काम नहीं करती है।

‌‌‌आत्महत्या के कारण डिप्रेशन

दोस्तों डिप्रेशन की वजह से स्टूडेंट ही नहीं बहुत से लोग आत्महत्या करते हैं। स्टूडेंट जब परिक्षा के अंदर असफल हो जाते हैं तो उनको अपना भविष्य अंधकार मे नजर आने लगता है। और वे सोच सोच कर पेरशान हो जाते हैं। और डिप्रेशन के अंदर चले जाते हैं।‌‌‌जब यह डिप्रेशन लंबे समय तक चलता है तो काफी घातक सिद्व होता है।

‌‌‌सुसाइड क्यों करते हैं लोग अंतिम वर्ड

दोस्तों सुसाइड क्यों करते हैं लोग ? लेख के अंदर हमने सुसाइड करने के कारणों पर गहराई से विचार किया है। वैसे देखा जाए तो इन कारणों की भूमिका पर विचार करें तो सुसाइड करने के सबसे ज्यादा कारण सामाजिक और आर्थिक ही जिम्मेदार हैं। ‌‌‌और इन्हीं कारणों की वजह से लोगों का आत्महत्या का मनौविज्ञान तैयार होता है।

आत्महत्या क्यों करते हैं लोग लेख आपको कैसा लगा कमेंट करके हमे बताएं ।

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