अकेली महिला की संघर्ष की कहानी 50 पैसे से 50 लाख का सफर

संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती है।जो लोग संघर्ष करते रहते हैं।वो एक दिन जरूर अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं। लेकिन ऐसे बहुत की कम लोग होते हैं तो वो पा लेने की ताकत रखते हैं जो कि वो चाहते हैं।

‌‌‌चेन्नई की रहने वाली पेट्रीसियानारायण ने इस कहावत को सचकर दिखाया। कभी ठेले पर 50 पैसे कमाने वाली आज लाखों की कमाई कर रही है।वो भी बिना किसी के साथ बिल्कुल अकेली महिला ।

 

‌‌‌की थी लव मैरीज

 

पेट्रीसिया का जन्म ईसाई परिवार के अंदर हुआ था।और अपने घरवालों के मर्जी केखिलाफ उन्होने एक ब्राह्राण लड़के से शादी की थी। उनकी यह लव मैरीज थी।वे भी पहले एक समान्य लड़की की तरह गुजर बसर करना चाहती थी। लेकिन हालातों ने उनको लड़ना भी सिखा दिया ।

 

‌‌‌शादी के बाद उनके पति ने नौकरी छोड़दी और शराब पीने लगे जूए के भी आदि हो गए ।इतना ही नहीं उनका पति उनको काफी परेशान करने लगा तो उन्होंनेंअलग होने का निश्चय किया और अपने पति से अलग रहने लगी। तब उनके दो बच्चे थे। अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता थी।

 

‌‌‌ठेले से की शूरूआत

 

‌‌‌पति से अलग होने के बाद बच्चों का पेट भरने के लिए ठेला लगाने का काम किया।जिन पर वे कॉफी और कटलेट बेचती थी। उनकी पहली कमाई 50 पैसे हुई जिससे उनको काफी निराशा हुई किंतु उनकी मां ने हौसला बढ़ाया और धीरे धीरे उनकी कमाई बढ़ने लगी और 2003 तक आते आते 25000 तक पहुंच चुकी थी।

‌‌‌बाद मे उन्होंने नेशनल मैंनेजमेंट ट्रेनिंग स्कूल  के अंदर कैंटीन लगाई। उसके बाद उनको मुनाफा होना शूरू हो गया था।अब वे एक सप्ताह के अंदर1 लाख रूपय तक आसानी से कमाने लगी तो उनकी लाइफ भी बदल गई अब वे टेम्पू की ‌‌‌बजाय गाड़ी मे बैठकर आने लगी।

 

 

‌‌‌पेट्रीसिया का बिजनेस चल निकला तो उन्होंने अपनी बेटी की शादी करदी ।और उनका बेटा नौकरी करने लगा। लेकिन एक कार एक्सीडेंट के अंदर उनके बेटी और दामाद की मौत हो गई जिसकी वजह से अब पेट्रीसिया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन उनके बेटे प्रवीण कुमार ने सारे बिजनेस की जिम्मेदारी ली ।

 

 

‌‌‌कभी रोड़ परठेला लगाकर कॉफी बेचने वाली पेट्रीसिया के पास आज 200 कर्मचारी काम करते हैं। और अब उनका बिजनेस भी काफी अच्छा चल रहा है। उनको 2010 के अंदर उनको सरकार द्वारा भी सम्मानित भी किया गया था ।

पेट्रीसिया नारायण उन लोगों के लिए एक मिसाल है जोकि जिंदगी के अंदर कुछ करना तो चाहते हैं

 

 

‌‌‌लेकिन संघर्षों से डर जाते हैं। ऐसे लोग जो निरंतर प्रयास करते हैं एक दिन तो किस्मत को भी उनके आगे झुकने को मजबूर होना पड़ता है।

 

‌‌‌जो लोग संघर्ष करना जानते हैं

वो ही सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करते हैं।

 

 

 

 

 

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