पढ़ाई के लिए ‌‌‌टाइम टेबल या समय सारणी कैसे बनाते हैं full guide step by step

‌‌‌यदि कोई स्टूडेंट सही तरीके से पढ़ना चाहता है तो उसे समय सारणी या टाइम टेबल की आवश्यकता होती है। ताकि वह टाइम टेबल की मदद से सही तरीके से सारे विषय को पढ़ सके । इस लेख के अंदर हम आपको बताने वाले हैं कि आप पढ़ाई का सही टाइम टेबल कैसे बनाएं और इसको बनाते समय किन किन चीजों का आपको ध्यान ‌‌‌रखने की आवश्यकता होती है। हमारा मन किया वैसे ही हम टाइम टेबल बना लेते हैं तो इसमे कई सारी समस्याएं आ जाती हैं।

पढ़ाई के लिए ‌‌‌टाइम टेबल

‌‌‌किस विषय को कितने घंटे देने हैं और कौनसा सही समय डिसाईड करना है? आदि बातों का ध्यान टाइम टेबल बनाते समय रखना चाहिए । इस लेख के अंदर हम सभी बातों पर विस्तार से चर्चा करेंगे । हमे पूरा यकीन है यदि आप हमारे बताए तरीके से टाइम टेबल बनाते हैं तो आप बेहतर ढंग से पढाई कर पाएंगे ।

 

‌‌‌सबसे पहले आप कौनसा विषय किस समय पढ़ना चाहिए डिसाईड कैसे करें ?

 

 

‌‌‌हर स्टूडेंट के पास तीन प्रकार के सब्जेक्ट होते हैं। पहला जोकि उसे हार्ड लगते हों ।दूसरा उसे मिडियम लगते हों और तीसरा जो उसे बिल्कुल ईजी लगते हों । यदि आप स्कुल जाते हैं तो आपके 8 घंटे तो स्कूल के अंदर ही बीत जातें हैं बाकि का समय आपके पास बच जाता है।

 

हार्ड विषय को कब पढ़ना चाहिए

 

‌‌‌हार्ड विषय की सबसे खास बात यह होती है कि यह बोरिंग होता है। और आप इसको ज्यादा देर तक पढ़ते हैं तो आपको बोरियत महसूस होती है। सो आपको हार्ड विषय रात के अंदर 9 बजे के बाद नहीं पढ़ना चाहिए । क्योंकि ऐसा करने से आपको जल्दी ही नींद आने लग जाती है। हार्ड विषय को आप अपने टाईम टेबल के अंदर सुबह ‌‌‌के लिए लिख सकते हैं या फिर आप शाम होने के बाद जब अपनी पढ़ाई र्स्टाट करें तब  ले सकते हैं। दूसरी बात आप जब पढाई र्स्टाट करें तो हार्ड विषय से करें । ताकि आपकी सारी एनर्जी उसमे लगे और आपको वो सरल लगने लगे ।

‌‌‌यदि आप गर्मी के मौसम के लिए टाइम टेबल बना रहे हैं तो आप हार्ड विषय को शाम के अंदर ही पढ़े तो सही रहता है। क्योंकि सुबह उठकर पढ़ने पर आप नींद के अंदर होते हैं। और आप उसपर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते हैं।

 

‌‌‌माध्यम विषय

इसके अंदर ऐसे विषय आते हैं जोकि आपको सामान्य लगते हैं। ऐसे विषय को हार्ड विषय के तुरन्त बाद भी रख सकते हैं। लेकिन सरल विषय के बाद इनको नहीं पढ़ना चाहिए ।  इनका सबसे बेस्ट कम्र है आप इनको अपने टाइम टेबल के अंदर पहले स्थान पर ना रखें । क्योंकि ऐसा करने से । बाद मे आप हार्ड ‌‌‌विषय पढ़ेंगे तो उब जाएंगे । आपका मन नहीं करेगा । सो आपको टफ से सरल की और चलना होगा ।

 

‌‌‌सरल विषय

सरल विषय आपके लिए रूचिकर हो सकते हैं। सो आपको इनको सबसे बाद मे अपने टाइम टेबल के अंदर रख सकते हैं। ऐसे विषयों को आप देर रात तक पढ़ सकते हैं। ऐसे विषयों को पढ़ने पर आपको पढाई करते वक्त नींद आने की समस्या कम हो जाएगी । क्योंकि आप इसमे उबेंगे नहीं ।

 

‌‌‌हर विषय को कितने घंटे पढ़ना चाहिए

अब आपको यह तय करना होगा कि किस विषय को आप कितने घंटे पढ़ना चाहते हैं और आपके पास पढ़ने का समय कितना है। मान लो आपके पास 9 घंटे समय है और आपके पास कुल विषय 10 विषय हैं तो आपको कैसे टाइम टेबल बनाना होगा ।

 

हार्ड विषय

‌‌‌हार्ड विषय को आपको कम से कम रोज 1.5 घंटे से कम नहीं पढ़ना चाहिए । अब आपके पास कितने हार्ड विषय हैं।उस हिसाब से आपको हार्ड विषय का पढ़ने का समय निर्धारित करना है। माना आपके पास तीन हार्ड विषय की किताबे हैं तो आपको तीनों विषय का समय इसी प्रकार से निर्धारित कर लेना है।

‌‌‌इसके अलावा आपको हार्ड विषय की छूटी के दिन अतिरिक्त पढाई करनी चाहिए  ताकि आपको वह हार्ड लगना कम हो जाए । अपने टाइम टेबल के अंदर नीचे मेंन्सन करें की आप छूटी के दिन ‌‌‌हार्ड विषय को कितने घंटे पढ़ेंगे ।

 

 

‌‌‌माध्यम विषय

 

‌‌‌माध्यम विषय को आपको रोज एक घंटे पढ़ना चाहिए। आपको जितने भी विषय सामान्य लगते हैं आप रोज उनको एक घंटे पढ़ें ।

 

‌‌‌सरल विषय

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सरल विषय को आप चाहें तो रोज एक घंटा पढ़ सकते हैं। या फिर  आप इनके लिए रोज आधा घंटा टाईम निकाल कर पढ़ सकते हैं। और कुछ प्रयास आपको अपने क्लाश के अंदर करना है ताकि यह विषय आपको पूरी तरह से याद हो जाएं। इसके अलावा कुछ ऐसे विषय भी होते हैं। जिनका समय आप एक दिन छोड कर दूसरे ‌‌‌दिन पढ़ सकते हैं। हमारा मतलब है जैसे आपको पास 4 सरल विषय हैं तो दो को एक दिन पढ़ें और दूसरे दो को दूसरे दिन ।

 

 

टाइम टेबल मे टफ विषय को अपने पसंदीदा कामों के करने के समय कभी नहीं पढ़ें

कई बार क्या होता है कि हमारे टाइम टेबल के अंदर हम टफ विषय को तब पढ़नें लग जाते हैं । जब कोई मैच या हमारे पसंद का धारावाहिक या कोई और पसंद का काम हो रहा हो या होने का समय हो । ऐसा करना वास्तव मे गलत होता है । क्योंकि ‌‌‌ऐसी स्थिति के अंदर बार बार हमारा दिमाग भटककर बार बार अपने पसंद के काम पर चला जाता है। जिसके परीणाम स्वरूप मन एकाग्र नहीं हो पाता है। सो ऐसा न करें ।

 

‌‌‌हार्ड से सरल की ओर या सरल से हार्ड की ओर

 

‌‌‌वैसे देखा जाए तो हमटाइम टेबल को दो तरीकों से बना सकते हैं। यदि आप सरल से हार्ड की ओर टाइम टेबल बनाते हैं तो हमारी नजर मे यह सही नहीं है। क्योंकि मान लिजिए आप हमेशा कोई सरल काम करते हैं और बाद मे आपको हार्ड काम करना पड़ जाए तो आपको कभी भी अच्छा नहीं लगेगा । लेकिन आप पहले हार्ड चीजों को सीख ‌‌‌लेते हैं तो आपका आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है और फिर आप किसी भी सरल काम को आसानी से कर सकते हैं। दूसरी बात हार्ड चीजों को देर तक पढ़ने से इंसान का दिमाग भी तेजी से काम करता है। जिससे सरल चीजों को समझने मे भी मदद मिलती है।

 

‌‌‌क्या टाईम टेबल के अंदर ब्रेक होना चाहिए

 

हमारे हिसाब से टाईम टेबल के अंदर तब ब्रेक होना चाहिए जब आपको लगे कि आप उब रहे हैं। आप अपने टाईम टेबल के अंदर आधे घंटे का ब्रेक दे सकते हैं। जिसके अंदर आपको कोई ऐसा काम करना चाहिए कि आप एकदम से खुश हो जाएं । मतलब आपका मूड फ्रेस हो जाए और आपको अच्छा ‌‌‌ महसूस हो । आप ब्रेक का समय अपने हिसाब से तय कर सकते हैं।

 

टाइम टेबल के अंदर टारगेट अवश्य रखें

 

कुछ लोग टाइम टेबल तो बना लेते हैं । लेकिन अपने विषय का कोई टारगेट नहीं रखते । हमारा टारगेट से यहां पर मतलब है कि आपको अपने विषय का कितना हिस्सा आज याद करना है। आप पाठ के हिसाब से टारगेट तय कर सकते हैं। और उसे कम समय मे पूरा करने की कोशिश करें । यदि ‌‌‌टारगेट कम समय मे पूरा हो जाता है तो बचे हुए समय के अंदर आप एंजोय कर सकते हैं। या उस समय को दूसरे विषय को दे सकते हैं। या अपना टारगेट बढा भी सकते हैं।

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arif khan

‌‌‌हैलो फ्रेंड मेरा नाम arif khan है और मुझे लिखना सबसे अधिक पसंद है। इस ब्लॉग पर मैं अपने विचार शैयर करता हूं । यदि आपको यह ब्लॉग अच्छा लगता है तो कमेंट करें और अपने फ्रेंड के साथ शैयर करें ।‌‌‌मैंने आज से लगभग 10 साल पहले लिखना शूरू किया था। अब रोजाना लिखता रहता हूं । ‌‌‌असल मे मैं अधिकतर जनरल विषयों पर लिखना पसंद करता हूं। और अधिकतर न्यूज और सामान्य विषयों के बारे मे लिखता हूं ।