आत्महत्या के बाद आत्मा के साथ क्या होता है

आज कल रह कोई व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आत्महत्या करने वाले अधिकतर लोग अपनी अधूरी इच्छाओं को लेकर मरते हैं। आत्महत्या के बाद आत्मा के साथ क्या होता है।‌‌‌इस बारे मे गुरूड पुराण के अंदर विस्तार से बताया गया है। गुरूड पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। और वह प्रेत बनकर तब तक भटकता रहता है।

जब तक की उसकी उम्र पूरी नहीं हो जाती है। मतलब यदि किसी इंसान की उम्र 50 साल की है और 30 साल की उम्र के अंदर उसने सुसाईड कर  ‌‌‌लिया तो 20 साल तक उसकी आत्मा प्रेत योनी के अंदर रहती है। और लोगों को परेशान करती रहती है। इस प्रकार की आत्मा को नरक के अंदर भी कष्ट भोगने पड़ते हैं।

 

‌‌‌लेकिन याद रखें आत्महत्या और ऐक्सीडेंट के अंदर हुई अचानक मौत दो अलग अलग बाते हैं। यदि किसी इंसान की मौत किसी एक्सीडेंट के अंदर हो जाती है तो उसे उसके कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नरक के अंदर जाना पड़ता है। उसी तरह से यदि ऐसे व्यक्ति की कोई इच्छा शेष रह जाती है तो उसे भी प्रेत बनना पड़ता है।

‌‌‌गुरूड पुराण के अंदर आत्मा को शांति के लिए कई उपाय बताए गए हैं। यह उपाय करने पर आत्म हत्या करने वाले व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है।

आत्मा का तर्पण

 

गुरूड पुराण के अनुसार किसी तपस्वी को बुलाकर म्रत आत्मा का तर्पण कराया जा सकता है। जिससे की आत्मा को शांति मिलती है। और ‌‌‌आत्मा को आगे का रास्ता मिलता है।

 

‌‌‌आत्मा के लिए पाठ करना

इस तरीके के आत्मा की शांति के लिए किसी तांत्रिक से रामायण और गीता आदि के पाठ कराए जाते हैं जिससे की आत्मा को शांति मिल जाती है। और उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

 

‌‌‌अधूरी इच्छा को पूरा करना

 

कई लोग अपनी अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए प्रेत बन जाते हैं और हजारों सालों तक प्रेत योनी के अंदर भटकते रहते हैं। यदि किसी आत्मा को मोक्ष दिलाना है तो उसकी अधूरी इच्छा को पूरा करना होता है। इससे म्रत आत्मा को शांति मिलती है।

‌‌‌दोस्तों गुरूड पुराण के अंदर और भी कई बाते बताई गई हैं। जो लोग आत्महत्या करते हैं। उनकी आत्मा को जल्दी ही शांति नहीं मिल पाती है। और वे मरने के बाद प्रेत बनकर भटकते हैं। आपने इस बात का अनुभव किया है कि हमेशा अच्छे लोग आपको प्रेत के रूप मे कभी भी नहीं दिखाई देते जबकि बुरे लोग आपको प्रेत ‌‌‌के रूप दिखाई देते हैं।

यकिन मानिए आप अपने आसपास मरे हुए लोगों के बारे मे विस्तार से सोचिए तो आपको अपने आप ही इस बात पर यकीन हो जाएगा । की भगवान के दरबार मे रिश्वत नहीं चलती है। इंसान के पाप कर्मों की सजा उसे मिलकर ही रहती है। जो बुरे कर्म करता है। वह नरक मे जाता है। और वहां पर उसकी आत्मा ‌‌‌को पीड़ा पहुंचाई जाती है।

 

आत्म हत्या के बाद प्रेत बनी आत्मा क्या करती है

 

‌‌‌जो लोग सुसाईड कर लेते हैं वो प्रेत योनी के अंदर चले जाते हैं और भूलोक के अंदर भटकते रहते हैं। यदि इस दौरान उनको पहले से बने कुछ प्रेत भटकते हुए मिल जाते हैं तो यह आत्मा उन प्रेतों के साथ हो जाती है। और भू लोक के अंदर यहीं कहीं भटकती रहती है। प्रेत आत्मा को भूख और प्यास भी लगती है। यदि ‌‌‌वह भूखी होती है तो वह इधर उधर भोजन की तलास मे घूमती रहती है। प्रेत आत्मा का मन हमेशा कुछ ना कुछ बुरा करने का करता है। कई बार प्रेत आत्मा पितर बने अपने स्वजनों के साथ भी हो जाती है

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