‌‌‌‌‌‌जातक कथा का संकलन महत्वपूर्ण जातक कथाएं भाग . 2

‌‌‌जातक कथाएं काफी अच्छी कथाएं हैं । इनके अंदर कई सारी अच्छी कहानियां बताई गई हैं। खास कर जातक कथाओं के अंदर शिक्षाप्रद कहानियां मिलती हैं। जिनको पढ़कर मनोरंजन तो होता ही इसके साथ ‌‌‌सीख भी मिलती है।

जातक कथा .. चूहिया और ऋषि

चुहिया प्राचीन समय की बात है एक ऋषि हिमालय के अंदर रहते थे काफी पहुंचे हुए ऋषि थे और रोज तपस्या करने नदी के पास जाते थे इसी तरह एक दिन सुबह सुबह एक पहाड़ पर आसन बिछाकर तपस्या कर रहे थे तभी उनकी गोद में एक चुहिया आ कर गिरी जिसको ऊपर चील अपने पैरों से पकड़ कर ले जा रही थी चुहिया थर थर कांप रही थी ऋषि को कोई संतान नहीं थी उनकी पत्नी को संतान की काफी लालसा थी ऋषि को पता था कि उनकी पत्नी की कोख से संतान सुख प्राप्त नहीं होगा ऋषि को उस पर दया आ गई और उसे अपने तपोबल से एक सुंदर कन्या के अंदर बदल दिया

और वे उस बच्चे को हाथों में उठाकर घर पहुंचे और अपनी पत्नी से बोले कि तुम सदा संतान की कामना किया करती थी समझ लो कि ईश्वर ने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली है ईश्वर ‌‌‌ने ही भेजी है ‌‌‌इसका लालन पालन करो ‌‌‌. वह लड़की को देख कर बहुत प्रसन्न हुई ‌‌‌और उस पर अपनी ममता लुटाने लगी। इस प्रकार से वह ‌‌‌चूहिया ऋषि के घर पर एक बेटी की तरह रहने लगी
और ऋषि भी
उसको इतना प्यार करने लगे कि वह भूल गए कि वह कभी एक‌‌‌ चूहिया थी या थी और पत्नी बच्चे की प्यार में खो गई वह दिन-रात उसे खिलाने और उसे पिलाने के अंदर लगी रहती ऋषि अपनी पत्नी को ममता लुटाते दे तो काफी प्रसन्न होते आखिर संतान नहीं होने का उसे दुख नहीं रहा ऋषि ने स्वयं भी उचित समय आने पर कांता को शिक्षा दी और सारी ज्ञान विज्ञान उसे सिखाई देखते ही देखते मां का प्रेम कथा ऋषि का शिक्षा प्राप्त करती कांता बढ़ते-बढ़ते 16 वर्ष की सुंदर और सुशील कन्या बन गई माता पिता को बेटी की चिंता सताने लगी
एक दिन उसने ‌‌‌अपनी पत्नी से कहा .. सुनो अब हमारी कांता विवाह योग्य हो गई है और उसका हमें विवाह कर देना चाहिए तभी वहां कांता पहुंची .ऋषि ‌‌‌ने अपने तपोबल से सूर्य देव ‌‌‌को बुलाया और बोले———- यह मेरी बेटी है और मैं चाहता हूं कि मेरी बेटी से शादी करो तभी कांता बोली ————-यह बहुत गर्म है मेरी आंखें ‌‌‌चुथिया रही हैं। मैं नहीं आ पाऊंगी
———— ठीक है ऋषि ने ‌‌‌कहा और कांता की पीठ थपथपाई और बोले कि तुम हमारे लिए इससे दूसरा कोई श्रेष्ठ वर ‌‌‌देखते हैं। उसके बाद ऋषि ने सूर्यदेव से पूछा कि ————तुमसे सर्वश्रेष्ठ कौन है ? तब सूर्यदेव बोले कि मुझसे सर्वश्रेष्ट बादल हैं जो मुझे भी ढक लेता है ऋषि के बुलाने पर बादल गरजते बरसते और बिजलियां ‌‌‌चमकाते हुए हुए प्रगट हुए बादल को देखते ही कांता ने विरोध किया —————- यह बहुत काले रंग का है मेरा रंग गोरा है हमारी जोड़ी नहीं जमेगी ऋषि ने बादल से पूछा तुम ही बताओ कि तुम से सर्वश्रेष्ठ कौन है? बादल ने उत्तर दिया पवन वह मुझे भी उठाकर ले जा सकती है ऋषि ने पवन देव का आह्वाहन किया उसके बाद पवन देव प्रकट हुए ऋषि ने अपनी बेटी से पूछा क्या तुम्हें यह पसंद है ? तब वह बोली———- नहीं तो आप यह बहुत चंचल है एक जगह नहीं टिकेगा इसके साथ गृहस्ती कैसे जमेगी ? ऋषि की पत्नी बोली हम अपनी बेटी को नहीं देंगे तब ‌‌‌दामाद कम से कम ऐसा तो होना चाहिए हम अपनी आंख से देख सकें ऋषि ने पूछा———- बताओ तुमसे अच्छा कौन है उसके बादल ———-बोले कि मुझसे अच्छा पर्वतराज है उसके बाद पर्वतराज को बुलाया जिसको देखकर लड़की बोली ————यह तो पत्थर है इसका दिल ही पत्थर का होगा उसके बाद ऋषि ने उसे बताने को कहा———— चूहा ‌‌‌मुझसे अच्छा है मेरे अंदर भी ‌‌‌बिल खोद सकता है ऐसा कहते हैं चूहा बाहर निकल कर आ गया और कांता उसे देख कर उछल पड़ी और बोली————– देखो कितना सुंदर दिख रहा है और इसके कान मुझेकितनी प्यारी लग रही हैं उसके बाद ऋषि ‌‌‌ने उस लड़की को अपनी अभी मंत्रों से वापस ‌‌‌चूहिया ही बना दिया और उस चूहे के साथ उसकी शादी कर दी और अंत में इससे यही सीख मिलती है कि
जिस योनि में जन्म लेता है उसी के संस्कार बने रहते हैं प्रभाव नकली उपायों से नहीं बदले जा सकते

‌‌‌‌‌‌जातक कथा ..शेर और गिदड़

बहुत प्राचीन समय की बात है हिमालय की कंदराओं के अंदर बलिष्ठ शेर रहता था एक दिन वह ‌‌‌सांड का शिकार कर और उस का भक्षण कर अपनी गुफा के अंदर ‌‌‌लौट ‌‌‌रहा था तभी रास्ते के अंदर उसे एक मरियल सा गीदड़ मिला जिसने शेर को लेटकर दंडवत प्रणाम किया जब शेर ने उसे ऐसा करने का कारण पूछा तो उसने कहा ——-‌‌‌सेवक बनना चाहता हूं कृपया मुझे आप अपनी शरण में ले ले मैं आप की खूब सेवा करूंगा और आपके द्वारा छोड़े गए भोजन से अपना गुजर बसर कर लूंगा शेर ने उसकी बात मान ली और उसे मित्रता कर ली कुछ ही दिनों में शेर द्वारा छोड़े गए शिकार को खा खाकर बस गीदड़ बहुत मोटा हो गया प्रतिदिन के प्रक्रम को देखकर उसने भी ‌‌‌खुद को ह का प्रतिरूप मान लिया एक दिन उसने कहा अरे शेर ‌‌‌मैं अब तुम्हारी तरह शक्तिशाली हो गया हूं आज एक हाथी का शिकार करूंगा और उसका ‌‌‌भक्षण ‌‌‌करूंगा और बच्चे ‌‌‌बचे हुए मांस को मैं तुम्हारे लिए छोड़ दूंगा क्योंकि शेर उसे अपना मित्र मानता था इसलिए उसने गीदड़ की ‌‌‌बातों को गलत नहीं माना और ऐसा करने से पहले उसको रोका भी था

लेकिन गीदड़ नहीं माना और वह पहाड़ी के नीचे की ओर चला गया वह उसे उसने चारों ओर नजर दौड़ाई तो पहाड़ के नीचे हाथियों के एक छोटे से समूह को देखा शेर की तरह तीन बार आवाज ही निकाल कर एक बड़े हाथी पर कूद पड़ा हाथी के सिर के ऊपर से गिर कर उसके पैरों में जा गिरा और हाथी अपनी मस्तानी चाल से अपना अगला पेड़ उसके सिर के ऊपर रखकर आगे बढ़ गया क्षणभर में गिरकर चकनाचूर हो गया और उसके प्राण पखेरू उड़ गए
कभी भी जिंदगी में किसी भी समय घमंड नहीं करना चाहिए

‌‌‌‌‌‌‌‌‌जातक कथा – सांड और गीदड़

एक किसान के पास एक बिगड़ैल सांड था उसने कई पशु ‌‌‌सींग ‌‌‌मारकर घायल कर दी आखिर ‌‌‌एक दिन तंग आकर किसान ने सांड को जंगल की ओर खदेड़ दिया जिस जगह में पहुंचा वहां खूब हरी घास उगी थी आजाद होने के बाद सांड के पास दो ही काम रह गए खूब खाना और पैरों के तलवों में चीन बसा कर जोर जोर से हिलाना ‌‌‌अब ‌‌‌पहले से भी अधिक मोटा हो गया
कंधों के ऊपर की गांठ बढ़ती बढ़ती धोबी के कपड़ों की गटर जितनी बड़ी हो गई ‌‌‌वहां पर गीदड़ गीदड़ी
का जोड़ा रहता था जो बड़ी जानवरों द्वारा छोड़े शिकार को खाकर गुजारा चलाते थे वह केवल ‌‌‌छोटे शिकार कर पाते थे सहयोग से एक दिन वह मतवाला सांड झूमता हुआ उधर ही निकला ‌‌‌गीदड़ी की ‌‌‌आंखे
फटी रह-गई तोहफा भेजा है मांस खाने में मजा आएगा उसके बाद
‌‌‌गीदड़ ‌‌‌ने ‌‌‌गीदड़ी को समझाया कि इसका मांस भले ही कितना भी स्वादिष्ट हो लेकिन हमें इस से क्या लेना देना उसके बाद भी बड़ी भड़क उठी और बोली ‌‌‌देखते
नहीं उसकी पीठ पर जो चर्बी की गांठ है वह किसी भी समय गिर जाएगी हमें उठाना होगा और इसके गले में जो मांस नीचे लटक रहे हैं वह किसी भी समय टूट कर नीचे गिर सकती हैं पर समय उसके पीछे चलना है ‌‌‌गीदड़——-बोला हे भगवान यह लालच छोड़ दो लेकिन ‌‌‌गीदड़ी भी जिद करने लगी और बोली तुम हाथ में आया वह अपनी कायरता से ‌‌‌गवाना चाहते हो तुम्हें मेरे साथ चलना होगा मैं अकेली कितना खा पाऊंगी ‌‌‌गीदड़ी के जिद के सामने ‌‌‌गीदड़भी कुछ भी नहीं चली दोनों ने सांड पीछे पीछे पीछे चलते चलते उन्हें कुछ नहीं गिरा ‌‌‌.दड़ ‌‌‌ने ‌‌‌गीदड़ी को समझाने की कोशिश की
घर चलते हैं ‌‌‌लेकिन गीदड़ी नहीं मानी और बोली हम खाएंगे तो इसी का मोटापा और स्वादिष्ट मांस खाएंगे बस दोनों सांड के पीछे चलने लगे एक दिन दोनों गिर पड़े
लालच बुरी बला है अधिक लालच बुरी बला है

‌‌‌‌‌‌‌‌‌जातक कथा ..शिकारी और 4 मित्र

बहुत समय पहले की बात है एक सुंदर हरी-भरी वन में 4 मित्र रहते थे उनमें से एक चूहा दूसरा ‌‌‌कौआ
तीसरा हिरण और चौथा कछुआ था अलग-अलग प्रजाति के होने के बाद भी इनके अंदर घनिष्ठ प्रेम था चारों एक दूसरे पर जान छिड़कते थे सभी घुल मिलकर रहते थे वन में एक निर्मल जल का सरोवर था जिसमें कछुआ रहता था सरोवर के तट के पास ही एक जामुन का पेड़ था उस पर बनी घोसले में कौवा रहता था पेड़ के नीचे जमीन में बिल बनाकर चूहा रहता था और पास ही झाड़ियों के अंदर हिरण भी रहता था दिन में कछुआ धूप ‌‌‌सेकता
रहता पानी में डूब‌‌‌की लगाता बाकी तीन मित्र भोजन की तलाश में निकल पड़ते और दूर-दूर तक घूमकर सूर्यास्त के समय लौट आते चारों भीतर इकट्ठे होते एक दूसरे को गले लगाते खेलते और धमाचौकड़ी मचाते एक दिन शाम को चूहा और कुआं तो लौट आए परंतु ‌‌‌हिरन
नहीं लौटा तीनों मित्र बैठकर उसकी राह देखने लगे उनका मन खेलने में नहीं लग रहा था ‌‌‌कछुए कहा वह रोज तुम दोनों से भी पहले लौट आता था आज पता नहीं क्या बात हो गई जो अब तक नहीं आया मेरा दिल तू डूब रहा है चूहे ने भी कहा हां बहुत गंभीर है बात है जरूर ‌‌‌हिरण
किसी मुसीबत में पड़ गया है अब हम क्या करें ‌‌‌कौवे ने अपनी चोंच खोली
बोला उधर मुड़ कर देख आता पर अंधेरा गिरने लगा है नीचे कुछ नजर नहीं आएगा हमें सुबह तक प्रतीक्षा करनी होगी सुबह होते ही मैं उड़कर जाऊंगा और उसकी कुछ खबर लाकर तुम्हें दूंगा ‌‌‌कछुए ‌‌‌ने
सिर हिलाया अपने मित्र की कुशलता जाने बिना रात को नींद कैसे आएगी दिल को चैन कैसे पड़ेगा और अभी चल पड़ता हूं मेरी चाल भी बहुत धीमी है तुम दोनों सुबह आ जाना ना ‌‌‌चूहा बोला मैं भी आपके साथ चल पड़ता हूं ‌‌‌कौवे ने रात रात आंखों आंखों की ‌‌‌काटीजैसे ही सुबह हुई ‌‌‌वह भी अपने मित्र की तलास करने निकल पड़ा कहा मित्र तुम कहां हो आवाज दो मित्र तभी उसे किसी के रोने की आवाज सुनाई दी ‌‌‌स्वर उसके मित्र हिरण का सा ‌‌‌था आवाज की दिशा में मोड़ कर सीधा उसके पास गया था हिरण शिकारी के जाल में फंसा रहा था हिरण ने रोते हुए बताया कि कैसे एक शिकारी ने अपना जाल बिछा रखा था और जाल को नहीं देख पाया और फंस गया हिरण का शिकारी आता ही होगा वह मुझे पकड़ कर ले जाएगा और मेरी कहानी खत्म समझो मित्र को तुम चूहे और कछुए को भी मेरा अंतिम नमस्कार कहना ——-
जान की बाजी लगाकर भी तुम्हें छुपा लेंगे और हिरण ने निराशा व्यक्त की वह बोला
———-‌‌‌तुम कैसे बचापाओगे ? वह बोला———-
सुनो मैं अपनी मित्र चूहे को पीठ पर बैठाकर ले आता हूं वह अपने दांतों से जाल कुतर देखा हिरण को आशा की एक किरण दिखाई दी उसकी आंखें चमक उठी और बोला ———
मित्र चूहे भाई को शीघ्र लेकर आओ कौवे और तेजी से वहां पहुंचा जहां कछुए तथा चूहा पहुंचे थे कौवे ने समय नष्ट करते हुए बताया कि हमारा मित्र हिरण एक दुष्ट शिकारी के जाल में कैद है शिकारी के आने से पहले हमें उसे ‌‌‌नहीं छुटाया तो वह मारा जाएगा उसकी ‌‌‌बाद कौवे ने चूहा को अपनी पीठ पर बैठाया हिरण की ओर लेकर उड़ गया चूहा ने जाल कुतर कर हिरण को मुक्त करने में अधिक देर नहीं लगी मुक्त होती हिरणी अपने मित्रों को गले लगा लिया और उन्हें धन्यवाद दिया तभी ‌‌‌कछुआ भीवहां आ पहुंचा और चारों मित्र भाव विभोर होकर खुशी से नाचने ‌‌‌फिर हिरण ने सबको चेतावनी दी ———-
भाइयों शिकारी आ रहा है तुरंत छिप जाओ चूहा फौरन पास के एक बिल में घुस गया ‌‌‌कौआ पेड़ की ढ़ाल पर जा बैठा हिरण एक ही ‌‌‌छलाकमें पास की झड़ी में जा घुसा ओझल हो गया परंतुकछुए मंद गति दो कदम भी नहीं जा पाया था कि शिकारी आ धमका उसने ‌‌‌जालको कटा देकर किसने काटा यह जानने के लिए पैरों के निशान के सुराग ढूंढने के लिए इधर उधर देख ही रहा था कि उसकी नजर कर जाते हुए कछुए पर पड़ी भागते चोर की लंगोटी ही सही भोजन की व्यवस्था करेगा
और उसने कछुए को उठाकर अपने ठेले में डाला और ‌‌‌जाने लगा ‌‌‌कोवैतुरंत हिरण ने चूहे को बुलाकर कहा मित्रों हमारे मित्र कछुए को शिकारी थैले में डाल कर ले जा रहा है वह बोला हमें अपने मित्र को ‌‌‌छुटाना चाहिए लेकिन कैसे?
इस बार ‌‌‌हिरणसमस्या का हल मित्रों हमे चाल चल रही होगी मैं लंगड़ा ता हुआ शिकारी के आगे से निकलूंगा मुझे लंगड़ा समझकर वह ‌‌‌कछुएको छोड़कर मेरे पीछे दौड़ेगा और मैं उसे दूर ले जाकर चकमा दे दूंगा ‌‌‌हिरण शिकारी के सामने आया शिकारी उसे लंगड़ा समझकर पीछे दौड़ा उसके बाद चूहे ने आकर थैले को काट दिया और कछुए को आजाद कर दिया।
‌‌‌सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्बित मे काम आए।

‌‌‌‌‌‌‌‌‌जातक कथा ‌‌‌हिरणी और अजगर

एक वन के अंदर एक बहुत बड़ा अजगर रहता था वह बहुत अभिमानी और अत्यंत‌‌‌क्रूर था जब वह अपने ‌‌‌अपने बिल से निकलता तो सारे जानवर डर कर भाग जाते ।वह बहुत ही विशालकाय था कि एक खरगोश को वह एक बार में निकल जाता था एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था सारे ‌‌‌जानवर उसे बिल से निकलते देखते ही भाग चुके थे उसे कुछ ना मिला तो बहुत क्रोधित होकर पुकारने लगा और इधर उधर खाक छानने लगा वही निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छुपा कर एवं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी अजगर की पुकार से सुखी पति ‌‌‌उड़ने लगी तो उसे एक बच्चा नजर आने लगा । अजगर की नजर उस पर पड़ी भयानक अजगर देखकर इतना डर गई थी आंखों में आंसू कि उसके मुंह से चीख निकल गई अजगर ने उसके बच्चे को निगल लिया तब तक हिरनी भी आ चुकी थी लेकिन वह बेचारी क्या कर सकती थी
वह अपने बच्चे को दूर से ही काल का ग्रास बनते हुए देख रही थी लेकिन उसने ठान लिया था कि वह अजगर से बदला लेकर रहेगी ‌‌‌हिरणी के शौक का ठिकाना नहीं रहा ‌‌‌शोक मे डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई।बोली कि——-
मेरे बच्चे को एक भयानक सांप ने निगल लिया है उसके बाद नेवला दुख भरे स्वर में बोला ——-
मित्र मेरे बस की बात होती तो मैं ‌‌‌उसके टुकड़े कर डालता पर एक छोटा मोटा सांप नहीं है यह तो एक अजगर है लेकिन यहां पास में ही ‌‌‌चिंटियां वहां की रानी मेरी मित्र है उसे सहायता मांगी चाहिए
और क्या ‌‌‌तुम्हारे जितना बड़ा इस काम को करने मे सक्षम नहीं है तो चिंटिया क्या करलेंगी।——————
मैंने कहा ऐसा मत सोचो उसके पास छोटी बहुत बड़ी शक्ति होती है सारी कहानी सुनाई ‌‌‌नेवले को विश्वास था इसलिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया ——‌‌‌वे दोनों चिंटियों की रानी के पास पहुंचे चिंटियों की रानी बोली —
हम तुम्हारी सहायता करेंगे हमारी ‌‌‌बांबीके पास एक ‌‌‌नुकीले पत्थरों वाली जगह है
‌‌‌उसे वहां आने को किसी तरह से मजबूर करो बाकी काम‌‌‌हम पर छोड़ दो
दूसरे दिन नेवला जाकर ‌‌‌नुकीले पत्थरों वाली जगह अपनी बोली बोलने लगा अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर अपने बिल से बाहर आ गया नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में ‌‌‌दौड़ा
इस प्रकार नेवले ने अजगर ‌‌‌कोरास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया जब तक उस रास्ते से बाहर आया था उसका काफी शरीर ‌‌‌छिल था उसी समय ‌‌‌चिंटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया चिट्टियां उसके शरीर पर चढ़कर छिले हुए स्थानों से नंगी ‌‌‌त्वचाको काटने लगी अजगर तड़प उठा अपना शरीर ‌‌‌पटकनेलगा और मरने लगा और ‌‌‌चिंटियों के आक्रमण के लिए नई स्थान मिलने लगे चिंटुआ हजारों की संख्या में थी जो अजगर को तड़प तड़प कर मार दिया संगठन शक्ति बड़े बड़ों को धूल चटा सकती है

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