पारे जहर की जानकारी और पारे के प्रभाव mercury effect on body

पारे की खोज किसने की इस बात के तो कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं।लेकिन ऐसा माना जाता है कि इसका प्रयोग काफी सालों पहले  मिस्त्र के मकबरों के अंदर की कई होगी। इसको चीन और हिंदुओं ने खोजा होगा ‌‌‌ऐसा माना जाता है कि जब यह लोग सोने और चांदी की खोज करने मे लगे थे तब इन्हें पारा धातु मिली थी।हांलाकि पारा धातु प्रक्रति के अंदर मुक्त रूप मे नहीं पाया जाता है।

 

‌‌‌वैसे पारा काफी जहरीला होता है लेकिन इसका प्रयोग ओषधियों को बनाने मे किया जाता है।ऐसी स्थिति के अदर यह शरीर के रोगों को दूर करने के काम आता है।

 

‌‌‌यह तो थी पारे से जुड़ी कुछ बेसिक जानकारी। अब आते हैं कि प्राचिन समय मे किस तरह से पारे की वजह से अनेक लोग मौत के मुंह के अंदर चले गए।

‌‌‌और किस तरह से लोग पारे का प्रयोग अपने शत्रूओं का नाश करने मे करते थे

 

‌‌‌16 वीं शताब्दी के अंदर सम्राट एरिक 14 को उसके ही भाई ने ही पारा देकर मार डाला था।उसने ऐसा इतनी सफाई से किया की किसी को पता नहीं चल पाया ।हांलाकि उस समय के इतिहास कारों ने इस बात की शंका व्यक्त की थी।कि एरिक की हत्या पारे नामक जहर से हुई है।जिसकी पुष्टि अब के वैज्ञानिक शोधों के ‌‌‌अंदर हो चुकी है।

 

 

‌‌‌एक अन्य घटना के अनुसार रूस का एक राजा जार ईवान अपने अंतिम दिनों केअंदर काफी पागल हो गया था।इसकी वजह थी कि वह अपने जोड़ों के दर्द से नीजात  ‌‌‌पाने  लिए निरंतर पारे की मालिस करता था।वह इतना अधिक क्रोधित हो जाता था कि एक दिन तो क्रोधके अंदर आकर उसनेंअपने बेटे तक को मार दिया था ।

 

 

‌‌‌17 वी शताब्दी काराजा चार्ल्स 2 ने अपने महल केअंदर एक प्रयोग शाला बना रखी थी। उसके बारे मे यह कहा जाता है कि वह अपनी प्रयोगशाला के अंदर पारे से जुड़े प्रयोग करता था। लम्बे समय तक पारे के पास रहने से उसे अनेक रोगोंने  घेर लिया ।किंतु उसने अपना उपचार करवाने की काफी कोशिश की किंतु सफलता  ‌‌‌नहीं मिली और अंत मे उसे भी मरना पड़ा।

 

 

‌‌‌इतिहास के अंदर उल्लेख मिलता है कि चीन के सम्राट शीहुआंग ने काफी सालों पहले एक नगर बसाया था जिसके निरूपण मे पारे का बहुत अधिक प्रयोग हुआ था ।इस काम को करने मे लगभग 70 हजार मजदूरों की मौत पारे की विषाक्तता से हो गई थी।और चीन के सम्राट की मौत पारे की गोली सेवन करने से हो गई थी। यहां पर ‌‌‌तो आज भी खुदाई केअंदर पारे की अधिकता का पता चलता है।

 

 

‌‌‌पारे जहर से मौत की एक अन्य घटना सन 1956 के अंदर जापान केअंदर घटी थी। यहां पर एक कम्पनी ने प्लास्टिक सामग्री बनाने के लिए पारे के यौगिक का प्रयोग किया था ।और उसके कचरे को समुद्र केअंदर फेंक दिया गया। यह तब अकार्बनिक अवस्था केअंदर था लेकिन कुछ सूक्ष्म जीवों ने इसे कार्बनिक योगिक ‌‌‌के अंदर बदल दिया। यह पारा मछलियों से होते हुए इंसानों के शरीर तक पहुंच गए ।जिससे अनके लोग मारे गए ।और कई घम्भीर बिमारियों के शिकार हो गए।

 

‌‌‌पारे की खानों मे बिखरे रहते हैं नर कंकाल

 

सिनोबार एक पारेका अयस्क होता है।1550 ई केअंदर एक चिकित्सक ने  सिनोबार की खानों से जुड़े सच को उजागर किया था ।उसने बताया की पारे की खाने विनाशकारी विष पैदा करती हैं।और इसमे काम करने वाले मजदूर कम समय मे ही कालकलवित होजाते हैं।

 

‌‌‌उसने बताया कि सिनेबार की खानों केअंदर काम करने वाले कर्मचारी बुढापा ‌‌‌देख ही नहीं पाते हैं औरयदि कोई बुढापा देख भी लेता है तो वह गम्भीरबिमारियों की वजह से मरने की इच्छा करता है।इनके साथ ही कांच बनाने वाले मजदूरों का भी यही हाल होता है। वे लोग कांच बनाते बनाते या तोजवानी केअंदर ही मर जाते हैं। ‌‌‌और उनमे सेअधिकतर तो दमा और लकवा जैसे गम्भीर रोगों के शिकार हो जाते हैं।

पारे का प्रमुख अयस्क सिनोबार होता है।जिसका खनन चीन अमेरिका सर्बिया आदि देस करते हैं। हांलाकि अब तो काफी सेफटी उपलब्ध है लेकिन प्राचीन काल मे खनन काफी डेजर माना  जाता था।

 

‌‌‌इन खानों केअंदर काम करने वाले मजदूरों को काफी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था ।उनके दांत धीरे धीरे गिरने लगते थे ।बाल झड़ने लग जाते थे। और मजदूर वहीं पर मौत के मुंह के अंदर चले जाते थे ।इन मरे हुए मजदूरों के कंकालआज भी जेराब शान की पहाड़ियों  के अंदर पाये जाते हैं।यह पहाड़िया‌‌‌ कजाकिस्तान के अंदर हैं।

 

‌‌‌कैसे इंसानों के शरीर केअंदर पहुंच रहा है पारा जहर

 

समुद्री मछली केअंदर पारा पाया जाताहै। इसको आहार के रूप मे ग्रहण करने वाले इंसानों के शरीर के अंदर पारा पहुंच जाता है।और नुकसान पहुंचाता है।

हांलाकि मछली केअतिरिक्त अन्य जीवों केअंदर भी पारा पाया जाता है।‌‌‌इन के अलावा दंत चिकित्सा के अंदर प्रयोग किये जाने वाली दवाओं की वजह से पारा इंसानों के शरीर मे पहुंच जाता है। और टूटे हुए थर्मोमिटर टयूबलाईट आदि के संपर्क मे आने से भी पारा हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है। पारा युक्त हवा के अंदर सांस लेने पर भी पारा शरीर मे पहुंच जाता है।

 

‌‌‌जापानी लोग व्हेल डाल्फिन जैसी मछली के अंदर पारे की मात्रा 20 प्रतिशत स्वीकार्य मात्रा से अधिक पाई जाती है। जब जापानी लोग इन मछलियों का सेवन करते हैं तो पारा इनके शरीर मे जाता है। और नुकसान पहुंचाता है।

 

‌‌‌इनके अलावा कल कारखानों के अंदर  से निकलने वाले धुंए की वजह से पारा वातावरण के अंदर मिल जाता है।

 

‌‌‌सोने की खानों मे काम करने वाले मजदूर भी पारे जैसे जहर के प्रभाव से ग्रस्ति होने का अधिक खतरा रहता है। इन खानों के अंदर काम करने वाले लोग दमा जैसे गम्भीर रोग से ग्रस्ति हो जाते हैं और अंत मे अकालन मौत का शिकार होना पड़ता है।

 

‌‌‌पारे के जहर के लक्षण

यदि कोई व्यक्ति पारा खा जाता है या वह पारे जैसे जहर के संपर्क के अंदर रहता है तो उसमे निम्न लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं।

 

‌‌‌1.ऐंठन हो जाना

2.स्वभाव का चिड़चिडा पन

3.Memory power कमजोर हो जाना

4.दांत झड़ने लगना

5.पाचन तंत्र नष्ट होना

6.देखने सुनने बोलने की क्षमता खत्म होना

  1. ‌‌‌दमा होना

8.लकवा हो जाना ।

  1. ‌‌‌गुर्दों का क्षतिग्रस्त होना

 

What is safe level of mercury

 

0.47micro gram/kg/day ‌‌‌मर्करीया पारे का हूमेनबोड़ी केअंदर सबसे अधिक सैफ लेवल है।हांलाकि 1996  रिसर्च के अनुसार  0.1 microgram बोड़ी के पर किलों केहिसाब से होना चाहिए। यदि इस लेवल से अधिक पारा हमारी बोड़ी केअंदर जाता है तो वह हमे किसी न किसी प्रकार से नुकसान ही पहुंचाता है।

 

 

 

 

 

 

 

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