Kya hai kala pani ke saja काला पानी की सजा कैसे दी जाती है

‌‌‌इस लेख के अंदर हम काला पानी की सजा क्या है? काला पानी की सजा कैसे दी जाती है के बारे मे विस्तार से जानेंगे ।

दोस्तों आपने काला पानी की सजा के बारे मे तो सुना ही होगा । बचपन मे किताबों मे पढ़ा होगा कि जो लोग अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाते थे ।

उनको काला पानी की सजा दी जाती थी । काला पानी की सजा के नाम से बड़े बड़े वीर भी कांप जाते थे । वीर सावरकर के संदर्भ मे भी यह कहा ‌‌‌जाता है कि अंग्रेजों के द्वारा दी जाने वाली काला पानी की सजा के डर से वे भी कांप गए थे । और बाद मे अंग्रेजों से माफी मांगी थी । हालांकि इस बात को कोई साबित नहीं कर पाया की क्या यह वीर सावरकर की कोई चाल थी । या वे सच मे ही डर गए थे ।

‌‌‌वैसे कालापानी की सजा भी अंग्रेजी हुकुमत का एक काला अध्याय है। काला पानी की सजा के अंदर अंग्रेज भारतियों को अमानिय यातनाएं देते थे । इन यातनाओं की वजह से बहुत से भारतियों ने तो सेल्युलर जैल के अंदर ही दम तोड़ दिया था । काला पानी की सजा कैसे दी जाती थी के बारे मे जानने से पहले हम थोड़ा सेल्युलर ‌‌‌जेल के बारे मे भी जान लेते हैं।

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   काला पानी की सजा कैसे दी जाती है  सेल्युलर के अंदर

जेल अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है। इस जेल का निर्माण अंग्रेजों ने भारतिय लोगों को यातनाएं देने के लिए करवाया था । यह भारत भूमी से हजारों किलोमिटर दूर है। इस जेल के चारों ओर पानी ही पानी है। इस जेल की नींव 1897 में रखी गई थी । इस जेल के अंदर 694 कोठरियां बनी हुई हैं।

और वे इस प्रकार से बनी हुई हैं कि कोई कैदी दूसरे कैदी से आपस मे बात नहीं कर सकता है।आक्टोपस की तरह सात शाखाओं में फैली इस विशाल कारागार के अब केवल तीन अंश बचे हैं । इस जेल की दीवारों पर वीर शहीदों के नाम भी लिखे हुए हैं।

‌‌‌इसके अलावा जेल के अंदर एक संग्रालय भी है। जिसमे वो अस्त्र पड़े हुए हैं। जिनकी मदद से कैदियों को यातनाएं दी जाती थी । जेल के कुछ प्रसिद्ध कैदियों में फजल-ए-हकखैराबादी, दीवान सिंह कालेपानी, योगेन्द्र शुक्ला, मौलाना अहमदुल्लाह, मोलवी अब्दुल रहीम सादिकपूरी, बटुकेश्वर दत्त, और वीर दामोदर सावरकर को भी इसी जेल के अंदर रखा गया था । ‌‌‌सन 1942 को जापान ने इस द्विप पर आक्रमण करके अंग्रेजों को इस जेल से भगा दिया था ।

और कुछ को यहीं पर कैद कर लिया गया था । लेकिन सन 1945 के अंदर दुबारा अंग्रेजों ने इस जेल को अपने अधिकार मे ले लिया था ।अंडमान और निकोबार द्वीप दुनिया के सबसे खूबसूरत द्वीपों में से हैं और न ही मिट्टी, न ही इन द्वीपों का पानी काला है । लेकिन ब्रिटिश सरकार ने यहां बनाई इस जेल के अंदर भारतियों पर अमानविय अत्याचार किये इस वजह से इस जेल को काला पानी के नाम से जोड़कर देखा जाता है।

kaala paane ki saja kya hoti thee
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ब्रिटिश 1857 के सिपाही विद्रोह के तत्काल बाद के दिनों से अंडमान द्वीपों का जेल का प्रयोग भारतियों को कैद करने के लिए करने लगे थे ।1872 विद्रोह को दबाए जाने के कुछ ही समय बाद ही अंग्रेजों ने कुछ विद्रोहियों को मार डाला और बाकि को अंडमान जेल मे भेजदिया गया था।‌‌‌अंग्रेजों का यह मानना था

कि भारतियों को यहां की जेलों मे कैद करने की बजाय दूर भेजना बेहतर होगा । ताकि वे किसी भी तरह की गतिविधि के अंदर शामिल नहीं हो सकें ।1 9वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्वतंत्रता आंदोलन जब तेज हुआ तो अंडमान के अंदर अधिक सैनानियों को भेजा जाने लगा था ।

‌‌‌आजादी के बाद जेल को तबाह कर दिया गया । इसका विभाजन दो खंड़ों के अंदर हो गया । जिसका पूर्व स्वतंत्रता सैनानियों ने विरोध भी किया ।

इसके अलावा 1969 के अंदर इस जेल को राष्टिय स्मार्क भी घोषित कर दिया गया ।1963 के अंदर ही जेल मे गोविंद वल्लपंत अस्पताल बना और इसके अंदर 500 बेड की सुविधा भी दी गई। इसके अंदर 40 से ज्यादा डॉक्टर मरीजों की सेवा मे लगे हुए हैं।

 

 

काला पानी की सजा कैसे दी जाती है

‌‌‌अबतक हमने सैल्युलर जेल के बारे मे जान जिसके अंदर भारतियों को काला पानी की सजा दी जाती थी । अब हम आपको यह बताने वाले हैं कि इस जेल के अंदर कैदियों को काला पानी की सजा कैसे दी जाती है। ‌‌‌वैसे इस जेल के अंदर यदि कोई भारतिय को भेज दिया जाता था । तो उसके संबंध मे यह कहा जाता था कि उसे काला पानी की सजा मिली है। जेल मे भेजने के बाद उसके वापस आने की संभावना नहीं के बराबर थी । और एक बार कोई इस जेल के अंदर कैद हो गया तो उसे अपनी इंसनी जिदंगी से भी नफरत होने लग जाती थी । ‌‌‌क्योंकि सेल्युलर जेल इतनी भयानक थी कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं ।

kalapani ki saja kya hoti hai
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‌‌‌ ‌‌‌काला पानी की सजा  कैदी को रोशन तक नसीब नहीं होती थी

काला पानी की सजा मिल जाने के बाद कैदी को एक कोठरी के अंदर कैद कर दिया जाता था । और वह कोठरी इस प्रकार से बनी हुई थी कि उसके अंदर कैदी को सूर्य की रोशनी तक नहीं मिल पाती थी । जिसकी वजह से कैदी को यह भी पता नहीं चल पाता था कि कब दिन होता है और कब रात होती है। ‌‌‌लम्बे समय तक इस प्रकार से रहने पर कैदी को अपनी जिंदगी से ही नफरत होने लग जाती थी । इसी वजह से बहुत से कैदी इस जेल के अंदर आने के बाद सुसाइड तक कर चुके थे । शायद कैदियों ने सोचा होगा कि इस सजा से बेहतर है मर जाना ।

‌‌‌कैदियों को बेड़ियों के अंदर जकड़कर रखा जाता था

काले पानी की सजा के अंदर हर कैदी को बेड़ियों के अंदर जकड़े रखा जाता था । यदि वे रात को सोते जागते या कुछ भी करते तो उनको बेड़ियों के साथ ही करना पड़ता था । बेड़ियों की वजह से काफी तकलीफ होती थी । हालांकि बिना बेड़ियों के भी कोई वहां से ‌‌‌भाग नहीं सकता था । इसके अलावा कई बार कैदियों को बेडियों के साथ नीचे बांध दिया जाता था । वे वहां से हिल नहीं सकते थे । घंटो कैदियों को इस प्रकार से रहना होता था । कुल मिलाकर यह भी काफी डेंजरस था ।

‌‌‌ ‌‌‌काला पानी की सजा  एक दूसरे से मिलने जुलने पर रोक

काले पानी की सजा की यह भी एक सजा थी कि इस जेल मे कैदियों को एक दूसरे से मिलने भी नहीं दिया जाता था । कौन जेल के अंदर है और कौन बाहर है। कहां क्या हो रहा है। इस बात का पता कैदियों को नहीं चल पाता था । वे पूरी तरह से दूसरी दुनिया से कट चुके होते थे । सावरकर ‌‌‌और उनके भाई बाबरो इसी जेल के अंदर बंद होने के बाद भी दोनों को एक दूसरे का पता नहीं था । वे पूरे एक साल बाद मिले थे । ‌‌‌कैदियों के नहीं मिलने के पीछे सरकार का तर्क था कि यदि कैदी एक दूसरे से मिलेंगे तो स्वतंत्रता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा । इस वजह से उनका न मिलना ही बेहतर होगा ।

‌‌‌कैदियों की बांध कर पीटाई

काले पानी की सजा के अंदर कैदी यदि कोई गलती कर देते तो उनको बांध कर बुरी तरह से पीटा जाता था । इसके लिए कैदियों को बांधने के लिए बना होता था । जिसकी मदद से कैदियों के हाथ पैरों को बांध दिया जाता था । उसके बाद एक अंग्रेज सिपाही कैदी को बहुत बुरी तरह से पीटता रहता ‌‌‌पीटाई इतनी अधिक की जाती थी कि मार खाते खाते कैदी बेहोश हो जाते थे । और उनकी चमड़ी तक उधेड़ दी जाती थी । कई कैदी तो वहीं पर मर भी जाते थे ।

‌‌‌ ‌‌‌काला पानी की सजा खाने के नाम पर कचरा

यदि आपको कोई घास की बनी सब्जी खिलाए तो क्या होगा ? यकीन मानिए आप इसको नहीं खाएंगे । लेकिन सैल्युलर जेल के कैदियों को घास से बनी सब्जी दी जाती थी । और भूखे होने की वजह से उनको खाना भी पड़ता था । इसके अलावा उनके पास और कोई चारा  भी नहीं था ।‌‌‌नमक के नाम पर केवल एक चुटी दी जाती थी । खराब खाने पीने की वजह से कई कैदियों की मौत भी हो चुकी थी । लेकिन ब्रिटिश सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं थी । खराब खाने पीने से कैदी जेल के अंदर काफी कमजोर होते जा रहे थे । अब उनके शरीर के अंदर जान ही नहीं बची थी । दिन में एक बार नारियल के आकार के कटोरे में उबले हुए चावल को पानी में मंथन किया किया जाता था ।

‌‌‌सैल्युलर जेल से भागना नामुमकिन

सैल्युलर जेल के चारों ओर समुद्र पड़ता था । इस वजह से यदि कोई कैदी भागने की कोशिश भी करता तो उसको मौत को गले लगाना पड़ता था।‌‌‌इसके अलावा जेल की सिक्योरिटी भी काफी टाईट थी । यदि कोई जेल से भागने की कोशिश करता पकड़ा भी जाता तो उसको कठोर दंड दिया जाता था ।मार्च 1868 में, 238 कैदियों ने भागने की कोशिश की। अप्रैल तक वे सभी पकड़े गए थे। एक ने आत्महत्या की और शेष अधीक्षक वाकर ने 87 को फांसी देने का आदेश दिया।

‌‌‌काला पानी की सजा मई 1 9 33 में कैदियों द्वारा भूख हड़ताल

1933 के अंदर कैदियों के साथ हुए अमानविय बर्ताव की वजह से भूख हड़ताल पर बैठ गए ।

उनमें से भगत सिंह (लाहौर साजिश के मामले), मोहन किशोर नामदास (शस्त्र अधिनियम मामले में दोषी) और मोहित मोइत्र (शस्त्र अधिनियम मामले में भी दोषी) के सहयोगी महावीर सिंह थे। ‌‌‌इनमे से तीन कैदियों की भूख की वजह से मौत हो गई। उसके बाद महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर ने हस्तक्षेप किया। सरकार ने 1 937-38  के अंदर कैदियों को छोड़ने के निर्देश दिये ।

 

‌‌‌ ‌‌‌काला पानी की सजा कीड़े मिला पानी पीने के लिए दिया जाता था

कैदियों को दिया जाने वाला पानी भी बेकार था । उसके अंदर कीड़े पड़े हुए थे । यदि इस प्रकार के पानी को आम इंसान देख ले तो उसे घिन्न आने लगे । लेकिन देशभक्त मजबूर थे । उनको यही पानी पीना पड़ता था । और वह भी उनको सीमित मात्रा के अंदर दिया जाता था ।

‌‌‌सीधे फांसी पर लटका देना

‌‌‌काला पानी की सजा का इतिहास

काले पानी की सजा मे कोई कैदी पर रहम नहीं किया जाता था ।मार्च 1868  के अंदर इस जेल मे एक साथ 87कैदियों को फांसी पर लटका दिया गया था । वैसे यहां पर फांसी देने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। यदि कोई कैदी कुछ गलती करते पकड़ जाता तो उसको फांसी दी जाती थी । इस वजह से

‌‌‌भी कैदी काफी डरे हुए रहते थे ।

‌‌‌बर्तन मे शौच

सेलुलर जेल के अंदर कैदियों की कोठरी के अंदर कोई शौचालय नहीं बना हुआ था । वरन उनको दो धातु के बर्तन दिये जाते थे । उनमे से एक का इस्तेमाल वे खाने के लिए करते थे । और दूसरे का इस्तेमाल वे शौच जाने के लिए करते थे । शौच को जब कैदी अपनी कोठरी से बाहर निकलते तो फेंक कर बर्तन को साफ ‌‌‌करके ले आते थे । ‌‌‌इसके अलावा यदि उनको पेशाब वैगरह करना होता था तो उनको अपनी कोठरी के अंदर ही करना होता था । कुल मिलाकर यह सब बहुत भयानक था।

‌‌‌जमीन पर सोना

कैदियों के पास सोने के लिए कोई कंबल या रजाई कुछ भी नहीं होता था । वरन उनको जमीन पर ही सोना पड़ता था । हर मौसम के अंदर उनको इसी स्थिति के अंदर रहना होता था । कई कैदियों ने बिछाने की मांग की तो उनपर भयंकर अत्याचार भी किये गए ।

‌‌‌नारियल का तेल निकाला

कैदियों को नारियल का तेल निकालने के लिए भी लगाया जाता था । इसके लिए उनको एक लक्ष्य दिया जाता था कि इतने समय के अंदर इतना तेल निकालना है। लक्ष्य इस प्रकार से होता था कि कमजोर शरीर वाले व्यक्ति इसको पूरा नहीं कर पाते थे । इस वजह से उनको बूरी तरह से पीटा जाता था ‌‌‌तेल निकालते समय बहुत से कैदियों की मौत भी हो जाया करती थी ।

 

‌‌‌कैदियों के हाथ पैर तोड़कर मरने के लिए छोड़ देना

इस जेल के अंदर दुनिया के सबसे क्रूरतम अत्याचार होते थे । यदि कोई कैदी गलती करता पकड़ा जाता तो उसकी पीटाई की जाती थी । इसके अलावा यदि इसमे उसके हाथ पैर टूट जाते तो उसका उपचार भी नहीं करवाया जाता था । वरन उसे और अधिक प्रताड़ित किया जाता था। ‌‌‌

‌‌‌जिंदा कैदियों को समुद्र मे फेंक देना

कई बार यदि कोई कैदी गलती करता तो उसको जिंदा ही समुद्र के अंदर फेंक भी दिया जाता था। और वह बेचारा समुद्र के अंदर डूब कर मर जाता था। इसके अलावा फांसी दिये हुए कैदियों की लाश को उठाकर भी समुद्र के अंदर फेंका जाता था ।

 

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि काला पानी की सजा के अंदर जो यात्नाएं हमने आपको बताई हैं। उनसे भी भंयकर यातनाएं जेल के अंदर जी जाती थी । जिनका डेटा हमारे पास उपलब्ध नहीं है। तो आप कल्पना कर सकते हैं कि काला पानी की सजा इतनी खतरनाख क्यों होती थी ।

‌‌‌काला पानी की सजा कैसे दी जाती है यह लेख आपको कैसा लगा नीचे कमेंट करके हमे बताएं।

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